0
तेरा ख़त
एक वो भी दिन थाजब तेरे ख़त के आने किखबर से ही महक उठते थेदिन रात मेरेऔर एक यह दिन हैतेरा ख़त सामने मेज़ पे पड़ा हैऔर उसे खोलकर पड़ने की हिम्मत नहीं होती ...-तरुण
- 7 00 टिप्पणियां [1]
May 22 2010 04:05 AM


Shuffle








