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14 Jun 2010
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नमक बिन सब सूना

मन्नू ने जब पहली दफा कॉलेज में कदम रखा तो उसे अपने चारों ओर का माहौल बड़ा ही खुशगवार लगा। कैंपस की चमक-दमक ने सीधे-सादे मन्नू को करीब-करीब बेसुध कर दिया था। इतने रंग एक साथ उसने इससे पहले कभी नहीं देखे थे। उसने पहली बार महसूस किया कि वह अब तक कुएं की
 
अखिलेश चंद्र
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आखिर कुछ तो बदले!

अपना देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है। यह शासन जनता के लिए होता है। लेकिन बेचारी जनता ही सरकारी नीतियों से जन्मे बोझों के नीचे दबी है! मौज है तो जनता के प्रतिनिधियों की। इसलिए लोकतंत्र की परिभाषा में थोड़ा
 
अखिलेश चंद्र
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खाना हम खाएं और बदहजमी उसे!

अमेरिका दुनिया के कोने-कोने और हर चीज के लिए चिंतित रहता है। यह उसकी आदत है। दूसरे देशों के लोगों के बारे में सोचने उन्हें सुधारने के चक्कर में वह अपने ही देश के लोगों की नहीं सुनता! उसकी आदत धीरे-धीरे बीमारी का रूप लेती जा रही है। अमेरिका में सरकार जरूर
 
अखिलेश चंद्र
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महंगाई भी बहुत मायावी

महंगाई का शोर चारों तरफ है। सड़कों पर महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं तो संसद में इसको लेकर हंगामा है। विपक्ष ने सरकार को महंगाई कम करने के लिए घेरा। जैसे सरकार ने जानबूझकर चीजों का दाम बढ़ा दिया हो और सारे पैसे लेकर वह स्विस बैंकों में डाल देगी।
 
अखिलेश चंद्र
May 04 2010 04:14 PM
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ट्वीट-ट्वीट नहीं स्वीट-स्वीट

जमाना कहां से कहां पहुंच गया है। कभी एक जगह से दूसरी जगह बात पहुंचाने में महीनों लगते थे। संवाद पहुंचाने का काम पलक झपकते ही पूरा हो जा रहा है। कबूतर और संवदिया तो अब किताबों तक सिमट कर रह गए हैं। चिट्ठी लिखने वालों को कोई पूछता तक नहीं। सूचना क्रांति के
 
अखिलेश चंद्र
May 01 2010 03:00 PM
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आईपीएल के बहाने

आईपीएल-3 अपने पूरे शबाब पर है। रोज ही चौकों और छक्कों की बरसात हो रही है। रिकॉर्ड बन और टूट रहे हैं। कई नए-पुराने खिलाड़ियों को आईपीएल ने चमका दिया है। कुछ खिलाड़ियों की चमक फीकी पड़ गई है। इन सबसे अलग ट्वेंटी-20 क्रिकेट में चीयरलीडर्स भी जमकर पर अपना
 
अखिलेश चंद्र
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मुखर्जी की दूरदृष्टि

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी अगला प्रधानमंत्री बनने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गए हैं। ताजा आम बजट में उन्होंने वही सब किया है, जो मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तब किया था जब वे केंद्रीय वित्त मंत्री हुआ करते थे। उस दौरान अंतरराष्ट्रीय
 
अखिलेश चंद्र
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हाय, री! सरकार

हां महंगाई के मसले पर एक बात याद आई। प्रणव ने महंगाई पर लगाम लगाने और किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाने के लिए आम बजट में एक अद्भुत योजना का संकेत दिया है। वे घरेलू खुदरा क्षेत्र को देश-विदेश की बड़ी पूंजी के लिए खोलना चाहते हैं। उनका तर्क है कि
 
अखिलेश चंद्र
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हीरे को जौहरी की खोज

हीरे की परख जौहरी ही कर सकता है। लेकिन इन दिनों ‘हीरे' तो चारों ओर बिखरे हैं मगर उनकी पहचान करनेवाले नहीं बचे। यह भी हो सकता है कि 'जौहरी' जानबूझकर को नजरअंदाज कर रहे हों। हीरे खुद को इस बात के लिए कोस रहे होंगे कि जब भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था
 
अखिलेश चंद्र
Mar 04 2010 02:00 PM
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कब होगा मोह भंग

क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर हमारी टीम में। टेस्ट का नंबर एक बल्लेबाज गौतम गंभीर भी यहीं पर। दुनिया के प्रमुख विस्फोटक बल्लेबाजों में से एक वीरें्र सहवाग हमारे ही साथ और यह टीम भी टेस्ट की नंबर एक। इसके बावजूद हमने घर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहला
 
अखिलेश चंद्र
Feb 10 2010 02:26 PM
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बिना चुनौती क्या मजा!

मराठी और मुंबई मामले पर 'कागजी शेर' और 'गैर-कागजी' शेरों के बीच मुकाबला टाई रहा। न 'कागजी शेर' ने हार मानी और न 'गैर-कागजी' शेर ही जीत पाए! मुंबई को किले में तब्दील कर 'गैर-कागजी' शेर ने खूब दहाड़ा! युद्ध की भी अपनी नीति होती है। मैदान-ए-जंग में धर्म को
 
अखिलेश चंद्र
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आखिरी गाने का रहस्य!

मेरे एक मित्र को रात में बिना लोरी सुने नींद नहीं आती। यह आदत उन्हें बचपन से लगी थी। तब उनकी मां उन्हें प्यार से पीट-पीटकर, कुछ गुनगुनाकर सुलाया करती थीं। यह बात मेरे मित्र ने स्वयं मुङो बताई थी। इससे यह अनुमान बिल्कुल नहीं लगाया जाना चाहिए कि मेरी
 
अखिलेश चंद्र
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अखबारवालों की जल्दबाजी

क्रिकेट अनिश्चतताओं का खेल है। यह बात समय-समय पर स्वयं क्रिकेट ही सिद्ध करता रहा है। इसका सबसे ताजा उदाहरण सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच खेला गया दूसरा क्रिकेट टेस्ट मैच था। तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट जीतकर
 
अखिलेश चंद्र
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थप्पड़ का कमाल!

थप्पड़ खाना शायद ही किसी को पसंद हो। लेकिन बिना थप्पड़ खाए हमारे अक्ल पर ताला पड़ा रहता है। यह ताला सिर्फ थप्पड़ नाम की चाभी से ही खुलता है। एक अदद थप्पड़ ने न जाने कितने लोगों की दुनिया बदल दी। हमारे आसपास कई उदाहरण मिल जाएंगे, जिन्होंने थप्पड़ खाने के
 
अखिलेश चंद्र
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खुश न हों पप्पू

बोर्ड की एक ही परीक्षा लेने की सरकार की भविष्य की योजना के बारे में सुनकर लोगों को बड़ा आनंद आया। जिंदगी यूं भी झमेलों की एक पूरी सीरीज है। सरकार ने नई योजना से कम-से-कम उसमें से एक कड़ी तो निकालने की सोची, ये क्या कम है! वाकई, पहली बार मुङो लगा कि स
 
अखिलेश चंद्र
Dec 29 2009 11:53 AM
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राई और सरसों की लड़ाई

यह जंग किसी भी अन्य लड़ाई से तनिक भी कम नहीं है। इसकी तुलना मियां-बीवी,चूहा-बिल्ली या प्रेमी-प्रेमिकाओं के झगड़ों से किया जा सकता है। हालांकि दोनों में खूब छनती है। दोनों का चोली-दामन का साथ है। लेकिन अखबार और टीवी चैनल अपनी लड़ाई को अनोखी, अतुलनीय त
 
अखिलेश चंद्र
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बिन मांगे मोती मिले

चुनाव के नतीजे आने के पहले तक मैं सोच रहा था कि नतीजे आने के सप्ताह-दस दिन बाद भी राजनीतिक गहमगहमी रहेगी। ऐसा सोचने वाला मैं इकलौता था यह दावा नहीं कर सकता! हालांकि दावा करने में अपना कुछ तो जाता है नहीं लेकिन फिर भी दावा नहीं करता! बात राजनीति की हो
 
अखिलेश चंद्र
Dec 29 2009 11:53 AM
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'कौन हारा घाट' पर दिग्गज

बिहार की राजधानी पटना से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित हाजीपुर आधुनिक, ऐतिहासिक और पौराणिक चीजों का अनूठा संगम है। यह शहर वैशाली जिले में आता है, जहां लिच्छिवियों ने विश्व का पहला गणतंत्र स्थापित किया था। महात्मा बुद्ध के शिष्य आनंद के अवशेष का एक हिस्सा
 
अखिलेश चंद्र
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पप्पू के पिटारे में और क्या!

पटनायक दूसरे नवीन हैं, जिनसे भाजपा इस समय जली भुनी बैठी है। पहले हैं चुनाव आयुक्त नवीन चावला। पटनायक जब से राजनीति में आए हैं उनकी छवि साफ-सुथरी और काम से काम वाली है। राजग सरकार में वे सबसे शांत और अविघ्नकारी सहयोगी थे। कंधमाल की घटनाओं ने उड़ीसा की
 
अखिलेश चंद्र
Dec 29 2009 11:53 AM
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बिन अनुभव सब सून

इन दिनों टेस्ट और एकदिनी क्रिकेट को लेकर नए-पुराने खिलाड़ियों में बड़ी चिंता व्याप्त है। शायद उन्हें यह पता नहीं कि चिंता, चिता के समान होती है। हो सकता उन्हें इस बारे में सोचने का वक्त न मिला हो! आखिर खिलाड़ियों का शेड्यूल टाइट जो रहता है। थोड़ा-बहु
 
अखिलेश चंद्र
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टपोरीलाल की भविष्यवाणी

टपोरीलाल की रुचि क्रिकेट और भविष्य बांचने में खूब थी। संयोग देखिए कि दोनों अनिश्चतताओं से भरा क्षेत्र। क्रिकेट मैच में किस दिन क्या होगा कहा नहीं जा सकता। मैच में न जाने कब कोई बल्लेबाज चमक जाए और पता नहीं किस गेंदबाज की धुनाई हो जाए। भविष्य बांचने म
 
अखिलेश चंद्र
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मैनेजर बराक ओबामा!

पुरस्कार अक्सर जोड़-तोड़ में माहिर लोगों को मिला करता है। ओबामा को नोबेल पुरस्कार से नाजे जाने के बाद यह साबित भी हो गया। इसीलिए मुङो उतनी हैरत नहीं हुई जितनी मेरे दोस्तों को हुई। ये जरूर हैरान करने वाली बात है कि ओबामा ने सिर्फ कुछ ही महीने में पुरस
 
अखिलेश चंद्र
Oct 14 2009 07:50 PM
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उल्टा-पुल्टा सिद्धांत!

यह जमाना उल्टे-पुल्टे का है। सामान्य चीजें वही हैं, जो उल्टी-पुल्टी हैं। इसे आधुनिक दुनिया का नया सिद्धांत माना जा सकता है। अगर नहीं मानेंगे तो आपसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा। कम से कम आपको बेवकूफ न माना जाए इसलिए भी नए सिद्धांत को मानकर अपनी लाज बचा
 
अखिलेश चंद्र
Sep 23 2009 03:56 PM
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विविधता का फायदा

भारत विविधताओं से भरा देश है। एकता में अनेकता है। यहां नदी-नाले, पर्वत-पठार, कई तुएं, सूखा और बाढ़, अमीरी-गरीबी का लाजवाब मिश्रण तथा कहना कुछ और दिखाना कुछ जसी कई प्राकृतिक और चमत्कारिक चीजें बड़ी आसानी से मिल जाएंगी! इनमें से कुछ चीजें सुनने और पढ़ने को
 
अखिलेश चंद्र
Sep 12 2009 03:05 PM
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अब मौसम की परवाह किसे

भारत अब न गांवों का का देश रहा और न ही कृषि प्रधान। शायद यह अविश्वसनीय लगे लेकिन हमारी सरकार ने मानसून की बेरुखी और बढ़ती महंगाई से आजिज होकर यह घोषणा की। इसके साथ ही सरकार ने खाने की चीजों को बाहर से मंगाने की भी घोषणा की है! नई योजना के तहत देश भर में
 
अखिलेश चंद्र
Aug 24 2009 04:29 PM
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अमेरिका का हाथ!

संसद में भारत-पाक साझा बयान पर बड़ा हो-हल्ला मचा। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ। संसद के अंदर-बाहर राजनीतिक दलों को एक-दूसरे की टांग खिंचाई (झूठमूठ का ही सही) करने का तो बस बहाना भर चाहिए। क्योंकि विपक्ष जानता है कि सरकारें किस तरह चलाई जाती हैं। उन्हें
 
अखिलेश चंद्र
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सच का सामना

बहुत दिनों से मैं कई चीजों का अर्थ जानना चाहता था। कई सवाल मन को परेशान कर रहे थे। लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी इनका उत्तर नहीं ढूंढ़ पा रहा था। अपनी इस नाकामी पर मैं अंदर ही अंदर जल रहा था। कई लोगों से पूछा लेकिन सटीक जवाब नहीं मिला। ये सवाल मुङो अब भी
 
अखिलेश चंद्र
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बारिश के बिना उफान

समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के एक कोर्ट के फैसले के बाद चारों ओर बहस और विचारों के नदी-नाले उफनने लगे हैं। बारिश के मौसम में आसमान से आग बरसे या मानसून मुंह फूलाकर कोप भवन में जा बैठा हो, लेकिन बहस और विचारों का मौसम और मानसून से कोई ल
 
अखिलेश चंद्र
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कुछ अनकही और अनसुनी बातें

टी-20 विश्व कप से बाहर हो जाने के बाद टीम इंडिया के कप्तान रक्षात्मक मूड में थे। यह रवैया ठीक उसी तरह का था जिस तरह पिछले कुछ दिनों से उनकी बल्लेबाजी रही है। वे चाहते थे कि प्रेस कांफ्रेंस में किसी और को भेजकर काम चला लिया जाए। लेकिन टीम से कोई और पत
 
अखिलेश चंद्र
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नये जमाने में प्रेम

मेरे एक पड़ोसी के मित्र चंपूलाल जी इन दिनों बड़े परेशान चल रहे थे। यह बात मैं पहली ही नजर में भांप गया था। उनका सदाबहार हंसता-मुस्कुराता चेहरा सूख गया था। ठीक उसी तरह जसे हमारे गांव की नदी गर्मियों में हो जाती है! मैंने एक दिन चंपूलाल जी से इसका कारण
 
अखिलेश चंद्र
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आईपीएल ने सिखाया है..

आईपीएल-2 के फाइनल में बुड्ढों की टीम विशेषण से नवाजे गए दोनों टीम को देखकर दिल को सुकून पहुंचा। लेकिन जवान और जोशीले खिलाड़ियों की टीम वाले सारे पीछे छूट गए इसका मलाल तो है ही। यह हमारे लिए कई सबक भी छोड़ जाता है। जसे कि कभी निचले पायदान पर रहना पड़े
 
अखिलेश चंद्र
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आगे की सोचो, सुखी रहो

देश में चुनाव कराने वाली संस्था को मैं कुछ सुझाव देना चाहता हूं। मेरी आयोग से विनम्र अपील है कि वह प्रधानमंत्री के लिए पूरे देश में चुनाव न कराए। इस समय तो लगभग दर्जन भर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। उन्हीं लोगों में से किसी एक को चुनने का विकल्प
 
अखिलेश चंद्र
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प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़

चुनाव और गर्मी की तपिश में उल्टे-सीधे बयानों ने मुङो परेशान कर दिया था। इससे भी अधिक परेशान मैं लगभग रोज ही प्रधानमंत्री के उम्मीदवारों के नए-नए नाम सामने आने से था। हमारे यहां चुनाव अबतक नहीं हुए हैं। मैं भी अपने अन्य मित्रों के साथ आगामी प्रधानमंत्
 
अखिलेश चंद्र
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प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़

चुनाव और गर्मी की तपिश में उल्टे-सीधे बयानों ने मुङो परेशान कर दिया था। इससे भी अधिक परेशान मैं लगभग रोज ही प्रधानमंत्री के उम्मीदवारों के नए-नए नाम सामने आने से था। हमारे यहां चुनाव अबतक नहीं हुए हैं। मैं भी अपने अन्य मित्रों के साथ आगामी प्रधानमंत्
 
अखिलेश चंद्र
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आइए, मिलकर दुआ करें

हमारे यहां विदेशी चीजों का बड़ा क्रेज है। चाहे चीज कैसी भी हो। बाहरी होने भर से ही उसको हम अच्छा मानने लगते हैं। हमारे आसपास के लोगों में हमारा रुतबा अचानक ही सेंसेक्स की तरह ऊपर उछल जाता है! कई बार तो हम भारत में बनी चीज ही अमेरिका से खरीदकर इठलाते
 
अखिलेश चंद्र
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चुनाव के मौसम में

मैंने चुनावी मौसम में यह महसूस किया कि हम किस भारत में रहते हैं। यदि असली तस्वीर से मैं अब तक नावाकिफ था तो इसमें दोष मेरा ही है। मुङो अब लग रहा है कि मैं सच्चाई से मुंह चुराकर चला जा रहा था। आंखें बंद कर लेने से सच बदल तो नहीं जाता! मैं राजनीतिक दलो
 
अखिलेश चंद्र
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तीर-तुक्कों के भरोसे

एक सुबह मैंने अपने पड़ोसी वर्मा जी को बोरिया बिस्तर लेकर फ्लैट से निकलते हुए देखा। मुङो थोड़ा आश्चर्य हुआ। मैंने उन्हें टोका- वर्मा जी सुबह-सुबह अचानक कहां चल दिए? उन्होंने बुरा-सा मुंह बनाते हुए कहा-मैं अगले कुछ महीनों के लिए बाहर जा रहा हूं। जवाब स
 
अखिलेश चंद्र
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माही की उलझन

एकदिवसीय सीरीज जीतने के बाद एक दिन माही का फोन आया। मैं ट्वेंटी-20 सीरीज हारने के बाद ही उससे बात करना चाहता था। लेकिन फिर सोचा कि वनडे के बाद ही बात करना ठीक रहेगा। अभी मैं फोन करने के लिए सोच ही रहा था कि उसी ने याद कर लिया। फोन पर वह बहुत चहक रहा
 
अखिलेश चंद्र
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पांच साल बाद फिर एक सपना

इन दिनों मैं बड़ी उलझन में हूं। क्योंकि आजकल मुङो रात में सपने नहीं आते। इस परेशानी को किसी को बताते हुए शर्म आती है! इसमें कोई कुछ कर भी तो नहीं सकता! सारे सपनों पर आजकल नेताओं और अभिनेताओं ने कब्जा कर लिया है। सपनों का इन लोगों ने कॉपीराइट करा लिया
 
अखिलेश चंद्र
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आगे की खुदा जाने

बचपन में राजा और प्रजा की कहानी सुना और पढ़ा करता था। दयालु राजा, क्रूर राजा। प्रजा का भला चाहने वाला राजा। उनकी हाल-चाल जानने के लिए हड्डी भेदने वाली ठंड में भी वेश-भूषा बदल कर महल से निकलने वाला राजा। लेकिन इन कहानियों से जवानी के दिनों में भी पीछा
 
अखिलेश चंद्र