kuch kavitayen kuch hain geet's Image

kuch kavitayen kuch hain geet

http://kuchkavitayenkuchgeet.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
15 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
20
पाठक भेजे
502
पसंद
41
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
25.10
पसंद करें
3
नापसंद करें

kuch kavitayen kuch hain geet

गुलमोहर के रंग फीके हैं यहाँ पर , तुम नहीं हो .धूप के भी तीर तीखे हैं यहाँ पर , तुम नहीं हो .तुम नहीं हो, और ये लम्बी दोपहरीआँख की कोरों पे आके बूँद ठहरी .कब गिरेगी, ना गिरेगी कौन जाने ?कौन उंगली पर सम्हाले ....? तुम नहीं हो . गुलमोहर के रंग फीके हैं
 
सीमा रानी
पसंद करें
2
नापसंद करें

लो बसंत आ गया

मित्रों , एक पूरा साल आप लोगों की दोस्ती में कब बीता पता ही नहीं चला और फिर से बसंत का मौसम आगया .हमारे शहर में कड़ाके की ठण्ड के बीच भी अनंग सखा बसंत ने अपनी आमद दर्ज करा ही दी है ,जिसका प्रमाण बौरों से भरे हुए आम के वृक्षों ने दे दिया है .आज बसंत पंचमी
 
सीमा रानी
पसंद करें
4
नापसंद करें

आने दो खुशियों से भरे नए साल को

सभी दोस्तों ,आदरणीयों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें ।मित्रों, जीवन आशाओं ,उमंगों और नवीनताओं से भरा हुआ एक रहस्य है जिसे केवल और केवल जीकर ही जाना जा सकता है .प्रतिदिन नया दिन होता है जिसमें बीते हुए कल से अलग कुछ होता है, इसलिए आप सभी को नववर्ष की इस
 
सीमा रानी
पसंद करें
0
नापसंद करें

होली होली ,होली

दोस्तों होली आ गई है होली याने रंगों का त्यौहार ,मस्ती का, उल्लास का और सद्भावना का त्यौहार इस रंगों बहरे त्यौहार पर आप सबको मेरी और से रंगारंग शुभकामनायें ,इस गीत के साथ
 
सीमा रानी
Dec 29 2009 11:58 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मौसम

मोरपंखी दिन हुए हैं ,सिंदूरी शाम । सांवरी सुहागन रात, चांदनी चादर ओढे , सिमट -सिमट जाती है । आसमान के सीने में छिपाकर चेहरा , गाती है ,होंठों ही होंठो में , प्रियतम का नाम। मोरपंखी दिन हुए हैं ,सिंदूरी शाम । कोहरे मैं लिपटी सुबह , थमा जाती है ,चाय का
 
सीमा रानी
पसंद करें
0
नापसंद करें

kuch kavitayen kuch hain geet

एक जंगली बेल की तरह फैलता हुआ मेरा प्यार , तुमने उसको बोनसाई बनाना चाहा हर बार । खुशियों की जड़ें काटीं खिलखिलाहटों के पत्ते तोडे । लगाया एक उथली कमाना के गमले में । सींचा सुविधाओं की कृत्रिम नमी से । अफ़सोस लेकिन, तुम्हारा हर यतन गया बेकार । जंगली बेल
 
सीमा रानी
पसंद करें
0
नापसंद करें

geet

पास आओ तुम जरा मैं ज़िन्दगी से प्यार कर लूँ । तुमसे अपने सुख दुखों की , बातें भी दो चार कर लूँ । हर कदम और हर डगर पर , जीत मेरी ही रही है । प्रशंसा के पुष्प पाए , चोट मैंने कब सही है ? किंतु तुमसे मिल के जाना, हर में भी सुख कहीं है । इस निरर्थक जीत क
 
सीमा रानी
पसंद करें
0
नापसंद करें

मन की खिड़की

प्रिय मित्रों ,बीमार होने की वजह से पिछले कुछ महीनों से आप लोगो से मिलना नही हो पाया ,बहुत बहुत क्षमा प्रार्थी हूँ .बीमारी तो खैर दिल की है जिसके ठीक होने के आसार नहीं हैं बस दवाओं और दुआओं के साथ ही जीना है ।अपनी एकदम ताज़ा रचना आप सबके लिए प्रस्तुत है
 
सीमा रानी
Sep 17 2009 08:39 PM
पसंद करें
3
नापसंद करें

आउंगी ज़रूर मैं

आउंगी जरुर मैं आउंगी जरुर मैं , पर प्रतीक्षा मत करना मेरी । किसी भी दिन अचानक आकर खड़ी हो जाउंगी , तुम्हारे सर्वथा निजी एकांत में । सोख लूंगी तुम्हारे भीतर की निस्तब्धता , अपनी उन्मुक्त हँसी से । मुस्कुराये बिना नहीं रह सकोगे तुम । आउंगी जरुर मैं पर ,
 
सीमा रानी
पसंद करें
0
नापसंद करें

बदल बन जायें

आओ हम बादल बन जायें । प्रेम की रिमझिम फुहारों से , धो डालें उस धूल को , जो वृक्षों के पत्तों पर , फूलों पर , डालों पर जम गई है । और जमी है , हम सब के अन्तर में , कटुता बन कर । आओ हम बादल बन जायें आओ हम बादल बन जायें । ताकि भुला सकें हम आपस का वैमनस्य
 
सीमा रानी
पसंद करें
1
नापसंद करें

गीत

मित्रों ,कभी कभी कुछ भाव हैं जो गीत की शक्ल में ही आते हैं तब मैं न चाहते हुए भी गीत लिख लेती हूँ हालाँकि गीत मेरी विधा नही है .इस गीत की प्रेरणा आदरणीय बुद्धिनाथ मिश्र जी के एक प्रसिद्ध गीत -" एक बार जाल और फेंक रे मछेरे , जाने किस मछली में बंधन की
 
सीमा रानी
पसंद करें
2
नापसंद करें

टुकडा -टुकडा जिंदगी

चलो , इस टुकडा - टुकडा ज़िन्दगी को जोड़ कर , एक चादर सी लें । एक चादर , जो कभी तेरा लिबास बन जाए । कभी मेरा लिबास बन जाए । और जब वक्त की धूप हमारे सर पर आए , तो ये चादर हम दोनों का सरमाया बन जाए । चलो , इस टुकडा - टुकडा ज़िन्दगी को जोड़ कर , एक चादर
 
सीमा रानी
पसंद करें
5
नापसंद करें

kuch kavitayen kuch hain geet

रिश्ते लोग ...... जो हर रिश्ते का एक नाम चाहते हैं , नहीं जानते ........ कि कुछ रिश्ते , बिना नामों के सदियों से चलते आ रहे हैं , पलते आ रहे हैं । ये रिश्ते हो सकते हैं किसी के भी बीच । जैसे ... मनुष्य और मनुष्य के बीच । मनुष्य और पृकृति के बीच । मनु
 
सीमा रानी
पसंद करें
4
नापसंद करें

kuch kavitayen kuch hain geet

मित्रों ,क्षमा प्रार्थी हूँ बहुत दिनों से आप लोगों से सम्पर्क नही हो पाया .कुछ काम की अधिकता और कुछ यात्रा -प्रवास के कारण .सो अब अपनी इस गलती को सुधारते हुए एक कविता पोस्ट कर रही हूँ कृपया अपने बहुमूल्य सुझाव अवश्य दें। मेरे लिए आगे - आगे और दूर तक
 
सीमा रानी
पसंद करें
5
नापसंद करें

क्या लिखूं

नीला आकाश लिखूं , पीपल का गाछ लिखूं या लिखूं कि महके हैं आमों पर बौर । दहकता पलाश लिखूं , फागुन की बात लिखूं या लिखूं रंग भरे सपने कुछ और । सरसों की लाज लिखूं बरसों की याद लिखूं या लिखूं कि , भीगी है आँखों की कोर । पिछले अनुबंध लिखूं , बासंती छंद लिख
 
सीमा रानी
पसंद करें
4
नापसंद करें

kuch kavitayen kuch hain geet

ब्लॉग मित्रों , आप लोगों की उत्साहवर्धक टिप्पणियों के प्रताप से मुझमें भी आपनी नई-पुरानी रचनाओं को पोस्ट किए चले जाने का चस्का लग गया है सो आपलोग अब अपनी करनी का फल प्राप्त करो..... और एक रचना झेलो - मैं गर्म ,तपती हुई रेत पर , पानी की एक बूँद, मैं ,
 
सीमा रानी
पसंद करें
3
नापसंद करें

मौसम

यहाँ बेवक्त ,बेमौसम बदल छा गए हैं । सब कुछ ढंका -ढंका सा है , मन भी । हालाँकि शहर के बीचों बीच अब भी कई पलाश हैं जो दहक रहे हैं , वैसे मौसम तो दहकते पलाशों का ही है तुम्हारे शहर का मौसम कैसा है ...? ढंके ढंके से इस मौसम में एक आंच से , कुछ अनदेखे ,अन
 
सीमा रानी
पसंद करें
2
नापसंद करें

kuch kavitayen kuch hain geet

योग्यतम ही रह पाता है जीवित " सार्थक करते हुए इस सत्य को , अब तक बचा है प्यार इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में । मानवता का यह सबसे योग्य पुत्र हमेशा रहेगा जीवित आदमी के भीतर | जब तक के दुलारना बंद नही कर देती माएं , बच्चों को । जब तक के बंद नही कर देती बहन
 
सीमा रानी
पसंद करें
4
नापसंद करें

प्यार

प्यार मैंने तुम्हें कभी नही किया अस्वीकार जब तुमने पुकारा मैंने खोल दिए द्वार । कभी प्रतीक्षा में तुम्हारी सजाई रंगोली , बांधे बन्दनवार । प्यार मैंने तुम्हें कभी नही किया अस्वीकार । कभी सूनेपन में तुम्हें गीत बनाकर गा लिया । कभी अकेलेपन में , मीत बना
 
सीमा रानी
पसंद करें
3
नापसंद करें

अहिल्या

अहिल्या की कथा पढ़ - पढ़ कर सोचती रहती थी मैं अक्सर कि कैसे बदल जाती होगी अक जीती जागती औरत पाषाण की शिला में ? कैसा होता होगा वह क्रूर शाप ? जो जमा देता होगा शिराओं में बहते रक्त को । आज अपने अनुभव से जाना , संवेदनहीन , प्रवंचना युक्त अंतरंगता का साक्
 
सीमा रानी