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08 Mar 2010
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हिंदी की आत्मा अवधी

पिछले दिनों मुंबई में अवधी सम्मलेन आयोजित किया गया। अवधी भाषा में काव्यपाठ के लिए मेरे मित्र राजेश विक्रांत ने मुझे फोन किया। मै अपने आपको सम्मानित महसूस कर रहा था कि आज तक मंचों पर हिंदी में वो कवितायें सुनाई जो लोग सुनना चाहते थे, आज मै वो कविता
 
Abhay
Feb 23 2010 05:26 PM
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बेदर्द दर्द?

दर्द को भी अब दर्द होने लगा दर्द ख़ुद ही मेरे घाव धोने लगा दर्द के मारे हम तो बहुत रोये अब दर्द ख़ुद मुझे छूकर रोने लगा।
 
Abhay
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शराफत

शराफत इंसानों की कैसी ये शराफत है झूठ की नींव पे खड़ी सच की इमारत है जेब में है खून से सने खंजर औ' जुबां पे इबादत है ............
 
Abhay
Dec 29 2009 11:54 AM
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मैया शारदे

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Abhay
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दो शब्द

मैं गया वो आई मिटी तनहाई। वो जवां मैं जवां हम कहाँ? वो हंसी मैं हंसा दिल फंसा। वो बोली मैं बोला राज़ खोला। मैं गरीब वो अमीर बोला ज़मीर। वो रूठी मैं रूठा विश्वास टूटा। वो दुखी मैं दुखी किस्मत रूठी। वो वहाँ मैं यहाँ हम कहाँ? वो दुल्हन टूटे सपन लौटे वतन
 
Abhay
Dec 29 2009 11:54 AM
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हर शख्स...

जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है मेरा दिल तोड़कर मुझे हँसाना चाहता है जाने क्या बात है मेरे चेहरे में हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है ......
 
Abhay
Dec 29 2009 11:54 AM
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झुर्रियों के पीछे ...

उन बेटा-बेटियों के नाम जिन्होंने अपने माँ-बाप को एक बोझ समझा। जिन्होंने अपने पृथ्वी के साक्षात देवता का अपमान किया। उन्हें एक चेतावनी ... माँ बाप ने पैदा किया, होम कर दिया जीवन बेटा बदला बेटी बदली, दिखा कमीनापन दिखा कमीनापन , देखो शर्म न आयी दो पैसे
 
Abhay
Dec 29 2009 11:54 AM
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हादसों ने पाला है

हमने हर गम को खुशी में ढाला है , हमारा हर एक चलन निराला है, जिन हादसों में मरते हैं लोग, हमें तो उन हादसों ने पाला है
 
Abhay
Dec 29 2009 11:54 AM
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आह ताज!

मेरे सात साल के बेटे ने ताजमहल की तस्वीर बनाई यमुना के तीर, सफेदी झलकाती मर चुकी मोहब्बत की दफ़न हुई तकदीर दिखाई फ़िर होटल ताज की तस्वीर उसने बिना देखे बना डाली चमकते ताज के नीचे खून से लथपथ-खौफनाक रात बना डाली लेकिन गायब था उसमे से ताज का एक गुम्बद प
 
Abhay
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सब माया है...

बचपन से ही बड़े बुजुर्गो के मुंह से सुनता था सब माया है लेकिन जेहन में एक चीज़ हमेशा सालती थी कि आख़िर ये माया क्या बला है? मैंने जो महसूस किया वह आपके सामने रख रहा हूँ । माया क्या है? मेरी दृष्टि में ईश्वर को पाने में जो वस्तु आपके मार्ग की बाधा बनत
 
Abhay
Dec 29 2009 11:54 AM
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तीन सूत्र

जीवन के तीन महत्वपूर्ण सूत्र दे रहा हूँ। अपने आप को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखना हो तो ये तीन बातें बहुत उपयोगी साबित होंगी। १ ) संगीत २) सेहत और ३) साहित्य। १ ) संगीत सुनने से हमारा मस्तिष्क हल्का हो जाता है। आपको जब भी समय मिले अपना पसंदीदा
 
Abhay
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शास्त्र वचन

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Abhay
Dec 29 2009 11:54 AM
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ये कैसा मातम है ?

मुंबई ने कई आतंकी हमले झेले है लेकिन मुम्बईकरों का जूनून कभी ख़त्म नही होता। हर हमाले के बाद मुंबई और मजबूत होकर उभरती है। जब इस घटना से द्रवित हुआ तो एक कविता बन पडी पेश कर रहा हूँ ... ये कैसा मातम है... खामोश हुई जुबां, दिल उदास बीमार हौसले, उम्मीद
 
Abhay
Dec 29 2009 11:54 AM
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आशियाँ

कुछ पत्थर हिन्दुओं ने चलाया कुछ मुसलमानों ने बेहतर होता उससे किसी गरीब के लिए एक आशियाँ बनाते।
 
Abhay
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२६/११

एक गोली सन्न से आकर सीने में धंसी होगी, जब गिन रहा था वो आख़िरी साँसें उसके सामने उसकी बीवी की उजड़ी मांग बच्चों का चेहरा और बूढी माँ भी रोती रही होगी ...
 
Abhay
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`गे' हो

गे' हो अदालती आदेश के बाद देश की तस्वीर कुछ ऐसी हो सकती है ... १) शाइनी आहूजा पर पुरूष नौकर से बलात्कार का आरोप। २) सभी लड़कियां बिंदास्त होंगी और लड़कियां लड़कों को छेड़ेंगी। ३) 'पक्के` दोस्तों को दुनिया टेढी नज़र से देखेगी। ४) शादी के बाद दोनों पक्षो
 
Abhay
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बचपन

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मौत

कल मै दादर स्टेशन -मुंबई पर उतरा । वहां से मुझे धीमी लोकल पकडनी थी। तभी मैंने कुछ लोगों के चिल्लाने की आवाज़ सुनीमैंने देखा कि एक नवयुवक जो कि ट्रेन की छत पर बैठा था, उसने ओवर हेड वायर छू लिया जिससे उसने प्राण त्याग दिए। मैंने देखा कि पहले वह तड़पा फ़ि
 
Abhay
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धर्म

पुन: मुंबई के लोकल ट्रेन की एक कहानी बताता हूँ। उपनगर बोरीवली से ट्रेन खुली। एक मंडली आयी, बातें शुरू हुई। शीर्षक था `अध्यात्म'। `अहिंसा'। एक महाशय ने लगभग १० मिनट प्रवचन दिया। जीवन में धर्म कैसे उतरे। सभी उनकी हाँ में हाँ मिला रहे थे। ऐसा लगा मानो म
 
Abhay
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जय हिंद !!!

मुंबई के उपनगर बोरीवली से लोकल ट्रेन खुली। धीरे- धीरे ट्रेन पूरी रफ्तार पकड़ चुकी थी। दो स्टेशन बाद भीड़ काफी बढ़ चुकी थी। सुबह पीक आवर होने के कारण गोरेगांव स्टेशन तक धक्कामुक्की बढ़ने लगी थी। ट्रेन में बातचीत का दौर शुरू हुआ। टाइम पास के लिए बातें शु
 
Abhay