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इश्क प्रीत love

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15 Jun 2010
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अर्चना चाओजी के सुरों में एक गीत

अर्चना चाओजी की आवाज़ में सुनिए फिल्म वक़्त मशहूर गीत और अब सुनिये यू-ट्यूब पर यह गीत
 
गिरीश बिल्लोरे
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मन बैठा विजयी सा रथ में !!

तुम संग नेह की जोत जगा केहमने जीते जीवन के तम  ..!********************धीरज अरु  व्याकुलता  पल केद्वन्द मचाते जीवन पथ में ,तुमसे मिल के  शांत सहज सबमन बैठा विजयी सा रथ में !!कितने  पावन हो तुम प्रियतम 
 
गिरीश बिल्लोरे
टैग: neh-geet
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सखि मैं उसे प्यार करती हूं....!!

{चित्र साभार काव्य-मंजूषा ब्लाग से } स्वर्गीय केशव पाठक का गीत सादर प्रस्तुत है
 
गिरीश बिल्लोरे
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आप को इश्क़ है तो

बुल्ले शाह को इश्क़ हुआ रब्बी के सुर में सुनिये इशक़ में बेख़बर बुल्ले शाह के दिल की बात
 
गिरीश बिल्लोरे
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हां..! ये शाम उस शाम से जारी हर शाम पर भारी

 हां..! ये  शामउस शाम से  जारी हर शाम पर भारीजब हुई थी मुलाक़ातखनकती आवाज़ से.... ! आओ..फ़िर उस पहली शाम को याद करें रिक्तता में रंग भरें लौटें उस शाम की तरफ़ जो आज़ हर शाम पे भारी है...!*************************वो जो मुझे खींचता है उस ओर
 
गिरीश बिल्लोरे
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मन प्याली, मदिरा थी प्रीत ..! ह्रदय की सुराही तौ पर न रीती

    [साभार: श्री विजय अग्रवाल ] मन  प्याली, मदिरा थी प्रीती ..!ह्रदय की सुराही तौ पर न रीती *****************लोग कहें बावली, इत उत मद छलकायेबोलूं तो लोग कहें- काहे तू इतराये ?सीमा जो लांघी तो सोच लै परणीति !!******************न तू सुहागन
 
गिरीश बिल्लोरे
टैग: सूफ़ी
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तेरी पूजा के तरीके से बेख़बर हूं मैं न ही उपवास मुझसे हो पाया !

तू दस्तक ज़रूर दी होगी..?मै वो आवाज़ नहीं सुन पायाकितनी आवाज़ें गिर्द मेरे हैंतेरा एहसास नही हो पाया !**************हर तरफ़ शोर चीख चिल्लाहटहरेक शख्स में है बेताबी जितना भी जिसको मिला किस्मत सेवास्ते उसके वो है   नाका़फ़ी  , शोर गुल का यही है
 
गिरीश बिल्लोरे
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हम तो तंतु कसे कसे से ठोकर से सरगम ही देंगे

शाम अधूरी मीत   याद बिन उसनींदे दिन मीत साथ बिन !***********हम तो तंतु कसे कसे से ठोकर से सरगम ही देंगेसर ढोऎंगें तपन पोटलीआओ तल में छांह ही देंगें ! क्योंकर मन में अवगुंठन है  शाम सुहानी कहां प्रात बिन ?***************मोहक मादक मदिरा
 
गिरीश बिल्लोरे
टैग: गीत
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जन्म दिन मुबारक हो मन्ना डे साहब

मन्ना साहब को  जन्म की हार्दिक शुभ कामनायें   ए मेरी  जोहरा .. तू  प्यार  का  सागर है ..  जहाँ  मैं  जाती हूं ..ज़िन्दगी  कैसी है पहेली .. ये  रात  भीगी .. गीत साभार : www.in.com
 
गिरीश बिल्लोरे
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आज़ सुनिये ये गीत

जोगी जबसे आया तू आया मेरे द्वारे  ओ रे मांझीमोरा गोरा अंग
 
गिरीश बिल्लोरे
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पाबला जी पगडी में क्या है सुनिये शरद कोकास से

 छत्तीसगढ में भी है पारा 45 डिग्रि है .  तपन से भरे दिन कैसे गुज़र रहे हैं वहां सुनिये शरद जी की ज़ुबानी उनने जैसी बात हुई हू ब हू पेश है
 
गिरीश बिल्लोरे
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आवाज़ पे सुनिये एक गीत जो यादों को सहला गया

साथियो हिंद-युग्म के महत्वपूर्ण पन्ने आवाज़ पे एक गीत जो मेरी पसंद है यहां सुनिये ,
 
गिरीश बिल्लोरे
टैग: आवाज़
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स्निग्धा तु मेरी सासों में घोल रहीं थी अमिय

स्निग्धातु मेरी सासों में घोल रहीं थी अमियतब से अब तकसिर्फ़ मैंसीख पाया हूंप्यार की बातैंओ चिर छायातुम्हारा आभास लेकर ज़िंदा हूंवरना कब का धुएं के गुबार के साथ जो चिता पर उभरती लौ से भागती नज़र आती हैंअनज़ान दिशा में गुम हो जातालोग तब मेरी पराजित देह पर शोक
 
गिरीश बिल्लोरे
टैग: मां
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महफ़ूज़ अली की कविता वाली ती शर्ट पहनेंगे अमेरिकन

उस व्यक्तित्व को कौन पसंद न करेगा जिसका घर गोरखप्रुर / लखनउ /जबलपुर में कहां है कोई नहीं समझ पाया यानि सबके अपने प्यारे महफ़ूज़ मियां जितने  गोरखप्रुरके हैं उससे ज़्यादा  लखनउ  और जबलपुर के हो गये.....!अब  तो महफूज़ की तलाश  दुनिया
 
गिरीश बिल्लोरे
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सानिया से ज़्यादा ज़रूरी है संजय पर बात

संजय एक विजेता खिलाडी  किंतु हताश है संजय या इन जैसे अभावों में जूझते खिलाडियों पर इस वक्त चर्चा  होनी ज़रूरी है  सानिया से ज़्यादा ज़रूरी है सानिया मिर्ज़ा की शादी शोएब के साथ आयशा के सम्बन्धमें पल छिन की खबर देते मीडिया के  लिये यह खबर
 
गिरीश बिल्लोरे
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गढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ?

अदेह के सदेह प्रश्न कौन गढ़ रहा कहोगढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ?मुझे जिस्म मत कहो चुप रहो मैं भाव हूँतुम जो हो सूर्य तो रश्मि हूँ प्रभाव हूँ !!मुझे सदा रति कहो ? लिखा है किस किताब में देह पे ही हो बहस कहा है किस जवाब में नारी  बस देह..? नहीं
 
गिरीश बिल्लोरे
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ज़रा याद करें: Girish Billore ने आपको फेसबुक का सदस्य बानने का न्यौता दिया है...

facebookनमस्ते Girishbillore.love,निम्न-वर्णित व्यक्तियों ने आपको फेसबुक पर मित्रता के लिये आमंत्रित कियाGirish Billoreआमंत्रण भेजे गए:Mar 7, 2010 Facebook apne dosto ke saath sambandh rakhne ke liye, chitar daalne ke liye aur ghatnayon ki soochi
 
गिरीश बिल्लोरे
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गढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ?

अदेह के सदेह प्रश्न कौन गढ़ रहा कहोगढ़ के दोष मेरे सर कौन मढ़ रहा कहो ?मुझे जिस्म मत कहो चुप रहो मैं भाव हूँतुम जो हो सूर्य तो रश्मि हूँ प्रभाव हूँ !!मुझे सदा रति कहो ? लिखा है किस किताब में देह पे ही हो बहस कहा है किस जवाब में नारी  बस देह..? नहीं
 
गिरीश बिल्लोरे
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इश्क प्रीत love

 जानती हो स्वप्न प्रिया इस गुलाब के कानों में बदमाश हवा ने कहा के कोई भ्रमर तुमसे अभिसार को आ रहा है और झट उसने सर ठीक वैसे ही झुका लिया जैसे कि तुम जब मुझसे पहली बार मिली थीं .... और मैंने बिन कहे अपने इश्क का इज़हार किया था............तुम्हारी याद
 
गिरीश बिल्लोरे
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मेरे इश्क की तासीर यही है

अक्सरप्रीत की मदालस गंध के बीचआ जाती है बेपरावह सीरिश्तों की कतरनें जो बिखेरदीं  गईं हैं जान बूझकर शायद इस लिये भी की बना रहे अनुशासन तुम मुझे प्रीत थी है और रहेगी बस तुम्हारा इंतज़ार करता रहूँगा हाँ, मैं तुमसे प्यार करता
 
गिरीश बिल्लोरे
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मेरी Facebook प्रोफ़ाइल देखें

facebook Girish Billore has:302 मित्र2 photos0 टिप्‍पणियां 18 wall posts37 groupsमेरी Facebook प्रोफ़ाइल देखेंनमस्ते Girishbillore.love,मैंने Facebook रूपरेखा बनाई है जहाँ पर मैं अपने चित्र, वीडियो, और इवेंट्स पोस्ट कर सकता/सकती हूँ और मैं आपको मित्र के
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
Mar 07 2010 08:57 PM
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podcast

पाडकास्ट कांफ्रेंस हेतु सादर आमंत्रित हैं http://sanskaardhani.blogspot.com/
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
Mar 06 2010 01:05 AM
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शहरोज़ जी को पहली बार रंगा था उनकी प्रेमिका ने:पाडकास्ट इंटरव्यू

कई खुलासे कर दिए शहरोज भाई ने  हसीन यादें बाक़ी हैं दिल में शहरोज़ भाई  के साथ हुई बातचीत में हुआ इस बात का खुलासा और  इसे यहाँ क्लिक करके सुनिए => संवाद एवं विमर्श सुनिए श्रीमती रानी विशाल जी को''उज्जैन की होली के
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
Mar 05 2010 11:40 AM
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अदा जी की आवाज़ में सुनिए तेरी आँखों के सिवा

और सुनिए अदा जी के स्वरों में ये गीत तेरी आँखों के सिवा 
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
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तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ !!

वीणा की इस कविता वाले टी शर्ट होली वाले दिन पहन कर विदा कह दिया शायद ही  मै इसे अब पहन सकूं किन्तु सम्हाल के रख दिया कवर्ड में.................. !और उग आई एक प्रेम कविता देखिये तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ !!एक अधूरी चाह से तुम टुकुर टुकुर
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
Mar 02 2010 12:33 PM
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दिलों को जीतने का शौक :जीतने का हुनर भी

प्रियराज यानी गिरीराज किशोर शर्मा   एक अनोखी जिंदादिल ज़िंदगी जीते नज़र आ रहे हैं  सपत्नीक व्यक्तिगत यात्रा पर बरतानियाँ गए शर्मा जी की धर्म पत्नी  स्वर्गीय श्रीमती शकुन्तला जी  ब्रेन हेम्ब्रेज होने से 14 नवम्बर, 2005 को  इस
 
गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर''
Feb 11 2010 07:51 PM
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प्रीत का यह रूप

प्रीत का यह रूप मेरे अंतस को छू गया शायद आप भी पसंद करेंगे
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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झूठ है आज का ग्रहण सबसे लंबा ग्रहण नहीं था

इस गतिमान चित्र को देख आपकी याद ताज़ी हो जावेंगी विकी पीडिया पर   इस  तस्वीर को देखिये आज दिन भर खबरीले चेनल्स इस खबर के साथ उसी तरह घिस्सा-पीटी करते रहे जैसे अन्य खबरों  के संग साथ की जाती है. अब इस तस्वीर को गौर से देखिये एक भारतीय पुरुष
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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अणु-अणु सँवर-सँवर तिल-तिल मिट-मिट पूरा करार करतीं हूँ

उमर-खैयाम की रूबाइयों के अनुवादक पंडित केशव पाठक के बारे में जितना लिखा जाए अंतर जाल के लिए कम ही है मुझे विस्तार से जानकारी न होने के कारण जो भी लिख रहा हूँ श्रुति के आधार पर फिर भी कुछ जानकारीयां  उपलब्ध किताब में मिलते ही लोभ संवरण न कर सका जाने
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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प्रिया तुम्हारी पैजन छम-छम

प्रिया तुम्हारी पैजन छम-छम,बाजे मन अकुलाए।जोगी मन को करे बिजोगी,नैनन नींद चुराए।।बोले जो मिसरी रस घोले,शकन हरे पूछ के कैसे?बसी श्यामली मन में,धड़कन का घर हिय हो जैसे, मिलन यामिनी, मद मदिरा ले, जग के दु:ख बिसराए।कटि नीचे तक, लटके चोटी,चंद्र वलय के से दो
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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मिर्ज़ा ग़ालिब

आभार यू ट्यूब  तेरा  चेहरा  कितना  सुहाना लगता !                               &
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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प्रिय बिन बैरन-सी लगे पायल की झंकार

मंद पवन मादक मदन, प्रियतम भाव विभोर, पायल-ध्वनि मोहक लगे, शेष सबइ कछु शोर नयनन सोहे प्रीत रंग, प्रीत पवन चहुँ ओर टेसू बोते वेदना, विरहन पीर अछोर प्रिय बिन बैरन-सी लगे पायल की झंकार हाथ निवाला ले खड़ा ओंठ करे इनकार देह जगाए कामना, हाथ सजाते रूप दरपन त
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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वेब दुनिया पर इश्क प्रीत love की चर्चा

रवीन्द्र व्यास जी का आभार जिन्हौने मेरे ब्लॉग    इश्क प्रीत love की चर्चा कुछ इस तरह की                                           
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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तापसी-उर्मिला

सुभगे उर्मिला तुमने मेरे दिए हुए अश्रु सजा लिए अपनीं पलकों पर निस्तब्ध/नि:शब्द ताकती आकाश को कदाचित मेरे दिए गए अश्रु-उपहार/मेरी अमानत के बिखर जाने के भय से  तुम जो निस्तब्ध/नि:शब्द/स्थिर हो सच उर्मिले मन प्राण से तुम्हारा लक्ष्मण आज प्रतिज्ञा औ
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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तुम्हारी सादगी ही उनके

प्रीत दिल में और मधुर सी   मुस्कान लब पे मेरी दीवानगी की बस इतनी ही वज़ह है.  तुम्हारी  सादगी  से  रूपसी हूरें सुलगती हैं  तुम्हारी सादगी ही उनके    सुलगने की वज़ह है  
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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तुम यौवन की राजकुमारी में पीड़ा शहजादा हूँ

मन प्रियतम का प्रेम पिपासु  तुम्हें निहारूं प्रियतम सभागार में बोलूँ कैसे ? नयनन से गुहारूँ प्रियतम ### तुम यौवन की राजकुमारी में पीड़ा शहजादा हूँ हिरनी से भी अधिक चपल तुम, मर्यादा से मैं तागा हूँ   भय वश भाग न जाओ मुझसे कैसे तुम्हें प
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'