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सत्यार्थ-प्रकाश

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12 Jun 2010
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सुवचन-सुधा

११.) अर्थसम्पप्रकृतिसम्पदं करोति । अर्थ-सम्पत्ति ‘प्रकृति-सम्पत्ति’ (अमात्य, सेना, मित्र आदि सम्पत्ति)को उत्पन्न करने वाली होती है। १२.) प्रकृतिसम्पदा ह्मानायकमपि राज्यं नीयते । प्रकृतिसम्पत्ति के द्वारा नेतारहित राज्य का भी सञ्चालन किया जा सकता है। १३.)
 
सौरभ आत्रेय
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सुवचन-सुधा

१.)सुखस्य मूलं धर्मः । सुख का मूल(कारण) धर्म है। २.)धर्मस्य मूलमर्थः । धर्म का मूल अर्थ है। ३.)अर्थस्य मूलं राज्यम् । अर्थ का मूल राज्य है। ४.)राज्यमूलमिन्द्रियजयः इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करना ही राज्य का मूल है। ५.)इन्द्रियजयस्य मूलं विनयः ।
 
सौरभ आत्रेय
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हिंदू वेदों को इतना अत्यधिक महत्त्व क्यों देते हैं?

(लेख थोड़ा दीर्घ है किन्तु अतिरिक्त समय में पढ़े अवश्य विशेष तौर पर हिन्दू लोग क्योंकि उन्हें अपने धर्म के मूल को तो जानना चाहिये कम से कम.) हिंदू धर्म में वेदों का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है. सभी हिंदू धार्मिक ग्रन्थ अपनी बातों को प्रमाणित करने के लिये
 
सौरभ आत्रेय
टैग: वेद
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धर्म और विज्ञान तथा धर्म और राष्ट्र में कौन बड़ा ?

अक्सर लोग धर्म को ही सब चीजो की समस्या का मूल कारण बताते हैं। आपने बहुत बार ये वाक्य पढ़े या सुने होंगे -- शासन धर्म-निरपेक्ष होना चाहिये, धर्म से ऊपर उठकर भी सोचना चाहिये, धार्मिक कर्मकाण्डो में नहीं फंसना चाहिये, धर्म और विज्ञान मैं कौन श्रेष्ठ है,
 
सौरभ आत्रेय
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राष्ट्र-रक्षा कैसे हो ?

नीतिज्ञ और राजनीति शास्त्रों का कहना है –‘शस्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्रचिंता प्रवृत्तते’ –‘शस्त्र द्वारा राष्ट्र की रक्षा हो जाने पर ही शास्त्र की चिंता में प्रवृत्त होना चाहिये।व्यक्ति के समान प्रत्येक राष्ट्र के तीन पक्ष स्वभावतः होते हैं—शत्रु,
 
सौरभ आत्रेय
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सत्य का निर्धारण कैसे हो (न्यायदर्शनम् भाग ४)

क्योंकि २ प्रमाण शेष रह गए हैं इसीलिए उनको सक्षिप्त में लिखते हुए और इस विषय में लोगो की रूचि को अत्यंत कम देखते हुए न्याय दर्शन के इन सिद्धांतों को इसी भाग में समाप्त कर रहा हूँ और आगे अन्य विषयों पर लिखने का भी प्रयास करूँगा. आज कल पहले की भाति समय की
 
सौरभ आत्रेय
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सत्य का निर्धारण कैसे हो (न्यायदर्शनम् भाग ३)

भाग ३ – प्रमाण का दूसरा प्रकार है अनुमान. प्रत्यक्ष के अनंतर प्रत्यक्ष पूर्वक होने वाला (अर्थात प्रत्यक्ष है कारण जिसका) ३ प्रकार का अनुमान प्रमाण है – वे ३ प्रकार हैं पूर्ववत, शेषवत, और सामान्यतोदृष्ट. अनुमान में कोई साध्य, हेतु एवं उदाहरण आदि को
 
सौरभ आत्रेय
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सत्य का निर्धारण कैसे हो (न्यायदर्शनम् भाग २)

पिछले भाग में मैंने उन १६ विद्याओं का केवल बहुत ही संक्षिप्त में परिचय कराया था और प्रमाण से लेकर निर्णय तक का क्रम रखा था। अब मैं यहाँ इन सब के बारे में थोड़ा खोल कर और आवश्यकता पड़ी तो उदाहरण के साथ समझाता हूँ। मैं फिर से ये बात दोहरा रहा हूँ कि जब आप
 
सौरभ आत्रेय
Mar 07 2010 02:03 PM
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सत्य का निर्धारण कैसे हो (न्यायदर्शनम् भाग १)

ऐसा लगता है इन्टरनेट पर भी कोई भी व्यक्ति कुछ भी कहने के लिए स्वतंत्र है चाहे वो सत्य हो या असत्य, तार्किक हो या अतार्किक। इस बात से बहुत से पाठक धुर्त और मुर्ख लोगो के असत्य के जाल में फंस जाते हैं जिस से सत्य की हानि होती है। नैट पर लोगो द्वारा छलना और
 
सौरभ आत्रेय
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दयानंद जी ने क्या खोजा क्या पाया (भाग ३)

............भाग २ से आगे क्रमशः८. "हरित ‘शाक के खाने में जीव का मारना उनको पीड़ा पहुंचनी क्योंकर मानते हो? भला जब तुमको पीड़ा प्राप्त होती प्रत्यक्ष नहीं दिखती और जो दिखती तो हमको दिखलाओ।´ (सत्यार्थप्रकाश, दशमसमुल्लास, पृष्‍ठ 313) - आज पहली क्लास का
 
सौरभ आत्रेय
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दयानंद जी ने क्या खोजा क्या पाया (भाग २)

वैसे तो यह गुमनाम पुस्तक समीक्षा के काबिल भी नहीं है किन्तु ऐसी कुतर्कों भरी अनेक पुस्तकें नेट पर प्रचारित की जा रहीं है इसीलिए एक का खंडन करने से आप समझ सकते हैं बाकी सब भी इसी तरह की बकवास से भरी पढ़ी हैं। मैं इस पुस्तक के मुख्य वक्तव्य नंबरवाइज लिख कर
 
सौरभ आत्रेय
Feb 19 2010 07:06 PM
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दयानंद ने क्या खोजा क्या पाया (भाग १)

मुस्लिम लोगो को और कुछ हिन्दुओं को भी भारतीय या हिन्दू संतो में सबसे अधिक समस्या मह्रिषी दयानंद सरस्वती जी से होती है, काफी लोगो पता है कि ऐसा क्यों है पर फिर भी बहुत से लोग अनभिज्ञ हैं. किसी गुमनाम लेखक डॉ अनवर जमाल ने एक पुस्तक ही लिख डाली "दयानंद ने
 
सौरभ आत्रेय
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मिथ्या प्रचारको को मेरा सन्देश

मैंने अभी हाल ही में ये ध्यान दिया है कुछ मुस्लिम ब्लोगकर्ता अपने ब्लॉग पर और अपनी टिप्पणियों के माध्यम से कुछ पुस्तकों का प्रचार बड़े ही लगन और परिश्रम से कर रहे हैं, उन पुस्तकों से उधृत बातों का वो अपने कुतर्कों में भी स्थान-स्थान पर वर्णन करते हैं।
 
सौरभ आत्रेय
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क्या हम हिन्दी नहीं बोलते

मित्रो एक बार की बात है मेरी एक भारतीय से ये बैहस हुई कि भारतीय हिन्दी नहीं बोलते अब आप लोगो को सुन कर मेरा मतलब पढ़ कर बड़ा अजीब लगा होगा पर ऐसा ही कि कुछ मूर्ख लोग समझते हैं। अब उनका तर्क सुनिए उसने मुझ से हिन्दी में ही बोल कर कहा की आप इसको हिन्दी
 
सौरभ आत्रेय
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सत्यार्थ-प्रकाश

दोस्तो अभी हाल ही में मैंने दयानंद सरस्वती जी कृत सत्यार्थ प्रकाश पढ़ी तो मेरी आँखे खुली की क्यों पिछले १००० वर्षो से दुनिया ने हम पर इतने आक्रमण किए और बहुत सारे उनमें निष्फल और काफी सफल भी हुए। दुर्भाग्य से ज्यादातर हम केवल सफल आक्रमणकारियों से परिच
 
सौरभ आत्रेय
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फ़िल्म समीक्षा "हल्ला बोल"

अभी कल ही मैंने हल्ला बोल मूवी देखि तो सोचा इसको आप लोगो से शेयर करता हूँ मूवी काम-चलाऊ है बोरिंग नहीं है लकिन कोई ख़ास भी नही है इसमे एक हरामी साधू बाबा जिसके बिना हर हिन्दी फ़िल्म लगभग अधूरी सी लगती है का भी किरदार है दो हरामी मोलवी भी दिखाए हैं कु
 
सौरभ आत्रेय
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प्रथम संदेश

मैंने अभी हाल ही में इस बात पर ध्यान दिया है कि हिन्दी की साइट्स और ब्लोग्स दिन प्रति दिन प्रचलित होती जा रही हैं और ये देखकर काफी अच्छा अनुभव हुआ फ़िर मैंने भी सोचा मैं भी एक अपने देश की भाषा में ब्लॉग बनाऊं। मैं एक सीनियर प्रोग्रामर हूँ और आज कल यू
 
सौरभ आत्रेय
Dec 29 2009 12:01 PM
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तंत्र - अविद्या

तंत्र विद्या एक ऐसा ढोंग है जोकि मुर्ख वाम-मार्गियो से प्रारम्भ हुआ था और उसीकी एक शाखा है। जिस तरह शैव मत वाले शिव के लिंग की पूजा करते हैं वाम-मार्गी, देवी जो शिवजी की पत्नी है उसके उपासक हैं ये मुर्ख लोग क्वारी कन्या(१२-१६ वर्ष के मध्य उम्र) को नग
 
सौरभ आत्रेय
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वैदिक या सनातन मत (हिंदू)

बहुत लोग वैदिक दर्शन के बारे में सही तथ्य से नहीं जानते हैं ये बात मैं इस आधार पर कर रहा हूँ कि मैं जब बहुत लोगो से पूछता हूँ तो अधिकतर लोग इसकी प्राचीनता, बहुलतावाद में एकतावाद और कुछ ब्रह्म , विष्णु, महेश(शिव) की प्रार्थना के बारे में और पुराणों की
 
सौरभ आत्रेय
Dec 29 2009 12:01 PM
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दिग्भ्रमित भारतवासी

हम हिंदू, शैव, वैष्णव, जैन, सिक्ख, बोद्ध, आर्यसमाजी हैं या सनातनी या वैदिक या फ़िर कोई और हमारी भाषा क्या है हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, बंगला या तमिल या फ़िर मराठी, हमारी संस्कृति क्या है आर्य, द्रविड़, पञ्जाबी, गुजराती, उत्तर भारतीय, दक्षिण या पूर्व या
 
सौरभ आत्रेय
Dec 29 2009 12:01 PM
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क्या भारत वर्ष या आर्याव्रत हमारा देश नहीं है (क्या हम विदेशी हैं )

भारत वर्ष की लगातार अत्यन्त त्रुटिपूर्ण शिक्षा का ही ये कमाल है की हम अपने देश में ही अपने आप को विदेशी आक्रमणकारी की संज्ञा से संबोधित करते हैं जिस के कारण बहुत सारे लोग (और इसमें लगातार वृद्धि भी हो रही है) अपने को आर्य और कुछ को द्रविड़ बताते हैं
 
सौरभ आत्रेय
Dec 29 2009 12:01 PM
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नियोग व्यवस्था

आजकल इन्टरनेट कुछ ब्लोग्स आदि पर वैदिक धर्म को नियोग का नाम लेकर उसका बड़ा मजाक उड़ाया जाता है मैंने एक मुस्लिम ब्लोग्कर्ता के नियोग संबधी लेख पर एक टिप्पणी की थी जोकि उसने कुछ दिन बाद वहां से डिलीट कर दी ये अच्छा रहा कि वो टिप्पणी मैंने अपने गूगल डो
 
सौरभ आत्रेय
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साँख्य दर्शन

अनेक शताब्दियों से यह प्रवाद रहा है की महर्षि कपिल अनीश्वरवादी थे और उनके द्वारा लिखित सांख्य दर्शन इश्वर को नहीं मानता। परन्तु साँख्य दर्शन का गंभीर तर्कपूर्ण अध्यन इस परिणाम पर नहीं पहुँचता तो यह प्रश्न यह उठता है इस प्रवाद का रहस्य क्या होगा। साँख
 
सौरभ आत्रेय
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हिन्दू धर्म का पतन - राष्ट्र का पतन

आज राष्ट्र विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है । स्थिति इतनी विनाशकारी है की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है। आतंकवाद ,भ्रष्टाचार , अंधविश्वास ,भाषावाद ,जातिवाद , क्षेत्रवाद, अलगाववाद , मतान्तरण , मतान्धता , गरीबी , भुखमरी , बेरोजगारी , अशिक्षा , परिवर्ति
 
सौरभ आत्रेय
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गाँधी परिवार अथवा खान परिवार

गाँधी परिवार का परिचय जब भी किसी कांग्रेसी अथवा मीडिया द्वारा देशवासियों को दिया गया है अथवा दिया जाता है,तब वह फिरोज गाँधी तक जाकर ही यकायक रुक सा जाता है फिर बड़ी सफाई के साथ अचानक उस परिचय का हैंडिल एक विपरीत रास्ते की और घुमाकर नेहरु वंश की और मो
 
सौरभ आत्रेय
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क्या वर्तमान हिन्दू जाति व्यवस्था का कोई प्रमाणित शास्त्रीय आधार है?

आज कल ये बहुत अधिक प्रचारित है कि आज हिन्दू जाति व्यवस्था का उदगम हमारे शास्त्रों द्वारा वर्णित वर्ण व्यवस्था है और भीम राव अम्बेडकर ने यहाँ तक कहा था की यदि इस हिन्दू जाति व्यवस्था से मुक्ति पानी है तो वेद शास्त्रों को डायनामाईट से उड़ा दो और वो स्व
 
सौरभ आत्रेय
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क्या वैदिक धर्म में विभिन्न मत हैं?

कुछ विद्वान होते हुए भी अविद्वता की बात करते हैं तो बड़ा अजीब लगता है जैसे उदाहरण के तौर पर मैंने अभी पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की व्याखित की हुई सांख्य योग, योग शास्त्र, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा एवं वेदांत दर्शन पढ़ी। पुस्तकों की भूमिका में और कहीं-
 
सौरभ आत्रेय
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आवश्यकता है अभी एक ओर स्वतंत्रता संग्राम की

सम्पूर्ण विश्व ने सदियों से भारत पर आक्रमण किए हैं किंतु मुख्यतः मुग़ल और ब्रिटिश लोगो को ही अधिक सफलता मिली है। मुग़ल और ब्रिटिश लोग भी इस राष्ट्र पर कभी पुर्णतः राज नही कर सके।भारत जब गुलाम नही था जब यहाँ मुग़ल और ब्रिटिश आए क्युकी उस समय देश में क
 
सौरभ आत्रेय