जानवर******* दु:ख अनमोल होते है, कुदरत कि दौलत है, कभी कुछ देकर जाते है, कभी सब छीन ले जाते है, कभी बैचेन करते है, कभी जीना सिखाते है, कभी बनाते है जब आंसू उम्र भर लहु के रुलाते है, कभी लबों की हँसी बन कर, नई दुनियाँ सजाते है, कभी मीठी कसक बन कर, अंज
गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी