ये सच है's Image

ये सच है

http://jhamanu.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
05 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
26
पाठक भेजे
500
पसंद
28
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
19.23
पसंद करें
3
नापसंद करें

आज वो जिन्दगी की जंग हार गयी वो नहीं है चली गयी ......

आज वो जिन्दगी की जंग हार गयी आखिर खुदा ने उसे बुला हीं लिया , ताउम्र उसने अपने परिवार को कुछ इस तरह संभाला की गांव में लोग उसकी मिशाल दिया करते है , उसे किताबी भाषा का तनिक भी ज्ञान नहीं था , पर जब भी लालटेन लेकर शाम को पढने बैठता था वो मेरे बगल में
 
मनीष झा
पसंद करें
2
नापसंद करें

रसूख वाले कानून को बपौती समझते हैं ....

रुचिका को आखिर २० साल बाद न्याय मिला ,राठौर को कम ही सही लेकिन सजा तो मिली , लेकिन एक चीज़ जोऐसे मामले को देकते हुए सामने आते है वो ये की , रसूख वाले मुजरिम क़ानूनी रफ़्तार को अपने हिसाब से गति देने में पूरी तरह सफल रहते है , लोगो को मीडिया का धन्यवाद्
 
मनीष झा
पसंद करें
2
नापसंद करें

भारतीय रेल भगवन भरोसे

नईदिल्ली रेलवे स्टेशन पर आज दोपहर हुई घटना पर यदि गौर से सोचे तो आपको ये समझते हुए तनिक भी देर नहीं लगेगा की भारतीय रेल किस कदर यात्रियों के सुरक्षा के प्रति समर्पित है .आज जब टीवी चैनल पर खबर चल रहा था तो इस घटना के एक पीड़ित ने अपने -आप को रोक नहीं पाया
 
मनीष झा
पसंद करें
0
नापसंद करें

मनीष की कलम से आपकी खिदमत मे.......

१.कसम खुदा की शायरी का मिजाज़ हीं कुछ और होता यक़ीनन शायरों की तादाद भी कुछ और होता ,हर हुस्न दीदार करती शायरों की शायरी सेकाश के कमबख्त ये आइना ना होता ।२.कौन कमबख्त हदे आशिकी को बर्दाश्त कर पाया है किसी ने शराब को तो किसी ने मौत को गले लगाया है ।३.हो
 
मनीष झा
Apr 08 2010 07:51 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

मनीष की कलम से आपके खिदमत मे ....

१.वक़्त की बेवफाई देखो कितने सितम ढाए हैंकभी नफरत थी जिस गली से हमे आज वहीँ घर बनाये हैं हमने ।२.हमे सराबी कह कर क्या खूब इलज़ाम लगायाहै तुमने , जरा पैमाने से पूछो हमे ऐसा बनाया हैकिसने ।३.हर मर्ज़ की दवा होती तो दुआओं पे यकीनकौन करता , सबूतों के बिना
 
मनीष झा
पसंद करें
0
नापसंद करें

मनीष क़ी कलम से आपके खिदमत मे ....

१.है तकलीफ कि वो खुद हीं बँट चूका हैचंद नमो मे कहीं अल्लाह तो कहीं इश्वरके चाहने वालो मे ।वो कहता है हम तो एक है एक हींधरती बनाई तुम हीं तो जिसने लकीरखिंच इसपर सरहदें बनाई । २.हमे खुद पे नहीं खुदा पे तरस आता है हसीनो को जमी पे भेज नजाने कैसे आसमा पे रहता
 
मनीष झा
पसंद करें
0
नापसंद करें

मनीष की कलम से आपके लिए { गौरफरमाइयेगा }

1. सरहदें कहाँ हवा को रोक पाई हैजिन्दगी कहाँ एक पल को थाम पाई है ,ये बस मज़बूरी है ,वर्ना दूरियाँ कहाँ दोस्तीको तोड़ पाई है । (मेरा सबसे पहला शायरी )२.दूरियाँ चाहे जितनी भी हो , दर्द चाहे कितनीभी हो तेरा दामन हम ना छोरेंगे तूफां चाहे -कितनी भी हो ।३.आँखे
 
मनीष झा
पसंद करें
0
नापसंद करें

बोले तो तू बीमार है वीरू.....

क्यों नहीं देते हो चेतन भाई को उसकी कहानी का क्रेडिट .क्यों बच्चे की जान ले रहे हो पागल हो क्या ऐसे भी कोईकिसी का हक़ छीनता है . दे -दे यार ये तो सोलह आनाउसी का कहानी है ,वो आई. आई .टी मे पढ़ा भी है यारये तो ठीक है की तुने चेतन से ख़रीदा है ऐसा अच्छालगता
 
मनीष झा
पसंद करें
0
नापसंद करें

जिन्दगी के सफर का सच .......

इक राह जिन्दगी होती है , हम राही बनकर चलते हैं॥ ........ कब सोते हैं कब जगते है इस बात से फर्क नहीं परता , हर वक़्त मुसाफिर रहते हैं .......हम युही पार नही करते कभी बीच राह भटकते है , कभी ठोकर खाकर गिरते है ,फिर उठते हैं ,संभलते है ,एक लम्बी आहे भरते
 
मनीष झा
पसंद करें
0
नापसंद करें

*रहमान तुझे सलाम *

ए. आर . रहमान ने भारतीय संगीत को दुनिया की नजरों में एक खास पहचान दिया है। वो भी इस दौर में जब भारतीय संगीत अपनी मौलिक पहचान खोते जा रही है और यहाँ के संगीतकार धुन कॉपी करने में महारथ हांसिल कर रहे हैं। पर जो भी हो हमारे मनोरंजन का शील - शिला चल रहा
 
मनीष झा
Dec 29 2009 11:56 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिहार में बहाल शिक्षकों का सच

बिहार में शिक्षा की स्थिति सुधरी है ,इसमे कोई दो राय नही । नीतिश कुमार के नेत्रित्व में सवा तीन साल पहले बनी सरकार ने शिक्षा ,शासन और सरक में काफी सुधर लाई है । राज्य में प्राइमरी स्तर पर शिक्षकों की बहाली का काम काफी जोर -शोर से चल रहा है ,और ये शिक
 
मनीष झा
Dec 29 2009 11:56 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जुर्माने में राखी या तोहफे में गुलाब ...

बात जब जुर्माने से नही बनी तो उतर आए गांधीगिरी पर। दरअसल उड़ीसा ट्रैफिक पुलिस ने इन दिनों बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले को आर्थिक जुर्माने के बदले लड़कियों से राखी बंधवाने का कम शुरू किया हैं। वहीं दूसरी तरफ़ हेलमेट पहने बाइक सवारों को तोहफा स्वरुप गुलाब
 
मनीष झा
Dec 29 2009 11:56 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

धोनी की प्यास नम्बर 1

जिस तरह से धोनी ने लंका में एक दिनी श्रंखला जीता वो काबीले तारीफ है । इससे ये तो साफ ज़ाहिर हो चुका है की वे भारत के सब से सफलतम कप्तान में से एक हैं , और ये कहना अतीसियोक्ति नही होगा की टेस्ट के भी सफलतम कप्तान के रूप में ख़ुद को साबित कर दिखायेंगे ,
 
मनीष झा
Dec 29 2009 11:56 AM
पसंद करें
3
नापसंद करें

मै बिहार मे हूं और विकास तो अभी चालू हुआ है

ऐसे विकास हो रहा है बिहार का कुछ चुनिन्दा जगहों को छोर दे तो बहुत ऐसी जगह है जहाँ बुनियादी सुबिधा भी उपलब्ध नहीं है । इसमें कोई दो राइ नहीं की बिहार मे काफी कुछ बदला है मगर ये लोग क्या करे जब तलक विकाश की हवा पहुँचती है उससे पहले ही चुनाव की खुसबू हव
 
मनीष झा
पसंद करें
2
नापसंद करें

नेताजी भूल भी नहीं भूल हीं जाते हैं

जरा सोचिये वो मंजर कैसा होगा जब कोई आपको मारने के लिए बन्दुक ताने आपके सामने खड़ा होगा (कुछ भी बताना मुस्किल है )फिर उसके बन्दुक से दना-दन गोलीयां निकलती है और आपका बाल भी बांका नहीं होता है ,इसका मतलब ये नहीं की उसका निशाना चुक गया नहीं बिलकुल नहीं व
 
मनीष झा
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये सच है: ऐसे भी चलती है दिल्ली मे ऑटो

ये सच है: ऐसे भी चलती है दिल्ली मे ऑटो
 
मनीष झा
पसंद करें
4
नापसंद करें

ऐसे भी चलती है दिल्ली मे ऑटो

ये कहानी दिल्ली के ऑटो की है यु तो ऑटो मे सफ़र करने वालों का हर रोज ऑटो चालक से बहस होती है , लेकिन दिल्ली मे कुछ ऐसे जगह भी है जहाँ ये चुप- चाप सवारी बिठा कर निकल देते है, यदि कभी आप कश्मीरी गेट से सीलमपुर या फिर सीलमपुर से भजनपुरा की और जाने वाले ऑ
 
मनीष झा
पसंद करें
0
नापसंद करें

जब झूट पर ऐतराज़ नहीं तो सच्चाई की कीमत पड़ ऐतराज़ क्यों

दुनिया का सबसे बड़ा सच तो यह है की "सदियों से झूठ बिकता रहा है और बिकता रहेगा । भारत में पहली बार सार्वजनिक तौर पर सच का कीमत लगाया एक टी.वी प्रोग्राम "सच का सामना "ने , उसूल - अगर आपमें है अपने ख़ुद के जीवन की पूरी सच्चाई कबूलने की हिम्मत तो " सच का
 
मनीष झा
Jul 30 2009 09:31 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

किसके साथ गद्दारी कर रहें हैं हम

रामायण की एक बहुत ही लोकप्रिय ठेठ कहावत है " घर का भेदी लंका नाश "विभीषण की वजह से रावण के लंका का सर्वनाश हुआ क्योंकि विभीषण रावण के दुश्मन राम का सेवक था . हमारे देश में भी यही हो रहा है चारो तरफ से पड़ोसी मुल्क के दुश्मन हम पे धावा बोलने को तैयार है
 
मनीष झा
पसंद करें
1
नापसंद करें

'गे' सभ्यता प्रकृति के नियम के खिलाफ

कहते हैं की हम परम्परावादी हैं .यानि भारत अपने आप में एक ऐसा देश है जिसकी संस्कृति का गुणगान दुनिया भर में गया जाता है .यहाँ पेड़ से लेकर पत्थर तक और गंगा से लेकर गाँधी तक पूजे जाते हैं तो क्या ये 'गे' सभ्यता की स्वतंत्रता को अपना पायेगा , बताना मुस्
 
मनीष झा
पसंद करें
1
नापसंद करें

एक चिट्ठी लोकसभा चुनाव पर

इश्वर की कृपा से कल यानि 13 तारीख को लोकसभा सीट के लिए मतदान ,कुछ छिट-फुट घटनाओं के साथ शांतिपूर्ण ख़त्म हुआ । आगे - देश के दो बरे गठबंधन UPA और NDA अपने -अपने सरकार बनाने के समीकरण तैयार करने में लग गए होंगे हमे आशा नही पूर्ण विश्वास है क्योंकि सरका
 
मनीष झा
पसंद करें
6
नापसंद करें
पसंद करें
1
नापसंद करें
पसंद करें
1
नापसंद करें

सब गन्दा है पर धंधा है ये ........

माँ कौन होती है ये सवाल काफी अटपटा लग रहा है , यदि ये सवाल है तो इसका जवाब है माँ वो है जो हमे जन्म देती है । पर आज हमारी बदलती सोच और बढती जरूरतों ने वैज्ञानिक खोज को वंहा पहुंचा दिया है जहाँ हम यह सोचने पर मजबूर है कि आख़िर सही मायने में उस बच्चे क
 
मनीष झा
पसंद करें
1
नापसंद करें

सब गन्दा है पर धंधा है ये (भाग .१ )

माँ कौन होती है ये सवाल काफी अटपटा लग रहा है , यदि ये सवाल है तो इसका जवाब है माँ वो है जन्म देती है । पर आज हमारी बदलती सोच और बढती जरूरतों ने वैज्ञानिक खोज को वंहा पहुंचा दिया है जहाँ यह सोचने पर मजबूर है कि आख़िर सही मायने में उस बच्चे का माँ किसे
 
मनीष झा
पसंद करें
1
नापसंद करें

मेट्रो की मौत लीला जारी........

लगातार मेट्रो के काम में लापरवाही बरती जा रही है। इसका ताजा उदारहण गुरुवार को फिर देखने को मिला। मेट्रो के लिए मिट्टी लेकर पहुचे एक ट्रक चालक की लापरवाही के चलते फुटपाथ पर सो रहे दो लोग दफ़न हो गए । ये घटना नांगलोई इलाके में हुआ है जहा इन्द्रलोक मुंड
 
मनीष झा