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अमरेन्द्र कुमार - हिन्दी राइटर्स गिल्ड

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10 Jun 2010
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एक दिन सुबह

अपनी नौकरी से रिटायर होने के बाद एक एकदम नये और अंजाने शहर में बसने का फैसला मेरा ही था। फैसलों में किसी की राय लेना और फैसला में उन राय-मशवरों की भूमिका में बहुत फर्क होता है। मैं नहीं चाहता था कि मेरी नौकरी और नौकरी से जुड़ी चीजे मुझे बाद के जीवन में
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निर्मल वर्मा जयन्ति

३ अप्रैल १९२९ को निर्मल वर्मा का जन्म हुआ था। निर्मल वर्मा उन चुने हुए साहित्यकारों में थे जिनकी कृतियों को बार-बार पढ़ा जायेगा। उनकी कृतियों की तुलना श्रीरामचरितमानस या श्रीमद्‍भागवतगीता से तो नहीं करूंगा लेकिन कला की दृष्टि से मैं उनकी रचनाओं की ओर
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कला और युगबोध

आहत विश्व के प्रतिपल रुदन मेंखींची मुस्कान की रेखा सस्मित ।जग की व्यथा, निज के संतप्त मन मेंनव चेतना ले कला हुई अवतरित ।सृष्टि का चक्र जब से है चलायुग बदले और जग भी है बदला ।मनुज कई बार गिरा, गिरकर सम्भलागुफा से निकल अब अंतरिक्ष को निकला।उंचे आदर्शों के
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कविता पर दो कवितायें

(1) कविता याद रखना कविता याद रखनाकि जिन पलों में मैंने तुम्हें रचा थामैं बांट सकता थाउनमें जो मेरे अपने थे ।कर सकता था दो बात अधिकमां से जो अक्सर सिरहाने मेंआकर बैठ जाती थी रात कोजब मैं लौटता था अपने घरचंद दिनों की छुट्टियों में ।बाबू जी से बात करते
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लेखन और बाज़ार

बाज़ार को सिर्फ़ खरीद-बिक्री के केन्द्र के रूप में देखा जाय यह जरूरी नहीं। बाज़ार एक प्रकार का अवसर है जिसके अन्तर्गत खरीद-बिक्री है। यह वस्तुओं के विनिमय का आधुनिक रूप है। कुछ दिनों पहले एक रिपोर्ट पढने को मिला कि भारत के युवा लेखक (हिन्दी) बाज़ारोन्मुख
Dec 29 2009 11:58 AM
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बदला लेने से क्या बदल जायेगा

कविता और कहानी में एक फ़र्क और भी है - कविता का टंकण (टाइपिंग) सरल और कहानी का मुश्किल । कहानी के हजारों शब्दों को टाइप करना अपने आप में एक प्रक्रम हो जाता है। पहले का मेरा सारा लिखा किसी दूसरे फांट में है और यही कारण है कि गद्द मुझे स्कैन करके देने प
Dec 29 2009 11:58 AM
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क्षणिकायें

रात और दिन रात झुक जाती है दिन के कंधे पर दिन उसे लिये फिरता है फिर थक जाता है रात की नींद खुल जाती है दिन को थपकाती है सहलाती और सुलाती है खुद एक आंख में सारी रात काट देती है कौन कहता है कि दिन का विलोम रात है। उदासी और मुस्कान मैंने जब भी पूछा उसकी
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कैसे लिखें कहानी

कहानी और उसे लिखने के सम्बंध में मेरे कुछ विचार:
Dec 29 2009 11:58 AM
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पहला ब्लॉग

सुमन घई जी का आभारी हूं जिनकी मदद से मेरा ब्लॉग शुरू हो पा रहा है। लेखन कितना व्यक्तिगत और कितना सार्वजनिक होना चाहिये - यह प्रश्न मेरे मन-मस्तिष्क में काफ़ी समय से घूम रहा था। लिखना और उसे एक दम से लोगों के बीच बांटना कई बार बहुत सहज नहीं लगता। लेकिन
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क्षितिज - एक प्रयोग

आज से छ: साल पहले जब क्षितिज के सम्पादन और प्रकाशन की शुरुआत हुई थी कोई बहुत बड़ी महत्त्वाकांक्षा नहीं थी इसके पीछे। खेल-खेल में शुरु हुई इस लघु पत्रिका ने प्रयोगों, गुणवत्ता और स्तरीयता के नये आयाम स्थापित किये। दो साल के अंदर यह पत्रिका अमेरिका से न
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हिन्दी ग़ज़ल

हुस्न के जो ये नज़ारे नहीं होते हम ये दिल कभी हारे नहीं होते। चढ जाते जो सबके होठों पर वो गीत फिर कंवारे नहीं होते। तमाम नफ़रतों के बलबलों में इश्क करने वाले सारे नहीं होते। मात खायी है हमने तो हर्ज़ नहीं प्यार करने वाले बेचारे नहीं होते। जो जगमगाते हरद
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सर्वेक्षण - प्रवासी साहित्य

पिछले सर्वेक्षण का विषय था - हिन्दी भाषा एवं साहित्य - संकट और संभावना । उसमें पूछे गये प्रश्नों के जो उत्तर मिलें उसके आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। संगीता पुरी जी ने अवश्य लिखा कि हिन्‍दी की अवनति के सबसे बडे कारण तो पाठक की कमी होनी चाहिए।
Sep 28 2009 08:35 AM
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सम्पर्क

पिछले कुछ दिनों हिंदी के तीन प्रमुख साहित्यकारों से सम्पर्क का सौभाग्य मिला - उदय प्रकाश जी, डा. कमल किशोर गोयंका जी और उषा प्रियम्वदा जी।================================मेरे लिखे एक ई-मेल के उत्तर में उदय जी ने लिखा -Friday, May 1, 2009प्रिय अमरेन्द्र
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हिन्दी भाषा एवं साहित्य - संकट और संभावना

वर्तमान समय को अगर हिन्दी भाषा और साहित्य की अवनति का काल कहा जाये तो सम्भवत: अतिरेक नहीं होगा। आज हिन्दी समाज अन्तर्कलह, आरोप-प्रत्यारोप, वाद-विवाद और वैचारिक शून्यता के अन्धेरे में भटक रहा है। पिछले कुछ दशकों से यही स्थिति बनी हुई है। इससे किसको कितना
Jul 25 2009 09:17 AM
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विष्णु प्रभाकर

कोई सुबह या शाम या फिर कोई घडी क्या खबर लेकर हमारे पास आयेगी, हमें पता नहीं होता। हम जीवन भर इसी अंधियारे में भटकते रहते हैं। इस अंधेरी गुफा में कहीं कुछ जब चमक कर बुझ जाता है तो हमें लगता है कि हमने क्या खो दिया और फिर अहसास भी होता है कि जो खो दिया
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मिडलैंड आर्टिस्ट गिल्ड द्वारा आयोजित कला प्रदर्शनी

जनवरी-मार्च २००९ के दौरान मिडलैंड आर्टिस्ट गिल्ड द्वारा आयोजित कला प्रदर्शनी में शामिल हर्षा केऔर मेरे कुछ चित्र ।
 
अमरेन्द्र कुमार - हिन्दी राइटर्स गिल्ड
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कहानी - कुछ सोचा है ?

 
अमरेन्द्र कुमार - हिन्दी राइटर्स गिल्ड