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GHAZAL
छोड़ कर हम अना और हनक जाएँगेतेरे कूचे से पर बेधड़क जाएँगेक्या करें देख कर सब चटक जाएँगेदीदा ए कू ए जाँ में खटक जाएँगे जां निसारी मिरी चर्ख है इब्तिदामेरे आहबाब भी ता-फलक जाएँगेदिल ए मजरूह में तेरी यादों की मयदिल छलक जाएगा हम छलक जाएँगेशीश महलों में जो
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Apr 25 2010 12:05 PM


Shuffle








