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दिव्य दृष्टि

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21 May 2010
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अनिवार्य योग्यता

नक्सल के हाथो मारे गए भारतीय नागरिक सामान्य नहीं असामान्य थे .क्योंकि वे "खबरी लाल" थे , और दुसरे पुलिस के जवान के "हमसफ़र" थे बस के अन्दर .बस ये अनिवार्य योग्यता काफी था ,उनके चयन का .खूनी राजनीति की थाली में "लालू की लाली " दिखना भी अनिवार्य था ।
May 21 2010 06:28 PM
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मौजूदगी !

हर सफल आदमी के पीछे औरत होती है ,तो हर असफल आदमी के आगे भी औरत ही होती है .
May 20 2010 11:02 AM
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दंतेवाडा के दांत में फंसी जुबान और जवान !

कमाल है गृह मंत्री जी, कसाब जैसे कसाई की सुरक्षा में जितनेजवान लगाये ठीक उतने ही जवान को दंतेवाडा के महायज्ञ मेंआहुति दे आये . ये जो दो -दो लाख चार -चार लाख का "दक्षिणा"बाँट रहे है इसे भी कसाब के सुरक्षा में लगे खर्च के बराबर करनेका इरादा है क्या ? चूहे
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अंदाज़

गाँधी को रोज गोली दागने वाले आज शोक मना रहे हैं।रघुपति राघव राजा राम .......
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अलग मंत्रालय दे दो ना !

किसी से भी अनुरोध करने के अधिकार के तहत मैंभारत की सरकार से अनुरोध करता हूँ .कि अपनेमंत्रालय में एक का इजाफा तो करे "मंहगाई मंत्रालय"केवल मंहगाई मंत्रालय ही मंहगाई बढाने घटाने कापुनीत कर्त्तव्य समय समय पर निभाता रहे .इस मंहगाई में कृषि मंत्रालय संभालना
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अमर ज्योति

मरते ही नेता अच्छे हो जाते हैं . कि नेता अच्छे होते ही हैं ?
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मेरी मर्ज़ी !

आप भी दूध के धुले तो हो नही ! बड़ा चिल पों मचा रहे हैं आजकल आप लोग .थोड़ा सा प्रतिबन्ध क्या लगा ,लगे अपने आपको लोकतंत्र का सबसे सजग प्रहरी बताने . अरे आप सजग रहते तो सरकार सजग नही रहती क्या ? आपके प्रसारण पर रोक लगाने वाला सरकार कहाँ से हो गया .ये काम
Dec 29 2009 11:50 AM
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"करारा जबाब "

वो आया हमारे कपडे फाड़े हमारे भाई के खून से हमारे घर का दीवार रंगा हर रिश्ते को रुलाया सिसकिया अभी थमने का नाम नही ले रही ये कह रहे है हमारा "करारा ज़बाब" है . वो नौ नपुंशक साठ घंटे के अनुष्ठान में दो सौ लोगों का हवन कर गया . और लगभग इतनी ही अधजली लकड
Dec 29 2009 11:50 AM
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बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ !

बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ ! देखिये ! आप देख सकते हैं ! आप देख सकते हैं कि कैसे हम अपनी जान पर खेल कर आपको वह सब कुछ दिखा रहे हैं जो आप घर बैठे देख रहे हैं.जो आप देखना नही चाहते वो भी दिखाने को हम मोर्चा खोले बैठें हैं. इस देश का हम चौथा स्तभ ह
Dec 29 2009 11:50 AM
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माँ और भूख !

दालान पर , कल्ह कादिरी मियाँ से संक्षिप्त मुलाकात का नतीजा है कई शेर अपनी यादों के जंगल से छोड़ गए मियाँ . इन दो के अतिरिक्त सब मेरे शिकार बने .और मैं इनका शिकार हुआ .दम है क्या इनमे ? "एक निवाले के लिए मार दिया जिसको हमने , वो परिंदा भी कई रोज का भूख
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मेरी दाल गला दो ना !

मुस्कान दे आए सुबह को, शाम की सुध लेगा कौन ? उदास हो रही है साझ एक दीया जला दो ना ! अछूत बुझती नींद आंखों को या दोनों पलकों में झड़प हुआ इन थकी,खुली आंखों में, एक सुंदर ख्वाब पला दो ना ! घुल-मिलकर अस्तित्व मिटा लेता पर जग सारा, खारा पानी है बस तुम अप
Dec 29 2009 11:50 AM
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अच्छा लगता हूँ !

शब्द ज़माने का .वाक्य बन गया मेरे से . सो सर्वाधिकार सुरक्षित कैसे हो ? इन बने -बिगडे वाक्य को कविता, गीत ,गजल,या छंद क्या कहा जाय ,मालूम नही . बस अच्छा लगता हूँ } आजकल सोचते हुए अच्छा लगता हूँ। ख़ुद को कोसते हुए अच्छा लगता हूँ । दर्द जो सीने से उठकर
Dec 29 2009 11:50 AM
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मेरे मन के तार !

सन् १९८४ मे मेरे मन की बात कागज़ पर उतर आई थी ।आज अचानक, न जाने क्यों ब्लॉग पर उतरने को बेताब दिखी । पर मैंने इसे ब्लॉग पर उतारा नही, चढाया है । कुछ तार मेरे मन के उलझे हुए है / कुछ सार इस बात के सुलझे हुए हैं // रोशनी मिली तो उठाई न नज़र / अब तो सारे
Dec 29 2009 11:50 AM
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कम्बल ओढ़ के हम घी पी रहें है या पानी ?

मैं बिहार मे पैदा हुआ दिल्ली मे प्रगतिशील पत्रकार कहलाता हूँ . सर नेम को झटक कर जाति से अपने परहेज की मात्रा मापी जाने लायक बना लिया है . शुरू से ही दुबे ,चौबे, झा ,मिश्रा ,तिवारी ,त्रिपाठी , सिंह , शर्मा , चौहान जैसे सरनेम नेम से विलीन हो गुप्त आचरण
Dec 29 2009 11:50 AM
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हां रे बेटा ऐसे ही पढ़ना

कर्ज लेकर किराने की बड़ी दुकान चला रहे हीरालाल की एकलौती संतान करण पढ़ाई के नाम फान्केबाजी करना भाता था. उसकी माँ अनपढ़ बाप सातवी पास .हर बाप की तरह हीरालाल अपने लाल को जवाहर लाल बनाने को सोच रखा था . इस दिशा मे दो टिउशन लगा कर प्रयास शुरू कर दिया गया
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दो रुपये की शिक्षा !

मैट्रिक करके कॉलेज मे दाखिला ले किसी छुट्टी का आनंद ले रहा था अपने गाँव . बात सन् १९७९ की ही है .तब मेरे भइया हिन्दी ऑनर्स मे नामांकित हो गए थे . मैं नही जानने वाले मुझे भइया का भरत कहा करते है .वो भी शायद इसलिए कि मैं उनकी किसी बात को काट-पीट नही कर
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पेट मे नौ टन पीठ पर दस टन !

मालूम नही मुझे ट्रक या टेंपो पर प्रसिद्ध सूक्ति या उक्ति उकेरे जाने के पीछे ट्रक मालिक का हाथ होता है , या ट्रक का ड्राईवर, क्लिनर का , या कि पेंटर अपनी मर्जी चला जाता है . ये जरूरी तो नही कि प्रत्येक ट्रक मालिक काफ़ी शिक्षित हो और ज्ञान प्रसार ,प्रच
Dec 29 2009 11:50 AM
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लो विदा अब वर्ष तुम भी !

लो विदा अब वर्ष तुम भी ,थक गए हो बहुत चल कर !अब तुम्हारे भार को, नए वर्ष के कंधे मिलेगे/कौन जाने दर्द कितना बांधे जा रहे हो /नए सूरज को नयन की रौशनी दिए जा रहे हो /अब तुम्हारे साथ के पल ,आँख मे बन गए काजल . साल २००७ से क्या शिकवा ? हमने इस साल को दिय
Dec 29 2009 11:50 AM
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"ला बुढिया गडास {गडासा} आज खून के नदी बहा देबउ !

कहानी सत्य घटनाओ पर आधारित होते हुए भी स्थान, काल ,पात्र काल्पनिक है . किसी व्यक्ति विशेष स्थान विशेष से मेल खाता हो तो स्तंभकार पर सॉरी बोलने का दवाब नाही बनाया जा सकता है .गलती वश ये मनोरंजन का साधन बन गया है .समाज मे ये परम्परा पुरातन है कि एक डॉक
Dec 29 2009 11:50 AM
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माँ मरुस्थल मे नदी है !

ये मर्माश्पर्शी रचना मेरी नही,मैंने तो इससे गबन किया है। मध्यप्रदेश के कवि श्री ॐ व्यास जीं को इसका पाठ करते देखने और सुनाने का सौभाग्य प्राप्त कर चूका हुईं।कविता प्रस्तुत करने कि शैली इतनी जबर्दस्त थी कि एक भी आदमी ऐसा नही था जिन्होंने अश्रु-सुमन अप
Dec 29 2009 11:50 AM
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Parents/ Parrots- Teacher Meet:

मैं अपने उताराधिकारी यानी सुपुत्र के स्कूल मे परेंट्स टीचर - मीट मे आमंत्रित था । अक्सर इसमे भाग लेने की जिम्मा मेरे जीवन साथी ही बखूबी निभाती आ रही हैं । पर एक दिन उनकी तबियत खराब हो जाने के कारन ना चाहते हुए भी मुझे ही जाना पड़ा । साड़ी तैयारी मैंन
Dec 29 2009 11:50 AM
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टोपी ट्रांसफर !

आसमान छूती उमीदें , भागती हुई ज़िन्दगी मे हमे गुड नही , बेटर भी नही सीधे बेस्ट चाहिऐ इसलिये हमे उन तमाम इंतजाम करने को विवश किया जिससे बेस्ट पाया जाये । 'स्कोर -मोर ' के जमाने मे हम अपने बच्चों को अपनी सामर्थ्य से ज्यादा बड़ा स्कूल मे दाखिला दिला कर ए
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"यदा-यदा ही धर्मस्य ग्लान्लिर भवति भारतः....."

कला का सम्मान हम सभी उत्साहित होकर करते आये हैं.कला का व्यापक विस्तार हो इसके लिए प्रकृति ने पचुर maatraa मे जगह दी है,पर आज कल ये फ़ैलाने के बदले सिकुड़ता नज़र आ रह है.ये महसूसा ही नही, नंगी आंखों से देखा जा सकता है, कुठाराघात को हम सब ने मिलकर सहा ह
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अक्षराराम्भ !

अक्षराराम्भ ! ****** ॐ ****** या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्रवस्त्रव्रिता या वीना वर दंद्मंदित्करा या श्वेत्पद्मसना या ब्रह्म्च्युत शंकर प्रभिर्ती देवी सदवंदिता सा माँ पातु सरस्वती भगवती निह्शेश जाड्यापहा ॐ ****** * * * * * * भूमि -पूजक कर्ता है
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मेरे मन के तार !

कुछ तार मेरे मन के उलझे हुये हैं कुछ सार एस बात के सुलझे हुये हैं / रौशनी मिली तो उठाई ना नज़र, अब तो सारे चिराग बुझे हुये है / कुछ तार मेरे मन के…………. दुखाया है बड़ी बेरहमी से तेरा दिल, अहसास एस बात के अब मुझे हुये है / कुछ तार मेरे मन के…………… किस क़द
Dec 29 2009 11:50 AM
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लगे पचासी झटके !

काबिल कपिल जी को काफी सुधार का काम वाला मंत्रालय मिला. प्रतिशत को ग्रेड में बदलकर अब ग्रेड को प्रतिशत में बदल रहे हैं .फिर किसे सही माने प्रतिशत को हटाने के खेल को या फिर से प्रतिशत को लाने के खेल को ?मतलब प्रतिशत, शत प्रतिशत चलन में रहेगा ही . त काह
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आपत काल परखियहूँ चारी !

तुलसी दास जी की कविता की एक पंक्ति याद आ गई .धीरज धर्म मित्र अरु नारी / आपत काल परखियहूँ चारी ! धैर्य अब रहा नहीं . धर्म का साथ देते तो सांप्रदायिक कहलाते सो राज धर्म भी निभा नहीं पाया .मित्र तो नीतिश थे ,सुशील मोदी थे ,जो हमारी हर उटपटांग हरकत पर कभ
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परिभाषा !

बोलने वाले को वरुण, करने वाले को कसाब कहते है."
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तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ ?

हमें जो कुछ कहना था आम जनता की तरफ़ से उसका एक पार्ट लिख दिया .बुरा लगा उनको जो सबकी बुराई करने की अच्छी-खासी दरमाहा [वेतन] लेते हैं. आप ग़लत हैं बन्धु ! मुझे टी.वी.की समझ नही है ये आपने लिख तो दिया .आपको आज़ादी का मतलब पता है ? समाचार का मतलब पता है
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"Translate in to Hindi"

1956-58 batch ke M.A.in English tab ke most respectable post "Principle of Govt. High School par virajmaan tha ek sadharan kisaan ka beta. Sadharan kissan hone ke naate unake Pita jee apane kai mahatvpurn bhavnao ko daba kar ek-ek paisa laga diya tha