Bharat kaa Loktantra's Image
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23 May 2010
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आखिर सुप्रीम ने भी माना कि न्यायायिक नियुक्तियों करप्शन कैंसर कि तरह

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मना कि न्यायायिक नियुक्तिओं में भर्ष्टाचार केंसर कि तरह बढ चुका है जस्टिस जी एस सिंघवी कि अध्यक्षता वाली वेकेशन बैंच ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को दोषी ठहराते हुए कहा कि हमने २० साल पहले ही न्यायायिक नियुक्तियों में भ्रष्टाचार
 
K.P.Chauhan
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फोरेंसिक लैब[ ऍफ़ ,एस एल|में भ्रष्टाचार न्यायपालिका और लोकतंत्र के लिए ख़तरा

सभी राज्यों कि फोरेंसिक लैब ,उस राज्यं के मिनिस्ट्री ऑफ़ होम के अंतर्गत आती हैं और मिनिस्ट्री ऑफ़ होम के अधिकारी वहाँ प़र होने वाली सभी जांचों को जैसे कि सिग्नचर्स कि जांच ,खून कि जांच ,डी,एन ऐ ,कि जाच .फिंगर प्रिंट्स और सभी प्रकार कि क्रिमिनल जांचों को
 
K.P.Chauhan
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आखिर भारत में लोकतंत्र है

आज हमारे देश में कानून के रखवालों ने कसाब प़र अभी तक मुकद्दमे चलाकर ,उसकी प्रत्येक बात को पूर्णत:गौर करके ,यानी के कुछ भी नजर अंदाज ना करते हुए और उसको अपने बचाव के लिए पूर्ण स्वतंत्र करके सम्पूर्ण दुनिया को भलीभांति दिखा दिया कि भारत में अभी भी लोकतंत्र
 
K.P.Chauhan
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न्यायपालिका और जनता जनार्दन ,शासक और शासन

इतिहास गवाह है कि जिस देश में भी जिस शासक के शासन काल में वहाँ कि जनता का विश्वास उस देश कि न्याय पालिका से उठ गया क्योंकि वहां कि न्यायपालिका में दोष उत्त्पन्न हो गए थे चाहे तो वो शासक के कारण अथवा उसके कानूनी सलाहकारों अथवा क़ानून के कारिंदों के कारण
 
K.P.Chauhan
Apr 30 2010 09:31 AM
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न्याय पालिका को भ्रष्टाचार से मुक्त करना होगा

आज सभी जानते हैं कि न्याय पालिका भ्रष्टाचार से कंठ तक डूबा है ,और पहली बात तो ये है कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय से न्याय पाने कि गुहार लगाना भी किसी गरीब आदमी के बस कि बात नहीं है क्योंकि बिना वकीलों के वहाँ केस लड़े नहीं जाते और जिन केसों का सही
 
K.P.Chauhan
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नियति

न्यायालय में न्याय पानेजो भी जाता हैन्याय मांगते मांगतेबूढा अश्व सम हो जाता है ,आँखें भरिया जाती हैकान बहरा हो जाता हैदन्त विहीन मुखहिप्पो कि भांति मुस्कुराता है ,न्यायाधीश झूठे सच्चेदोनों को देखता हैकौन सच्चा है कौन झूठासमझ नहीं पाटा है,इसी तरह चलता
 
K.P.Chauhan
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लोकतंत्र के रक्षा कवच दिग्गज नेताओं के दृढ ब्यान

हमारे देश में जब भी बाहरी ताकतों ने हमले
 
K.P.Chauhan
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भारत के लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका

हमारे देश में पिछले कुछ वर्षों में न्यायपालिका की गरिमा में दिन प्रितिदीन कमी आती जा रही है है ,भ्रष्टाचार इतना बाद चुका है की देश के हर आदमी की जुबान प़र एक ही बात है कि मुकद्दमे बाजी से बाज आना क्योंकि वहाँ कोई भी काम बिना पैसे के नहीं होता ,पैसा दो और
 
K.P.Chauhan
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लोकतंत्र में नक्सलवाद आखिर क्यों ?

कल की लोमहर्षक घटना जिसमे की नक्सलवादियो के द्वारा ७५ सैनिकों की ह्त्या कर दी गई ,आखिर इन सैनिकों का क्या दोष था ये तो बेचारे देश और प्रदेशों की रक्षा ही कर रहे थे यदि नक्सलियों को कोई परेशानी सरकार से है तो इन निरीह सैनिकों की ह्त्या के बजाय उनको सरकार
 
K.P.Chauhan
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लोक तंत्र क़ा अंत जल्दी ही ,वरना व्यवस्था बदलो

आज के हालात और भ्रष्टाचार की चरम सीमा देखकर कोई भी आदमी आराम से कह सकता है की अब लोकतंत्र भारत में ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है क्योंकि लोकतंत्र क़ा मतलब होता है प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान व्यवस्था ,और आज वो भारत में नहीं है यद्यपि क़ानून बनते हैं प़र
 
K.P.Chauhan
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भारत का लोकतंत्र और दिल्ली की महंगाई

दिल्ली के बाशिंदे बेचारे बड़े अभागे हैं जिसको भी अपना समझकर दिल्ली की गद्दी प़र बिठाते हैं वो ही आकर महंगाई की मार से त्रस्तकरते हैं ,दिल्ली वाले शीला जी से इतने मुग्ध हैं की पिछले लगभग १२ साल से वो ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीहैं और अभी भी कह रही हैं की
 
K.P.Chauhan
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महिला बिल के पास होने से लोकतंत्र मजबूत होगा

आज राज्यसभा में महिला बिल का पास होना हमारे देश की एक महान उपलब्धि है और आज का दिन एतिहासिक होगा क्यूंकि पिछले ६२ साल से चले मुद्दे में हमको आज सफलता मिल गई ,इसका मुख्य फाय्द्द होगा की नारी स्सक्तिकर्ण के कारण देश में लोकतंत्र में मजबूती आएगी महिलाओं को
 
K.P.Chauhan
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महिला दिवस (जागरूकता का दिन )

महिला दिवस प़र आज देश की सभी महिलाओं को मेरी शुभकामनाएं ,आपसे मेरी करवद्ध प्रार्थना है कि आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और किसी भी प्रकार के अन्याय को सहन ना करे ,कहीं प़र भी अपना सामाजिक ,पारिव्वारिक शोषण ना होने दें यदि आपको ऐसा कुछ नजर आये तो
 
K.P.Chauhan
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क्या यही भारत का लोकतंत्र है

सम्पूर्ण दुनिया में रिसेसन चल रहा है और कोई भी देश उससे अछूता नहीं और भारत भी अछूता नहीं ,काम धाम बंद होने की कगार प़र है व्यापारी गरीब मजदूर ,किसान सभी त्राहि त्राहि कर रह है मंदी की मार ,महंगाई की मार से प्रत्येक व्यक्ति दुखी ,यदि थोड़ा बहुत न्सुखी है
 
K.P.Chauhan
Mar 05 2010 12:02 AM
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होली की शुभकामनाएं

सभी ब्लोगर्स को होली मैया की बहुत बहुत सारी शुभकामनाएं ,होली मैया आप और हम सभी ब्लोगर्स की आशाओं ,इच्छाओं ,आकांक्षाओं को परिपूर्ण कर सभीको सुख समर्धि ,एश्वर्य और मान सम्मान प्रदान करे आपकाकांति प्रकाश चौहान
 
K.P.Chauhan
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क्या यही भारत का लोकतंत्र है

कुछ गरीब बच्चौं को मीठे की दूकान प़रझूठे दौने चाटते देखकर करकुछ खाकर दौने फैंकने वाले कहते हैंये दौनों में अपनी किस्मत ढूंड रहे हैं ,वास्तव में वास्तविकता ये हैआजादी के ६० वर्ष बाद भीभारत जैसे लोकतंत्र में बच्चे गरीबी की तस्वीर देख रहे हैं ,कुछ विदेशी उन
 
K.P.Chauhan
Feb 28 2010 01:38 AM
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आखिर कैसा लोकतंत्र है यहाँ

भारत जैसे लोकतंत्र में देश का एक महान आर्टिस्ट जिसको की केवल हिन्दुस्तान में ही उसे महान आर्टिस्ट का रुतवा नहीं दिया बल्कि सम्पूर्ण दुनिया ने उनको महान आर्टिस्ट ,कलाकार का खिताब दिया हुआ है जी हाँ हम बात कर रह हैं श्रीमान मकबूल फ़िदा हुसैन जी की जिनकी एक
 
K.P.Chauhan
Feb 27 2010 12:23 AM
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लोकतंत्र है या भौंक तंत्र

जो भी कोई नेता जब किसी पार्टी से निकाला जाता है या खुद निकल जाता है तो वो उस समय इस प्रकार भौंकता है की ये शब्द जिस जानवर के लिए प्रयुक्त किया जाता है शायद वो भी इस प्रकार ना भौंक सके ,आखिर ऐसा क्योँ होता है क्या नेताओं में नैतिकता नाम की कोई चीज नहीं है
 
K.P.Chauhan
Feb 15 2010 12:23 AM
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देश की प्रथम महिला {राष्ट्रपति}के पतिश्री देवी सिंह शेखावत

उस देश में लोकतंत्र भला कैसे फलीभूत हो सकता है जिस देश की प्रथम महिला (राष्ट्रपति )प्रतिभा पाटिल शेखावत के पति जिनको हम देश का प्रथम नागरिक भी कह सकते हैं वो २.२५ एकड़ जमीन के लैंड ग्राब्बिंग केस में लिप्त थे और अभी जल्दी में ही उस केस को कोर्ट में हार
 
K.P.Chauhan
Feb 14 2010 11:29 PM
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हाई कोर्ट के रिटायर चीफ जस्टिस शाह साहब

हाल ही में रिटायर हुए चीफ जस्टिस शाह साहब ने भी माना कि जुडिसरी में भी भर्ष्टाचार व्याप्त है परन्तु ऊपर लेबल पर नहीं .अब हम ऊपर लेबल किसको माने क्या केवल उच्चतम न्यायालय को या किसी और न्यायालय को भी ,जब कि वास्तविकता ये है कि सभी न्यायालयों में करप्सन
 
K.P.Chauhan
Feb 12 2010 11:59 PM
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लोकतान्त्रिक भारत की स्थिति

मेरे विचारों में भारत में लोकतंत्र की स्थिति बहुत खराब है क्योंकि देश के किसी भी सेक्टर में लोकतंत्र के अनुरूप कार्य नहीं हो रहे यद्यपि देखने और सुनने में प्रितिदीन यही आ रहा है और अखबार भी दहाड़ मार रहे है की यदि कहीं लोकतंत्र है तो वो केवल भारत में है
 
K.P.Chauhan
Feb 11 2010 12:02 AM
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महाराष्ट्र में जो हो रहा है क्या वो भी लोकतंत्र का हिस्सा है ?

मैं आप सभी ब्लोगेर्स और देश की जनता से पूछना चाहता हूँ की क्या जो सब कुछ बॉम्बे (महाराष्ट्र )में हो रहा है क्या वो हमारे लोकतंत्र को अधिक मजबूत बनाता है या दिन प्रितिदीन बड़े बड़े नेताओं के भाषणों ,धमकियों ,तोड़फोड़ या भाषाओं का सीखने या गैरमराठियों को
 
K.P.Chauhan
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एम् सी डी के लापता २२००० कर्मचारी

ये सुनकर अफ़सोस भी होता है और अचम्भा भी की हर माह इतनी मोटी तनखा लेकर भी एम् सी डी के २२००० कर्मचारी रातों रात कहाँ चले गए क्या उनको धरती खा गयी या हवा में उड़ गए शायद ही भारत के इतिहास में तो क्या भर्ष्टाचार का ऐसा उदाहरण सम्पूर्ण संसार के किसी भी
 
K.P.Chauhan
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वाह रे महंगाई तू कहाँ से आई

आज भारत का प्रत्येक व्यक्ति महंगाई की अभूतपूर्व मार से इतना त्रस्त है की उसकी कुछ बानगियाँ प्रदर्शित करना ज़रूरी हो गया है ताकि सरकार के कानों तक किसी तरह से पहुंचे और शायद सरकार के कानों पर जूं रेंगने लगें और उससे पीड़ित जनता का कुछ भला हो जाए पर होने
 
K.P.Chauhan
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जसवंत की किताब का भूत

जसवंत सिंह जी ने अपनी किताब का उदघाटन ऐसे वक्त में करवाया जब की भारतीय जनता पार्टी में चुनावी हार को लेकर आरोप प्र्त्याक्शारोप का दौर पहले से ही चल रहा है ,इस किताब मैं जिन्ना साहब की तारीफ़ ने पार्टी तोड़ में आग में घी का काम किया है ,हम ये नहीं समझ प
 
K.P.Chauhan
Dec 29 2009 11:50 AM
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लोकतंत्र में जूता या चप्पल तंत्र क्योँ ?

सम्पूर्ण मानव समाज के लिए ये बहुत ही शर्मसार सा विषय है की पहले अमेरिका के राष्ट्रपति मिस्टरबुश पर जूते का फेंका जाना और अब हमारे देश में उच्चतम न्यायालय के जज पर चप्पल का फेंका जाना एक अजीब दुर्घटना है इस घटना के लिए सम्पूर्ण विश्व समुदाय हतप्रभ और
 
K.P.Chauhan
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लोकतंत्र के रक्षक हैं या ?

एक बहुरूपिया धूर्त बेईमान असभ्य ,क्रूर सभ्य नागरिक की भाषा में अपने दुर्गुणों का बखान सदगुणों में प्रवर्त कर त्यागियौं जैसा बोध जनता जनार्दन पर अभिमंत्रित कर रहा है , शासन करने हेतु अपने लक्ष्य को मीन की नैन बना तन से श्याम मन से कलुषित इच्छाओं में स
 
K.P.Chauhan
Dec 29 2009 11:50 AM
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लोकतंत्र की रक्षा हेतु मुझे भी उम्मीदवार बनाएं

मैं के .पी .चौहान लोकतंत्र की रक्षा हेतु भारत वर्ष की सभी राजनितिक पार्टियों से प्रार्थना करता हूँ किवो मुझे अपनी पार्टी से उम्मीदवार घोषित करें पार्टी का चयन मैं स्वयम सत्यता या मेरिट के आधार पर करूंगा यह अधिकार सर्वथा सुरक्क्षित है जिस पर ऊँगली उठा
 
K.P.Chauhan
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होली की शुभकामनाएं

के .पी .चौहान के द्बारा सभी ब्लोगेर्स को होली की बहुत -बहुत सुभकामनाएँ ,होली मैया करे की हम और आप सभी ब्लोगेर्स को दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की देकर समर्ध्शाली बनाएं
 
K.P.Chauhan
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K.P.Chauhan
Oct 06 2009 10:37 AM
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महंगाई की मार से त्रस्त भारत का लोकतंत्र

अभी तक देश में चुनाव हुए बामुश्किल १०० दिन ही बीते होंगे परन्तु महंगाई ने अपना मक्कड़ जाल इस प्रकार फेला दिया है की कोई भी वस्तु अपने पहले के दामों से दुगुने दामों पर भी मुश्किल से मिल पा रही है और उसको भी वाही लोग ले पा रहे हैं जो की मालदार हैं यानि के
 
K.P.Chauhan
Sep 26 2009 06:57 PM
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मनमोहन उचाव

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने तारीख २५_८_०९ को सी ,बी ,आई ,और एंटी करप्सन के एक अधिवेशन में अधिकारियों को नेक सलाह दी की वो बड़ी बड़ी मछलियों पर हाथ डाले ,और अपने गिरहबान में भी झाँककर देंखे ,यद्यपि प्रधानमंत्री जी का सुझाव प्रंशसनीय है परन्तु
 
K.P.Chauhan
Aug 28 2009 11:27 AM
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भारतीय जनता पार्टी में हार के विश्लेषण के कारन खीझ ?

देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी "भारतीय जनता पार्टी "लोकसभा चुनावों में हार के कारण नहीं ढूंड पा रही ,उसके बड़े _बड़े दिग्गज नेता चाहे वो अध्यक्ष राजनाथ सिंह जी हों या एल के अडवानी अथवा दूसरे दिग्गज ,आख़िर क्योँ पता नहीं चल रहा उसका एक ही कारण है और वो
 
K.P.Chauhan
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१५वि लोकसभा चुनावों की पहली और बाद की दलगत स्थिति

चुनावों से पहले लगभग सभी छोटे बड़े दल ,कांग्रेस पार्टी को यकदम अछूत मानकर उसके साथ अजीब व्यवहार कर रहे थे और इस प्रकार अकड़ कर घूम रहे थे जैसे की कुत्ता छाछ पीकर फूलकर कुप्पा हो जाता है और सभी अपने आप को भावी प्रधानमन्त्री मान कर खुश हो रहे थे ,चलो क
 
K.P.Chauhan
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पी .एम् मनमोहन सिंह एवं के .एल .अडवानी पर भी जूता

आज अहमदाबाद में कांग्रेस की रैली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी पर एक सॉफ्ट इंजिनियर हितेश चोहन द्बारा जूता फेंका गया , और अहमदाबाद में ही भारतीय जनता पार्टी की रैली में क्रिशन लाल अडवानी पर भी एक साधू जिसका नाम बजरंग था जूता फैंका गया , यद्यपि यह ए
 
K.P.Chauhan
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चुनाव आयोग का फरमान (सम्पत्र्ती ब्यौरा देना जरुरी )

हमारे लोकतंत्र में एक अच्छी बात होनी शुरू हो गयी है की चुनाव में खड़े होने वाले प्रत्याशी को अपनी संपत्ति का एवं आय व्यय का बौरा देना जरूरी कर दिया गया है ,और लगभग सभी प्रत्याशी अपनी संपत्ति का ब्यौरा दे भी रहे हैं जिनमें काफ़ी लोग ऐसे हैं जो की करोड़
 
K.P.Chauhan
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जूते और चप्पलों की बरसात शुरू

जब एक शिक्षित स्त्री ने जज पर चप्पल फेंकी गई थी तो मैंने आशंका व्यक्त की थी किकहीं ये प्रचलन ना बन जाए ,वास्तव में ये ही होना शुरू हो गया ,जनता अपना संतुलन खो चुकी है और संस्कारों को भूल चुकी है क्योंकि नेताओं ,सरकारी अफसरों ,पुलिश सहित ,और सम्पूर्ण
 
K.P.Chauhan
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एक जूते का करिश्मा,लोकतंत्र में अद्भुत नजारा

पहले एक कहावत थी की एक तीर से दो शिकार परन्तु अब ये लोकोक्ति बदलनी पड़ेगी और कहा जायेगा की एक जूते से दो शिकार ,यानी के पहले तो श्रीमान जगदीश टाइटलर जी का ही टिकिट काटना था परन्तु अब तो श्रीमान सज्जनकुमार जी को भी टिकिट काटकर हाथ में थमा दिया ,आख़िर ऐ
 
K.P.Chauhan
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लोकतंत्र की रक्षा करनी है तो

८० से ८३ ,८५ ,या ९० वर्ष की आयु ,कानो से भली प्रकार सुनाई ना देना ,याददास्त का कमजोर हो जाना ,गले से आवाज का ना निकलना ,नाक से स्वांस लेने में परेशानी ,आंखों पर ३० नंबर का चश्मा चढ़ा हुआ ,हर्दय की बाई पास सर्जरी ,एक किडनी ख़राब ,गैस प्रोब्लम ,घुटनों
 
K.P.Chauhan
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भारत के लोकतंत्र में चप्पल के बाद जूता भी

अभी कुछ समय पहले एक न्यायाधीश पर एक शिक्षिका के द्बारा चप्पल फेंके जाने की घटना और आज गृहमंत्री श्री चिदम्बरम जी पर एक पत्रकार द्वारा जूता फेंका जाना वैसे तो हमारे देश के लिए बड़ी शर्म महसूस करने वाली बात है परन्तु सवाल ये उठता है कि कि ऐसी क्या परिस
 
K.P.Chauhan