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हँसते रहो हँसाते रहो

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12 Jun 2010
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अचानकमार (अमरकंटक) के घने जंगलों में गुप्त ब्लॉगर मीट

  ब्रेकिंग न्यूज़…ब्रेकिंग न्यूज़…ब्रेकिंग न्यूज़… अभी-अभी पुष्ट सूत्रों के जरिये प्राप्त खबर के अनुसार पता चला है कि हिन्दी के कुछ अज्ञात ब्लोगरों की मीटिंग इस समय ‘अचानकमार’(अमरकंटक) के घने जंगलों में चल रही है|… ऐसे बिना किसी पूर्व नोटिस के हो रही
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एक ग़ज़ल : लबों पर दुआएं ......

ग़ज़ल :लबों पर दुआएं..... लबों पर दुआएं , पलक पर नमी है बता ज़िन्दगी! अब तुझे क्या कमी है? हज़ारों मसाइल ,हज़ारों मसाइब मगर फिर भी ज़िन्दा यहाँ आदमी है मिरी मुफ़लिसी पे तरस खाने वालों तुम्हारा यह रोना फ़क़त मौसमी है हवादिस में जीना ,हवादिस में मरना ग़रीबों को क्या
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एक ग़ज़ल : जूनून-ए-इश्क में ......

जुनून-ए-इश्क़ में हमने न जाने क्या होगा ! हैं इतने बेख़ुदी में गुम कि हम को क्या पता होगा मैं अपने इज़्तिराब-ए-दिल को समझाता हूँ रह रह कर कि जितना चाहता हूँ वो भी उतना चाहता होगा हमें मालूम है नाकामी-ए-दिल, हसरत-ए-उल्फ़त हमें तो आख़िरी दम तक वफ़ा से वास्ता
May 22 2010 03:46 PM
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एक ग़ज़ल : यहाँ लोगों की आँखों में .....

ग़ज़ल : यहाँ लोगों की आँखों में....... यहाँ लोगों की आँखों में नमी मालूम होती है नदी इक दर्द की जैसे थमी मालूम होती है हज़ारों मर्तबा दिल खोल कर बातें कही अपनी मगर हर बार बातों में कमी मालूम होती है चलो रिश्ते पुराने फिर से अपने गर्म कर आएं दुबारा बर्फ की
May 15 2010 07:52 PM
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नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे वाले जोधपुर के सक्रिय ब्लॉगर श्री हरी शर्मा जी से माईक्रो मुलाकात …

  नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे वाले जोधपुर के सक्रिय  ब्लॉगर श्री हरी शर्मा जी से माईक्रो मुलाकात …माईक्रो इसलिए कि आने से ज्यादा उन्हें वापिस जाने की जल्दी थी ..वो कब आए?…और कब वापिस चले गए?…पता भी ना चला…अब इसे समयाभाव कहें या फिर द्वारका में किसी
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एक गीतिका : तुम भीड़ खरीदी देखे हो......

तुम भीड़ खरीदी देखे हो ,ज़ज्बात नहीं देखा होगा सत्ता की हिला दें बुनियादें ,उन्माद नहीं देखा होगा जो गरदन झुका के बैठे हैं ,वो बिके हुए दरबारी हैं आदर्शों पर मर-मिटने का उत्साह नहीं देखा होगा तुम भीख बाँटते फिरते हो वादे झू्ठे आश्वासन के खाली पेटों की आहों
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एक ग़ज़ल : रकीबों से क्या आप ....

एक ग़ज़ल : रक़ीबों से क्या...... रक़ीबों से क्या आप फ़रमा रहे हैं ! हमें देख कर और घबरा रहे हैं इलाही! मेरे यह अदा कौन सी है ! कि छुपते हुए भी नज़र आ रहे हैं उन्हें आईना क्या ज़रा सा दिखाया वो पत्थर उठाए इधर आ रहे हैं सुनाया जो उनको ग़मों का फ़साना वह झुझँला रहे
May 02 2010 11:54 AM
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एक अमीर का लेख गरीबी पर

एक अमीर लडकी को स्कूल में "गरीब परिवार " पर निबंध लिखने को कहा गया ।निबंध कुछ इस तरह लिखा उसने ..एक गरीब परिवार था ,    पिता गरीब,मां भी गरीब,बच्चे गरीब,परिवार में ४ नौकर थे , वो भी गरीब,कार भी टूटी हुई सफ़ारी थी उनकी,उनका गरीब ड्राईवर
 
अजय कुमार झा
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एक व्यंग्य : हरहुआ और टी०वी०

हरहुआ और टी०वी० किसी गाँव में, एक ज़मींदार साहब रहते थे।काफी लम्बी-चौड़ी ज़मींदारी थी।परन्तु जब से ज़मींदारी उन्मूलन अभियान शुरु हुआ तो उनकी ज़मींदारी ख़त्म हो गई और वह "बाबू-साहब" बन गए।ज़मींदारी तो ख़त्म हो गई परन्तु उनकी "कोठी" का "कोठापन" खत्म नहीं
Feb 21 2010 07:05 PM
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एक गीत : जिसने मुझे बनाया ..

जिसने मुझे बनाया ,उसका ही गीत गाया दरबारियों के आगे कभी सर नहीं झुकाया मिट्टी सा भुरभुरा तन किसके लिए सजाया यह कब रहा था अपना जो अब हुआ पराया पानी के बुलबुले पर तस्वीर ज़िन्दगी की किसने अभी उकेरा किसने अभी मिटाया इस दिल के आइने पर जो गर्द सी जमी है जब भी
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चेहरा छुपा दिया है हमने-40(अंतिम कड़ी)

दोस्तो...पिछली कड़ी में याने के पहेली नंबर 39  में दीपक 'मशाल' जी और समीरलाल जी ...दोनों ने सभी उत्तर सही दिए थे...इसलिए उन दोनों को ही पहेली नंबर 39 का पूर्ण विजेता घोषित किया जाता है दोस्तो...जैसा कि आप जानते हैं कि ये 'चेहरा छुपा लिया है हमने नकाब
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-39(बस एक आखिरी दिन और)

दोस्तो...बस एक आखिरी दिन और बचा है इस पहेली की समाप्ति में...तो मैंने सोचा कि क्यों न आज कि कड़ी को केवल महिला ब्लोगरों को समर्पित की जाए?...तो आईए...आज कि पहेली की तरफ चलने से पहले कल कि पहेली में शामिल ब्लॉगर साथियों के बारे में जान लें  
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-38(बस 2 दिन और)

दोस्तो...कल की पहेली याने कि पहेली नंबर 37 में शामिल ब्लॉगर साथियों के नाम इस प्रकार थे...   'अदा' जी ने 1 सही जवाब दिया Dipak 'Mashal'  जी ने 4 सही जवाब दिए Udan Tashtari जी ने सभी 6 जवाब एकदम सही दिए ...इसलिए समीरलाल जी को पहेली नंबर 37 का
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-37 (बस 3 दिन और)

दोस्तो.....आज की पहेली की तरफ चलने से पहले आइए हम चलते हैं कल की पहेली याने के पहेली नंबर 36 के परिणाम की तरफ...तो दोस्तो...कल की पहेली में शामिल ब्लॉगर बंधुओं के नाम इस प्रकार थे.....   AlbelaKhatri.com  जी ने इस बार 2 को पहचाना.....राज भाटिय़ा
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-36

दिन को चैन नहीं...रात को आराम नहीं... आ...खोल के कम्प्युटर देखेँ ज़रा पोस्ट पे टिप्पणियाँ मिली हैं या नहीं दोस्तो...मेरी इस पहेली का मकसद आप सभी ब्लॉगर साथियों का आपस में एक-दूसरे से परिचय करवाना था ...उम्मीद है कि अपने इस कार्य में मैं सफल भी हुआ
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-35

लीजिए मैं फिर हाज़िर हो गया आज की पहेली को लेकर ....लेकिन उससे पहले हम कल की पहेली याने के पहेली नंबर 34 के नतीजे के बारे में जान लेते हैं...तो दोस्तो...कल की पहेली में शामिल साथियों के नाम इस प्रकार हैं... रूपचंद्र शास्‍त्री जी श्री गिरीश पंकज जी श्री
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-34

आज की पहेली की तर्फ चलने से पहले आइए हम जान लेते हैं कल की पहेली याने के पहेली नंबर 33 के परिणाम के बारे में...तो दोस्तो...पहेली नंबर 33 में शामिल ब्लॉगर साथियों के नाम इस प्रकार हैं ....            दिनेशराय द्विवेदी जी ने 2
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-33

बचना ऐ ब्लोगरों ...लो मैं आ गया...फिर से एक नई पहेली को ले के... लेकिन उस से पहले आइए हम जान लेते हैं कल की पहेली याने के पहेली नंबर 32 के परिणाम को ...तो दोस्तो...कल की पहेली में में शामिल साथियों के नाम इस प्रकार थे ....      कल की पहेली
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-32

दोस्तो...जैसा कि मैंने कल कहा था कि अब से इस पहेली को कुछ समय के लिए साप्ताहिक से दैनिक किया जा रहा है तो..आज मैं आपके सामने फिर पेश हूँ फिर से एक नई पहेली को लेकर ...उम्मीद है कि आप इसमें बढ़-चढ़ कर भाग लेते हुए मेरी हौंसला अफजाई करेंगे...नई पहेली कि तरफ
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-31

ओ...बड़े दिनों में खुशी का दिन आया... ओ...बड़े दिनों में खुशी का दिन आया... आज मुझे कोई न रोके .. बतलाऊँ कैसे कि मैंने क्या पाया इस बार तो कमाल हो गया ...धमाल हो गया... आप सभी के सहयोग और उत्साह के चलते पिछली पहेली याने के पहेली नंबर तीन में एक नहीं...दो
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एक ग़ज़ल : आंधियों से न कोई गिला कीजिए ...

आँधियों से न कोई गिला कीजिएलौ दिए की बढ़ाते रहा कीजिएसर्द रिश्ते भी इक दिन पिघल जाएगीगुफ़्तगू का कोई सिलसिला कीजिएदर्द-ए-जानां भी है,रंज-ए-दौरां भी हैक्या ज़रूरी है ख़ुद फ़ैसला कीजिएमैं वफ़ा की दुहाई तो देता नहींआप जितनी भी चाहे जफ़ा कीजिएहमवतन आप हैं ,हमज़बां
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में –30

लो जी मैं आ गया फिर से एक नई पहेली ले कर लेकिन क्यूँ ना उस से पहले पिछले हफ्ते की पहेली याने के पहेली नंबर 29 के परिणाम के बारे में बात कर ली जाए?... तो पहेली नंबर 29 में इस बार फिर से मुझे एक नया विजेता मिल गया है ..वो भी आंशिक या अधूरा नहीं बल्कि पूर्ण
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एक गीत : जिसने मुझे बनाया ....

एक गीत : जिसने मुझे बनाया ........जिसने मुझे बनाया ,उसका ही गीत गायादरबारियों की आगे कभी सर नही झुकाया दुनिया ने मुझसे चाहा दिल वो ग़ज़ल सुनाए तिरी नील-झील आँखें दिल डूब -डूब जाए कैसे उन्हें भुला दूँ दो रोटियों के बदले मासूम नन्हीं बच्ची बाजार बेंच आएदो
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-29

          हुर्रे.... "ओ.....बड़े दिनों में खुशी का दिन आया ... आज मुझे कोई ना रोके बतलाऊँ कैसे कि मैँने क्या पाया... ओ.....बड़े दिनों में खुशी का दिन आया"... जी हाँ!...आज का दिन बड़ी खुशी का दिन है क्योंकि कई कोशिशों के
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एक स्वागत गीत : नववर्ष तुम्हारा अभिनन्दन .....

हे आशाओं के प्रथम दूत ! नव-वर्ष तुम्हारा अभिनन्दन सौभाग्य हमारा है इतना इस संधि-काल के साक्षी हैं जो बीता जैसा भी बीता पर स्वर्ण-काल आकांक्षी है यह भारत भूमि हमारी भगवन ! हो जाए कानन-नंदन नव-वर्ष तुम्हारा............ ले आशाओं की प्रथम किरण हम करें नए
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-28

ये क्या?..इतने ब्लॉगरों को एक साथ..एक जगह देख के आप चौंक गए?.... अरे भाई!..चौकिए मत...यहाँ कोई दंगा...या फसाद नहीं होने जा रहा है... इसलिए घबराईए मत...सरकार का हम चिट्ठाकारों पर 'रासुका' लगाने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता ... इन्हें तो यहाँ एक साथ आप
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-28

ये क्या?..इतने ब्लॉगरों को एक साथ..एक जगह देख के आप चौंक गए?.... अरे भाई!..चौकिए मत...यहाँ कोई दंगा...या फसाद नहीं होने जा रहा है... इसलिए घबराईए मत...सरकार का हम चिट्ठाकारों पर 'रासुका' लगाने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता ... इन्हें तो यहाँ एक साथ आप
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-27

लो जी मैँ आ गया फिर एक नई पहेली लेकर.....उससे पहले हम पिछली पहेली याने के पहेली नम्बर 26 के परिणाम के बारे में जान लें...पिछले रविवार को पहेली में मैँने आपसे छुपे हुए दस ब्लॉगरों के नाम पूछे थे.. लेकिन इस बार भी नतीजा वही..ढाक के तीन पात... किसी ने द
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एक व्यंग्य : अपना अपना दर्द....

एक व्यंग्य : अपना अपना दर्द.. " आइए ! आइए ! स्वागत है भई श्याम; बहुत दिनों बाद इधर आना हुआ"-वर्मा जी ने आगन्तुक का स्वागत करते हुए कहा । वर्मा जी ,सचिवालय में लिपिक हैं ,साहित्यिक रुचि रखते हैं,हिंदी में कविता ,कहानी ,उपन्यास आदि पढ़ते रहते हैं।यदा-कद
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-26

क्या होता जा रहा है हमारे ब्लॉगजगत के सूरमाओं को... सवाल पूछता हूँ मैँ ग्यारह तो कोई.. तीन...तो कोई चार...कोई पाँच...तो कोई ज़्यादा ही मेहनत करता हुआ सात...आठ...नौ सही जवाबों को बताने के बाद पतली गली से निकल लेता है... अरे भाई...एक दिन नहीं...दो दिन न
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एक गीत : मैं प्यार माँगता हूँ........

एक गीत : मैं प्यार माँगता हूँ...... मैं प्यार माँगता हूँ ,अधिकार माँगता हूँ ! जीवन के इस सफ़र में श्वासों के इस भँवर में टूटे हे सपन का श्रृंगार माँगता हूँ मैं प्यार माँगता हूँ........ आदर्श के सहारे लूटी गईं बहारें उजड़ी हुई गली का गुलजार माँगता हूँ म
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एक व्यंग्य : अथ लोमड़ी कथा .....

लोमडी ने ललचाई नज़रों से अंगूर देखा .मुंह में पानी भर आया और लार टपक गई .सोचने लग गई ....आहा! क्या रस भरे अंगूर होंगे...कितने मीठे होंगे...काश ! यह अंगूर अपने आप टपक जाता ...काश! यह अंगूर मैं तोड़ पाती...| यही सोच उसने दो-चार जोरदार छलाँग भी लगाईं .पर
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-25

चलो मेरी पहेली का एक फायदा तो हुआ कि जिन ब्लॉगरों को हम नहीं जानते थे..उनके चेहरे अब हम पहचानने लग गए हैँ... पिछले हफ्ते की पहेली में  मैँने कुल ग्यारह ब्लॉगरों के नाम पूछे थे... अधिकांश साथियों ने सही जवाब दिए...तीन ब्लॉगरों में मुख्यत: कांटे क
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एक कविता : श्वेत-पत्र पर खून के छींटे........

६ दिसम्बर,किसी भी वर्ष का एक सामान्य दिन,भारतीय राजनीति का का एक खास दिन,६-दिसम्बर -१९९२ ,बाबरी मस्जिद ढहाई गई, दो दिलों के बीच नफ़रत की दीवार उठाई गई.इस दिन को कोई शौर्य दिवस के रूप में मनायेगा,कोई पुरुषार्थ दिवस के रूप में ,कोई धिक्कार दिवस के रूप म
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एक व्यंग्य : तितलियाँ ज़िंदा हैं...........

एक व्यंग्य : तितलियाँ ज़िन्दा हैं.. जब से अस्थाना साहब इस विभाग में स्थानान्तरित होकर आये हैं काफी उदास रहते हैं।उदास रहने का कोई प्रत्यक्ष कारण तो नहीं था।फिर भी उन्हें अन्दर ही अन्दर कुछ न कुछ कमी महसूस होती थी।कहने को विभाग ने तो प्रोन्नति देकर यहा
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-24

लो जी...पिछला हफ्ता किस तरह बीत गया...पता ही ना चला...और अब मैँ फिर ले आया हूँ एक नई पहेली लेकिन उसकी तरफ बढने से पहले क्यों ना पिछले हफ्ते की पहेली में शामिल ब्लॉगरों के नाम जान लिए जाएँ?... ...तो पहेली नम्बर 23 में शामिल 10 ब्लॉगरों के नाम थे.... 1