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दिलीप के दिल से

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23 May 2010
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अद्बुत , अद्भुत और अद्भुत ... मुकुल शिवपुत्र - कुमार जी गंधर्व के पुत्र.

अभी कल ही दोपहर को इंदौर पहूंचा. पिछले दिनों काम के सिलसिले में इजिप्ट में था, कैरो और सुएज़ में जहां की मानव निर्मित बडी नहर प्रसिद्ध है.इन दो दिनों में बहुत कुछ हुआ.परसों रास्ते में अबु धाबी में दो तीन घंटे रुकना था, क्योंकि डायरेक्ट फ़्लाईट नहीं थी.
 
दिलीप कवठेकर
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सुर देवता मन्ना दा को जन्मदिन पर आदरांजली...

कडी १ये बात तो पक्के है, कि इतने दिनों गायब होने के बाद जब फ़िर से आपके संम्मुख आया हूं तो मुआफ़ी तो मांगना ज़रूरी है.कितनी बार आपसे वादे किये, अपने आप से कसमें खायी,ब्लोग जगत के मेरे सुरीले परिवार से प्यार और वफ़ा का वास्ता भी दिया, मगर फ़िर वही ढाक के
 
दिलीप कवठेकर
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साहिर की अंतरंग की पीडा़ का क्रंदन- जिन्हे नाज़ है हिंद पर वो कहां है..

साहिर लुधियानवीकडी़ २पिछली पोस्ट पर आपकी टिप्पणियों के लिये शुक्रिया अदा करता हूं, क्योंकि वह पोस्ट काफ़ी समय बाद लिखी गयी थी,और लगा था कि आप मुझे भूल गये होंगे. (ऐसे ये हक है आपको, मेरे बात और है, मैने तो मुहब्बत की है).मेरे मित्र OLD MONK नें फ़रमाया
 
दिलीप कवठेकर
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औरत नें जनम दिया मर्दों को.. साहिर की चुभती हुई रचना..

साहिर कडी १दो दिनों पहले ८ मार्च को अज़ीम शायर साहिर लुध्यानवी का जन्म दिन था. वह भी विश्व महिला दिवस के दिन!! क्या ये एक महज़ संयोग माना जाये या इसके पीछे विधाता का कोई डिज़ाईन है, कोई बडा़ मंतव्य है?शायद हां. आप साहिर के अश’आर सुनें ,पढे़, तो उसमें
 
दिलीप कवठेकर
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है दुनिया उसीकी,ज़माना उसीका... ओ पी नय्यर और रफ़ी का दर्द में दूबा हुआ एक कालजयी गीत

आज लगभग एक महिना होने आया, आपसे मुखातिब नहीं हो पाया. पिताजी की तबियत के कारण, काम में थोडा पिछड गया था. मूड भी नहीं बन पा रहा था. गोया कोई बडा़ उपन्यास लिखना था,जो मूड बना रहा था.इन दिनों, रफ़ी साहब का जन्म दिन चला गया २४ दिसंबर को. मैं संयोग से एक दिन
 
दिलीप कवठेकर
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मूसीकी़ की हसीन दुनिया में चमकता हुआ आफ़ताब - मोहम्मद रफ़ी

शमा - ए - रफ़ी के परवानों ....... आखिर फ़िर वही मनहूस ३१ जुलाई आ ही गयी. फ़िर वही मकाम आया है आज, जिससे गुज़रना हमारे दिलों पर फ़िर खंजर चलने से कम नहीं.आज ही के दिन हमारे मूसीकी़ की हसीन दुनिया में चमकता हुआ आफ़ताब गुल हो गया और छा गयी ऐसी तारीकी, कि आज त
 
दिलीप कवठेकर
Dec 29 2009 11:45 AM
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राज कपूर और शैलेंद्र... दोस्त दोस्त ना रहा...

मैं पिछले दो महिनों से इस दिन के लिये इंतेज़ार कर रहा था. यह दिन था १४ दिसंबर, जिस दिन हमारे हर दिल अज़ीज़ , फ़िल्म जगत के सबसे बडे , सर्व श्रेष्ठ शोमन राज कपूर का जन्म दिन था, और भावुक हृदय के , मानव संवेदनाओं को अचूक शब्दों और पद्य में ढालने वाले फ
 
दिलीप कवठेकर
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सुन मेरे बंधू रे, सुन मेरे मितवा, सुन मेरे साथी रे

सचिन्द्र देव बर्मन, ये नाम मेरी पिछली पोस्ट पर चमक रहा था. अब भी मेरे मन में घुला घुला सा, गुनगुनाया सा नाच रहा है. कुछ भी लिख दूं, उनके लिये अधूरा सा लगता है. और तो और, जब उनकी धुनों पर रचे गये गीत जब मैं गुनगुनाता हूं, तो वे खुद मुझमें परकाया प्रवे
 
दिलीप कवठेकर
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सचिन दा और मन्ना दा की जुगलबंदी - कव्वाली - किसनें चिलमन से मारा...

सचिन देव बर्मन एक ऐसा नाम है, जो हम जैसे सुरमई संगीत के दीवानों के दिल में अंदर तक जा बसा है. मेरा दावा है कि अगर आप और हम से यह पूछा जाये कि आप को सचिन दा के संगीतबद्ध किये गये गानों में किस मूड़ के, या किस Genre के गीत सबसे ज़्यादा पसंद है, तो आप क
 
दिलीप कवठेकर
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बिछोह की पीडा़ का टोटल रिकॊल - मदन मोहन का संगीत

अभी रविवार को दोपहर को टाईम्स नाऊ चेनल पर टोटल रिकॊल में संगीत सम्राट मदन मोहन पर यादों के झरोकों से उनके जीवन के अंतरंग क्षणों से और सुर संयोजन के अनेक पहलुओं से हमारा तार्रुफ़ करवाया गया, तो मेरे मन की खिडकियों से दिल का पंछी सुरमयी गगन में उड चला औ
 
दिलीप कवठेकर
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किशोर दा के कॊलेज जीवन के संस्मरण!- ये दिल ना होता बेचारा,कदम ना होते आवारा-

आपको शायद याद ही होगा कि हमारे हर दिल अज़ीज़ गायक शेहंशाह जनाब रफ़ी साहब की पुण्यतिथी ३१ जुलाई को मैने श्रद्धांजली के तौर पर एक विडीयो बनाया था --नाचे मन मोरा मगन तिकता धिगी धिगी.... (http://dilipkawathekar.blogspot.com/2009/07/blog-post_30.html) वह तो
 
दिलीप कवठेकर
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किशोर दा के साथ- कश्ती का खा़मोश सफ़र -

अभी परसों ही हमारे लाडले , मस्ताने ,ऒल राउंडर कलाकार , गायक किशोर दा की पुण्य तिथी थी. १३ अक्टूबर १९८७ को वे हमको दर्द भरा अफ़साना सुना कर हमेशा के लिये इस ज़िंदगी के सुहाने सफ़र को खत्म कर के कहीं दूर चले गये. दूर गगन के इस राही नें, इस मुसाफ़िर नें
 
दिलीप कवठेकर
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गुरुदत्त - एक संस्मरण -चौदहवीं का चांद

समय अभाव के कारण, पिछली पोस्ट थोडी देर से नश्र हुई, फ़िर एक दम संयोग से गुरुदत्त जी का स्मरण दिन आ गया. दोनों पोस्ट मिक्स हुई और बडी हो गयी. इसलिये उनका एक संस्मरण अब लिख रहा हूं, ११ ता. को , इसलिये क्षमा करें. आपनें पिछली पोस्ट पढी ही होगी.( चौदहवीं
 
दिलीप कवठेकर
Oct 14 2009 07:43 PM
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ए चौदहवी के चांद - सुहानी रात ढल चुकी है,, ना जाने तुम कब आओगे?

पिछला हफ़्ता बडा़ ही हट के गया. याने पिछले हफ़्ते एक शब्द चांद बार बार कानों पर पडा़, क्योंकि बात साफ़ है. पिछले हफ़्ते शरद पुर्णिमा की मदहोश रात थी. सुनते आये हैं, कि इस रात को चंद्रमा से अमृत बरसता है. लगता है सही है, क्योंकि, पिछले कई सालों से बिना ना
 
दिलीप कवठेकर
Oct 14 2009 07:43 PM
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लता मंगेशकर - संगीत से समाधि तक

आज स्वर कोकिला लता मंगेशकर का जन्म दिन है, और मन बडा ही गुले गुलज़ार हो रहा है, बौरा रहा है, क्या सुनूं, क्या सुनाऊं, कुछ भी समज़ नहीं आ रहा है. अभी कल ही जन्मदिन पूर्व संध्या को हमारे मित्र सुमन चौरसिया नें यहां प्रेस क्लब में लता जी का जन्म दिन मनाया
 
दिलीप कवठेकर
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’राग - ज़ेज़ स्टाईल ’ हिंदुस्तानी शास्त्रीय राग और पश्चिमी संगीत का फ़्युज़न - जयकिशन

इस चित्र को आप ज़रा गौर से देखें.नामवर संगीतकार जोडी शंकर जयकिशन में से एक जयकिशन डाह्याभाई पांचाल.....अभी पिछली १२ तारीख को आपकी पुण्यतिथी थी और हम सबनें उन्हे याद किया. वैसे पिछली ६ ता. को यहां मुंबई से आई एक फ़िल्मी संगीत को समर्पित एक ग्रुप आया था
 
दिलीप कवठेकर
Sep 26 2009 12:40 PM
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आशा भोंसले- स्वर्ग से उतरी एक स्वर किन्नरी...

पिछले दस दिन बस अस्पताल में गुज़रे. और साथ ही इंदौर में एक मेगा ईवेंट भी चल रहा था, जुनून.. सात सुरों का, जिसमें अन्नु कपूर नें इंदौर आकर करीब सौ गायक गायिकाओं में से २४ कलाकार चुनें, सुगम (फ़िल्मी), सूफ़ी और लोकगीत विधाओं में , और ता. ९ को यहां के बडे अभय
 
दिलीप कवठेकर
Sep 17 2009 04:08 PM
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ये कौन चित्रकार है? मुकेश जी और प्रकृति का चमत्कार !!

मुकेश - कडी २अभी दो दिन पहले ही मुंबई काम के सिलसिले में जाना हुआ.विघ्नहर्ता विनायक की स्थापना मुंबई के गली गली , कूचे कूचे में हुई नज़र आ रही थी. बडे बडे पांडाल, रोशनीयों की झप झप , झक पक, और एक दूसरे से होड लेती हुई भगवान गणपति देवा की बडी बडी ,दर्शनीय,
 
दिलीप कवठेकर
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Sep 06 2009 12:25 AM
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अपने अपने ग़म के फ़सानों का तसव्वूर - मुकेश के गीत ( पुण्य तिथी पर विशेष)

कल स्व. मुकेश जी की पुण्य तिथी थी. कल मैं पोस्ट नहीं लिख पाया.या यूं कहूं , मैंने नही लिखी. क्योंकि ऐसे स्मृति दिनों में मैं अक्सर अपने ड्राईंग रूम में अपने आपको बंद कर उस महान शख्सि़यत के गीत गाकर उसे अपने तहे दिल से शिराजे अकी़दत पेश करता हूं. रफ़ी साहब
 
दिलीप कवठेकर
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रफ़ी साहब और किशोरदा - प्यार का मौसम....

जैसे ये जो सावन का महिना चल रहा था, उसमें पवन के सोर करने के अलावा अन्य विशिष्ट रेखांकित करने जैसी बात ये है कि इस अगस्त में कई त्योहारों नें हमारे धार्मिक परिवेश में ,हमारी दिनचर्या को भक्तिरस और उल्ल्हास के रौनक भरे क्ष्णों से नवाज़ा है.जैसे रक्षा बंधन,
 
दिलीप कवठेकर
Aug 23 2009 02:19 AM
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कॊमेडी के बडे नवाब - मेहमूद

Mehmood is Dead…. आज से पांच साल पहले एक दिन सुबह हमेशा की तरह ऒफ़िस में मेल चेक करने रेडफ़मेल खोला ही था तो एक केप्शन नें ध्यान खींचा.. और दिल एकदम से बैठ गया. मेहमूद …  ये नाम मेरे लिये मात्र कोंमेडीयन या फ़िल्मी एक्टर नहीं था, मगर एक पूरा व्यक्तित्व
 
दिलीप कवठेकर
Jul 25 2009 07:51 PM
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मेरा सुंदर सपना बीत गया… गीता दत्त के जीवन का यथार्थ

गीता दत्त , या गीता रॊय…     एक अधूरी सी कविता , या बीच में रुक गयी फ़िल्म , जो अपने मंज़िल तक नहीं पहुंच पायी. क्या क्या बेहतरीन गीत गायें थे ..   दर्द भरे भाव, संवेदना भरे स्वर को अपनी मखमली मदहोश करने वाली आवाज़ के ज़रिये. गीता दत्त रॉय
 
दिलीप कवठेकर
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सुरों के शहेंशाह मदन मोहन- पुण्यतिथी…

सुरों के शहेंशाह मदन मोहन की आज ३४ वी पुण्यतिथी है. अपने सुरीले और मन मोहने वाली धुनों के खज़ाने लिये यह शहेंशाह हमसे मात्र अपने ५१ वे वर्ष में रुखसत हो गया. मगर कई संगीतकारों की तुलना में कम फ़िल्मों को संगीत देने वाले इस स्वर महर्षि नें फ़िल्मी गीतों
 
दिलीप कवठेकर
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उस्ताद अली अकबर खां – विनम्र श्रद्धांजली

पिछले दिनों संगीत के इस जाजम पर कुछ नही लिख पाया. यही कहूंगा कि संगीत पर लिखना या किसी बात पर भी अपनी राय देना तभी संभव है, जब आप मन से उसमे रमे हुए हो.  यह ब्लोग मैं अपने दिल की कलम से लिखता हूं, और पिछले दिनों उसकी स्याही जैसे सूख ही गयी थी. ख
 
दिलीप कवठेकर
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दिल का हाल सुने दिल वाला.. मन्ना दा के गीतों पर कार्यक्रम

मेरे आवाज़ की दुनिया के मित्रों, आज तक आप मेरे साथ यहां तक आये, संगीत के सुरों के शीतल बयार में हमने अपनी दिल की प्यास बुझायी उन सदाबहार हिंदी फ़िल्मी गीतों से. साथ ही आप हमखयाल हुए उन गीतों से जुडे हुए सृजनकार स्वर ऋषियों की जीवनी से, मेथडोलोजी और अलग
 
दिलीप कवठेकर
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तलत महमूद.. एक कोमल एहसास... दर्द की श्वेत श्याम तसवीर..

तलत महमूद, जब भी तलत मेहमूद ये नाम हमारे ज़ेहन में आता है, तो हमारे यादों की खिडकीयों पर दस्तक देते हैं उनकी मखमली आवाज़ के मोरपंखी एहसासात.हमारा प्यासा मन खुद ब खुद, सुरों की इन हसीन वादीयों से टकरा कर गूंजते हुए दर्द भरे नगमों के समंदर में डूब जाता ह
 
दिलीप कवठेकर
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शंकर जयकिशन, रफ़ी और मन्ना डे…

अभी आपने पिछली कडी में पढा़ था प्रसिद्ध संगीतकार जोडी के शंकर के जीवन की कुछ घटनाओं के बारे में … अभागे शंकर -(कृपया यहां पढे..) हमारे एक टिप्पणीकार नें यह लिखा था कि इसमें से एक घटना को उन्होने किसी साप्ताहिक में पढी थी. वे सही हैं. जो भी हम यहां लि
 
दिलीप कवठेकर
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अभागे शंकर

शंकर रामसिंग रघुवंशी... जब ये नाम मुझे बताया गया , तो मैं पहले समझ ही नही सका , कि ये उस अज़ीम और मकबूल शख्सियत का पूरा नाम है, जिसे आप और हम सभी फ़िल्मी संगीत की एक महान सफ़लतम जोडी शंकर - जयकिशन के एक स्तंभ के नाम से जानते है.जिसने चालीस के दशक के अंत
 
दिलीप कवठेकर
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चश्मे बद्दूर..

हसरत जयपुरी परसों थी सत्रह तारीख.17 सप्टेम्बर. करीब नौ साल पहले १७ तारीख सन १९९९ को प्रसिद्ध उर्दू शायर/कवि जनाब हसरत जयपुरी इन्तेकाल फ़रमा गये, और हिंदी फ़िल्मों के गीत संगीत के इतिहास में अपना नाम सुनहरे हर्फ़ों में दर्ज़ करा गये. उनके गीतों और जीवनी प
 
दिलीप कवठेकर
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भगवान श्री राम के जन्म दिवस के प्रमाण

पिछले अंक में राम नवमी के दिन मैने आपको श्री राम जन्म दिन की अचूक तारीख और उनसे संबंधित अन्य घटनाओं के भी दिन, वार और सन बताये थे. कृपया यहां पढें राम जन्म                
 
दिलीप कवठेकर
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आवाज़ की दुनिया - फ़िल्मी गीतों का सुरीला सफ़र

कभी कभी आप यूंही एक ऐसे जगह फ़ंस जाते हो, जहां आपको लगता है, कि ये कहां आ गये हम ? यूंही साथ साथ चलते.... और कभी कभी अनजाने में आप उस जगह पहुंच जाते हैं जो आपके लिये एक स्वर्ग की अनूभूति देती है. आज ही मुंबई से आया और अभी अभी देर शाम एक संगीत के विलक्
 
दिलीप कवठेकर
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गुरु दत्त , एक अशांत अधूरा कलाकार !

महान फिल्मकार गुरुदत्त की पुण्यतिथी पर एक विशेष प्रस्तुति अ कुछ दिनों पहले मैंने एक सूक्ति कहीं पढ़ी थी - To make simple thing complicated is commonplace. But ,to make complicated things awesomely simple is Creativity. गुरुदत्त की अज़ीम शख्सियत पर ये व
 
दिलीप कवठेकर
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अल्ला रक्खा रहमान के दिल से--- जय हो....शिवमणी.

इस बार फ़िर देर हो गयी, घर में शादी जो थी.मित्रों को भी यही समय मिला था. बस सब निपट चुका है, चार किलो वजन भी बढ गया है, और आज महाशिवरात्री के रोज़ का उपवास बडा सुकून भरा लग रहा है. आज की सबसे बडी खबर ये है कि ओस्कर में भारतीय विषय पर बनी फ़िल्मों में स्
 
दिलीप कवठेकर
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हीरे मोती जडे़ गहनों जैसे फ़िल्मी गीतों के बोल- NO EXPIRY DATE !! पं. नरेंद्र शर्मा-

अभी अभी कहीं ये बहस चल रही थी कि फ़िल्मी गीतों में गीतकार का क्या योगदान होता है. बेशक , हम जो भी गाने आज सुनते है, उनमें से अधिकांश में बोल तो सिर्फ़ सुरों को बांधने के लिये ही है. और तो और, जैसा कि स्वयं लताजी नें अभी अभी किसी इंटरव्यु में क्या सच कह
 
दिलीप कवठेकर
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दिलीप के दिल से

कडी़ - २ जब हम ओ पी नैय्यर के गानें सुनते हैं तो ये बात तो निर्विवाद सत्य है ही कि उनकी संगीत शैली, धुनों का Dynamics,सुरों के कोर्ड्स की विविधता, लय की मस्तानी चाल आदि अन्य संगीतकारों से एकदम हट के थी.साथ ही , हिंदुस्तानी तथा पाश्चात्य वाद्यों के मा
 
दिलीप कवठेकर
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बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया...

कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया, बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया.... आज अभी तक दिल ग़मगीन है, दो तीन दिनों पहले के घावों की टीस अभी तक मन से रिस रही है. जैसे जैसे और मुम्बई की घटनायें सामने आ रही है,उन अपनों के बारे में पता चल रहा है,जो पिछले दिन
 
दिलीप कवठेकर
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चैन से हमको कभी, आपने जीने ना दिया... ओ.पी.नय्यर ..

रिधम किंग - ओ.पी. नैय्यर , कडी़ - १ - कल उनकी पुण्य तिथी थी, २८ जनवरी को. अभी अभी दो साल ही तो हुए उन्हे हमसे बिछडे़. फ़िल्मी संगीत की सुरीली दुनिया में कई संगीतकार हुए, जिन्होने अपनी अपनी प्रतिभा के बल पर हम संगीत प्रेमीयों को दिये नायाब खज़ानों की शक
 
दिलीप कवठेकर