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अनौपचारिक

http://arkjesh.blogspot.com/
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16 Jun 2010
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बीते कुछ दिनों से लिए गए नोट्स

बादल हैं। धूप-छॉंह चल रही है। सुबह ज्‍यादा थे अब सघनता कम हो गई है । धूप निकल रही है । चार-पॉंच दिन की उमस भरी तेज गर्मी के बाद कल सुबह बारिश हो गई थी । तब से बादल छाए हुए हैं । शायद वे आसमान, चिलमिलाती धूप को सौंपकर फिर कुछ दिनों के लिए चले जाऍं ।
 
अर्कजेश
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लिखते-लिखते हमें कुत्‍ते की पूँछ क्‍यों याद आ जाया करती है

यह जो आप पढ रहे हैं यह लाइन सबसे अंत में लिखी गई है पहले हमें लगा इसे कोई श्रृंखला जैसा कोई नाम दे दें । फिर उसी चीज के एक दो तीन पढते पढते होने वाली ऊब के याद आने की वजह से एक शीर्षक दे दिया ।शीर्षक पर न जाऍं क्‍योंकि आपको पता ही है कि शीर्षक और पोस्‍ट
 
अर्कजेश
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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग सबसे ज्‍यादा पढी जाने वाली पोस्‍टों के प्रकार

हम ब्‍लॉगिंगनामा टैग के अंतर्गत ब्‍लॉगिंग से संबंधित पोस्‍टें जैसे -ब्लॉगिन्ग के कमेन्ट किलर या टिप्पणी हन्ता ! ( यह ब्‍लागिंग के शुरुआती दिनों की पोस्‍ट है )हिन्दी ब्लॉग्गिंग में टिप्पणी का महत्व , जॉनी....ब्लॉगिंग की भावना को समझो ! ! हिन्दी ब्लॉगिंग
 
अर्कजेश
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'मदर्स डे' का हल्‍ला

आज 'मदर्स डे' का हल्‍ला है । यह हल्‍ला हमें तब दिखाई पडा जब हम अपनी आदत के मुताबिकसुबह देर से सोकर जगे । अखबार में, एफएम रेडियो में, फिर जब इंटरनेट पर बैठे तो फेसबुक मेंब्‍लॉग्‍स में, हर तरफ मदर्स डे से संबंधित बातें दिखाई पडीं । इससे हमें पक्‍का यकीन हो
 
अर्कजेश
May 09 2010 06:23 PM
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यह कोई कविता नहीं है - 1 (आज भी )

आज भी,खबरें बनती हैंकुछ 'निरुपमा', 'आरुषी', 'सायमा'और पता नहीं कितनी गुमनाम जो नहीं बन पातीं 'खबर'आज भी,कहीं मार दिया जाता है याआत्‍महत्‍या कर लेता हैकोई नौजवान, कभीप्‍यार नाम की गलती करने परआज भी,पढा - लिखा अधकचरा वर्गसाधे हुए है, अपने दोगलेपन कोमहानता
 
अर्कजेश
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अपने विचारों के कंफेसन चेंबर में खड़े होकर अपना मुल्यांकन करिए ...

मित्रों ! प्रस्‍तुत है भारत के संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव रामजी अम्‍बेडकर की जयंती पर फेसबुक पर हुआ एक वार्तालाप । बातचीत की शुरुआत हुई फेसबुक पर लवली जी के इस स्‍टेटस से :-------यह पोस्ट पढ़िएउसने भिखारी से आठ आने का आटा खरीदा था | पास
 
अर्कजेश
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काली मलाई - एक अप्रायोगिक निष्‍कर्ष

ब्‍लॉगर बगलूचंद आराम की मुद्रा में बैठकर , नहीं, बल्कि पसरकर इंटरनेट लोक में घुसे ही थे , ऐसे जैसे कोई दिनभर के कामों से फुरसत पाकर शाम को अपने दोस्‍तों की महफिल - अड्डे में निठल्‍ले मूड में बैठा हो । महफिल जमने ही वाली थी । जाल के कुछ पन्‍ने खुल गए थे
 
अर्कजेश
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मूर्ख बनने से बचने के १०१ तरीके

एक मूर्ख को भी, मूर्ख बने रहने के लिए सतत अपनी मूर्खता साबित करनी होती है----------------========== Continuing to remain a silly, fool has to prove his stupidityयह १०२ वाँ तरीका था
 
अर्कजेश
टैग: मजाक
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'विवाह' पर ओशो के विचार - देखिए सुनिए सरल अँग्रेजी में

फेसबुक से मिला यह मुझे । संवादघर के मालिक संजय ग्रोवर जी के स्‍टेटस पर । आप भी आनंद लीजिए, धैर्य के साथ औ' कौनौ गलत कहें होंय तौ बताओ .....
 
अर्कजेश
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बाघ बचाओ अभियान का समर्थन आप इस तरह भी कर सक‍ते हैं

अब बाघों की संख्‍या केवल 1411 रह गई है ।इसलिए अपने किसी भी प्रयास को छोटा मत समझिये ।ट्विटर और फेसबुक के लिंक पर जाकर और वहॉं फालो करके आप इस काम की शुरुआत कर सकते हैं ।ट्विटर पर , SaveOurTigersसेव अवर टाइगर का अनुसरण (Follow) करके । अब तक इसके 5096
 
अर्कजेश
Mar 06 2010 03:43 AM
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बुरा न मानो होली है - सब मोनालिसाऍं भोली हैं

बुरा न मानो होली है - मेरी बातें भोली हैं - सब अपने हमजोली हैं !पहचान कौन ?
 
अर्कजेश
टैग: होली
Feb 28 2010 03:24 PM
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कृष्‍ण की धरती पर वेलेंटाइन आए

कृष्‍ण कन्‍हैया अपनी भारत भूमि पर प्रेम के इजहार के इस वेलेंटाइन दिन को देखकर मुस्‍कुरा रहे थे । कृष्‍ण की आदत है मुस्‍कुराने की मुस्‍कुराते ही रहते हैं । रुक्‍मणी ने सोचा कि लगता है इन्‍हें अपने पुराने दिन याद आ रहे हैं । कुहनी मारते हुए बोलीं कि क्‍या
 
अर्कजेश
Feb 27 2010 07:58 PM
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देखिए एक जादू .......खुद की रिस्‍क पर

१ विश्रांत हो जाइए और इस चित्र के बीच में बने हुए चार बिंदुओं को एकाग्रता से 30-40 सेकंड तक दे‍खते रहिए । 2 अब अपनी पास की की दीवाल या किसी चिकनी सतह (जो कि एक ही रंग की हो ) पर देखिए । 3 आपको प्रकाश का एक गोला बनता हुआ दिखाई पडेगा । 4 अब आप अपनी ऑंखें
 
अर्कजेश
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चलो, चुप हो जाऍं

चलो,चुप हो जाऍं, कुछ दिनों के लिएजैसे,चुप हो जाते हैं दो अनन्‍य मित्रसहनशीलता की आखिरी सीमाआने से पहले ,बिना एक-दूसरे को नुकसान पहुँचाएकरते रहते हैं, अपना कामसाझे मिशन के लिएसदाशयता से ,कभी मिल जाने के लिएजैसे,मॉं-बाप पूरे करते रहते हैं अपना
 
अर्कजेश
टैग: कविता
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अ‍ाखिरी कश की बकवास

जब मैं वहॉं पहुँचा तो चेन स्‍मोकर की उँगलियों में सुलगती हुई आखिरी सिगरेट बुझ चुकी थी । मुझे देखते ही उसने दो उँगलियों में फंसे हुए सिगरेट के समाप्‍त प्राय छोटे से टुकडे को मुँह में लगाते हुए एक अ‍ाखिरी कश लेने की कोशिश की , इस बात से बेखबर कि वहॉं अब
 
अर्कजेश
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पंक्तियों के समूह को कह देता हूँ, कविता

मुझे,पता नहीं हैकैसे, लिख देता हूँचंद पंक्तियां, कभीअचानक ही,उन पंक्तियों के समूह कोकह देता हूँ, कविताब्‍लॉग पोस्‍ट के लेबल परचिप्पियॉं या टैग मेंजबकि,मुझे पता है,मैं नहीं लिख सकताकोशिश करके भी,वह सबजो मैंने लिखी हैं,अनायास ही किसी पल में,किसी भाव दशा
 
अर्कजेश
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संबंध - खुशियों की चाबी खुद की जेब में रखें

"मुझे याद आता है कि जब मैं एक छोटी सी लडकी थी , मेरी मॉं हमारे लिए नाश्‍ता और रात का खाना बनाया करती थी । एक दिन की घटना मुझे खासतौर पर याद आती है जब मॉं ने एक पहाड जैसे दिन में कठोर थकाने वाला श्रम करने के बाद घर आकर हमारे लिए रात का खाना बनाया था । कई
 
अर्कजेश
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3 ईडियट्स बनाम फाइव प्‍वाइंट समवन

कल मैंने फिल्‍म 3 ईडियटस देखी । इसके पहले हाल ही में चेतन भगत का उपन्‍यास फाइव प्‍वाइंट समवन पढा था ।यह उपन्‍यास एक फुल टाइम पास है, वैसी ही फिल्‍म भी है । आप कहीं भी बोर नहीं होंगे । फर्क इतना है कि किताब सच्‍चाई के ज्‍यादा करीब है । चेतन भगत अद्भुत
 
अर्कजेश
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रस्म -ए- ब्‍लॉगिंग भी है - नया साल भी है !

एक साल पूरा होने संबंधित कुछ ब्‍लॉग पोस्‍टों को देखकर याद आया कि हमने भी पिछले वर्ष दिसंबर महीने से ही हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग शुरु की थी । पिछली पोस्‍ट की पिछली पोस्‍ट में हमने इसका जिक्र भी किया था । इस पेशकश के साथ कि इस पोस्‍ट की साइज को नियंत्रित करने
 
अर्कजेश
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बीतता हुआ वर्ष !

समय की एक इकाई 'वर्ष' ! महसूस होता है सशरीर पूरी पूर्णता में जब, बीतना शुरू होता है उसका आखिरी महीना और महीने का आखिरी दिन | अनायास ही मन लगाता है हिसाब पूरे साल का साल के आखिरी दिन साल में हैं महीने और वह भी पूरे बारह महीने भी दिखाई पड़ते हैं विदा के
 
अर्कजेश
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क्रिसमस की बधाई - Merry Christmas

पहले क्रिसमस की बधाई दे दें, इसके बाद अपनी ब्‍लॉगिंग के एक साल पूरा होने की गप्‍पालॉजी शुरु करें । ईशु का जन्‍म हमारे समय के हिसाब वर्ष‍ , दिन और तारीखों की गिनती से जुडा हुआ है । आज ईसवी संवत ही अंतर्राष्‍ट्रीय प्रयोग में है । तो लीजिए आप सभी को क्र
 
अर्कजेश
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काल्पनिक दोस्त को एक काल्पनिक पत्र

अप्रिय , नाराज दोस्‍त , मैं चाहता हूँ कि बनावटी भाषा का प्रयोग न करुं और तुम्‍हें याद करुं । इसलिए यह पत्र लिख रहा हूं । यदि तुम्‍हे लगे कि इस पत्र में कोई बात झूठ है या पूरा पत्र ही काल्‍पनिक है या मैं यह सब तुम्‍हे चिढाने के लिए लिख रहा हूं तो तुम
 
अर्कजेश
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ब्‍लॉगिंग माहात्‍म्‍य - कुंडलियां , भाग- 1

पहली बार कुण्डलियाँ लिखे हैं ! यह काका 'हाथरसी' को समर्पित है ! काका हाथरसी को स्कूली दिनों में पढ़े थे ! पता नहीं कैसे अचानक याद आ गए ! रस्‍ते में कल मिल गए, ब्‍लॉगर बगलूचंद नमस्‍कार तो कर लिए, और बोलती बंद और बोलती बंद, तुम अपना हाल सुनाओ ब्‍लागिंग
 
अर्कजेश
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आदमी एक संवेदनशील प्राणी है .............खुद के लिए

कुछ लिखना चाहा कुछ लिख नहीं पाया । कुछ अधूरा सा लिखा कुछ पूरा नही हुआ । कोई टिप्‍पणी नहीं की किसी ब्‍लॉग पर । ब्‍लाग पढे बस । नई पोस्‍ट का आना जरूरी है । कुछ नहीं तो पुरानी पोस्‍ट हटाने के लिए ही । नई पोस्‍ट के लिए मुददा चाहिए , कोई बहाना चाहिए । हो
 
अर्कजेश
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याद करते नहीं फिर भी चीखने लगती हैं कुछ तारीखें जैस 6 दिसंबर

समय के साथ त्रासदी दिवस बढते जा रहे हैं देश में । अभी 26/11, 3/12, और आज 6 दिसबंर । वैसे तो रोज ही त्रा‍सदियॉं होती हैं, रोजमर्रा के जीवन में दुर्घटनाऍं , आपराधिक गतिविधयॉं, आतंकवादी घटनाएँ । लेकिन जब समाज के सफोदपोश लोग , देश के नेतृत्‍वकर्ता अपने ह
 
अर्कजेश
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एड्स : एस नई सुबह की ओर !

रात्रि का अंतिम पहर बीत रहा था । रात और पूरे कमरे में अंधकार का एकछत्र राज् ‍ य कायम था । जीरो वाट का छोटा सा लाल बल् ‍ ब अपनी पूरी ताकत से कमरे को रोशन करने का प्रयास कर रहा था । छत पर लगे हुए पंखे की पंखियॉं अपनी परिधि में लगातार अनगिनत चक् ‍ कर लग
 
अर्कजेश
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भाषा में छिपे हुए भाव

बडा कौतूहल होता है देखकर जब प्‍यार और नफरत उपेक्षा और अपनत्‍व अस्‍वीकार और सहानभूति की भाषा बेजुबान पशु पक्षी और अबोध नवजात भी समझ जाते हैं , तत्‍क्षण | वे भी, जिनका भाषा और सभ्‍यता से कोई सरोकार नहीं होता | वे भी, जिन्‍हें इनकी आदत पड गई है सदियों स
 
अर्कजेश
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सचिन, 26/11, स्काई लैब और माया

इन दिनों सचिन का बयान, की उन्‍हें मराठी होने पर गर्व है , लेकिल मुम्‍बई पूरे भारत की है काफी चर्चित रहा । आज शिवसेना के एक और सांसद का बयान आने से मामला फिर से रिफ्रेश हो गया है । इसमें सांसद ने कहा है कि सचिन ने मराठीवासियों के लिए कुछ नहीं किया है
 
अर्कजेश
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बात सच है, पर चलन में है नहीं

बात सच है, पर चलन में है नहीं आपकी बातें सहन में हैं नहीं बात कैसे बोल दी तुमने यहॉं बात जो अपने जेहन में है नहीं बात करते ही रहो हर बात पर आपात तो अपने वतन में है नहीं बात हमसे ऑंकडों की न करो एक भी संख्‍या फलन में है नहीं बात पूछेगी तुम्‍ही से जान
 
अर्कजेश
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इन बच्चों का दिवस कब आयेगा भारत देश में

क्या हवाई मुद्दों पर लड़ने वालों को कुछ शर्म आएगी ? चित्र : गूगल और ईमेल से प्राप्त
 
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बहुत हो गया अब देखिए तरह तरह की मोनालिसा

मोनालिसा मोरक्को में --------------------------------------- मोनालिसा लन्दन में ------------------------------------------------ मोनालिसा इराक में ----------------------------------------------- मोनालिसा मिस्र में ------------------------------------
 
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तो इसमें कौन सी नई बात है भाई

खबर : हिन्‍दी में शपथ लेते हुए सांसद अबू आजिमी की मनसे सांसदों द्वारा पिटाई । तो इसमें कौन सी नई बात है भाई हिन्‍दी की वजह से तो होती ही रहती है पिटाई अभी सांसद की हो गई इसके पहले मजदूरों, कामवालों, और छात्रों की हूई थी ऐसी ही पिटाई ये तो दो-चार हाथ
 
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चीथडों के गठ्ठर फ़ेंको

पता नहीं कैसे रहते हैं लोग आज भी लादे हुए सतत चीथडों का गठ्ठर जिसे कभी खोल कर नहीं देखा गया कि क्या है उसके अन्दर पता नहीं कितनी सडी हुई चीजें हैं उनमें जो मारती रहती हैं सडांध वक्त-बेवक्त तब छिडक देते हैं उनके ऊपर गुलाब जल और इत्र सुंदर शब्दों और व्
 
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फ़ूल में भी मगरूरी रही होगी

फ़ूल में भी मगरूरी रही होगी पत्थर की भी मजबूरी रही होगी पछता न सके लडकर भी जब रिश्तों में बहुत दूरी रही होगी बात की है अब तक तो क्या दिमागी कुछ कमजोरी रही होगी पूछे नहीं हम कहां थे अब तक फ़िक्र ये गैर - जरूरी रही होगी समझ आई तो क्या आई उनको ये किस्मत ह
 
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लो ! हम भी एक ठो पोस्ट कबाड लिए इलाहाबाद ब्लॉगर गोष्ठी के नाम पर

इलाहाबाद ब्लॉगर गोष्ठी से एक बात तो जाहिरा तौर पर हालिया हजामत / फ़ेसिअल प्राप्त मुंह की तरह साफ़ हो गई है कि एक ब्लॉगर और कुछ बर्दाश्त करे या नहीं इ बर्दाश्त नहीं कर सकता कि कोई उसे ब्लॉगिंग की तमीज सिखाने की कोशिश करता नजर आए । चाहे वह ब्लॉगिंग का
 
अर्कजेश
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आदमी की फ़ितरतें बदली नहीं हैं देखिए

आदमी की फ़ितरतें बदली नहीं हैं देखिए कौन है जो कह सके कर ली तरक्की देखिए राम औ’ रहमान दोनों हैं बहुत अमनो पसन्द’ जिक्र-ए-मजहब हो कहीं, उनकी शराफ़त देखिए स्वर्ण कंगूरे कलश तो देखिए ही, साथ में नंगे पुजारी और अधनंगे भिखारी देखिए उम्रभर लडते रहे जिसकी रिह
 
अर्कजेश
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पावर की प्रॉब्लम

पावर है तो सब कुछ है पावर नहीं है तो सब कुछ भी कुछ ना होने के बराबर है । पावर के शाब्दिक अर्थ तो बहुत हैं पर अर्थ जो ध्वनित होता है एक ही है - ताकत, शक्ति । इस ताकत को प्राण या जान भी कहा गया है । जिसे अभी भी विग्यान को समझना बाकी है । जब पावर माने ब
 
अर्कजेश
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छोटा सा दीपक है बडा पैगाम है !

क्यों सूरज की राह तकें चंदा से क्यों भरमायें अन्धकार को क्यों कोसें हम इक दीप जलायें । दीपक हमें सिखाता चलना घटाटोप अंधियारे में दीपक एक दिलासा भी है जीवन दुख के गलियारे में, खुद के दीपक बन जायें छोटा सा दीपक है बडा पैगाम है रोशनी के लिये जलना ही दीप
 
अर्कजेश
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जहां सुमति तहं संपति नाना

एक बार किसी गांव में रामचरिमानस पाठ का आयोजन किया गया । जोर - शोर से लय में उतार - चढाव के साथ रामायण गायी गयी । सभी संबंधित भगवान जी लोगों की जै और भक्त समाज की जै जयकार करने के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ । बातचीत के दौरान एक पन्डित जी भाव विभोर होकर
 
अर्कजेश
Oct 14 2009 07:43 PM
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तेरा होना सदा है कविता सा....

फ़िर तुम्हारा ख्याल आने लगा दिल कोई गीत गुनगुनाने लगा एक बहुत खूब शायरी पढकर क्यों मैं शायर से मिलने जाने लगा कितने नाजुक हैं ये नये रिश्ते देखकर फ़ूल शर्माने लगा अब तो बातों में भी है खामोशी शायद अपना पडाव आने लगा तेरा होना सदा है कविता सा मैं अपनी
 
अर्कजेश