satyadev tripathi's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
22 Apr 2010
कुल प्रविष्टियां
28
पाठक भेजे
2029
पसंद
20
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
72.46
पसंद करें
3
नापसंद करें

किसके लिए जीते हैं...

मेरी बडी बिटिया जब नन्हीं-सी थी, कोई भी सामान लाते, तो छोटी बहन व भाइयों को दे देती थी। हम कहीं जाते, तो उन दोनो को एक मिनट भी न छोडती - माँ जैसी ‘केयर’ करती। आज वो बडे पद पर काम करती है। आठ-नौ लाख का सालाना पैकेज पाती है। 10-12 लाख का पैकेज दामाद पाता
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi

पुराने फॉर्मूलों को खींचतानकर बनी ‘महबूबा’ का क्या हो...? सफ़ाई देखिए कि करन (अजय देवगन) सपने में लडकी को देखता है और उसे पेंटिग्स में हू-ब-हू उतार लेता है !! स्टुडियो (सॉरी, बैठक है) भर रखा है.। फिर कमाल देखिए कि वह लडकी उसी शहर में है। तब मह्बूबा-मह
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi

लव स्टोरी- 2050 हैरी बावेजा लिखित-निर्देशित फिल्म ‘लवस्टोरी-2050’ में सना (प्रियंका चोपडा) व करन (हरमन बावेजा) को देखते हुए आधी फिल्म तक यही लगा कि 2050 का प्यार भी वही पहली नज़र वाला ही होगा- बिना किसी कारण व तर्क के...। फिर लडकी के पास बडा अच्छा घर
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

समा गया थोडे-से प्यार में ज्यादा-सा जादू

थोडा मैजिक थोडा प्यार’ यूँ तो बच्चों की फिल्म है और बच्चों के लिए काफ़ी मज़ेदार भी है, पर उसकी शुरुआत होती है- फ़िल्म के नायक, बडे नामी बिजनेसमैन रनवीर तलवार (सैफ़ अली ख़ान) के गुस्से (न जाने क्यों?) व उसकी कार के हादसे से, जिसमें एक दम्पति की मृत्यु हो ज
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

दे ताली

ताल ठोंकते-ठोंकते... हो गयी ‘दे ताली’... एक लडकी मम्मो (आयशा टाकिया) और दो लडके - पगलू (रीतेश देशमुख) व अभि (आफ़्ताब शिवदासानी)...लेकिन ‘एक फूल दो माली’ नहीं.. वैसे साँचे अब नहीं रहे - न जीवन में, न फिल्म में। आफ़्ताब तो हर दिन एक लडकी को दिल दे बैठता
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरे बाप पहले आप्

हास्य के साथ ‘कुछ और’ की खिचडी - काफ़ी फ़ीकी... यदि सिनेमा हाल में घुसते हुए प्रियदर्शन (लेखक-निर्देशक) मिल जायें, तो आप यही कहके उन्हें आगे कर सकते हैं- पहले आप। फिर दोनो पूरे तीन घंटे (हॉय, सम्पादित क्यों न किया या..र) बैठ पायें, तो निकलते हुए पूछिए
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi: माँ इसे देवी कहती... (समापन किस्त...)

माँ इसे देवी कहती... (समापन किस्त...) प्रियवर बेनामजी, आशीर्वचनों के लिए बारम्बार शुक्रिया...! कहीं बहुत गहरे चुभी होगी देवी, तभी अपनी असलियत के साथ प्रकट हुए आप...। आप को लगी चोट के लिए खेद सहित - स.त्रि.
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi: cinema

अनाम महोदय, सही श्लोक भी लिख ही देते ! ग़लती किससे नहीं होती ? स. त्रि.
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

cinema

सरकार राज’ की ‘सरकारी’ के सबब.... रामगोपाल वर्मा की ‘सरकार’ में एक व्यापारिक प्रकल्प को रोकने में सुभाष नागरे (अमिताभ बच्चन) घायल होते हैं। बेटा शंकर नागरे (अभिषेक बच्च्न) उन सबको मार डालता है। अब इस ‘सरकार राज’ में एक बिजली उत्पाद योजना को लगाने में
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अरे, जा रे ज़माना

तीसरी कसम’ का गँवई नायक हीरामन बात-बात पर कहता है- ‘अरे जा रे ज़माना’...। आज कदम-कदम पर हमारा भी मन जमाने के लिए यही कहता है... ...अभी चार दिन पहले की बात है- हमारी बगल वाली बिल्डिंग में एक 58 वर्षीय आदमी को दिल का दौरा पडा। वह एक कॉलेज में प्राध्यापक
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

हँसते हँसते

हँसते-हँसते’ में बैठना ‘फँसते-फँसते’ बन गया....” ‘हँसते-हँसते’ जैसा नाम...व कलाकारों में राजपाल यादव। हास्य-विनोद का अन्दाज़ हुआ था। और यही सबसे बडे धोखे निकले। न फिल्म में कुछ हँसते-हँसते होता, न एक बार भी हँसी आती। हँसाने के नाम पर बाप-बेटे-चाच की त
 
satyadev tripathi
टैग: सिनमा
पसंद करें
0
नापसंद करें

- धूम धडाका

हास्य का अभिनय और अभिनय का हास्य... जो बाबा ने अपने ‘मानस’ के बारे में विनम्रता वश कहा था - ‘भनिति मोर सब गुन रहित, बिस्व बिदित गुन एक’, वही कठोर सत्य है - शशि रंजन लिखित-निर्देशित फिल्म ‘धूम धडाका’ का। बाबा में वह सत्य है -‘ एहि महँ रघुपति नाम उदारा
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

‘जन्नत’ का रास्ता - ईमाँ या कुफ़्र...?

जन्नत’ का रास्ता - ईमाँ या कुफ़्र...? चचा ग़ालिब के ज़माने में शायद यह द्वन्द्व जिन्दा था, जब उन्होंने लिखा था - ‘ईमाँ मुझे रोके है, खैंचे है मुझे क़ुफ़्र...’, लेकिन आज वह बात नहीं रही - क़ुफ़्र का जलजला तारी है... और ईमाँ की बेसिक समझ ही नदारद हो गयी है...
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

भूतनाथ - भूत को देवदूत बनाता है आदमी

सिनेमा- भूतनाथ भूत को देवदूत बनाता है आदमी ... जी हाँ, बी.आर. चोपडा बैनर की फिल्म ‘भूतनाथ’ यही बताती है (इसलिए नाम देखकर इसे डरावनी वग़ैरह वाली फिल्म न समझें)। गोवा के एक भूत बँगले, जिसमें टैक्सी वाले व नौकर-चाकर तक नहीं आते, में रहने आये परिवार की मा
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

माँ इसे देवी कहती... (समापन किस्त...)

माँ इसे देवी कहती... (समापन किस्त...) इस तरह देवी इतना बाहर रहने लगी कि घर के लिए ही पहुनिया हो गयी। कहीं रुकने पर फोन करना भी बन्द हो गया। इसे लेकर कभी किसी बात पर मेरी पत्नी के मुँह से निकल गया - ‘जीजी का इतना बाहर रहना ठीक तो नहीं है...’ और माँ ने
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

माँ इसे देवी कहती ...! दूसरी किस्त

माँ इसे देवी कहती ...! दूसरी किस्त देवी की पढाई भी रंग लाने लगी। उसने बी. ए. पास किया - युनिवर्सिटी में टॉप करके । अब तो पास-पडोस व नात-हित ने भी मान लिया कि देवी में कुछ तो खास है...। वरना जब से वह ससुराल से लौटी थी, किसी को भी उसके लिए अन्दर से सहा
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

माँ इसे ‘देवी’ कहती... !!

माँ इसे ‘देवी’ कहती... !! - सत्यदेव त्रिपाठी पहली किस्त- अचानक चाल में जोरों का झगडा शुरू हुआ....और अपनी आदत के मुताबिक देवी वहाँ पहुंच गयी। मैं अकेला रह गया कमरे में...। आजकल यूं भी देवी कम ही मिलती है घर पर। सहित्य- कला आदि के तमाम कामों में बिज़ी ह
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi

हबीब तनवीर को एक श्रद्धांजलि भारतीय रंगकर्म से भारतीयता का जाना ... - सत्यदेव त्रिपाठी - हबीब तनवीर का जाना अनपेक्षित न था, पर 8जून, 2009 को यह ख़बर एक आघात की तरह लगी। मन से उठी ‘हाय’ शब्दों में यूँ निकली – ‘आज भारतीय रंगकर्म से भारतीयता चली गयी...’।
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

संवेदनाएं प्रैक्टिकल हो रही हैं...!!

कल एम.ए.-द्वितीय वर्ष की मौखिकी (वाइवा) चल रही थी... एक लडकी आयी। चल नहीं पा रही थी। थोडी देर में अपनी साथी प्राध्यापिकाओं की बातों से समझ में आ गया कि गर्भवती है। ऐसे में मैं हर स्त्री के चेहरे पर ‘कामायनी’ के श्रद्धा वाले वर्णन का सच जाँचने लगता हू
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi

एक संवेदना का आत्ममंथन... महानगर में एक शराफ़त का जनाज़ा... 20 जुलाई की सुबह ही सुबह सात-साढे सात बजे फोन की घंटी बजी। सर्द-सी आवाज - ‘भाई साहब, बुरी ख़बर है- राजेन्द्र पाण्डेय का निधन हो गया। गोरेगाँव पूर्व के ‘स्पर्श’ अस्पताल में’। मैं सहसा अवसन्न...क
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi

सिंग इज़ किंग...नाम में क्या नहीं है...! अनीस बज़्मी को अंग्रेजी नामों का खासा मोह है। ‘नो एंट्री’, ‘वेलकम’ को तो हिन्दी में कह सकते थे, पर ‘सिग इज़ किंग’ को तो हिन्दी में ढालना भी कठिन है, पर है इतना सरल कि अंग्रेजी लगता नहीं। तभी तो सिगों की कुछ ट्रको
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi

तमाचे और एक चुम्बन की ‘अगली और पगली’ ... सचिन खोत की फ़न्नी, पर अच्छा ‘टाइमपास’ फिल्म ‘अगली और पगली’ के अंत में पर्दे पर लिखा पाया जाता है - ‘99 स्लैप्स ऐण्ड वन किस’। पूरी फिल्म हम देखते रहे थे कि बात बात पर या बिना बात बात की बात पर हिरोइन मल्लिका शे
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi

इस्तानबुल का मिशन टाँय-टाँय फ़िस्स अपूर्व लखिया को लगा कि ‘शूट आउट’ को मिशन और ‘लोखंड्वाला’ को ‘इस्तानबुल’ कर देंगे, तो एक और हिट बन जायेगी; पर भूल गये कि वह एक वारदात थी, जिसके निशानात लोगों की जेहन में थे। सो, लोग गये देखने। और जैसा कि हर घटना के पी
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें

satyadev tripathi

अकेलेदम आतंकवाद को खत्म करने का ‘कॉंट्रैक्ट’ ... रामगोपाल वर्मा का नया हीरो आतंकवाद को खत्म करने का ‘कॉंट्रैक्ट’ लेता है और यह फिल्म का ही कमाल है कि वो ऐसा कर देता है - दो गैंगों का सफ़ाया...वरना तो इस बात में कोई माल नहीं है, यह रागोव को भी मालूम है
 
satyadev tripathi
Dec 29 2009 11:54 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

गडे मुर्दे क्यों उखाडे जायें ‘बालिका वधू’ में... ??

हमारा महानगर’ (17 जुलाई, 09) में ‘बालिका वधू’ पर संसद में उठे सवाल को लेकर अलका आश्लेषाजी का आलेख पढने को मिला। धारावाहिक को अलका जी ने ‘सामाजिक जागृति का सकारात्मक रूप’, ‘बाल-विवाह के विरोध में एक सार्थक कोशिश’ ‘इस कुप्रथा की समस्याओं को सुलझाने’ व
 
satyadev tripathi
पसंद करें
0
नापसंद करें