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कठपुतली

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16 Jun 2010
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मानवीय त्रासदी की इन्तहा - -

कडकडाती ठण्ड में चाय का प्याला अँगुलियों के बीच थामकर चुस्कियां लेना अभी शुरू ही किया था कि अख़बार पर नज़र टिक गई , मुंह खुला रह गया , सीने से हूक सी उठी , कुछ भीतर ही भीतर बैठ गया सा लगा , दौड़कर माँ के पास गई , माँ !! देखा आपने , भोपाल में गैस लीक हो
 
Renu Sharma
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आवाज नहीं आती ---

माँ , के आँगन से विदा होकर आई थी , तब , सोचती थी , माँ , बाबा हर वख्त रमा- रमा चीखते रहते हैं , मेरे जाने के बाद इनकी आदत कैसे बदल पायेगी ? घर में इतने लोग हैं , पुन्नी है ,सोनू है , पीकल है फिर भी माँ , हर काम के लिए मुझे ही आवाज लगाती है कभी -कभी माँ
 
Renu Sharma
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कैसे होती है गुप्तचरी !!

हमारे धर्मग्रन्थों से लेकर सम्पूर्ण पृथ्वी का साहित्य गुप्तचरों के कारनामों की रोचक कहानियों से भरा हुआ है . हम अक्सर पढ़ते रहते हैं कि व्यक्ति ने देश के साथ गद्दारी की , फलां व्यक्ति गुप्चारी करते पकड़ा गया  या पकड़ी गई ,यह कोई आज की बात नहीं है ,
 
Renu Sharma
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विवाह पूर्व का रहन -शयन

हमारे देश में कुछ बातें शिगूफा की तरह उछलती हैं और धीरे -धीरे पूरे समाज में फ़ैल जाती हैं , पहले -पहल तो कोई यकीन ही नहीं करता कि ऐसा भी होता है क्या ? लेकिन हम लोग उस विषय पर इतनी चर्चा कर लेते हैं कि सब कुछ मामूली सा लगता है |अब , हम बात कर रहें कि
 
Renu Sharma
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शक्ति का उपहास

आज हम पत्रिकाओं , समाचार -पत्रों और न्यूज चैनलों पर चिल्ला -चिल्ला कर जिस महिला शक्ति का बखान कर रहे हैं , वह एक ढकोसले के अलावा कुछ नहीं है , अगर , नहीं छापेंगे या बोलेंगे तो बयार के साथ बहेंगे कैसे ? पचासों भारतीय महिलाओं के कारनामों को कागजों पर चस्पा
 
Renu Sharma
Mar 08 2010 11:39 AM
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बाई का बजट

श्यामा , आज जल्दी आ गई , सुबह की चाय बनाती जा रही थी और कह रही थी बाई सा !! आज सरकार बजट दे रही है , क्या पता , क्या निकालेगी ? क्यों , तुम इतनी चिंतित क्यों हो रही हो ? बाई सा !! चिंतित क्यों न होऊं ? पिछले बरस सरकार ने कहा था - हर आदमी को कपड़ा ,
 
Renu Sharma
Mar 05 2010 06:39 PM
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लो , बीत गया , दहशत का साल

हर बार नव वर्ष आता है , दुनियां भर के मानव खुशियाँ मनाते हैं . नए साल के डूबते सूरज का सम्मान कराते हुए , उगते हुए भास्कर का अभिनन्दन अपने -अपने तरीके से सभी कर लेते हैं . बीते बरस की गई गलतियों से शायद तौबा भी करते हैं , भविष्य की सुनहरी योजनाओं की
 
Renu Sharma
Mar 05 2010 06:07 PM
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राजनीति के तरकश से , शब्दों के तीखे बाण

कहा जाता है , जब व्यक्ति शिक्षित और साक्षर हो जाता है तब , सोचने समझने की क्षमता बढ़ जाती है . अज्ञानता का अंधकार मिट जाता है लेकिन कुछ भारतीय नेताओं को देखकर तो ऐसा नहीं लगता बल्कि उनका विवेक पतन की ओर जाता दीख पड़ता है . ऐसा लगता है , पढ़ा -लिखा
 
Renu Sharma
Feb 23 2010 06:35 PM
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बजट का बाजा

जब , पास की दुकान से चने -चिढ्वा लेने जाती थी , तब , पच्चीस पैसे से लेकर पचास पैसे तक हर बच्चा अपनी ख्वाहिश पूरी कर पाता था . वह समय कुछ और था , उस समय विज्ञानं उतना विकसित नहीं हुआ था . गाँव के लोगों का शहरी लोगों से रिश्ता यदा -कदा ही हो पाता था . यह ,
 
Renu Sharma
Feb 17 2010 04:03 PM
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उत्कोच !! उत्कोच !!

आचार्य कौटिल्य को जब पढ़ रही थी , तब उत्कोच शब्द जादा समझ आया था . उस काल के उत्कोची लोगों और उत्कोच के तरीकों पर निगाह रखना शुरू कर दिया , लेकिन आज तो उत्कोच की परिभाषा ही बदल गई ,क्योंकि कोच की जगह तो अब बिस्तर ने ले ली है . भारतीय प्रशासनिक सेवा में
 
Renu Sharma
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इतिहास मत दुहराओ

हमारे देश में शिक्षा का पहला पाठ बताया जाता है कि - सदा सच बोलो , कभी झूंठ मत बोलो , चोरी मत करो , सम्पूर्ण विश्व को अपने कुटुंब की तरह देखो आदि न जाने कितनी बातें । माँ के आँचल से लेकर स्कूल , कॉलेज तक इन्हीं संस्कारों पर अमल करने का प्रयास किया जात
 
Renu Sharma
Dec 29 2009 11:44 AM
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एक उम्र के बाद ....

सुनयना !! देखो तो , ट्रेन रुक गई है , हाँ , यहाँ तो जंगल नज़र आ रहा है , तभी पीछे वाली बोगी से पकडो -पकडो की आवाज आने लगी , लाइन के किनारे किसी के भागने की आवाज भी आ रही है , उत्तमा !! ऐसा लगता है किसी को पकड़ कर धुना जा रहा है , मुझे लगता है जरूर कुछ
 
Renu Sharma
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राजनीति का प्रवेशद्वार रैगिंग

सदियों से पढने और सुनने को मिल रहा है कि रैगिंग करने के बहाने सीनियर छात्र जूनियर को मारपीट कर निजी काम व कॉलेज का काम करवाया करते थे । छोटों पर अपनी धाक ज़माने का तरीका यही था । जूनियर से सम्मान करवाने के लिए इतना मारते थे कि बंद डर के मारे जूते पोलि
 
Renu Sharma
Dec 29 2009 11:44 AM
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ढोर , गंवार , गरीब और नारी , सकल ताड़ना के अधिकारी . ??

अपराध हमारे समाज से सत्व की तरह ही जुड़ा है , इसे मिटाया नहीं जा सकता , लेकिन कम अवश्य किया जा सकता है . हजारों बरस पहले विद्वान लेखकों ने राम चरित मानस में लिखाकर अमर कर दिया कि- ढोर ,गंवार , शूद्र [ गरीब ] और नारी सकल ताड़ना के अधिकारी . उस समय के
 
Renu Sharma
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वेश्यावृत्ति मंजूर !! तो , होगा सुधार

हमारी पृथ्वी पर सामाजिक व्यवस्था को इसलिए लागू किया गया था , क्योंकि औरत , धन और जमीन इन तीन संपदाओं को खुलेआम लूटा जा रहा था . छोटे -छोटे लड़ाकू कबीले एक बड़ा समूह बनाकर धरती के बड़े हिस्से पर मारकाट , लूटपाट और तोड़फोड़  मचा रहे थे , भारत भी इ
 
Renu Sharma
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शत शत नमन

शहीदों की कतारें इतनी लम्बी होती जा रही हैं कि हम पुराने शहीदों को भुलाकर नए शहीदों कि यादों में ही दिए जलाते जा रहे हैं . हमारी आँखों की कोरें सूख भी नहीं पातीं हैं कि कुछ नया घाट जाता है . हम अभी तक नहीं भूले हैं , देश की सरहदों पर नव -जवानों का शह
 
Renu Sharma
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भेद का भाव

हमारी रगों में भेद का भाव धरोहर सा विकसित होता रहता है . गाँव के बड़े घर में जब दादी घर के लोगों को खाना परोसती थी , तब , आधी थाली दाल- साग से भरी होती थी , दाल पूरी थाली में न फैले तो , चाचा , थाली के नीचे एक किनारे कंडे का टुकड़ा या लकड़ी का टुकड़ा
 
Renu Sharma
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भाषाई तमाशा

कहा जाता है कि जब विपत्ति आती है ,तब , बुद्धि , विवेक , सब किनारा कर जाते हैं . व्यक्ति बिना सोचे - समझे कार्य करता है . यही बात महाराष्ट्र की राजनीति में देखने को मिल रही है . बाप -दादों की बरसों की मेहनत को पानी में बहा दिया है , उनके मुंह पर कालिख
 
Renu Sharma
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अगले जनम मोहे कुत्ता ही कीजो ..

कुत्ता पूरी पृथ्वी का प्रिय जानवर है , हर घर में एक पिल्ला जो देशी या विदेशी कैसा भी हो , पतली  चेन से बंधा मिल जाता है , दरवाजे के बाहर लिखा मिल जाता है , कुत्तों से सावधान !!! अब , उनसे पूछो , कौन से कुत्ते से क्योंकि जो वफादार है ,वह तो काटेग
 
Renu Sharma
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उठो देव , अब , आँखें खोलो ..

नमस्कार स्वामी जी !! आप जब सो रहे थे , बहुत कुछ अच्छा तो नही हुआ हाँ , भारतीय खिलाड़ी खेल जीत गए , हमारी राष्ट्रपति विदेश भ्रमण पर निकल गईं और न जाने क्या -क्या होता रहा , आप जब घोर निद्रा मैं थे , तब ही शायद लक्ष्मी जी आईं और लाडलों के घरों पर दस्तक
 
Renu Sharma
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चौथ का चाँद

सदियों से सुनते आ रहे हैं कि चाँद हमारे धर्म ग्रन्थों, की कथा सरिता में , जड़े गए बहुमूल्य रत्न की तरह चमकता एक तारा तो , है ही , साथ ही हमारे पृथ्वी ग्रह के मानवों और जीव -जंतुओं के लिए दैनिक जरूरतों का खजाना भी है । जब रात अपने चरम पर होती है ,तब जी
 
Renu Sharma
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पलायन

सबेरा हो गया था , हम एक बस्ती के पास पहुँच गए ,वहां शानो ने पानी पीया , बच्चों ने रोटी खायी और आगे चल दिए । सब डरे हुए थे ,कोई किसी से बात नही करना चाहता था , न जाने इन्सान के रूप में क्या निकल आए ? अभी करीब आठ किलोमीटर ही चले थे कि सड़क के किनारे एक
 
Renu Sharma
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पलायन

अभी तक कोई नही जानता था कि बुनेर भी कोई जगह है , जहाँ जिन्दा इन्सान रहते हैं , जबसे पाकिस्तानी अफसरों ने आतंकी लोगों के नाम पर सबको निशाना बनाना शुरू किया है , हजारों लोगों की सांसें थम गईं हैं । हमने क्या बिगाडा ? जैसे -तैसे काम करके जीवन यापन कर रहे थे
 
Renu Sharma
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भ्रष्टाचार तलाश कर बताओ !!!

कोई राजनेता , मंत्री या श्रेष्ठ शासकीय अधिकारी यह कह दे कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करना चाहिए तो, यह वही बात होगी कि सुबह के नास्ते से ऑमलेट हटा दो , दोपहर के खाने से बटर हटा दो और रात के खाने से दही हटा दो । बस हो गया । यार !! कह किससे रहे हो , करके दिखाओ न
 
Renu Sharma
Sep 15 2009 02:15 PM
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विकारों से पनपते गे ..

जब हम मनोविज्ञान की बात करते हैं , तब मनोवैज्ञानिक असमानता की बात भी आती है जो सामान्य से इतर होती है । असमान्यता के हजारों कारण दिए जा सकते हैं , उन्हीं में जिक्र आता है बाल अपराध का , जो बच्चे विशेष रूप से स्कूल नही जाते या झुग्गी -बस्ती में रहने वाले
 
Renu Sharma
Sep 14 2009 06:27 PM
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दर्द

संसार चक्र की नियति है , इंसान जन्म लेता है , किशोर ,युवा , प्रोण और फ़िर वृद्ध हो कभी शतायु हो , कभी अल्पायु हो इस जीवन भ्रम को जीता हुआ मुक्त हो जाता है और कभी फ़िर से इस पृथ्वी लोक में जन्म ले भवसागर पार करने का प्रयास करता है ।हम सभी लोग युवा होते
 
Renu Sharma
Sep 13 2009 06:57 PM
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एक उम्र के बाद ....

उत्तमा !! अंधेरे उजाले की बात मत करो , मुझे डर लगता है । देखो तो , लोग चलते -चलते ही गिर पड़ते हैं । अरे !! कैसी बात करती हो बिना चले ही गिर सकते हैं । गिरने के लिए कुछ करने की जरूरत नही है बस , विचारों के गिरते ही सब कुछ गिरने लगता है । हाँ , तुम ठीक
 
Renu Sharma
Aug 22 2009 02:39 PM
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विभाजन

विभाजन की बात चलती है तब , हम भारत-पाक के बीच की कडूआहट , तकरार , मतभेद , आरोप -प्रत्यारोप , नीति -कूटनीति ,धोखा -फरेव और न जाने क्या -क्या लांछन लगाकर चर्चा करने लगते हैं । हमारे बुजुर्ग बीसवीं सदी की इस बर्बरतापूर्ण विरासत के बंटवारे को महाकाव्य के रूप
 
Renu Sharma
Aug 13 2009 05:17 PM
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एक उम्र के बाद ...

सुनयना मुझे याद है , उस दिन में लोकल में थी , घर जाने की जल्दी हो रही थी क्योंकि बेटी का जन्म दिन था , उसने कहा था -माँ !! केक लेकर आना , मैने ऑफिस के सामने वाली बेकारी से केक लिया और स्टेशन की ओर दौड़ गई । सात बज रहा था , भीड़ थी , हम अधिकांश लोग रोज
 
Renu Sharma
Aug 10 2009 03:15 PM
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एक उम्र के बाद ....

एक बार मैं ऊँची पहाडी पर बने देव स्थान पर गई , सुना था ईश्वर ऊपर रहता है , चलो देखें कितना ऊपर रहता है । हजार से अधिक सीडियां चढ़कर अथक परिश्रम के बाद ऊपर पहुँची तो , असीम आन्नद की अनुभूति हुई । मन्दिर प्रांगण में अपार उर्जा का भण्डार था , हम घूमते हुए
 
Renu Sharma
Jul 25 2009 02:42 PM
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एक उम्र के बाद ....

आसमान पर बादल घिरते आ रहे हैं , कहीं काली घटायें जमघट लगाकर विकराल रूप धारण कर रही हैं , कहीं आपस में झगड़ कर दूर हुए बच्चों की तरह सफ़ेद चमकीले बादल श्वेत कपास से इधर -उधर बिखर रहे हैं । दूर पहाडी पर मेघ बरस रहे हैं , पहाड़ और ऊँचा होता जा रहा है , ब
 
Renu Sharma
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वात्स्यायन आओ न !!

सदियों पूर्व शिक्षा के क्षेत्र में आचार्य वात्स्यायन ने यौन शिक्षा पर आधारित अपना महान ग्रन्थ " काम शास्त्र " समाज को समर्पित कर एक नया अध्याय शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में जोड़ दिया था । आचार्य वात्स्यायन के बारे में पता चलता है कि वे एक महर्षि थे
 
Renu Sharma
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घर से बाहर तक " बलात्कार "

आज कल गैंग रेप बहुत चर्चा में है , एक हफ्ते में ही कहीं न कहीं से ख़बर मिल जाती है इस खुरापात की । हमारी सरकारें सैक्स शिक्षा पर लगातार जोर दे रही हैं , क्या पढाया जाय , क्या नहीं इस पर किसी की तवज्जो नही है । वैसे ऐसा नही लगता , बिना शैक्षिक ज्ञान क
 
Renu Sharma
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चाँद आहें भरेगा .....

सुना है नासा के वैज्ञानिक पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर चाँद मामा के पीछे पड़े हुए हैं । अभी तक तो , चाँद का वार्तालाप मौन ही चल रहा था । हमारी कल्पनाओं मैं वह कभी प्रेमी , कभी धोखेबाज , कभी मनुहार सुनने वाला , कभी सहायक , कभी जज बनता नज़र आत
 
Renu Sharma
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महाप्रयाण से भयभीत न हों

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युध्रुवं जन्ममृतस्य च । तस्माद परिहयेअर्थे न त्वं शोचितुमहर्सी । । श्री मदभगवद्गीता में श्री कृष्ण कहते हैं कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित है और मृत्यु प्राप्त करने वाले का जन्म निश्चित है । तो हे अर्जुन !! तुम व्यर्थ की बात
 
Renu Sharma
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नमन करना सीखो

बड़े अदब से कह लेते हैं कि आज के युग में स्त्री पुरुषों में कोई भेद नही , कंधे से कन्धा मिलाकर आगे चल रहे हैं । मजदूर से लेकर शासन सत्ता तक यही कर्म चलता भी है । क्या , औरत हर जगह पूरे मान -सम्मान के साथ स्थापित है ? यह प्रश्न हर दिन उठता है । हम घर
 
Renu Sharma
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चौपट शिक्षा पद्धति

शिक्षा पद्धति से नाराजगी को लेकर हजारों बार लोगों ने कलम चलाई है और हर बार मुंह की खाई है । जब हम विज्ञानं का विकास कर रहे हैं , नित नए हैण्ड सैट बाजार में ला रहे हैं जो सबसे अधिक विद्यार्थी ही स्तेमाल करते हैं , फ़िर क्या वजह है कि हमारी सरकार ज्ञानी
 
Renu Sharma
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सिंहासन छत्तीसी

सिंहासन पर आरुड होने से पूर्व की हजारों रोचक घटनाएँ हम कहानियों में सुनते आ रहे हैं । कैसे कोई वीर योद्धा , शासक या बहादुर अपने प्रयासों की शक्ति को एकत्र कर कुर्सी पाने के लिए संघर्ष करता है । और जब , सिंहासन पर आरुड हो जाता है तब , उसके सामने क्या
 
Renu Sharma
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लीतरे की मार ----- .

आज -कल जहाँ देखो वहां लीतरे की मारा -मारी है । होनी भी चाहिए । कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनके लिए कहावतें भी बनी हैं - लातों के भूत , बातों से नही मानते । इसी तरह जूते के भूत भी , बातों से नही मानते । उनके लिए लीतरे की मार जादा शुभ कही जा सकती है । जूता
 
Renu Sharma
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ओजोन का घाव

दुनिया भर में कोहराम मचा है , हमारा पर्यावरण गरम हो रहा है । दुनिया मानो सूर्य की ओर सरक रही है । ग्लोवल वार्मिंग को लेकर विश्वभर के लोग लाखों करोंडों का धन सिर्फ़ मीटिंग करने में ही खर्च कर रहे हैं । जिन तथ्यों को संचार माध्यम से देखा जा सकता है , उ
 
Renu Sharma