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साईब्लाग [sciblog]

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08 Jun 2010
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आईये मनोविज्ञान और व्यवहार शास्त्र के फर्क को समझें!

मनोविज्ञान मानव व्यवहार का अध्ययन है-फ्रायड,कार्ल जुंग  से लेकर पैवलाव तक की व्याख्याओं से इसकी पीठिका तैयार हुई है ...किन्तु उत्तरोत्तर यह विचार बल पाने लगा कि चूंकि मनुष्य एक लम्बे जैवीय विकास का प्रतिफल रहा है अतः उसका अध्ययन एकदम से 'आइसोलेशन '
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जिन्हें आपके सहानुभूति की दरकार है!

इन दिनों पेटा- 'पीपल फार द एथिकल ट्रीटमेंट्स ऑफ़ एनिमल्स ' जीव जंतुओं के प्रति मानवीय सहानुभूति को जुटाने में एक रायशुमारी में लागा हुआ है -मेरे पास  भी उनकी चिट्ठी आई है .दुनिया भर में वैज्ञानिक प्रयोगों के नाम पर  ,सौन्दर्य प्रसाधनों की जाँच
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विधाता का धंधा किया बन्दे ने मंदा :क्रैग वेंटर ने प्रयोगशाला में बनाया संश्लेषित जीवाणु -....

 मनुष्य ने एक बार फिर विधाता को ललकार दिया है ...भले  ही कहते हों कि कर्ता का मन  कुछ और है विधना का कुछ और ..मगर आदमी भी कहाँ मानने वाला जीव है ....क्रैग वेंटर और उनकी टीम ने वर्षों की लगन के बाद आखिर प्रयोगशाला में एक संश्लेषित जीवन को
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एक करामाती गोली के हुए पचास साल.....एक चिट्ठी भावी निरुपाय निरुपमाओं के नाम ....!

मारग्रेट सैंगर  -गर्भ निरोध आन्दोलन की जन्मदाता गर्भ निरोधक गोली के पचास साल इसी ९ मई को पूरे हो गए ....इनोविड नाम था उस पहली गर्भ निरोधक गोली का जिसे अमेरिका के फ़ूड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन ने ९ मई १९६० को हरी झंडी दिखाई थी ....यह एक क्रांतिकारी
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हमारे मिथकों में जो नारायणाश्त्र और ब्रह्माश्त्र चलने के वर्णनं हैं वे कहीं........

ईजाफज्जल्लाजोकुल्ल नामक ज्वालामुखी के चलते जो हाय तोबा मची हुई है वह उन ज्वालामुखियो के आगे कुछ भी नहीं है जिनसे मानव प्रजाति के अस्तित्व के सामने ही संकट उत्पन्न हो गया था -कुछ सौ वर्षों पहले १७८३ में लाकी नामक एक ज्वालामुखी ने यूरोप में ही भयानक तबाही
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ज्वालामुखी के धुएं ने मचाया कुहराम -सभी यूरोपीय उड़ाने रद्द!

आईसलैंड एक  ज्वालामुखी ईजाफज्जल्लाजोकुल्ल   (Eyjafjallajokull) -(अजीब नाम है,लगता है अल्लाह का सबसे प्यारा ज्वालामुखी  है !) के फटने से कई यूरोपीय देश इससे निकलने वाले गर्द गुबार (ऐश -धुयें ) में डूब गए हैं -जिससे हवाई यातायात की कमर ही
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कौतूहल का फंडा बना तोते का अंडा !

ताज्जुब की बात है आज दो खबरों में तोते को पिजरे में ही अंडा देने का समाचार सुर्ख़ियों में है और दोनों अलग अलग जगहों से ...एक खबर बनारस से है तो दूसरी समस्तीपुर बिहार से ....और दोनों ही दैनिक जागरण में ....अमूमन भारतीय तोते पिजरों में अंडे नहीं देते जो कि
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मदमस्त मिलन इक ऐसा हो जाये....चाह न मिलने की कोई रह जाए

 मदमस्त मिलन इक ऐसा हो जाये , शुक्राणु कोष आजीवन मिल जाए  ,  चाह न मिलने की कोई रह जाए .....न न यह कोई कविता नहीं बल्कि एक हकीकत है कितनी ही चीटियों, मधुमक्खियों ,ततैयों और दीमकों का सेक्स जीवन ऐसा ही होता है .इन कीट परिवारों की मादाएं बस
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दुनियाँ जहाँ नर गर्भ धारण करते हैं !

बोलो गर ऐसा हो तो क्या हो ? नर गर्भ धारण करने लगें और नारियां इस दायित्व से मुक्त हो जायं ? जीव जगत में पहले से ही कुछ ऐसे रोचक उदाहरण है जहाँ पहले से ही यह वाकया वजूद में आ चुका है -हाँ यह बहुत  दुर्लभ है और केवल समुद्री घोड़ो ,पाईप  मछली और
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बैंक के खाते -लाकर अब खुलेगें घर घर आकर

घर घर तक जाकर रुपयों  के लेन देन की और लघु वित्तीयन को बढ़ावा देने के लिए सूचना और कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी की नई पेशकश का नाम है -फिनो -फायिनेशिअल इन्फार्मेशन नेटवर्क एंड आपरेशन लिमिटेड -जिसकी शुरुआत अब सूदूर ग्रामीण अंचलों में भी हो चुकी है .आम
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क्या सचमुच महिलायें एक बेहतर अन्तरिक्ष यात्री बन सकती हैं?

सांद्रा  मैग्नस जो एक महिला अन्तरिक्ष यात्री रही हैं के अंतिरक्ष से की गयी ब्लागिंग पर हमने कुछ समय पहले लिखा था .एक खबर चीन से है जिसने महिला अन्तरिक्ष यात्री के चुनाव की घोषणा की है .चीन के समानव अन्तरिक्ष अभियान के डिप्टी कमांडर झेंन 
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नर नारी समानता का आख़िरी पाठ

हमने अभी तक देखा कि गुफाकाल से ही नर नारी के कार्य विभाजनों में फर्क के बावजूद भी उनके बीच सामाजिक स्तर का कोई  फर्क नहीं था बल्कि पुरुषों की तुलना में नारियां एक समय में एक  साथ ही कई कामों का कुशलता से संचालन करती थीं और उनकी यह क्षमता
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नर नारी समानता का अगला पाठ

हमने नर नारी समानता के कतिपय मूलभूत समाज जैविकीय पहलुओं को पिछले दिनों जांचा परखा .अब आगे . पश्चिम से शुरू हुए नारीवादी आंदोलनों के बाद /बावजूद आज भी सारी दुनिया के कई हिस्सों में नारी पुरुष की " प्रापर्टी " और उससे निम्न दर्जे की मानी जाती है -और यह
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नर नारी समानता का दूसरा पाठ!

कल हमने बात की थी कि वयस्क पुरुष व्यवहार  जहाँ आज भी बचपन की मासूमियत और जोखिम उठाने की विशेषताये लिए हुए है वहीं वयस्क नारी आकृति  बाल्य साम्य अपनाए हुए है! नारी आकृति और पुरुष की आकृति में एक बड़ा फर्क प्राचीन वैकासिक काल से ही रहा है
Mar 05 2010 07:56 AM
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नर -नारी समान तो हैं ,मगर अलग से हैं!

पहले ही बोल देता हूँ -यह पोस्ट एक जैवविद के नजरिये से है. आपका मंतव्य अलग भी हो सकता है. इन दिनों मैंने खुद अपने आलोच्य विषयगत अल्प ज्ञान को अद्यतन करने के (नेक ) इरादे से वर्तमान वैश्विक साहित्य संदर्भों को टटोला और कई रोचक बाते सामने आई हैं जिन्हें
Mar 04 2010 06:55 AM
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पैसे फेको और अपने टूटे फूटे अंग बदलवा लो ....!आ रहा है रेपो मैन!

पैसे फेको और अपने टूटे फूटे अंग बदलवा लो ...जी हाँ यही सन्देश लेकर आने वाली है एक नई साईंस फिक्शन फिल्म रेपो मैन .आप  अपने पुराने अंग देकर नए अंग ले सकते हैं और चाहें तो फिर वही पुराना कितनी यादों से सराबोर कोई दिल वापस लेकर किसी दिल के (पुराने )
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आखिर ये बला है क्या - डिस्कामगूगोलेशन!

इस रिपोर्ट के बाद तो यह एक पुनरावृत्ति ही कही जायेगी मगर बात चूंकि गम्भीर है इसलिए यह पुनरावृत्ति भी सही लगती है .आपको फुरसत मिले तो अंतर्जाल पर उपलब्ध इन रपटों को इत्मीनान से पढ़िए -इसे  और इसे ..इन दोनों रपटों में तफसील से  है कि  
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लखनऊ में पहली बार मीन मेला (फिशफेस्ट-२०१०)

उत्तर प्रदेश सरकार के राज चिह्न में धनुष के साथ मछलियाँ उत्कीर्ण हैं .संभवतः अर्जुन के लक्ष्य भेद की पुराकथा से प्रेरित. राज्य में पहली बार  अनूठे ढंग का एक मीन/मत्स्य मेला आयोजित होने जा रहा है .स्थान है मोती महल लान ,राणा प्रताप मार्ग ,लखनऊ और
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अरहर की विकल्प बन सकती है 'सोया दाल'

अरहर और दूसरी दालों की कीमत में भारी उछाल ने इनके विकल्पों की तलाश तेज कर दी है .कल ही रविवारी टाईम्स आफ इंडिया के लोकप्रिय कालम स्वामिनोमिक्स में स्तंभकार स्वामीनाथन एस अंक्लेसरिया ऐयर ने इस समस्या का एक भरोसेमंद बेहतर विकल्प सुझाया है -सोया दाल! वे
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दुखी मानवता के लिए फलित ज्योतिषी एक स्थाई राहत केंद्र हैं!

यह पोस्ट अभी भी एक  ब्लॉग पर चल रही निरर्थक बहस से प्रेरित है .जहाँ एक फलित ज्योतिषी हठयोग किये हुए है कि उसकी  भविष्यवाणी गलत हो ही नहीं सकती ..... विज्ञान और फलित ज्योतिष का बड़ा फर्क भी यही है .एक विज्ञानधर्मी के शोध नतीजों को जब दूसरा
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आज कंगननुमा वलयाकार सूर्यग्रहण है !

अभी कुछ माहों पहले ही पूर्ण सूर्यग्रहण का लुत्फ़ हमने उठाया था.... आज  कंगननुमा वलयाकार सूर्यग्रहण है .मतलब चाँद धरती से इतना दूर है कि  सूर्य की पूरी चकती को ढँक नहीं पा रहा और किनारे ग्रहण से छूट रहे हैं जो कंगन जैसा दिखेगें ! यही वलयाकार
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इस मछली के पुनर्वास की फौरी जरूरत है!

कल मैंने ऊपर दिया  चित्र लगाया था यहाँ और उसके बारे में पूंछा था! कुछ जवाब आये हैं -दो तरह के -एक वर्ग मानता है यह कोई मछली है और दूसरा गांगेय डालफिन! एक वर्ग के प्रबल दावेदार हैं हिमांशु तो दूसरे के गिरिजेश! उन्मुक्त जी की मनाही है कि इसे डालफि
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पहले आप पहचानिए यह क्या है ,फिर मैं तफसील से बताउंगा!

जी जरा अपने दृश्य और ज्ञान चक्षुओं की परीक्षा लीजिये और बताईये यह क्या है ? फिर मैं तफसील से बताता  हूँ कि यह है  क्या और मैंने क्यों यहाँ साईब्लोग पर इसे जगह दी है! मुझे लगता है कि उन्मुक्त जी को तो सहजता से बता देना चाहिए मगर फिर भी देखता
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अवतार के बहाने विज्ञान गल्प पर एक छोटी सी चर्चा !

विज्ञानं गल्प फिल्म अवतार इन दिनों पूरी दुनिया में धूम मचा रही है ! फ़िल्म भविष्य  में अमेरिकी सेना द्वारा सूदूर पैन्डोरा ग्रह से एक बेशकीमती खनिज लाने के प्रयासों के बारे में है ! पूरी समीक्षा यहाँ पर है ! अमेरिका में अब यह बहस छिड़ गयी है क
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क्या महिलायें बहलाने फुसलाने में ज्यादा पारंगत होती हैं ?

क्या महिलायें बहलाने फुसलाने में ज्यादा पारंगत होती हैं ? जी हाँ पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह हुनर ज्यादा विकसित है -ऐसा कहना है व्यव्हारविदों का ! उनका मानना है कि ऐसा इसलिए होता है कि माताओं पर बच्चों के लालन पालन का दायित्व पुरुषों से अधिक हो
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बिना वजूद के ही याद हो आये जो वो ड़ेजा वू है .....

हर शख्श के अपने जायज रंजो गम हैं ,गमे रोजगार और गमे मआश हैं ,हमारे आपके भी हैं और लवली कुमारी जी के भी हैं और इसके बाद और बावजूद भी जब वे समय निकाल कर ब्लॉग दुनिया के लिए  योगदान करती  हैं तो सहज ही साधुवाद की अधिकारिणी बन जाती हैं -अब चूंक
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क्या प्रलय सचमुच इतना करीब है ? कौन जाने यह दबे पांव आ ही न जाय !

आगामी २०१२ में प्रलय की अनेक संभावनाएं व्यक्त हो रही है ! एक ब्लाकबस्टर फ़िल्म भी अभी अभी रिलीज हुई है नाम है २०१२! हिन्दी नाम रखा गया है प्रलय की शुरुआत ! क्या फिलम है भाई !हौलनाक,दहशतनाक ,खौफनाक सब विशेषण पानी मांगते नजर आते हैं ! कमजोर दिल वालों का
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प्रोफेसर यशपाल विज्ञान संचार के सर्वोच्च पुरस्कार "कलिंग/कलिंगा पुरस्कार " से सम्मानित!

प्रोफेसर यशपाल को विज्ञान संचार के सर्वोच्च पुरस्कार "कलिंग/कलिंगा  पुरस्कार " से सम्मानित  किया गया है! कभी उडीसा के मुख्य मंत्री रहे बीजू पटनायक   जी ने एक युग द्रष्टा की भूमिका अपनाते हुए इस पुरस्कार के लिए यूनेस्को को मुक्त हस्त से
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हरित क्रांति के प्रणेता तथा पद्मविभूषण से सम्मानित नारमैन बोरलाग नहीं रहे !

कृषि वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलागनोबेल शांति पुरस्कार विजेता और पद्म विभूषण से सम्मानित जाने माने  कृषि वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलाग नहीं रहे  .विकासशील दुनिया में भूख से लड़ने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए उन्हें १९७० में प्रसिद्ध नोबेल शान्ति
Oct 26 2009 08:00 PM
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नारियां क्यों बनाती है यौन सम्बन्ध ? एक ताजातरीन जानकारी !

विश्वप्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका टाईम(अक्टूबर ६ ,२००९) का यह ताजातरीन लेख  महिला सेक्सुअलिटी में रूचि रखने वालो /वालियों के लिए रोचक हो सकता है ! एलायिसा फेतिनी द्बारा लिखा  'व्हाई वीमेन हैव सेक्स " शीर्षक यह लेख हो सकता है यौन कुंठाओं वाले
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छठी का दूध याद है ? अरे वही पांचवा स्वाद ?

काफी समय  तक यही  माना जाता रहा की  मनुष्य की जीभ चार मूल स्वाद ग्रहण कर सकती है -मीठा ,खट्टा,कसैला/तीता    और नमकीन .स्वाद की अनुभूति में गंध की भी अहम् भूमिका होती है -जुकाम के समय व्यंजनों का स्वाद न मिलने का कारण यही
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क्या आप बता सकते हैं कि.....

क्या आप बता सकते हैं कि हिरन और मृग में क्या अंतर है ? या फिर उत्तरप्रदेश का राज्य पशु और पक्षी क्या है ? घड़ियाल और मगरमच्छ में क्या अंतर है ? या कौन सा पक्षी है जो अपने पंखों से ही पतवारों का काम लेकर तैरता भी है ? सवाल दर सवाल मगर सब के सही जवाब !
Oct 14 2009 08:04 PM
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गंगा की गोद की सिसकती सूंस को मिला राष्ट्रीय जल जंतु का दर्जा

वन्य जीव सप्ताह (१ अक्तूबर -७अक्तूबर ) में इससे अच्छी खबर कोई हो नहीं सकती ! पिछले तकरीबन पचास सालों से मनाये जा रहे इस सरकारी पर्व पर इससे अच्छी बात मैंने कभी नहीं देखी सुनी-यह वन्यजीव सप्ताह भी एक और औपचारिक सरकारी आयोजन के रूप में सिमट गया होता मग
Oct 14 2009 08:04 PM
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वैज्ञानिकों ने जाना चिर युवा होने का राज !

अखबारों में  य ह खबर सुर्खियों में है ! कभी च्यवन ऋषि ने चिर युवा बने रहने का नुस्खा हासिल किया था च्यवनप्राश के रूप में ! मगर आज का च्यवनप्राश मानकों पर खरा नहीं उतरता ! उम्र की ढलान को रोकने के लिए दुनिया भर में वैज्ञानिक कब से लगे हुए हैं -नए
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लो जी, एक और सुअरा !

अभी एक सुअरा (स्वायिन फ्लू ) के प्रकोप से मानवता कराह ही रही है कि एक नए सुअरा का पता लगने से वैज्ञानिक समुदाय चिंतित हो उठा है .गनीमत यही है कि यह नया सुअरा स्वायिन फ्लू के विपरीत मनुष्य के लिए अभी तक तो निरापद पाया गया है .मगर बकरे की माँ जो इस मामले
टैग: epidemic/pandemic
Sep 17 2009 06:34 PM
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प्यार में ज़रा संभलना ......बड़े धोखे हैं इस राह में !

मानव प्यार की जटिलताओं को विवेचित करती लगातार यह  तीसरी पोस्ट इस श्रृखला की फिलहाल अंतिम कड़ी है ! इश्क से दीगर मसले और भी तो हैं ! प्रेम के जोडों में कई कुदरती अवरोधक (जिनकी चर्चा पिछले पोस्ट में हुयी है ) अनुपयुक्त साथी की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने
टैग: sex
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लवेरिया हुआ ,मगर हुआ क्यूं ?

कमीने इश्क के बाद जो कुछ और सामग्री इस बहुप्रिय विषय पर मेरे खलीते में थी उसे रिसायिकिल बिन में डाल दिया था ,मगर आज फिर उस बिन को खलिया कर निकाल लाया हूँ -अब चिट्ठे पर भी कभी कभार कुछ कचरा नहीं आयेगा तो फिर कैसे श्रेष्ठ रचनाओं की तुलनात्मक साख बनेगी !
टैग: sex
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यह इश्क कमीना -क्या सचमुच ?

प्रेम पर इधर कुछ गंभीर चिंतन मनन शुरू हुआ है जिसे आप यहाँ  ,यहाँ और यहाँ देख सकते हैं ! मंशा है कि इसी को थोड़ा और विस्तार दिया जाय ! हो सकता है कुछ लोग रूचि लें ! कबीर तो कह गए कि ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय -मगर यह 'ढाई आखर' है क्या और कोई
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मछली सुन्दर सलोनी ,मगर खतरनाक कितनी ?

मैं आज मानव प्रणय श्रृखला को आगे ले जाना चाहता था मगर न जाने किस अज्ञात प्रेरणा से इसी विषय से सम्बन्धित लगभग उन्ही तथ्यों के साथ एक पोस्ट फिर  यहाँ आ गयी -अब स्तब्ध मैं अपने लिखे को कूड़े में मतलब फिलहाल रिसायिक्लिन बिन में डाल कर अब आपके लिए
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......और गायब हो गए शनि के सभी छल्ले !

इन दिनों जबकि हिन्दी ब्लॉग जगत कन्या राशि ( जो सौभाग्य या दुर्भाग्य से मेरी भी है ) पर आगामी ९ सितम्बर से शनि की साढे साती के आरूढ़ हो जाने का विवेचन कर रहा है शनि देव से ही जुडी एक विलक्षण खगोली घटना अभी पिछले ४ सितम्बर को घटित हुयी है -और देखा गया की
Sep 12 2009 08:51 AM