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ऋषभ उवाच

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13 Jun 2010
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सृजनात्मक लेखन पर डॉ. गोपाल शर्मा : पाठ २

स्वतंत्र वार्ता : १३/०६/२०१०
 
ऋषभ Rishabha
Jun 13 2010 02:49 PM
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सृजनात्मक लेखन पर डॉ. गोपाल शर्मा : पाठ 1

बड़ी खराब आदत है मेरी - खुद लिखने से बचना और आसपास वालों को उपदेशियाना कि अमुक लिखिए , तमुक लिखिए. प्रो. दिलीप सिंह ने जब से बाकायदा एक लेख में अपने ढेर सारे लेखन का श्रेय मेरी इस आदत को दिया है कि पठान की मानिंद पीछे पड़ जाता हूँ, तब से ढेट और भी खुल
 
ऋषभ Rishabha
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हिंदी पत्रकारिता दिवस - ३० मई - पर संगोष्ठी

इधर कुछ समय से हैदराबाद के वरिष्ठ हिंदी पत्रकार डॉ. हरिश्चंद्र विद्यार्थी जी अपने हर आयोजन में यह कहने लगे हैं, ''बस, यह मेरा अंतिम संयोजन है''. लेकिन हम लोग उनकी आयोजनजीविता या संयोजनधर्मिता को पहचानने के नाते जानते हैं कि हर तिमाही कम से कम एक संगोष्ठी
 
ऋषभ Rishabha
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जाना एक सच्चे हिंदी पत्रकार का

हैदराबाद से प्रकाशित हिंदी की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ''कल्पना'' के सम्पादक मंडल में रहे यशस्वी पत्रकार मुनींद्रजी [जन्म १९२५ ई] का गत दिनों - १६ मई २०१० ई. को - निधन हो गया. ''कल्पना'' के बंद होने के बाद से उन्होंने ''दक्षिण समाचार'' [पूर्वनाम
 
ऋषभ Rishabha
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कवि अगर रसोइया भी हो!

इधर कुछ दिन से व्यस्तता के साथ कुछ तनाव सा था. वैसे भी अप्रैल-मई में संस्थान के कार्याधिक्य के कारण तनिक ज्यादा दबाव तो सिर पर रहता ही है. लेकिन गत दिनों एक संगोष्ठी के अवसर पर जबसे दोस्तों ने आँख में अंगुली दे-देकर दिखाया कि डॉ. गोपाल शर्मा के लीबिया
 
ऋषभ Rishabha
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चर्चा - लाज न आवत आपको

गत दिनों स्त्रीविमर्श, ऋषभ की कविताएँ और हिंदी-भारत समूह पर एक छोटी-सी कविता दी थी - लाज न आवत आपको, विस्मय कि उसपर काफी चर्चा हो गई. कवि का अपना पाठ तो कविता है, यों अपनी ओर से कुछ नहीं कहना है. लेकिन पाठक कि रचना धर्मिता और किसी भी रचना के अनेक पाठों
 
ऋषभ Rishabha
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नहिं दरिद्र सम दुख जग माहीं

तुलसी मध्यकाल के सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं प्रतिनिधि कवि हैं.। उनकी कृति 'रामचरितमानस' धर्म और भक्ति के बहाने तत्कालीन सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों के चित्रण एवं मूल्यों की स्थिति, उनके विघटन तथा नए मूल्यों की तलाश की यात्रागाथा
 
ऋषभ Rishabha
May 09 2010 03:14 AM
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जासु बिलोकि अलौकिक सोभा ..............

आज पुष्पवाटिका में जब से जानकी जी को देखा है, मेरे राम जैसे कुछ और ही हो गए हैं। जाने कब का सोया परम प्रेम जाग उठा। मेरे राम का जानकी जी से एक ही संबंध है - परम प्रेम का संबंध। परम प्रेम भक्ति का ही नाम है न! अपनी आह्लादिनी शक्ति का साक्षात्कार होते ही
 
ऋषभ Rishabha
May 09 2010 01:13 AM
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जब तें उमा सैल गृह जाईं..

मित्रो!विचित्र है यह भारतवर्ष। एक ओर हम स्त्री को लक्ष्मी का रूप मानते हैं और दूसरी ओर स्त्री भ्रूण की हत्या करते समय हमारा कलेजा नहीं काँपता । स्त्री जातक इस कदर अवांछित है हमारे समाज में कि संपन्न से संपन्न घर में भी आज भी कन्या का जन्म होने पर कुछ देर
 
ऋषभ Rishabha
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अनुजवधू, भगिनी, सुतनारी। सुनु सठ, कन्या, सम ये चारी।।

मित्रो!तुलसीबाबा कथा के क्रम में तनिक सा अवसर मिलते ही अपने वांछित समाज के आचार के संकेत बड़ी कुशलता से देते हैं। लोग प्राय: बालि-वध के औचित्य-अनौचित्य पर लंबी-लंबी बहस करते रहते हैं। बहस को एक ओर खिसकाकर अगर देखें तो पता चलता है कि इस अवसर का लाभ उठाकर
 
ऋषभ Rishabha
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ढोल गँवार सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी।।

शूद्र और स्त्री को एक साँस में ढोल आदि के साथ रखने और ताडन का पात्र बताने वाली चौपाई की अनेक प्रकार से व्याख्याएं हो चुकी हैं। ''जड़'' जलधि के इस कथन का स्रोत गर्ग-संहिता आदि में पहले से उपलब्ध है. -- ''ताडनं मार्दवं यान्ति, शूद्राः पटहः स्त्रियः''इसे
 
ऋषभ Rishabha
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मिटइ न मलिन सुभाउ अभंगू

मित्रो!हमने बडे धोखे खाए हैं। पग-पग पर छले गए हैं। जाने कितनी बार किस किसने हमें ठग लिया और हम अपनी भलमनसाहत की दुहाई देते रहे। भलमनसाहत भी क्या कोई बुरी चीज है ? हर बार हम यही पूछते रहे कि हमने तो किसी का बुरा नहीं किया था; किया क्या, सोचा तक न था; फिर
 
ऋषभ Rishabha
May 09 2010 01:13 AM
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तुलसी सो सुत होइ!

तुलसीबाबा की जयंती पर हर वर्ष उनके संघर्षपूर्ण जीवन के चित्र पुतलियों में तैरने लगते हैं।एक बालक जो जन्मते ही अनाथ हो गया!कहते हैं, कोई कुटिल नाम का कीट होता है जो संतान को जन्म देते ही मर जाता है। तुलसी अपने आपको उस कीट जैसा समझते रहे होंगे क्योंकि उनकी
 
ऋषभ Rishabha
May 09 2010 01:13 AM
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''ग्लोबलाइज्ड अर्थव्यवस्था में हिंदी की भूमिका'' पर व्याख्यान संपन्न

''ग्लोबलाइज्ड अर्थव्यवस्था में हिंदी की भूमिका'' पर व्याख्यान संपन्नहैदराबाद,६ मई,२०१०.केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के राजभाषा प्रभाग के तत्वावधान में आयकर निदेशालय के अंतर्गत देश भर में कार्यरत हिंदी अनुवादकों के लिए 'आयकर शिखर' में आयोजित त्रिदिवसीय
 
ऋषभ Rishabha
May 06 2010 09:06 PM
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उत्तरआधुनिकता पर पोस्टर प्रदर्शनी

उच्च शिक्षा और शोध संस्थान में उत्तरआधुनिकता पर केंद्रित पोस्टर प्रदर्शनी हैदराबाद, 25 अप्रैल।उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के खैरताबाद स्थित परिसर में एक विशिष्ट विषय केंद्रित ‘‘शोधप्रबंध एवं पोस्टर प्रदर्शनी’’ का आयोजन किया
 
ऋषभ Rishabha
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‘‘उत्तरआधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’’ पर संगोष्ठी संपन्न

‘‘उत्तरआधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’’ पर संगोष्ठी संपन्नहैदराबाद - 16 अप्रैल, 2010। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के विश्वविद्यालय विभाग में नवगठित साहित्य संस्कृति मंच और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के तत्वावधान में ‘उत्तरआधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’
 
ऋषभ Rishabha
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‘‘उत्तर आधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’’

भूमंडलीकरण, उदारवाद और बाजारवाद के विष्वव्यापी प्रसार के साथ चिंतन और सृजन के क्षेत्र में तीव्रता से बदलाव आए हैं। संस्कृति, समाज, कला और राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में लंबे समय तक दो धु्रवीय विचारधाराओं का प्रभाव रहा। बदले हुए संदर्भ में यह बात सामने आई
 
ऋषभ Rishabha
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बरनि न जाइ अनीति!

मित्रो! कुछ भले मानुष इस बात को लेकर बड़ी माथापच्ची करने में लगे रहते हैं कि आखिर तुलसी ने अयोध्या पर किसी आक्रमण और राम जन्मभूमि के स्थान पर किसी प्रकार के ध्वंस और निर्माण का उल्लेख क्यों नहीं किया। इससे जुड़े तरह-तरह के प्रष्न उठाए जाते हैं। हमें उनके
 
ऋषभ Rishabha
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ते जानहु निसिचर सम प्रानी

मित्रो!कभी हम अपने आचरण पर सोचकर देखें तो ऐसा क्यों लगता है कि हम देवत्व की सारी संभावनाओं के बावजूद मनुष्य भी नहीं रह पाए हैं - राक्षस होते जा रहे हैं - रावण हो गए हैं। जिस परिवेष में हम जी रहे हैं( कभी-कभी तो लगता है - रावणराज्य में जी रहे हैं।
 
ऋषभ Rishabha
Apr 23 2010 12:53 AM
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प्रीति की रीति

तुलसी का साहित्य जीवन और जगत के तमाम अनुभवों के सार से लबालब भरा है। भक्ति और अध्यात्म का नीति और व्यावहारिकता के साथ समन्वय तुलसी की एक बड़ी विषेषता है जो उन्हें जनता का हृदयहार बनाए हुए है। उन्होंने लोकरंजन और लोकरक्षण का अपना कविधर्म निभाते हुए अनेक
 
ऋषभ Rishabha
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तजिए वचन कठोर

तुलसी बाबा ने वषीकरण के गोपनीय मंत्र को सर्वसुलभ बनाते हुए कहा है कि मीठे वचन से सब ओर सुख उपजता है इसलिए यदि सबको अपने वष में करना चाहते हो तो कठोर वचन के प्रयोग से बचो! यह आजमाया हुआ मंत्र है। छोटे से बड़े तक सब वष मेें हो जाते हैं। तमाम मंत्रों की तरह
 
ऋषभ Rishabha
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रामनाम मणिदीप धर, जीह देहरी द्वार।

आलोक पर्व की शुभकामनाए¡ ! `रामायण संदषZन` के इस अंक के माध्यम से हम दीपावली के अवसर पर अपनी अनंत शुभकामनाए¡ आप तक पहु¡चा रहे हैं। इस समय तुलसी का यह संदेष याद आता है : रामनाम मणिदीप धर, जीह¡ देहरी द्वार। `तुलसी` भीतर बाहिरहु, जो चाहसि उजियार।। दीपावली के
 
ऋषभ Rishabha
Apr 13 2010 08:32 PM
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सबइ सुधारी मोरि

`रामायण संदषZन` के तुलसी जयंती अंक पर अनेक सुधी पाठकों और विद्वान लेखकों के पत्र प्राप्त हुए हैं। इन पत्रों में जहा¡ पत्रिका को शुभकामनाए¡ दी गई हैं, वहीं राम, मानस और तुलसी की प्रासंगिकता पर खासी चर्चा भी की गई है। डॉण् गणेष दत्त सारस्वत, डॉण् सूर्यदीन
 
ऋषभ Rishabha
Apr 13 2010 08:17 PM
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||एतेहु पर करिहहिं जे असंका||

श्रावण शुक्ल पक्ष 7, संवत् 2064 तुलसी जयंती अंक 20 अगस्त, 2007510 वीं तुलसी जयंती की शुभकामनाएँ तुलसी जयंती अंक के माध्यम से 'रामायण संदर्शन' एक बार फिर नए संकल्प के साथ आपके सामने आ रहा है। कुछ विषम परिस्थितियों के कारण काफी समय तक इसका प्रकाशन स्थगित
 
ऋषभ Rishabha
Apr 13 2010 08:09 PM
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तेलुगु साहित्य का परिवर्तनशील परिदृश्‍य

तेलुगु साहित्य का परिवर्तनशील परिदृश्‍यनिखिलेश्‍वर (1938) तेलुगु साहित्य के दिगंबर कविता (अकविता) आंदोलन के छह प्रवर्तकों में से एक हैं. वे विप्‍लव रचयितल संघम (क्रांतिकारी लेखक संघ) के सक्रिय संस्थापक के रूप में भी जाने जाते हैं तथा मानवाधिकार संस्थाओं
 
ऋषभ Rishabha
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स्त्री और उपभोक्ता संस्कृति - चर्चा : गुरुदयाल अग्रवाल

पिछली प्रविष्टि के क्रम में...Dear Sharmaji sadar “bandey”I stress that the instinct of victimizing/exploiting the women is inborn in u. Right from the time immemorial we have been told that the women have to be “pati-varta” and that her man is her god.
 
ऋषभ Rishabha
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स्त्री और उपभोक्ता संस्कृति - चर्चा

पिछली प्रविष्टि के क्रम में......Dr sahab, I know why you are writing ! I want to share with you an advise of a German writer to a new writer. Its totally new for me. The advisor says, " If you think you are capable of living without writing, do not
 
ऋषभ Rishabha
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सांस्कृतिक कार्यक्रम : दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा

उच्च शिक्षा और शोध संस्थान में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं वार्षिकोत्सव संपन्नहैदराबाद, 29 मार्च।दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, हैदराबाद केंद्र के तत्वावधान में एकदिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं वार्षिकोत्सव संपन्न हुआ जिसके
 
ऋषभ Rishabha
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इफ्लू : ''स्त्री और उपभोक्ता संस्कृति''

अंग्रेज़ी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय , हैदराबाद, में नए-नए खुले ''हिन्दी एवं भारत अध्ययन विभाग'' में २४-२५ मार्च २०१० को भाषा, साहित्य और संस्कृति के समकालीन परिदृश्य पर विचार-विमर्श के लिए द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई. देश भर के दिग्गज
 
ऋषभ Rishabha
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दक्खिनी हिंदी का सूफी साहित्य

दक्खिनी हिंदी के साहित्य सृजन की परंपरा को एक ओर कण्हप्पा, पुफ्फयंत, नामदेव, गोन्दा, एकनाथ और संत तुकाराम से जोड़ा जाता है (डॉ. श्रीराम शर्मा, दक्खिनी का गद्य और पद्य) तो दूसरी ओर इसकी विकास रेखा को दक्कन के मुस्लिम राज्यों के ऐसे कवि- लेखकों के साथ
 
ऋषभ Rishabha
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कविता वाचक्नवी सम्मानित

'स्वतंत्र वार्त्ता'-६/३/२०१०-पृष्ठ ३
 
ऋषभ Rishabha
Mar 06 2010 07:23 PM
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प्रेमचंद की कहानियों का मंचन

साठये महाविद्यालय [मुंबई] में आयोजित संगोष्ठी की पहली साँझ बड़ी मनोरंजक रही. प्रेमचंद की तीन कहानियों का मंचन देखने को मिला - 'सवा सेर गेहूँ', 'संपादक मोटेराम शास्त्री' और 'ईश्वरीय न्याय'.यह जानकारी रोमांचकारी थी कि प्रेमचंद की कहानियों के दीवाने शौकिया
 
ऋषभ Rishabha
Mar 04 2010 12:05 AM
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सूफी काव्य का पुनर्मूल्यांकन

फरवरी के अंतिम सप्ताह में मुम्बई जाना हुआ. साठये महाविद्यालय में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी थी ५ और ६ तारीख को.संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह मध्यकालीन कविता के प्रति समर्पित विद्वान् हैं. संत काव्य और कृष्ण काव्य के बाद इस वर्ष उन्होंने सूफी काव्य पर
 
ऋषभ Rishabha
Mar 02 2010 09:24 PM
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चेन्नई में होली कविगोष्ठी

अभी दसेक दिन के लिए चेन्नई जाना हुआ. कार्यशाला के समापन के अवसर पर तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी ने होली की पूर्व वेला में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के अय्यंगार हाल में कवि गोष्ठी रख ली.कई नए पुराने रचनाकार मित्रों से मुलाकात हुई. आरंभ में प्रो.दिलीप
 
ऋषभ Rishabha
Feb 27 2010 05:04 PM
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