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तपन शर्मा

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16 Apr 2010
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वो लूटते रहे.. हम लुटते रहे...

टीपू सुल्तान की तलवार ब्रिटेन में 5 लाख पाऊंड में बेची गई.... ये तलवार भारत से 1799 में मैसूर से चुराई गई थी... या कहें कि लूटी गई थी....इस देश को पहले अब्दाली, लोदी व गज़नवी ने लूटा... फिर मुगलों ने और फिर बचा खुचा अंग्रेज ले गये....वो लूटते रहे.. हम
 
तपन शर्मा
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तेरे पास मोबाइल नहीं है??

एक गली से गुज़रते हुए दो मज़दूरों की बातें सुनी। एक मज़दूर दूसरे को हैरानी से पूछता हुआ कहता है:तेरे पास मोबाइल नहीं है!!! मैं तुझे बुलाऊँगा कैसे?मन में तुरंत विचार आया कि जिन मज़दूरों के पास खाने को रोटी नहीं, पीने को पानी नहीं आज की तारीख में उनके पास
 
तपन शर्मा
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ये शवयात्रा जारी रहेगी (?) Death of Hockey and sports crisis

पिछले सप्ताह से हॉकी फ़ेडरेशन और खिलाड़ियों के बीच तनातनी बढ़ती हुई दिखाई दी। ऐसा नहीं कि यह लड़ाई अभी शुरु हुई हो। ये एक पीड़ा है हॉकी की व हॉकी खिलाड़ियों की। यह ज्वालामुखी है जो समय समय पर फ़टता ही रहेगा जब जब हॉकी असहाय महसूस करेगी। जब जब हॉकी का दम घुटेगा
 
तपन शर्मा
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क्यों जल रहा है जम्मू?

जम्मू जल रहा है। वहाँ बंद है, आगजनी है, कर्फ्यू तोड़े जा रहे हैं। हालात बेकाबू हैं। लोग कहते हैं कि ४० दिनों से जम्मू में हालात खराब हैं। पर ये कहानी ४० दिनों की नहीं है। इसके लिये हमें ६० वर्षों के इतिहास को खंगालना होगा। वो हर घटना की चिंगारी पर गौ
 
तपन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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'आवाज़' से रचता ब्लोगिंग में इतिहास

पिछले वर्ष हिन्दयुग्म ने संगीत के क्षेत्र में एक शुरूआत की, जिसका नाम रखा गया- आवाज़ । वो आवाज़ जिसके माध्यम से नये संगीतकारों, गीतकारों व गायकों को एक मंच मिल सके जिससे ये सभी प्रतिभावान चेहरे लोगों के सामने आ सकें व अपनी कला प्रदर्शित कर सकें। पहले इ
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
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Dec 29 2009 11:50 AM
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मीडिया, अंधविश्वास और कलियुगी धर्म

अनुरोध : किसी को ठेस पहुँचाना मेरा मकसद नहीं। ये लेख निष्पक्ष हो कर पढें। धर्म पर मैं पहले भी काफी बार लिख चुका हूँ। कभी धर्म का मतलब जानना चाहा (http://tapansharma.blogspot.com/2007/01/blog-post_4643.html) तो कभी धर्म व क्षेत्रवाद से भारत को टूटने स
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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जहाँ बात बात पर कानून को जम कर जाता है तोड़ा

आगे की लाइन कहते हुए शर्म आती है पर सच कड़ुआ होता है। गुज़रे जमाने की सिकंदर-ए-आजम फिल्म से रफी साहब का गाया हुआ एक गीत है जिसकी तर्ज पर इस लेख का शीर्षक चुना गया है। वो भारत देश है मेरा। इस देश में असत्य है, हिंसा है और अधर्म भी है। शायद इसीलिये आज क
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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स्वार्थ व झूठ से भरे ४ वर्ष

आप सोच रहे होंगे कि ४ साल किस बात के? दरअसल कल यानि १४ जून २००८ को इस कार्पोरेट जगत के चार साल पूरे हुए। कहने को तो जनवरी २००४ से काम करना शुरू किया था परन्तु चूँकि डिग्री जून में मिली थी इसलिये पहले ६ महीने गिनती में नहीं आ सकते। खैर मुद्दा ये नहीं
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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माँ, तितली कैसी होती है?

रविवार को NDTV पर एक प्रोग्राम देख रहा था जिसका प्रसारण डल झील से हो रहा था। बहस हो रही थी कि क्या विकास पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है। उसी बहस के कुछ मुद्दों का जिक्र आगे के लेख में करूँगा। बहस की शुरूआत में डल झील के आसपास हो रहे निर्माण कार्य क
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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सरबजीत अफ़जल एक समान!!

मित्रों, हाल हीं में हमारे देश के गृहमंत्री साहब ने जब अफजल और सरबजीत की समानता करी तो रहा नहीं गया। एक देश की खातिर जान की बाजी लगा रहा है तो दूसरा देश द्रोह कर जान ले रहा है। फिर भी दोनों में समानता देखी जा रही है। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने कुछ प
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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काश

सुबह ज्यों ही सूरज को खुले आकाश में उठते अपनी किरणों को चारों ओर फैलाते हुए देखता हूँ तो यकीन होता है कि हम भी सर उठा कर चलने लगे हैं, हम हैं विश्व का सबसे बड़ा बाज़ार, डंका बजता है हमारा पूरी दुनिया में, अंतरिक्ष में अब भेजते हैं हम दूसरे देशों के उप
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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एक अलग दुनिया की झलक

मुझे नहीं पता कि मैं अपने इस लेख की शुरुआत किस तरह से करूँ? दरअसल अभी पिछ्ले दिनों कम्पनी के कुछ लोगों से पता चला कि ४-५ लोग मिलकर बच्चों को खाना खिलाने के लिये अँध महविद्यालय जा रहे हैं। मैंने भी उन लोगों के साथ जाने का मन बना लिया था। दिल में एक अज
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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अश्लील कौन?

जी हाँ। तो ये है आजकल का सबसे गर्म सवाल। इस विषय पर हमारे देश में पिछले कईं वर्षों से बहस जारी है। जब से समाचार चैनलों की संख्या में तेज़ी हुई है, इस विषय पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। सबसे ताज़ा उदाहरण बना है क्रिकेट में मनोरंजन के लिये विदेशी बालाओं क
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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सहनशीलता या कायरता?

ऊपर शीर्षक में दो शब्द दिये हुए हैं। सहनशीलता व कायरता। मैं समझता हूँ कि इन दो शब्दों में बहुत बारीक सी एक लकीर है जो इन दोनों को आपस में विलग करती है। आप सोच रहे होंगे कि अचानक इनकी क्या ज़रूरत आ पड़ी है। दरअसल अभी हाल ही में जो चीन व तिब्बत को लेकर
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
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नव वर्ष की औपचारिकतायें

नव वर्ष की औपचारिकतायें आगे बढ़ते हुए कहीं हम ये भूल न जायें साल के आखिरी दिन किये जाते हैं नये साल से वायदे खाईं जाती हैं कसमें, एक दूसरे पर मर मिटने की शराब सिगरेट न पीने की सड़क पर न थूकने की समय पर काम करने की दूसरों से न लड़ने की और हर वो काम न करन
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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जय हिन्द, जय हिन्दी, जय हिन्दयुग्म!!!

२८ दिसम्बर को हिन्दयुग्म ने अपना वार्षिकोत्सव मनाया। मैं भी इस आयोजन का साक्षी बना। हिन्दी भवन, दिल्ली में आयोजित इस समारोह में ’हंस’ सम्पादक राजेन्द्र यादव के अलावा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गणितज्ञ प्रो॰ भूदेव शर्मा , अंतर्राष्ट्रीय खेल कमेंटेट
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
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Dec 29 2009 11:50 AM
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हिन्द-युग्म: 28 दिसम्बर 2008 को हिन्द-युग्म मनाएगा वार्षिकोत्सव (मुख्य अतिथि- राजेन्द्र यादव)

हिन्द-युग्म: 28 दिसम्बर 2008 को हिन्द-युग्म मनाएगा वार्षिकोत्सव (मुख्य अतिथि- राजेन्द्र यादव)
 
तपन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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राजस्थान की गोलमा: लोकतंत्र का मजाक, विडम्बना या मजबूरी

कल राजस्थान में मंत्रियों ने शपथ ली। जिन्होंने शपथ ली उनमें एक राज्यमंत्री हैं गोलमा देवी। बात उनकी इसलिये करनी पर रही है क्योंकि पढ़ाई के मामले में पिछड़े राज्यों में से एक राजस्थान की यह राज्यमंत्री कभी स्कूल नहीं गई। ये पूर्ण रूप से अशिक्षित हैं। शप
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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सच ही कहा था हरिवंश राय ने!!!

डा. हरिवंशराय बच्चन-हिंदी काव्य में एक ऐसे स्तम्भ जिसको हर कोई मानता है। उन्होंने एक कविता लिखी थी मधुशाला। ७५ साल हुए उन बातों को। और आज अचानक कहीं से आवाज़ उठी कि इस कविता की कुछ लाइनें एक धर्म के खिलाफ हैं। या यूँ कहें कि कट्टरपंथियों और धर्म के ठे
 
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तस्लीमा नसरीन फिर देश के बाहर

सच कड़वा होता है। और इसका स्वाद तस्लीमा नसरीन चख रही है और भुगत भी रही है। तस्लीमा फिर देश के बाहर हैं। अभी अगस्त में ही तो वापस आई थी। मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ और मुस्लिम समाज की कुरीतियों को लिखना बहुत महँगा पड़ रहा है। सरकार कट्टरपंथियों की गुल
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
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लोकतंत्र की हार

सोचा था कि कविता लिखकर ही ब्लॉग पर पोस्ट करूँगा पर इस देश के हालातों ने मुझे फिर ये लेख लिखने पर मजबूर कर दिया। देश में बहुत ही अफरातफरी सा माहौल है। अंग्रेज़ी में कहते हैं : chaos| एक ओर मंदी मंदी का शोर है, दूसरी ओर बम धमाकों का, तीसरी कहानी ’राज’ क
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
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Dec 29 2009 11:50 AM
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कविता से लेख तक का सफर

आज न तो किसी सामाजिक मुद्दे पर लिखने का मन है और न ही किसी राजनैतिक अथवा धार्मिक विषय पर। आज लिख रहा हूँ अपने ब्लॉग में पिछले एक साल के सफर के बारे में। मैंने जुलाई,२००७ से सक्रिय रूप से ब्लॉगिंग की दुनिया में कदम रखा। प्रति माह दो पोस्ट तो हो ही जात
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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आतंक का है जोर, क्योंकि सरकार है कमजोर

आज लिखने के लिये कुछ और ही सोचा था। पर ये बिल्कुल न सोचा था कि रात होते होते ये लिखना होगा। दिल्ली में शनिवार शाम को बम धमाके हुए। हर जगह हाई-अलर्ट घोषित कर दिया गया। ये सब आम लगने लगा है। बैंगलुरू, जयपुर, अहमदाबाद, सूरत और अब दिल्ली। हमें आदत हो गई
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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कोसी से कंधमाल तक...कहानी राजनीति की...

जम्मू की आग अभी बुझी भी नहीं थी कि कोसी की बाढ़ और कंधमाल के दंगों ने देश को झकझोर के रख दिया है। जम्मू में हम केंद्र और राज्य सरकार का आतंकवादियों के प्रति नर्म रूख और जम्मू के लिये लापरवाही को देख ही चुके हैं। अब पहले बात करते हैं कोसी की। ये नदी ने
 
तपन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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वंदेमातरम को राष्ट्र्गीत का दर्जा : कितना सही?

आनन्द मठ : बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यही वह बांग्ला उपन्यास है जिसका एक गीत राष्ट्रगीत बन गया। लेकिन इसके राष्ट्रगीत बनने के बाद से अब तक यह विवादों से घिरा रहा है। वैसे हमारे देश में कोई भी ऐसी घटना या व्यक्ति नहीं जिस पर विवाद न हुआ हो। च
 
तपन शर्मा
Dec 29 2009 11:50 AM
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स्वतंत्रता दिवस पर उठते सवाल

देश में हड़तालें हैं, चक्का जाम हैं, सड़कें बंद हैं, रेल बंद है, बसें फूँकी जाती हैं.. टायर जलायें जाते हैं पुतले फूँके जाते हैं सबसे बड़ा लोकतंत्र है... ये देश स्वतंत्र है.. स्कूल में गोली चलती है बच्चे आत्महत्या करते हैं एम.एम.एस बनते हैं, ये देश के भ
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
Dec 29 2009 11:50 AM
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हिन्दयुग्म की "बैठक" पर कृषि/जिन्सों पर नियमित लेख

सूचना तंत्र में आई क्रांति के बाद अंग्रेजी में कृषि व अन्य जिंसो की जानकारी देने वाली अनेक साईट/ब्लाग मिल जाएंगे लेकिन हिन्दी में इस जानकारी की कमी अभी अखरती है। बैठक पर हम इसी के तहत ये विशेष स्तंभ जनवरी २००९ से शुरू किया गया है...हमारा प्रयास रहेगा
 
तपन शर्मा Tapan Sharma
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दूर रहो इससे ये पार्टी अछूत है!!!

इस देश में दो सबसे बड़ी राजनैतिक दल हैं। एक है कांग्रेस जिसको सौ वर्ष से अधिक का अनुभव हो चुका है और दूसरी है भाजपा जिसको अस्तित्व में आये ३० वर्ष के करीब हो गये होंगे । क्योंकि हमारे इस कथित लोकतंत्र में कितने ही दल हो सकते हैं तो जाहिर तौर पर हर दल
 
तपन शर्मा Tapan Sharma