आज पुरानी मेल्ज़ को खंगालते वक्त ये चित्र मिले तो सोचा कि क्यों ना इन्हें आप सबके साथ शेयर किया जाए?... जिन्होंने भी ये चित्र खींचे..उनकी हिम्मत की दाद देनी होगी कि ऐसे वक्त में भी उन्हें ये सब सूझ रहा था...भगवान जाने इन चित्रों को खींचने वालों का क्य
संजू तनेजा*** ज़िन्दों में मुर्दों में है फर्क कहाँ पापी पेट का रहता सवाल यहाँ पवित्र पावन मँगलकारी धरती कहाँ ज़िन्दों की नहीं मुर्दों की दरकार वहाँ हाँ!..ये हरिद्वार है र्
साहित्य शिल्पी ने अंतर्जाल पर एक वर्ष पूरा कर लिया है।इस संदर्भ में साहित्य शिल्पी अपने प्रथम वार्षिकोत्सव में आमंत्रित करते हुए हर्षित है।इसमें नुक्कड़ भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है पूरा समाचार जानने के लिए बारी-बारी से चित्रों पर चटखा लगाएँ
भली ही पूरी ज़िन्दगी घर में वेल्ले बैठ बच्चे दिन-रात वीडियो गेम खेलते रहें या फिर गली में गुल्ली-डण्डे संग दर्जनों गुलाटियाँ मारते फिरें लेकिन क्रिकेट?..... तौबा...तौबा..... ना बाबा ना ....बिलकुल नहीं....सवाल ही नहीं पैदा होता
दोस्त...दोस्त ना रहा प्यार...प्यार ना रहा ऐ ज़िन्दगी हमें तेरा ऐतबार ना रहा ऐतबार ना रहा 2. तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अनजाना तूने नहीं जाना मैँने नहीं जाना इक डोर खींचे दूजा दौड़ा चला आए कच
आओ खेल-खेल में पईस्सा बनाएँ... सारे जहाँ से अच्छा... हिन्दोस्ताँ हमारा...हमारा 1. 2. 3. देखा!.... ना हींग लगी और ना ही फिटकरी.. फिर भी रंग चढा चोखा ही चोखा :-) जय हिन्द..... ***संजू तनेजा***
थोड़ी सी जो पी ली है चोरी तो नहीं की है ओ 'शीला' ..... ओ ' मनमोहन'... ओ 'अडवानी'.... कोई तो रोको...कोई तो संभालो हमें बचा लो..... हम लौटना चाहते हैँ... हिन्दी में बोले तो... अच्छा बच्चा बनने का और... ड्रगस नइई लेना का...... बोले तो बापू
सलामत रहे दोस्ताना हमारा बने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा कट... कट... कट...... क्या पुरानी गुज़रे ज़माने की बात करते हो भाई?.... हमारा भी सलामत रहे दोस्ताना बने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा