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06 Apr 2010
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अवांछित तत्वों से कांग्रेस को बचाने की समस्या

बिहार कांग्रेस के निर्वाची पदाधिकारी और सांसद डा. गिरीश संघी ने कहा है कि आपराधिक तत्वों को संगठन में स्थान नहीं मिलेगा। डा. संघी ने ठीक ही कहा है। इससे पहले एक पूर्व सांसद ने सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाया था कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी गुंडों की जमात है।
 
Surendra Kishore
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पत्रकारिता के 40 साल पूरे कर चुके वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर से ‘ ‘प्रभात खबर ’ की बातचीत

कोई सरकारी परसादी लेनी होती तो नीतीश कुमार का शासन आने की प्रतीक्षा क्यों करता ?अपना यही है सहन/आंगन/,यही सायबान/छप्पर/है,फैली हुई जमीन,खुला आसमान है,---- मख्मूर सईदीमैं पूरी ताकत के साथ शब्दों को फेंकता हूं आदमी की तरफ यह जानते हुए कि आदमी का कुछ नहीं
 
Surendra Kishore
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बिहार को मिला एक नया चुनावी मुद्दा

बिहार में विधान सभा का चुनाव इसी साल होना है। महिला आरक्षण एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन जाए तो यह कोई अजूबी बात नहीं होगी। महिला आरक्षण के मौजूदा स्वरूप के सबसे बड़े विरोधी नेताआंें में से एक नेता लालू प्रसाद इसी प्रदेश से हैं। विधान सभा चुनाव में मतदाता
 
Surendra Kishore
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निंदक नियरे राखिए

चीन ने कहा है कि भारत, मिसाइल टैक्नोलाजी के मामले में, चीन से अभी दस साल पीछे है। संभव है कि यह बात चीन ने अपने लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए कही होगी! यह बात भी संभव है कि इसमें शायद सच्चाई भी हो। इस संबंध में अंतिम वाक्य तो कोई वैज्ञानिक ही बोल सकता है।
 
Surendra Kishore
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Feb 20 2010 05:49 PM
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राजनयज्ञों की उठती पीढ़ी

इस देश में नेता कई तरह के होते हैं। अत्यंत थोड़े से राजनयज्ञ यानी स्टेटसमैन होते हैं। कुछ अन्य नेता होते हैं। कुछ कबीलाई सरदार होते हैं। कुछ शुद्ध माफिया व हत्यारे होते हैं जो राजनीति भी करते हैं। कुछ जातीय व सांप्रदायिक वोट बैंकों के सौदागर होते हैं। कुछ
 
Surendra Kishore
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तीन-तीन बार उनके दरवाजे पर आकर लौट गया था प्रधान मंत्री का पद

प्रधान मंत्री का पद तीन-तीन बार ज्योति बसु के दरवाजे पर आकर लौट गया था। एक बार तो सी.पी.एम. की केंद्रीय कमेटी ने उन्हें प्रधान मंत्री पद स्वीकारने ही नहीं दिया। यह 1996 की बात है। अन्य दो अवसरों पर खुद ज्योति बसु ने यह पद ठुकरा दिया। 1996 से पहले उन्हंे
 
Surendra Kishore
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संसद में किया गया सर्वदलीय वादा निभाने का अवसर

लोक सभा का चुनाव सामने है। उम्मीदवारों के चयन का काम जारी है। भारतीय संसद ने 1997 में ‘ राजनीति के अपराधीकरण और भ्रष्टाचार की समाप्ति ’ के लिए जो सर्वसम्मत संकल्प किया था, उसे पूरा करने का यही अवसर है। अब जबकि इन दो बुराइयों से अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद
 
Surendra Kishore
Dec 29 2009 11:43 AM
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काश, ऐसा पहले हुआ होता

बसपा ने उत्तर प्रदेश में इस बार 80 में से बीस लोस चुनाव क्षेत्रों में ब्राह्मण उम्मीदवार खड़ा कराए हैं। इससे पहले बड़े अफसरों की पोस्टिंग में भी बसपा सरकार ने जितनी संख्या में ब्राह्मणों को जगह दी, उतनी वहां शायद कभी ब्राह्मण मुख्य मंत्रियों के शासन का
 
Surendra Kishore
Dec 29 2009 11:43 AM
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दूरगामी परिणामों वाला एक कदम

गुजरात विधानसभा ने स्थानीय निकायों के चुनाव में मतदान को अनिवार्य बनाने वाला विधेयक पास कर दिया। यह एक ऐसा कदम है जिसे देर सवेर सभी चुनावों में लागू कर दिया जाए तो उसका दूरगामी राजनीतिक परिणाम हो सकता है। जातीय व सांप्रदायिक वोट बैंक की बुराई को कम क
 
Surendra Kishore
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कांग्रेसी राज में ही क्यों बढ़ती है बेतहासा महंगाई ?

सन 1999 में गेहंू साढ़े सात रुपये प्रति किलो ग्राम की दर से बिक रहा था। सन 2004 में उसकी कीमत बढ़कर आठ रुपये प्रति किलो हो गई। आज लोग साढ़े 17 रुपये किलो गेहूं खरीदने को विवश हो रहे हैं। साधारण चावल का दाम 1999 में साढ़े आठ रुपये किलो था। 2004 में बढ़कर द
 
Surendra Kishore
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एक ऋषितुल्य संपादक की विदाई

यदि कोई संपादक अपने किसी मामूली संवाददाता के लेखन की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भी अपनी खुद की नौकरी दांव पर लगा दे तो उसे आप क्या कहेंगे ? यदि वही संपादक अपने पुत्र के कैरियर को नुकसान पहुंचा कर भी अपने सहकर्मी पत्रकार की स्वतंत्रता की रक्षा करे तो
 
Surendra Kishore
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नेहरू परिवार बनाम शास्त्री परिवार

सरकार के आश्वासन के बावजूद लाल बहादुर शास्त्री की विधवा ललिता शास्त्री को इलाहाबाद में कोई भूखंड नहीं मिल सका। इलाहाबाद में ललिता शास्त्री की एक छोटे घर की आस भी पूरी नहीं हो सकी। यह आस लिए वे 1993 में वे सिधार गईं। पर दूसरी ओर नेहरू -इंदिरा परिवार क
 
Surendra Kishore
Oct 14 2009 07:40 PM
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ऐसे विफल कर दी गई एक गांधीवादी की भूमि सुधार योजना

जय प्रकाश नारायण का सपना था कि कोशी क्षेत्र में माॅडल भूमि सुधार कार्यक्रम चलाया जाए। यह सन 1978 की बात है। तब कर्पूरी ठाकुर की सरकार थी। स्वाभाविक ही था कि कर्पूरी ठाकुर इस काम के लिए तत्काल राजी हो जाएं। इस काम के लिए गांधी शांति प्रतिष्ठान से गांध
 
Surendra Kishore
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कैसे बदला तीन ही महीने में मतदाताओं का मूड !

मात्र तीन महीने में ही बिहार की राजनीति में क्या कुछ घट गया कि मतदाताओं का मूड ही बदल गया ? क्यों बिहार विधानसभा के इस सितंबर के उप चुनाव में 18 सीटों में से 13 सीटों पर राजग हार गया ? क्या यह बदला हुआ मूड एक बार फिर बदलेगा या यह मूड अगले साल तक कायम
 
Surendra Kishore
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बटाईदारी विवाद व उप चुनाव

अपनी जमीन बटाई पर देकर खेती कराने वालों की ताजा नाराजगी के समक्ष लगता है कि नीतीश सरकार सहम सी गई है।इस नाराजगी ने तो हाल के बिहार विधान सभा उप चुनावों में राजग को बड़ा झटका दे दिया है। आगे के लिए भी खतरा मौजूद है। जानकार सूत्र बताते हैं कि किसानों की इस
 
Surendra Kishore
Sep 26 2009 08:37 PM
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बंटवारे के लिए मौलाना आजाद की नजर में नेहरू जिम्मेदार

मिस्टर जिन्ना सन् 1946 के आरंभ में अखंड भारत के लिए तैयार हो गये थे, पर उसी साल के मध्य में जवाहर लाल नेहरू ने एक ऐसा बयान दे दिया कि जिन्ना ने डायरेक्ट एक्शन का नारा देकर पाकिस्तान बनवा लिया। यह बात आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद ने लिखी
 
Surendra Kishore
Aug 22 2009 12:24 PM
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‘आजादी लाओ’ से ‘आजादी बचाओ’ तक का सफर

स्वतंत्रता सेनानियों ने दशकों पहले अपना ‘आज’ न्योछावर करके हमारे ‘कल’ के लिए आजादी की बेजोड़ जंग छेड़ी थी। तभीे हम 62 साल पहले आजाद हुए। पर, इतने साल में हमारे सत्ताधारी व प्रतिपक्षी नेताओं ने इस देश के साथ क्या-क्या किया? कैसा सलूक किया? देश के लिए कितना
 
Surendra Kishore
Aug 19 2009 12:53 AM
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जस की तस धर दीनी चदरिया

‘जस की तस धर दीनी चदरिया।’डी.एन.गौतम जब आज रिटायर हो रहे हैं तो कबीर की उपर्युक्त उक्ति सहसा याद आ रही है।काश इस लोकतंत्र में अफसर के बदले नेता के लिए इस उक्ति का ं अक्सर इस्तेमाल करने का मुझे अवसर मिलता !ऐसा होता तो मुझे और भी अच्छा लगता। बिहार के एक
 
Surendra Kishore
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काठ की हांडी फिर चढ़ा रहे हैं लालू

कभी के राजनीतिक महाबली लालू प्रसाद को इस बार लोक सभा की पिछली बंेच पर जगह दी गई है। बिहार की राजनीति में तो वे पहले ही पिछली कतार में पहुंच चुके हैं।क्या वे फिर कभी पहले की तरह राजनीति की अगली कतार में पहुंच पायेंगे ? खुद लालू प्रसाद ने पिछले महीने ही
 
Surendra Kishore
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Melting iceberg of vote banks politics in Bihar

Not only the ice on the north pole of the earth, the iceberg of vote bank politics in Bihar is also melting slowly .It is due to the new type of social engineering of the engineer turned politician chief minister Nitish kumar.It is being done through the
 
Surendra Kishore
Jun 09 2009 07:54 PM
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लालू-पासवान के बिना कांग्रेस का पुनर्जीवन मुश्किल

कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश और बिहार पर विशेष ध्यान देगी। इससे बिहार के कांग्रेसी उत्साहित हैं। आनेवाले दिनों में शायद राहुल गांधी बिहार में सक्रिय भी हों। पर यहां कांग्रेस के विकास की गुंजाइश काफी सीमित है। यहा
 
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बिहार में एक भिन्न व नई राजनीतिक संस्कृति की जीत

बिहार में लोकसभा का चुनाव दो दलों या दो नेताओं के बीच का चुनाव नहीं, बल्कि दो परस्परविरोधी राजनीतिक संस्कृतियों के बीच का चुनाव था। बिहार के मतदाताओं ने नीतीश कुमार की राजनीतिक संस्कृति पर मुहर लगायी है और लालू-रामविलास की पुरानी संस्कृति को बुरी तरह
 
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एक विदेशी बैंक में भारत के खरबों डूबने की कहानी

यह कथा बिहार के दरभंगा की है। यह नीदरलैंड के एक बैंक में 77 अरब रुपए डूबने की कहानी है। यह धन दरभंगा के मोहम्मद मोहसिन का था। यह कहानी सन् 1984 में दरभंगा के ही एक शिक्षक वैद्यनाथ मिश्र ने इन पंक्तियों के लेखक को सुनाई थी। वे उस धन को निकालने की कोशि
 
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आज के जार्ज को पुराना जार्ज कभी याद भी आता है ?

इतिहास की स्लेट पर लिखे अपनी गौरव-गाथा को कोई महान नेता खुद ही अपने हाथों से मिटाने या धुंधला करने लगे, तो उसे क्या कहा जाएगा ? ऐसे नेता का नाम आज बुझा- बुझा जार्ज फर्नांडीस है, जिसे कभी ‘अगिया बैताल’ का दर्जा हासिल था। उनके नाम से पहले महान शब्द का
 
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जार्ज का एक वो भी जमाना था, एक ये भी जमाना है !

हाल में जार्ज फर्नांडीस और उनके समर्थक खुद जार्ज के लिए जदयू से एक अदद चुनावी टिकट के लिए जद्दोजहद कर रहे थे । यह दयनीय दृश्य देखकर कुछ पुराने लोगों को उनका सन् 1977 का उनका वह गौरवपूर्ण जमाना याद आ गया । तब उन्हें मुजफ्फर पुर की जनता ने 3 लाख 34 हजा
 
Surendra Kishore
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सब्सिडी का सदुपयोग

जदयू ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में सब्सिडी और ‘एक साथ चुनाव’ के बारे में वायदा किया है। जदयू ने कहा है कि यदि उसे केंद्र में सत्ता मिली, तो सब्सिडी प्राप्त करनेवालों की एक ही बार विस्तृत सूची बना कर बैंक के माध्यम से उनके खाते में पैसे जमा कराए जाएंगे
 
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आपातकाल याद है मेनका जी ?

अपने पुत्र वरुण गांधी को लेकर मेनका गांधी बहुत परेशान हैं। परेशानी स्वाभाविक ही है। उन्होंने कहा है कि मायावती मां होतीं तो दर्द समझतीं। पर, आपातकाल में तो कई पुत्रों के साथ -साथ कई माताओं को भी अपार जेल -पीड़ा भुगतनी पड़ी थीं। याद है मेनका जी ? तब इस
 
Surendra Kishore
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कारण भले जूता हो, पर कांग्रेस में कुछ लोकलाज तो है!

दिल्ली के एक पत्रकार ने गृह मंत्री पी.चिदम्बरम की ओर जूता उछाला और कांग्रेस ने विवादास्पद जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार के चुनावी टिकट एक ही झटके से काट दिये। दूसरी ओर, एक जूता कौन कहे, इस देश में कुछ दल ऐसे भी हैं कि उनके नेताओं पर चार जूते भी उछाले ज
 
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भारतीय खातेदारों के नाम बताने को तैयार है विदेशी बैंक का बर्खास्त कर्मचारी

उस बैंक का एक बर्खास्त कर्मचारी एक विदेशी बैंक के गुप्त खातेदारों के नाम -पते बताने को तैयार है।फिर भारत सरकार क्यों उस कर्मचारी से मदद लेने को तैयार नहीं है ? हालांकि मदद लेने की शर्त यही है कि भारत सरकार को उसके बदले में कुछ धन खर्च करने पड़ेंगे। खब
 
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सुप्रीम कोर्ट उम्मीद की आखिरी किरण

सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त के मामले में जो फैसला किया है,उससे इस देश के लोकतंत्र के प्रति शांतिप्रिय लोगों की उम्मीद बंधती है। अन्यथा,तो बुद्ध और गांधी के इस देश की सबसे बड़ी पंचायत को बाहुबलियों और उनके परिजनों का अड्डा बनाने पर इस देश के अधिकतर नेता
 
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बेहतर उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी अब मतदाताओं पर

अब गेंद एक बार फिर मतदाताओं के ही पाले में है। इस देश के नेताओं और दलों ने एक बार फिर अपना ही सर्वदलीय वादा भुला दिया है। आजादी की स्वर्ण जयंती के अवसर पर सन् 1997 में संसद के भीतर देश से यह सर्वदलीय वादा किया गया था कि ‘राजनीति का अपराधीकरण और भ्रष्
 
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लोकतंत्र -सह -राजतंत्र

मिश्रित अर्थव्यवस्था के साथ- साथ इन दिनों भारत में ‘मिश्रित शासन- व्यवस्था’ भी चल रही है। यानी लोकतंत्र -सह -राज तंंत्र के यहां एक साथ दर्शन हो रहे हैं। अगले लोकसभा चुनाव में एक बार फिर इस ‘डाइनेस्टिक डेमोक्रेसी’ का और भी नंगा स्वरूप सामने आनेवाला है
 
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निर्णायक चुनाव

वैसे तो लोकसभा का हर चुनाव महत्वपूर्ण हुआ करता है। कई बार देश के लिए निर्णायक भी। पर, अगले लोकसभा चुनाव का मतदान -नतीजा इस देश और प्रदेश के लिए सर्वाधिक निर्णायक साबित होनेवाला है। अगला चुनाव -नतीजा न सिर्फ कुछ नेताओं और दलों के लिए निर्णायक साबित हो
 
Surendra Kishore
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एक सुदूर गांव में बिजली

मेरे गांव में इस महीने बिजली पहुंच गई। लोगबाग खुश हो रहे हैं। इलाके के एक प्रमुख व्यक्ति ने तो इसे जादू कहा। खुश होना स्वाभाविक ही है। गत दो साल के भीतर ही दिघवारा (सारण, बिहार) से उत्तर स्थित मेरे गांव तक जानेवाली ग्रामीण सड़क भी प्रधानमंत्री सड़क य
 
Surendra Kishore
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पर्यावरण,सरकार और मीडिया

पर्यावरण संतुलन कायम रखने में इस देश की सरकारें पूरी तरह विफल रही हैं। पर्यावरण संतुलन बिगड़ते जाने की इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए अब मीडिया का एक हिस्सा इस ओर पहले की अपेक्षा अधिक ध्यान देने लगा है। यह खुश खबरी है। ‘डाउन टू अथर्’’ पत्रिका की स
 
Surendra Kishore
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राजनीति में एक और प्रयोग

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल कहा कि ‘हम रहेंगे या भ्रष्टाचार ।’ अपनी ही सरकार के भ्रष्ट लोगों के खिलाफ नीतीश कुमार की जारी जंग को देख कर सन् 1969 की इंदिरा गांधी और 1990 के लालू यादव की जंगों की याद आती है। इन नेताओं ने भी तब अलग- अलग तरह से जंग की
 
Surendra Kishore
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नेता, अभिनेता, बाबा और बाहुबली

जनता दल यू के अध्यक्ष शरद यादव ने बाबाओं, अभिनेताओं और व्यापारियों के राजनीति व संसद में बढ़ते दखल का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। इसके लिए उन्होंने अपने सहयोगी दल भाजपा को दोषी ठहरा दिया है। ऐसा करके उन्होंने एक नई बहस छेड़ दी है। बहस अपनी जगह पर
 
Surendra Kishore
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कहां से आए नया दल नया नेता

इस देश में एक नए दल और नए नेतृत्व की जरूरत तीव्रता से महसूस की जा रही है। ऐसा दल जो आर्थिक मामलों में गरीबपक्षी हो, पर देश की एकता - अखंडता को लेकर राष्ट्रवादी हो। कम्युनिस्ट गरीबपक्षी हैं, तो देश की सुरक्षा को लेकर वे लापारवाह हैं। उनमें अंतरराष्ट्र
 
Surendra Kishore
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पड़ोसी -निरपेक्ष शहरी जीवन

आज सुबह सोकर उठा, तो देखा कि मेरा फोन कई दिनों के बाद एक बार फिर ‘डेड’ हो गया। आशंका थी कि संभवतः गत रात में भी किसी उदंड ट्रक ड्रायवर ने फोन के तार की परवाह किए बिना गाड़ी दौरा दी होगी। घर से बाहर निकला, तो दूर से ही यह लग गया कि तार फिर टूटा हुआ है
 
Surendra Kishore
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राजनीति नहीं, जन-धन की चिंता

इस देश के कई बड़े उद्योगपति इन दिनों नरेंद्र मोदी के इतने बड़े प्रशंसक कैसे हो गये, जबकि व्यापारीगण आम तौर पर उस नेता की तरफ अधिक मुखातिब होते हैं, जिसकी सरकार केंद्र में होती है। यदि इस देश के कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारी नरेंद्र मोदी को अगले प्रध
 
Surendra Kishore