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18 Jun 2010
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हकार.... बाबा नागार्जुन के गांव से -

साहित्य की प्रगतिशील धारा के प्रतीक पुरुष बाबा नागार्जुन आज नहीं हैं लेकिन उनकी महान विरासत हमारे साथ है। बिहार के मिथिलांचल का एक गांव तरौनी इसलिए धन्य है कि वहीं नागार्जुन जैसे दुर्धर्ष कवि का जन्म हुआ था। उसकी रचनाओं में वहाँ की मिट्टी, पानी और हवा के
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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देश व समाज के प्रति लेखकों की चिंता घटीः अरुण कमल

समकालीन साहित्यिक तथा सामाजिक परिदृश्य विषय पर विचार-गोष्ठीदेश और समाज के प्रति लेखकों की चिंता घटी है। पहले लेखक सांप्रदायिकता, हत्या, बलात्कार, मंहगाई, बेरोजगारी के खिलाफ सड़क पर उतरते थे लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। वहीं ऐसे विषयों पर लेखकों के बयान
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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तुम इतने समीप आओगे मैंन कभी नहीं सोचा था......- डा. बुद्धिनाथ मिश्र मधेपुरा में।

मधेपुरा की ऐतिहासिक साहित्यिक परम्परा को सम्वर्द्धित करते हुए बी. एन मंडल विश्वविधालय, मधेपुरा के वर्तमान कुलपति डा. आर. पी. श्रीवास्तव के सद्प्रयास से विश्वविधालय के सभागार में काव्य संध्या का एक महत्वपूर्ण आयोजन किया गया। विश्वविधालय स्थापना के 17
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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आलोक श्रीवास्तव और प्रेम भारद्वाज को लाला जगतज्योति प्रसाद सम्मान

चर्चित युवा ग़ज़लकार आलोक श्रीवास्तव और मासिक पत्रिका ‘पाखी’ के संपादक प्रेम भारद्वाज को वर्ष 2010 का लाला जगतज्योति प्रसाद सम्मान दिया जाएगा। साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय युवाओं को दिया जाने का यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रतिवर्ष 4 अप्रैल को
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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डा. विजय बहादुर सिंह, संपादकः ‘वागर्थ’ सम्मानित करेंगे शायर एवं ‘आजतक’ न्यूज चैनल के प्रोड्यूसर आलोक श्रीवास्तव और ‘पाखी’ पत्रिका के संपादक प्रेम

4 अप्रैल 2010 को लाला जगत ज्योति प्रसाद की बारहवीं पुण्य तिथि पर समकालीन साहित्य मंच, मुंगेर द्वारा सम्मान समारोह सह रचना पाठ का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डा. विजय बहादुर सिंह, संपादक - ‘वागर्थ’ कोलकाता उपस्थित रहेंगे। विशिष्ट
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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अदब की अग्नि आभा है हिन्दी की अन्यतम रचनाकार नासिरा शर्मा

नासिरा शर्मा का साहित्य जहाँ इलाहाबाद से ईरान तक फैला है, वहीं इनकी शख्सि़यत का दायरा भी अगम अपार है। पटना से प्रकाशित ‘राष्ट्रीय प्रसंग’ का ताजा अंक का विशिष्ठ आकर्षण है समकालीन कथा साहित्य के चर्चित हस्ताक्षर नासिरा शर्मा। वह एक साथ -‘मरजीना का देश
 
अरविन्द श्रीवास्तव
Mar 18 2010 06:39 PM
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आज ‘हिन्दुस्तान’ दैनिक (रविवार रीमिक्स) में प्रकाशित अपनी तीन कविताएँ ब्लॉगर मित्रों के लिएः-

विरासतअर्सा गुजर गयाजमींदोज हो गये जमींदार साहबबहरहाल सब्जी बेच रही है साहब की एक माशूकाउसके हिस्से स्मृतियों को छोड. कोई दूसरा दस्तावेज नहीं है                        
 
अरविन्द श्रीवास्तव
Mar 07 2010 01:05 PM
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सआदत हसन मंटो की लघुकथाएं

कम्युनिज्मवह अपने घर का तमाम जरूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था कि रास्ते में लोगों ने उसे रोक लिया । एक ने ट्रक के सामान पर नजर डालते हुए कहा, ‘‘देखो यार, किस मजे से इतना माल अकेला उड़ाये चला जा रहा है।’’ समान के मालिक ने कहा, ‘‘जनाब माल
 
अरविन्द श्रीवास्तव
टैग: मंटो
Mar 04 2010 04:56 PM
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अरुणाचल को समझने का बेजोड़ प्रयास है ‘जनपथ’ का ताजा अंक

 तीन अन्तराष्ट्रीय सीमाओं - तिब्बत (चीन) भूटान और वर्मा से घिरे अरुणाचल प्रदेश को जानने-समझने का जो प्रयास ‘जनपथ’ ने किया है वह स्तुत्य है। अरुणाचल की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत के विविध दृश्यों को प्रस्तुत कर जनपथ ने हमारी जिजीविषा को एक सशक्त मुकाम
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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बिहार प्रगतिशील लेखक संघ, पटना इकाई द्वारा एकल काव्य-पाठ का आयोजन

17 जनवरी 10 को राज्य प्रलेस कार्यालय- केदार भवन, पटना में काव्य-पाठ का अवसर मिला, जिसकी चर्चा दैनिक जागरण, पंजाब केसरी एवं आज आदि समचार पत्रों में की गयी। कवि शहंशाह आलम एवं योगेन्द्र कृष्णा की उपस्थिति तथा कड़ाके की ठंढ. में श्रोताओं की मौजुदगी ने पटना
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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चर्चा में..

वक्त बूँदों के उत्सव का था बूँदें इठला रही थी गा रही थीं बूँदें झूम - झूम कर थिरक रही थीं पूरे सवाब में दरख्तों के पोर - पोर को छुआ बूँदों ने माटी ने छक कर स्वाद चखा बूँदों का रात कहर बन आयी थी बूँदे सबेरे चर्चा में बारिश थीं बूँदें नहीं ! - अरविन्द
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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कोसी: प्रलय के एक वर्ष-

आज ही के दिन १८ अगस्त २००८ को कोसी के कहर ने हजारों लोगों की जानें ली, लाखों बेघर, तवाह और बर्बाद हुए , क्षण भर में राजा रंक बन गए | उत्तर बिहार के मधेपुरा, अररिया, पुर्णिया, सुपौल, कटिहार, सहरसा जिले में महज एक वर्ष पहले बरबादी का जो मंजर दिखा वह कि
 
अरविन्द श्रीवास्तव
Dec 29 2009 11:53 AM
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आज ‘हिन्दुस्तान’ दैनिक में प्रकाशित कविता की कुछ पंक्तियाँ ब्लोगर मित्रों को सप्रेम....

आज 20 दिसम्बर’09 को हिन्दुस्तान दैनिक (रीमिक्स) पटना, मुजफ्फरपुर एवं भागलपुर संस्करण  में प्रकाशित अपनी कविता ‘अफसोस के लिए कुछ शब्द’ की कुछ पंक्तियाँ ब्लोगर मित्रों को सादर भेंट कर रहा हूँ.... प्रतिक्रिया अपेक्षित । ...... हमें बातें करनी थी पत
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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‘जनपथ’ ने जारी किए पाब्लो नेरूदा, लैंग्स्टन ह्यूज, सनन्त तांती और के. सच्चिदानंदन की अनुवादित कविताओं के चार अंक

समय चेतना की मासिक पत्रिका ‘जनपथ’ ने अपने चार अंक- अगस्त से नवम्बर 09 के लिए समकालीन कविता जगत से विश्व प्रसिद्ध हस्तियों यथा पाब्लो नेरूदा की - जब मैं जडों के बीच रहता हूँ, लैंग्स्टन ह्यूज की- आँखें दुनिया की तरफ देखती हैं, सनन्त तांती की - नींद में
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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मैथिली कथा गोष्ठी ‘सगर राति दीप जरय’ का 68 वाँ आयोजन

मै थिली की त्रैमासिक कथा गोष्ठी ‘सगर राति दीप जरय’ का 68 वाँ आयोजन ‘कथा विप्लव-2’ के नाम से 5 दिसम्बर 09 को सुपौल के व्यपार संध में होगा । इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के मैथिली कथाकार अपनी-अपनी कहानियों का पाठ करेंगे एवं विद्वान समीक्षकों द्वारा
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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साहित्य से क्यों ओझल होता जा रहा ग्राम्यांचल? साहिती सारिका का ताजा अंक

साहिती सारिका का ताजा अंक (जुलाई-दिसम्बर) यह इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि गीतकार मार्कण्डेय प्रवासी और नवगीतकार सत्यनारायण के कविता और आलोचना पर बेवाक विचार पाठकों को सोचने पर विवश कर देते हैं । सत्यनारायण ने आलोचना के दायित्वों को रेखांकित करते
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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कविता कभी मरेगी नहीं, अपनी भूमिका खुद तय करेगी- अरुण कमल

अफसोस के लिए कुछ शब्द’ का लोकार्पण समारोह प्रगतिशील लेखक संध, पटना इकाई द्वारा आयोजित लोकार्पण सह कवि-सम्मेलन समारोह में बहुचर्चित कवि अरुण कमल ने कहा कि पुस्तक के लेखक अरविन्द श्रीवास्तव ने इस समय हो रहे हर बुरे कार्यों की आलोचना की है । अरविन्द ने
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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पटना में प्रलेस का लोकार्पण सह कवि-सम्मेलन कार्यक्रम

हकार...   प्रगतिशील लेखक संघ पटना इकाई कविवर कन्हैया कक्ष, केदार भवन (जनशक्ति परिसर), अमरनाथ रोड, पटना-800 001 लोकार्पण सह कवि-सम्मेलन  लोकार्पणः    पुस्तक ‘अफसोस के लिए कुछ शब्द‘  ‘   लेखक- अरविन्द श्रीवास्तव
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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सोवियत साम्यवादी सत्ता दरकने के दंश कहाँ है प्रगति प्रकाशन! रादुगा प्रकाशन!

सोवियत साम्यवादी सत्ता दरकने के लगभग बीस वर्ष हो चुके हैं। इस अन्तराल में जो सांस्कृतिक रिक्तता भारत और भारत सदृश्य विकासशील राष्ट्रों में आयी है, उसे खुलकर नहीं तो अन्दर ही अन्दर एक मुकम्मल पीढ़ी महसूस रही है। कहाँ है सस्ते साहित्य का जखीरा! साहित्य
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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’राइफल’ एक छोटी कविता

राइफलें जो किसी पत्ते की खड़खड़ाहट कि दिशा में तड़-तड़ा उठी थीं और किसी संकट को टाल देने की विजय मुद्रा में चाहता था राइफलधारी मुस्कुराना जिसे बड़े ही ध्यान से देख रहा था पत्ते की ओट से एक चूहा ! -अरविन्द श्रीवास्तव , मधेपुरा
 
अरविन्द श्रीवास्तव
टैग: राइफल
Oct 14 2009 07:52 PM
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एक खामोश कवि की अग्नि-ऋचाएँ

नई पीढ़ी. के कवियों में राकेश प्रियदर्शी ने अपनी काव्यात्मक सोच और धार की बदौलत समकालीन कविता जगत में अपनी पहचान कायम की है। उनकी नवीनतम कृति ‘इच्छाओं की पृथ्वी के रंग’ में एक संवेदनशील दृष्टि के साथ मानवीय चिंताओं के प्रति बेचैनी और छटपटाहट स्पष्ट द
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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डा.नामवर सिंह करेंगे बिहार प्रलेस राज्य कार्यालय का उद्‍घाटन

बिहार प्रगतिशील लेखक संध का राज्य कार्यालय ( अमरनाथ रोड, जनशक्ति भवन के पीछे, पटना ) का उद्‍घाटन प्रसिद्ध आलोचक एवं प्रगतिशील लेखक संध के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.नामवर सिंह 25 सितम्बर 09 को 12 बजे करेंगे। स्मरणीय है कि अबतक बिहार प्रलेस का राज्य कार्यालय
 
अरविन्द श्रीवास्तव
Sep 26 2009 09:45 PM
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नामवर सिंह ने किया बिहार प्रलेस कार्यालय का उद्‍घाटन

25.09.2009 बिहार प्रगतिशील लेखक संध के लिए एक महत्वपूर्ण दिवस रहा जब वरिष्ठ आलोचक व प्रलेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नामवर सिंह ने पटना स्थित केदार भवन, जनशक्ति परिसर, अमरनाथ रोड में प्रलेस कार्यालय का उद्‍घाटन किया । कार्यालय कक्ष का नाम ‘कविवर
 
अरविन्द श्रीवास्तव
Sep 26 2009 08:01 PM
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जनपथ के कुछ शब्द

’जनपथ’ समय-चेतना का मासिक आयोजन. संपादक- अनंत कुमार सिंह. मो.-09431847568 यीशु वसोक्रेटेस भले लोग थेफिर भी मारे गयेमुझे भला नहीं बनना। - मलयालम कवितातुम्हारी आग के खिलाफ हमने पानी का खासा इंतजाम किया है..... - शीन हयात, कथाकारमुझे यह भी लगा कि दिल्ली
 
अरविन्द श्रीवास्तव
Aug 29 2009 09:14 PM
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पश्चिम से-

लाये थे वेपश्चिम सेएच-1, एन-1 (स्वाइन फ़्लू) वायरसफिर लायेंगे वे हीपश्चिम से इसकी दवातबफर्क सिर्फ यही रहेगादवा के बदले वसूलेगा पश्चिम मोटी-मोटी रकम !-अरविन्द श्रीवास्तव, मधेपुरा
 
अरविन्द श्रीवास्तव
Aug 23 2009 02:12 AM
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हबीब तनवीर के अवदान पर बिहार प्रलेस की गोष्ठी

हबीब तनवीर ने भारतीय रंगमंच का चेहरा ही बदल डाला। वह एक रंगयोद्धा की तरह जीते रहे। उन्होनें अपने नाटकों के जरिए एक नया और भिन्न परिवेश को रखा एवं प्रगतिशील सांस्कृतिक आन्दोलन को सक्रिय भी किया। ये बातें रंगकर्मी जावेद अख्तर ने पटना के मैत्री-शांति भवन
 
अरविन्द श्रीवास्तव
Aug 05 2009 11:24 AM
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सृजन पथ का नया अंक-

सृजन पथ-7 (कविता अंक) नयी साज-सज्जा व आकर्षक कलेवर में उपलब्ध है। डा.परमानन्द श्रीवास्तव, नरेन्द्र पुण्डरीक एवं योगेन्द्र कृष्णा ने अपने विचारों में आधुनिक हिन्दी कविता की गतिविधियों का गहन परिवेक्षण किया है। आज की कविता को समाज के साथ तादात्म स्थापित
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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तानाशाह

सुनता है तानाशाह टैंकों की गरगराहट में संगीत की धुन फेफड़े को तरोताजा कर जाती है बारुदी धुएँ उन्हें नींद लाती है धमाकों की आवाज तानाशाह खाता है गाता है और मुस्कुराता है तानाशाह जब मुस्कुराता है लोग जुट जाते है मानचित्रों पर किसी तिब्बत की तलाश में ! -
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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महामहिम राष्ट्रपति को दी गयी मधेपुरा के साहित्यकार की पुस्तक

कोसी अंचल के वरिष्ट साहित्यकार श्री हरिशंकर श्रीवास्तव ’शलभ’ के गवेष्णात्मक एवं शोधात्मक पुस्तक "मंत्रद्राष्टा ऋष्य श्रृंग " की प्रति महामहिम राष्ट्रपति श्री मती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को नोएडा (दिल्ली) के सिखवाल समाज के युवकगण ने भेंट की, ज्ञातव्य ह
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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जनकवि बाबा नागार्जुन के जन्मदिवस पर

एक छोटी-सी, साहित्यिक यात्रा जनकवि बाबा नागार्जुन के जन्मदिवस पर दरभंगा से मिले आमंत्रण के क्रम में पटना से कवि शहंशाह आलम के साथ मुजफ्फरपुर पहूँचा, वहां प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा कवियत्री पूनम सिंह के आवास पर हमलोगों के सम्मान में काव्य-संध्या का आय
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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अलविदा हबीब तनवीर…

भारतीय रंगमंच के सबसे बड़े शख्सियत का खामोश हो जाना किसी सदमे से कम नहीं है, जनता के बीच जनता की आवाज बनकर वे सदियों-सदी दिल में बनें रहेंगे… हबीब साहब के साथ बिताये पल को याद करते हुए, उन्हें नम आँखों से नमन करता हूँ। तस्वीर र्में हबीब तनवीर के साथ अ
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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‘परिकथा’ का यह अंक…

परिकथा , अंक- मई-जून,(संपादक-शंकर, 96,बेसमेंट, फेज III इरोज गार्डन, सूरजकुंड रोड, नई दिल्ली-110044 मोबाइल-09431336275) इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि किसी साहित्यिक पत्रिका के लिए बीस अंकों का लंबा सफर तय करना, आज दुस्साहसिक कदम-सा है। हम इसे साहित्य के ल
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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शहंशाह ने दिया तोहफ़ा

अभी सप्ताह भर पटना में रहा, छोटी सी मुलाकात में शहंशाह आलम ने अपनी नयी पुस्तक ‘ अ च्छे दिनों में ऊँटनियों का कोरस’ भेंट किया। इसके पूर्व उनकी दो अन्य संग्रह प्रकाशित हो चुकी है, ’गर दादी की कोई खबर आए’(1993) और ‘अभी शेष है पृथ्वी राग’ (1995)। अभी प्र
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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पटना से आयीं दो पुस्तकें

जहाँ देश के कुछ बड़े नगर बतौर साहित्यिक मंडी में तब्दील हो रहे हैं, बिहार की राजधानी अपनी उर्वर साहित्यिक परंपरा का निर्वाह करते हुए 'मंडीकरन' की होड़ से खुद को बचाए रखा है। यहां से अभी प्रकाशित दो पुस्तकें क्रमश: बुतों के शहर में (कविता संग्रह) और दोआ
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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विवशता

वह धीरे से सरका करीब आया हल्की मुस्कान के साथ दबी किन्तु सख्त जुबान मे बोला- ' स्मैक लोगे ?' मै कहता नहीं तो भी मुझे लेना पड़ता । -अरविन्द श्रीवास्तव , मधेपुरा
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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संकट टला नहीं है

संकट टला नहीं है सटोरियों ने दाँव लगाने छोड़ दिये हैं चौखट के बाहर अप्रिय घटनाओं का बाजार गर्म है खिचड़ी नहीं पक रही आज घर में बंदूक के टोटे सड़कों पर बिखरे पड़े हैं धुआँधार बमबारी चल रही है बाहर समय नहीं है प्यार की बातें करने का कविता लिखने, आँखे चार क
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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चिड़ियाँ

चिड़ियों का हौसला देखिए वो चाहे जहाँ आ-जा सकती है सवर्णों के कुओं पर पानी पीती है हरिजनों के घरों के दाने चुगती है हम ऐसा कुछ भी तो नहीं कर सकते ऐसा करने के लिए हममें चिड़ियों-सा हौसला चहिए । - शहंशाह आलम युवा कवि शहंशाह आलम की कविताओं का एकल काव्य-पाठ
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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एक मृत सर्प का बयान

मारा गया मुझे खदेड़ कर घेर कर मारा गया मुझे बीहड़ों में पुलिस मुठभेड़-सा सड़कों पर किसी दुर्घटना-सा घरों में स्टाइल बदल-बदल कर मारा गया मुझे मरते वक्त सुना मैने शस्त्र सज्जित मेरे हत्यारे कह रहे थे- यह खतरनाक जाति का है बिल्कुल विषैली प्रजाति का है !
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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मामूली आदमी का धोषण पत्र

मामूली आदमी हूँ असमय मरुँगा तंग गलियों में संक्रमण से सड़क पार करते हुए वाहन से कुचल कर या पुलिस लाक अप में माफ करना मुझे अदा नहीं कर सकूँगा मैं अपना पोस्टमार्टम खर्च । - अरविन्द श्रीवास्तव
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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जनशब्द

अंगूठे बताओ, कहाँ मारना है ठप्पा कहाँ लगाने हैं निशान तुम्हारे सफेद - धवल कागज पर हम उगेंगे बिल्कुल अंडाकार या कोई अद्भुत कलाकृति बनकर बगैर किसी कालिख, स्याही और पैड के अंगूठे गंदे हैं मिट्टी में सने है आग में पके हैं पसीने की स्याही में। - अरविन्द श
 
arvind srivastava