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08 Mar 2010
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गम नहीं वहाँ

गम नही वहाँ जहाँ हो अफसाना आपकाखुशियाँ वहाँ ढूंढती है हर पल आशियाना आपकाआप उदास न होना कभी क्योकि ,बहुत अच्छा लगता है हमें मुस्कराना आपका एक लहर को प्यार था किनारे से ,पर उसकी शादी हो गयी सागर सेकिनारे की प्रीत लहर को खिंच लाती है ,पर बदनाम न हो मोहब्बत
 
संजय तिवारी ’संजू’
टैग: poem
Feb 19 2010 05:45 PM
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टुकड़े टुकड़े अहसास: बस यूँ ही, नहीं कुछ खास!!

-१-अश्क उनकी आखों के करीब होते है ,रिश्ते र्दद के जिनको नसीब होते है!दौलत दिल की जिसने लुटाई हो ,कोन कहता है वो गरीब होता है॥ -२-अपने दामन मे भी कुछ अश्क बचा कर रखोजाने कोन कब मोहब्बत की निशानी मागें।-३- जिन्दगी से यूँ चले है इल्जाम लेकरबहुत जी चुके हम
 
संजय तिवारी ’संजू’
Feb 11 2010 05:11 PM
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मेरा पता?

मैंआज अपने आप सेपूछता हूँ...बतामेरा पता क्या है??-संजू
 
संजय तिवारी ’संजू’
टैग: कविता
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मोह्ब्बत को मजबूरी का नाम मत देना ।

मोह्ब्बत को मजबूरी का नाम मत देना । हकीकत कॊ हाद्सॊ का नाम मत देना । अगर दिल मे प्यार हॊ किसी के लिये , तो उसे दोस्ती का नाम मत देना ।
 
संजय तिवारी ’संजू’
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समीर लाल जी ने चिट्ठी भेजी है...

समीर लाल जी , आप सब के उड़न तश्तरी और हमारे जबलपुरियों के चाचा. आज बहुत बार खत लिखने के बाद बस एक कविता से जबाब दे गये. मैं तो समीर चाचा के साथ बचपन से रहा हूँ हमेशा. फिर चाहे वो उनका दफ्तर रहा हो, राजनितिक मंच या पारिवारिक काम , मैं हमेशा साथ रहा. उन
 
संजय तिवारी ’संजू’
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हकीकत मे जीना आदत बन जाती है .

हकीकत मे जीना आदत बन जाती है . खवाब कि दुनिया बेरंग नजर आती है । कोई इंतजार करता है जिन्दगी के लिये, और किसी की जिन्दगी इंतजार मे गुजर जाती है ।
 
संजय तिवारी ’संजू’
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लम्बी उडान

लम्बी उडान से अपने घोसले मे लौटी'चिडिया से उसके बच्चो ने पूछा मां ’आस्मान कितना बडा है ? चिडिया ने बच्चो को पंखों मे समेटे’हुए कहा सो जाओ मेरे बच्चो वो,मेरे पंखॊ से छॊटा है । IT IS REALITY NOTHING INUNIVERSE IS BIGGER THAN d SHELTER OF A MOTHER`S
 
संजय तिवारी ’संजू’
Sep 22 2009 11:07 AM
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जिदंगी

जिदंगी को ऎसी कलपना समझॊ ,रात कॊ सच सुबह कॊ सपना समझो ।भुलाना चाह्ते हो अगर सभी जख्मो को,तो जिंदगी मे किसी को अपना समझॊ ।
 
संजय तिवारी ’संजू’
Sep 16 2009 10:45 AM
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कितना मुश्किल है,

दिल के र्दर्द को छुपाना कितना मुश्किल है,टूट कर फिर मुस्कराना कितना मुश्किल है ।किसी के साथ दूर तक जाओ ,फिर अकेले आना कितना मुश्किल है
 
संजय तिवारी ’संजू’
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उस अजनबी क यू ना इंतजार करो

उस अजनबी क यू ना इंतजार करो,इस आशिक दिल का ना एतबार करॊ ।रोज निकला करे किसी की याद में आसूं ,इतना कभी किसी से प्यार ना करॊ ।
 
संजय तिवारी ’संजू’
Sep 14 2009 12:00 PM
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ये हकीकत है

ये हकीकत है कही खवाब तो नही,हमे कोई याद करे ऎसी कोई बात नही ।फिर भी ना जाने क्यू एह्सास हुआ,जैसे किसी ने याद किया वो आप तॊ नही ।
 
संजय तिवारी ’संजू’
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अब उदास होना भी अच्छा लगता है

अब उदास होना भी अच्छा लगता है ,किसी का पास होना भी अच्छा लगता है ,मै दूर रह कर किसी कि यादो मे हू ,यह अह्सास भी होना अच्छा लगता है ।
 
संजय तिवारी ’संजू’
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संदेशा

कितनो की तकदीर बदलनी है |कितनो को सही रास्ते पर लाना है|अपनी हाथ की लकीरॊ कॊ मत देखो |तुम्हे तो लकीरो से भी आगे जाना है |हमारे आंसू पोछ कर वो मुस्कराते है|अपनी इसी अदा से बो दिल को चुराते है|हाथ उनके छू जाये हमारे चेहरे को|इसी उम्मीद मेहम बार बार खुद को
 
संजय तिवारी ’संजू’
Jul 28 2009 03:37 PM
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समीर लाल ’उड़नतश्तरी’ जी नवगीत की पाठशाला में

अपने समीर लाल जी का गीत ’द्वारचार कर जाती गरमी’ नवगीत की पाठशाला में प्रकाशित हुआ है. गीत के बोल, उसके भाव और प्रवाह प्रभावित करता है. समय मिले, तो जरुर पढ़ें और कोई गुनगुना सके तब तो आनन्द ही आ जायेगा. समीर लाल जी समीर लाल जी के नित नये रंग देखने मिल
 
संजय तिवारी ’संजू’
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आइये आपको दिखाये कुछ नया

आइये आपको दिखाये कुछ नया ये वीडियो मुझे मेरे दोस्त ने भेजा है मै आप सब को कुछ दिखाना चाहता हू शायद आपको पसंद आये तो अपनी राय से अवगत कराये
 
संजय तिवारी ’संजू’
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अहसास की रचनाऐं: बिखरे मोती: समीर लाल- समीक्षा: विवेक रंजन श्रीवास्तव ’विनम्र’

पुस्तक समीक्षा कृति: बिखरे मोती कवि: समीर लाल ’समीर’ मूल्य: २०० रुपये, १५ US $, पृष्ठ १०४ प्रकाशक: शिवना प्रकाशन , सिहोर (म.प्र.) कवि: समीर लाल ’समीर’ समीर लाल समीक्षक: विवेक रंजन श्रीवास्तव ’विनम्र’ विवेक रंजन श्रीवास्तव ’विनम्र’ ’अहसास की रचनायें’
 
संजय तिवारी ’संजू’
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जाने क्यूँ!!!

जाने क्यूँ खोया खोया रहता हूँ... लबों पर हँसी, दिल से रोता हूँ.
 
संजय तिवारी ’संजू’
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आपकी जरूरत...

१. रोज हम नशे मे होते है, और रात गुजर जाती है.. एक दिन रात नशे मे होगी , और हम गुजर जायेगे, शायद तभी हम आपको याद आयेगे .. २. आपकी कमी अब महसूस होने लगी है , आपकी यादो से आंख नम होने लगी है , हमेशा मेरे दिल मे रहते है आप लेकिन, आपकी जरूरत अब धड़कनो को
 
संजय तिवारी ’संजू’
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आपकी खातिर कुछ....

जिन्दगी यूँ गुजर जायेगी आहिस्ता आहिस्ता, घड़ी भी पाबंदी लगायेगी आहिस्ता आहिस्ता, बेशक, तुम मुझे याद रखोगी कुछ दिन तलक, फिर भूल भी मुझे जाओगी आहिस्ता आहिस्ता. *~*~*~*~* वो नाराज होता है कि कुछ लिखते नहीं , कहाँ से लायें वो लफ्ज जो मिलते नहीं , दर्द की
 
संजय तिवारी ’संजू’
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अजब गजब तेरी माया..

वाह प्रभु!! ये कैसी तेरी लीला? चूहा बिल्ली से डरता है , बिल्ली कुत्ते से डरती है , कुत्ता आदमी से डरता है, आदमी बीबी से डरता है, ओर बीबी चूहे से.... वाह रे चूहे!! तू ही है महान.... हम तेरे सामने प्राणी हैं नादान!!!
 
संजय तिवारी ’संजू’
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यूँ हीबिखरा बिखरा सा वजूद है मेरा

कि ताबों के पन्नों को पलट के सोचता हूँ, यूँजिन्दगी भी पलट जाये तो क्या बात है. ख्वाबों में तो हरदम मिलता हीहै वो, आहकीकत में लिपट जाये तो क्या बात है कुछ मतलब लिए ढ़ूँढ़ते हैं सबमुझको आ बेमतलब निकट जाये तो क्या बात है यूँ हीबिखरा बिखरा सा वजूद है मेरा
 
संजय तिवारी ’संजू’
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तुम गये कुछ दूर

तुम गये कुछ दूर मन उदास सा हो गया , याद करना याद आना बस ख्वाब सा हो गया , रोज कहते थे चला जाऊ जाउगा एक दिन, यू छोडके के जाना अजीब सा हो गया , न आते लोट के तो हम मन को बहला , लेते कि समीर अब किसी ओर देश का हो गया , याद मे आसूं बहाता मे कहा रह पाता हूं
 
संजय तिवारी ’संजू’
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भाई समीर लाल जी द्वारा बिखरे मोती के अंतरिम विमोचन की रपट

दो दिन बीते. न कोई कमेंट, न अधिक ब्लॉग विचरण. कोई ब्लॉग वैराग्य जैसी बात भी नहीं बस शनिवार को लंदन रुकते हुए कनाडा वापसी की तैयारी है तो बस!! समयाभाव सा हो लिया है. इस बीच मेरी पहली पुस्तक ’बिखरे मोती’ भी पंकज सुबीर जी और रमेश हटीला के अथक परिश्रम के
 
संजय तिवारी ’संजू’
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तिरुपति बाला जी के

 
संजय तिवारी ’संजू’
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समीर लाल ’उड़न तश्तरी’ का रात्रि भोज निमंत्रण: एक अलग सी बात है!!

होली के अगले दिन समीर लाल जी ने बम्बई से जबलपुर अपनी ससुराल पधारे नामचीन ब्लॉगर भाई विजय शंकर चतुर्वेदी जो आजाद लब के नाम का ब्लॉग चलाते हैं, के सम्मान में रात्रि भोज का आयोजन किया. जल्दी जल्दी में जिन जिन ब्लॉगर्स को सूचित कर पाये, किया गया और १२ ता
 
संजय तिवारी ’संजू’
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एक अखबार का अनोखा निवेदन

बन्दर बाबू हमारे आह्वाहन पर सारे शहर में तिलक होली और आपने सुबह सुबह फिर पानी से धो ली हमारा निवेदन है आप पानी बचाने के लिए सोचिये और सुबह सुबह हमारे अखबार से ही पौछिये. स्लोगन: जल ही जीवन है.
 
संजय तिवारी ’संजू’
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फिर ना पुकारो

फिर ना पुकारो मुझे तुम उन्ही बहारो मे, आके कही खो ना जाऊ उन हसीं नजारो मे,, यु तो तुम ने हॆ तड्फाया रात भर अधियारे मे, अब तो जाके सो जाने दो दिन के उजियारो मे,,
 
संजय तिवारी ’संजू’
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बम बम भोले

शंकर भोले शिव प्रतिमा, कचनार सिटी, जबलपुर महा शिवरात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.
 
संजय तिवारी ’संजू’
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जबलपुर: हाईटेक होते साहित्यकार: एक रिपोर्ट, कुछ तस्वीरें

विगत दिवस ’हिन्दी साहित्य संगम’ के तत्वाधान में श्री विजय तिवारी ’किसलय’ जी का जन्म दिवस शहर के वरिष्ट साहित्यकारों, चिट्ठाकारों, कवियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में मनाया गया. इस मौके पर सभी ने विजय तिवारी ’किसलय’ जी को जन्म दिवस की बधाई दी
 
संजय तिवारी ’संजू’
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जिन्दाबाद मुर्दाबाद

नोट: यह मेरी प्रथम कहानी लेखन का प्रयास है, कृप्या अपनी प्रतिक्रिया दें और मुझे क्या सुधार करना चाहिये, सलाह दें. अभी दिन ही कितने बीते हैं जब उन्होंने साथ जीने मरने की कसमें खाई थीं. उस चाँद के नीचे, नदी किनारे बैठे, सात जन्मों तक एक दूसरे का साथ नि
 
संजय तिवारी ’संजू’
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जिन्दाबाद-मुर्दाबाद

नोट: यह मेरी प्रथम कहानी लेखन का प्रयास है, कृप्या अपनी प्रतिक्रिया दें और मुझे क्या सुधार करना चाहिये, सलाह दें. अभी दिन ही कितने बीते हैं जब उन्होंने साथ जीने मरने की कसमें खाई थीं. उस चाँद के नीचे, नदी किनारे बैठे, सात जन्मों तक एक दूसरे का साथ नि
 
संजय तिवारी ’संजू’
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जबलपुर हिन्दी ब्लॉगर्स मीट की रिपोर्ट

विगत १९ जनवरी २००९ को जबलपुर ब्लॉगर्स मीट का आयोजन 'होटल रुपाली इन' जबलपुर में किया गया. कार्यक्रम में जबलपुर के हिन्दी ब्लॉगर्स ने शिरकत की. कार्यक्रम के मुख्य अथिति ’विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय हिन्दी ब्लॉगर के सम्मान" से नवाजे गये कनाडा से पधारे श्
 
Sandesha
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बस यूँ ही

भाई समीर लाल जी के प्रोत्साहन पर यह ब्लॉग शुरु किया है. आज ही ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत पर पंजीकृत करा टेस्ट कर रहा हूँ. अपना स्नेह बनाये रखें.
 
Sandesha