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31 Dec 2009
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25. श्री घंटियाली राय मन्दिर

श्री घंटियाली राय मन्दिर स्थान तनोट मन्दिर से बी. एस. ऍफ़. मुख्यालय से आते समय १० की. मी प्रूव की और इसी रोड पर हें ! जब मातेश्वरी तणोट से पधार रही थी तब इस स्थान के धोरों मे भयंकर वन मानुस असुर रहता था ! उसके गले मे बड़ी भयंकर मवाद भरी प्राकुतिक गाठ
 
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24. श्री भादरिया राय मन्दिर

श्री भादरिया राय मन्दिर : श्री भादरिया राय मन्दिर स्थान जैसलमेर से करीब ८० की. मी. जोधपुर रोड धोलिया ग्राम से १० की. मी. उतर की तरफ़ हें ! उक्त स्थान के पास एक भादरिया नमक राजपूत रहता था उसका पुरा परिवार आवड़ा माता का भक्त था ! जिसमे उक्त महाशय की पुत
 
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23. श्री महामाया आवड़ा देवी

श्री महामाया आवड़ा देवी ने मामड़जी मादा शाखा के यहाँ जन्म धारण किया , मामड़जी जी निपुतियां थे , एक बार अपने घर से कहीबहार जा रहे थे उस समय भाट जाति की कन्याए जो सामने से जा रही थी उन कन्याओ ने मामड़जी को देख रास्ते मे अपूठी खड़ी हो गईक्योकि सुबह के समय नि
 
J.K.ChArAn
Dec 29 2009 11:58 AM
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22. श्री राजल माता

श्री राजल माता - मैया श्री करनी माता का साक्षात अवतार थी , बीकानेर महाराजा पृथ्वी सिंह की अराध्य देवी थी ! महामाया राजल जोउदाजी चारण की पुत्री थी , चौराडा प्रान्त गुजरात मे उस समय साक्षात बालिका रूप मे विराजमान थी ! बीकानेर घराना हमेशा करनी माता काउप
 
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21 लुंग बाई सा

ॐ हिंगलाज माँ जय लुंग बाई सगत लुंग बाई सा सगत की अवतरित भूमि जो जिला सिरोही में गाव वलदरा हैं ,ये पावन भूमि ऋषि मुनियों की तपो भूमि हैं जो आबू की तलेटी में हैं ,ये जागीरी का गाव चारण दुदोजी आशिया का हैं ,जो बहुत बड़े वीरतापूर्ण वयक्ती थे .माँ सगत लुं
 
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20. चारण शाखाए

चारण जाति की मुख्य तेवीस शाखाए हें ! कुछ लोग इसकी गिनती एक सो बीस बताते हें , लेकिन मुख्य तेवीस हें ! उपशाखाए ५६७ हें अंत शाखा ओ की गिनती नही हें ! जो अखावत , लखावत , इशरावत , जुगतावत , अमरावत आदि योग पुरुषों के नाम गोत्र हें !! १ . मारू शाख : ५२ उपश
 
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19. मां करणी देवी

हमारे देश में अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां बार-बार जाने का मन करता है। एक ऐसा ही मंदिर राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर जोधपुर रोड पर गांव देशनोक की सीमा में स्थित है। यह है मां करणी देवी का विख्यात मंदिर। यह भी एक तीरथ धाम है, लेकिन इसे
 
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18. शक्तिपीठ हिंगलाज

पाकिस्तान में स्थित कई प्राचीन हिंदू मंदिरों में से सबसे ज़्यादा महत्व जिन मंदिरों का माना जाता है उन्हीं में से एक है हिंगलाज माता का मंदिर. ये वही स्थान है जहाँ भारत का विभाजन होने के बाद पहली बार कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल गया है. इस अस्सी सदस्यीय
 
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32. चारण देविया

सेणी जी लालस जाति की चारणी गुजरात की काछेला वेदा जी की पुत्री थी ! अपनी बाल्य अवस्था मे हिमालय जाकर अपना लोकिक शरीर त्याग दिया था ! वीझानंद जो भाचलिये शाखा के चारण थे व उक्त शक्ति से ब्याह करना चाहते थे ! लेकिन वचनानुसार समय पर नही पहुच पाये , शक्ति
 
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31. श्री तणोट राय मंदिर

श्री तणोट राय मंदिर : श्री तणोट राय मंदिर स्थान भाटी राजा की राजधानी थी वह मातेश्वरी के भक्त थे ! उनके आमंत्रण देने पर महामाया सातों बहने तणोट पधारी थी , इसी कारण भक्ति भाव से प्रेरित होकर राजा ने एक मन्दिर की स्थापना की थी , वर्तमान मे यह स्थान जैसल
 
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30. श्री तेमड़े राय मन्दिर

श्री तेमड़े राय मन्दिर : यह स्थान जैसलमेर शहर से २५ की. मी. दक्षिण की तरफ़ बना हुवा हें! इस स्थान को दूसरा हिंगलाज स्थान के नाम से जाना जाता हें ! इस पर्वत पर तेमड़ा नामक विशालकाय हुण जाति का असुर रहता था ! जिसको मातेश्वरी ने उक्त पर्वत की गुफा मे गाढ
 
J.K.ChArAn
Dec 29 2009 11:58 AM
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29. देवल माता

देवल माता का जन्म सवंत १४४४ माघ शुद्धी चौदस के दिन बताया गया हे ! देवल माता हिंगलाज माताजी की सर्वकला युक्त अवतार थी ! देवल माता ने भक्त भलियाजी और भूपतजी दोनों पर करुणा कर के एक के घर पुत्री और दुसरे के घर पुत्र वधु बनकर दोनों वंश उज्जवल किए ! इनका
 
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28. काले डूगर राय मन्दिर

काले डूगर राय मन्दिर यह मन्दिर जैसलमेर शहर से ४५ की. मी उतर दिशा मे एक पहाड़ी की चोटी पर हें ! इस पहाड़ी का रंग काला होने के कारण इस मन्दिर को काले डूगर राय के नाम से जाना जाता हें ! जब माड़ प्रदेश के महाराजा भादरिये से जब वापिस पधारे तब मैया के कथानुस
 
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27. देग राय मन्दिर

देग राय मन्दिर : यह स्थान जैसलमेर से ५० की. मी. देवीकोट साकड़ा रोड़ पर हें ! यहाँ एक तालाब के ऊपर बड़ा रमणीक मन्दिर हें ! इस जगह मातेश्वरी ने सहपरिवार निवास किया था ! एक दिन एक असुर रूपेण भेंसे को काट कर देग मे पकाया था जब भेंसे के मालिक ने मैया के भा
 
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26. पनोधर मंदिर

आवड़ा माता का यह स्थान मोहनगढ़ से ६ की. मी. उतर की और सिथत हे उसके चारो और रेत के टीले हें पुराने समय मे इस जगह पर एक कच्चा मन्दिर था उसके पास एक खेजड़ी का पुराना वृक्ष था जिसके निचे पानी का कुवा था ! यहाँ पर पुराने समय मे लाड जाती का एक मुसलमान भेड बक
 
J.K.ChArAn
Dec 29 2009 11:58 AM
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३५. श्री करणी धाम साठीका

साठीका बीठू चारणों का मुख्य गाव था ! पिछले साढ़े सात सौ वर्ष से बीठू चारण इस गाव मे निवास कर रहे हे ! साठीका का महत्व करणी किनियानी के साठीका आगमन से बढ़ गया ! माता मेहाई को पाकर साठीका तीर्थस्थल बन गया ! जहा कही करणी माता का पदापर्ण हो गया वही स्थान प
 
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34. जब मां बनी जवानों की ढाल !

आस्थावानोंका कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए दोनों युद्धों में तनोटमाता ने भारतीय सैनिकों को सुरक्षा कवच प्रदान किया था। लोगों का विश्वास है कि वर्ष 1965 एवं 1971 में हुए युद्धों में तनोटमाता ने अपने प्रभाव क्षेत्र में गिरने वाले पाकिस्तानी ब
 
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३३. अम्बाजी

अम्बाजी : आबू के पास आरासुर श्वेत पर्वत पर अम्बाजी का मंदीर हे ! लोकदेवी के रूप मे अम्बाजी की बड़ी मान्यता हे ! भक्तो की भीड़ लगी रहती हे ! अम्बाजी चक्खड़ा चारण की बहिन थी और बिरवड़ी जी चक्खड़ा चारण की पुत्री थी ! गुजरात का अम्बाजी मंदिर। माँ अम्बा - भवान
 
J.K.ChArAn
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17. બુટભવાની માતાજી

અરણેજ બુટભવાની માતાજીનું મંદિર ગુજરાત રાજ્યના અમદાવાદ જિલ્લાના ધોળકા તાલુકાના અરણેજ ગામે આવેલું છે. બુટભવાની માતાજીના ઈતિહાસ વિશે એમ કહેવાય છે કે બુટભવાની માતાજી ચારણ કુળમાં પ્રગટ થયેલાં. સૌરાષ્ટ્રમાં ગીર પંથકના નેસડામાં બાપલ દેથા ચારણ કુટુંબના હતા અને
 
J.K.ChArAn
Jan 08 2009 03:24 PM
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16. ચારણ મહાત્મા ઈશરદાસજી

ભક્તવર ચારણ મહાત્મા ઈશરદાસજીનું સંક્ષિ‍પ્‍ત જીવનચરિત્ર : વિક્રમ સંવત ૧૫૧૫ ના શ્રાવણ સુદ – ર ને શુક્રવારના રોજ મારવાડમાં ઈશરદાસજીનો જન્મ થયો હતો. તેમનું પૂર્વજન્મનુંનામ જવાલાગીરીજી હતું. મારવાડથી ફરતા-ફરતા ઈશરદાસજી જાત્રા કરવાના હેતુથી દ્વારકા આવેલ હતા.
 
J.K.ChArAn
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15. BAHUCHARA MATA TEMPLE

Temple: The temple of Bahuchara Mata is located in Bechraji town in Mehsana district of Gujarat, India. It is 110 km from Ahmedabad and 35 km west of Mahesana. The original temple complex was built in year 1783 AD. The temple is nicely decorated with
 
J.K.ChArAn
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14. BAHUCHARA MATA

Bahucharaji was a daughter of a “Charan” Bapal dan Detha. She and her sister were on journey with a caravan when a marauder named Bapiya attacked their caravan. It was common practice in charan men and women if overpowered by their enemies, not to
 
J.K.ChArAn
टैग: bahuchara mata
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13. KHODIYAR MATA TEMPLE

Khodiyar Mata Temple in Bhavnagar :Khodiyar Mata is a well-known shrine and the family goddess of the ruling house of the former Bhavnagar state. It is situated on the Khodiyari river in the midst of natural surrounding of great beauty. There is a temple
 
J.K.ChArAn
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12. KHODIYAR MATA

Khodiyar Maa is the Hindu goddess who appeared in the story of Mamaniya Gadhvi in about 700 AD. Mamaniya Gadhvi had a superb relationship with the then ruler - Maharaj Shilbhadra. The ruler’s ministers envied this exceptional relationship and prepared a
 
J.K.ChArAn
टैग: khodiyar mata
Jan 07 2009 02:16 PM
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11. HINGLAJ MATA TEMPLE

Hinglaj is situated in the Balochistan province of Pakistan. It is near the peak of one of the mountains of the Makran range. It is approximately 120 km from the Indus River Delta and 20 km from the Arabian Sea. The area is extremely arid and the
 
J.K.ChArAn