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मवार्क (MAVARK )

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08 Mar 2010
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मवार्क (MAVARK )

पोस्‍ट नंबर - 20 *आग* कहीं दूर …… दूर कहीं …… । एक बहुत बड़े ज्‍वालामुखी का विस्‍फोट होता है, जंगलों में आग लग जाती है, और एक तूफान समंदर को , अपनी बाहों में जकड़ लेता है। फिर कहीं दूर किसी नाव में , खारा पानी भर जाता है। जो न उलीचने से खत्‍म होता है और
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Feb 26 2010 09:25 PM
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बेमौसम की होली

पोस्‍ट नंबर - 19 बेमौसम की होली बीजेपी की टोली 1. हम आप सभी होली खेलते हैं, एक दूसरे पर रंग डालते हैं गुलाल लगाते हैं, कीचड़ फेंकते हैं, गोबर फेंकते हैं, कीचड़ में‍ छिपाकर कंकड़ मारते हैं, बहाने से धक्‍का दे देते हैं और मौका मिलते ही औंधे मुंह पटक देते
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मवार्क (MAVARK )

POST NO. 18WISHING YOU ALL A VERY VERY HAPPY INDEPENDENCE DAYसरहद तक आंगन है हम धरती के फूल, गगन पावन माटी चन्‍दन है, देश एक परिवार हमारा,सरहद तक आंगन है। सतरंगे सुमनों की शोभा , सब धर्मों की क्‍यारी, मानवता की महक सभी में देश एक फुलवारी। नाचें, गायें,
Aug 14 2009 07:16 PM
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स्‍वप्‍न और देश

पोस्‍ट नंबर 17स्‍वप्‍न अधूरे रह जाने से, कोई देश नहीं मरता है। सपनीली नव कलिका से ही ठूंठ हरा हो कर भरता है। जीवन के कोटर में विषधर, फण को ओट किए बैठे हैं। सजग चुनौती की मुद्रा में पारधि प्रत्‍यंचा ऐठें हैं। मेरी मौत भले हो जाए, जन विश्‍वास नहीं मरता है।
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पर अभी संभावना है

पोस्‍ट नंबर 16दांत पैने हो गए हैं, और पंजे कस गए हैं, रहनि चिरइन की कठिन हैपर अभी संभावना है। रात भीगी तम घना है, अन्‍धड़ों का रौ बना है, लौ दिया की है कठिन पर, प्रात की संभावना है। धनु अहेरी के खिंचे हैं, अंग भर कांटे चुभे हैं, पंख चिरइन के खुले हैं,
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Aug 11 2009 04:58 PM
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मेरा मन

पोस्‍ट नंबर 15मैं (मेरा मन) तुम्‍हारे शहर सेकोरा लौट रहा हूं। मुझे कोई छू न सका, पा न सका सब के सब व्‍यस्‍त थे अपने में सब के सब मस्‍त थे केवल अपने में। फिज़ा में रश्‍क था, रंज था, खुशी थी - बेखुदी थी, किसी के दामन के दो चार बूंद आंसू भी अफसोस है कि मेरे
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Aug 08 2009 08:34 PM
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चुनाव एक यज्ञ

पोस्‍ट नंबर 14 चुनाव एक यज्ञ ( सामयिक चर्चा ) चुनाव और हम ब्‍लॉगर्स की जिम्‍मेदारी चुनाव एक यज्ञ है। इस यज्ञ में वो सब लोग जो वोट देने के अधिकारी हैं, यज्ञ करने वाले हैं और जो अभी वोट देने की उम्र तक नहीं पहुचे हैं वे यज्ञ में सम्मिलित ऐसे सदस्‍य हैं
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होली

होली!! रंगो की सुघण रंगोली, राग भरी कोयल सी बोली फागुन की मधुर ठि‍‍ठओली, प्रेम स्रजन समता ममता मे, आओ सब को रंग दूं , और मना लूं होली! ============================================== WISHING TO ALL BLOGGERS VERY VERY HAPPY HOLI. From the desk of : MAV
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खून का खुलासा

खून का खुलासा आइये टिक्‍कू जी , आपको चाय पिलवाते हैं। अरे.....! छुटकऊ जरा बढिया दो प्‍याली चाय बनाओ तो। हां टिक्‍कू दादा, आप उस दिन तो बिना कुछ बताये चले गये। आज तो कम से कम बता दो, अपने द्वारा किये खून के बारे में। टिक्‍कू : चलो भाई वादा किया है तो
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खून

खून..... ! अरे टिक्‍कू जी आप तो ओसामा की चर्चा के बाद भूमिगत हो गये। कहां चले गये थे इतने दिनों के लिये। बड़े मायूस दिख रहे हो। इतनी उदासी और चुप्‍पी का सबब ? अरे भई कुछ तो बोलो। क्‍या बताऊं मित्र आप खुद बताओ कोई भी आदमी खून करके खुश रह सकता है क्‍या
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एक उपन्‍यास

पोस्‍ट नंबर 9 एक उपन्‍यास ऊंची कोठी, ढेरों दौलत, बड़ी-बड़ी कारों की शान, एक नहीं तेरह दरबान, सबके सब सधे हुये, मैडम से डरे हुये। कौन कहां से, क्‍यों, क‍ब आया, किसने कैसा रंग जमाया ? कभी किसी ने जान न पाया, कोई किसी से पूछ न पाया। चला कई वर्षों तक धंध
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मवार्क (MAVARK )

एकाकीमन हम सभी हमेशा इस प्रयास में रहते हैं जो हमें नहीं पसंद है उससे मुक्‍त हो जायें , जिसे हम सुख का कारक नहीं मानते हैं उससे मुक्‍त हो जायें , जिसका साथ मुझे सुखमय नहीं लगता उससे मुक्‍त हो जायें। मुक्‍त होना एक प्रक्रिया है लेकिन ऐसी प्रक्रिया जो
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क्षितिज

पोस्‍ट नंबर 7 क्षितिज मैं जानता हूं आज भी जब तुम हार जाते हो, थक जाते हो, खीज जाते हो, अपने से, तब मेरी ओर आते हो, सारी दुनिया को छोड़ कर, किसी समंदर के तट से, मेरी ओर निहारते हो, एक अबोध बालक की तरह, और तब मैं तुम्‍हें प्रदान करता हूं, अपार मानसिक ऊ
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आपसे दो शब्‍द

पोस्‍ट नंबर 6 जो कुछ संसार से सीखता हूं महसूसता हूं अनुभव करता हूं वही लिखता हूं। स्‍वांत: सुखाय लिखता हूं। अपने सीखे हुए पाठों को याद रखने के लिए लिखता हूं। भोगे हुए क्षणों को जो नहीं भूले जाते भुलाने के लिए लिखता हूं और जिन जिन क्षणों को बार बार या
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सोच के बारे में सोच

जीवन की एक सहज प्रक्रिया है सोचना। शायद जीवन का सब कुछ यहीं से शुरू होता है। मानव का अमोघ अस्‍त्र है सोच, अच्‍छी सोच, जागरूक सोच, वैज्ञानिक सोच, साहित्यिक सोच, सामाजिक सोच, आध्‍यात्मिक सोच, आत्मिक सोच ............... सोच ही सोच। तो प्‍यारे : कल की सो
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अपराध बोध

जिनके इशारों पर मैं चलाता रहा पत्‍थर, उनकी मुस्‍कराहटों के पहचान ये पत्‍थर । जब लौट कर आये मेरे लिये, त‍ब भी वे मासूमियत से मुस्‍कराते रहे। मैं तड़पता रहा दोनों दर्दों* से, वे मुस्‍कराते आम हमदर्दों से। * लौटे हुये पत्‍थरों की चोट और उनकी मुस्‍कराहट
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आतंक को कौन समर्थन देगा ?

पोस्‍‍ट नंबर 3 अरे‍ टिक्‍कू जी, कहां जा रहे हो। पीछे से आवाज देकर चौबे काका ने बुलाया। काका राम राम। का बात है। अरे भाई, कल जो तुमने दिमाग में एक जिज्ञासा बैठा दी है उसका समाधान तो दे दो। बताओ तो अमरीकी गोरों ने ओबामा में ऐसा क्‍या देखा कि उसको ओसामा
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ओसामा का तोड़

पोस्‍ट नंबर 2 नमस्‍कार मेरी आज आपसे यह पहली मुलाकात है, वैसे तो मुझे अनगिनत लोग जानते हैं लेकिन अनगिनत का मतलब सब लोग तो नहीं है। मेरा नाम श्री टी. आर. पाण्‍डेय, पूरा नाम टीका राम पाण्‍डेय है। संक्षेप में मुझे टी.आर.पी. भी कहते हैं लोग। और जो लोग मेर
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तप

हम कल्पना करते हैं यथार्थ में मनन करते हैं बात करते हैं बहस करते हैं सहमत होते हैं कर्म में परिणत करते हैं अपनी कल्पनाओं को अपने विचारों को अपनी सोच को सृजन होता है एक सुंदर घर का एक सुंदर समाज का एक सुंदर देश का एक सुंदर विश्‍व का यदि हम ईमानदार रहे