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बहाने कम नहीं होते.
(चित्र साभार: युवा उदीयमान चित्रकार एवं मित्र 'संजय बथ्याल') मेरी नाकामियों को गर, तेरे मरहम नहीं होते,बग़ावत के ये मेरे सुर, कभी पंचम नहीं होते.ख़फा है ज़िन्दगी तुम बिन, मग़र दिल मुस्कुराता है,जहाँ मौज़ूद हो तुम, बस वहीँ पे ग़म नहीं
Jun 07 2010 11:37 AM


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