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कुछ बातें...

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नयी प्रविष्टी लिखी
10 May 2010
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आईपीएल नहीं खराब बल्‍लेबाजी है वि‍श्व‍ कप में हार की वजह

वेस्‍टइंडीज के हाथों हारते ही टीम इंडि‍या का वि‍श्व कप टी20 2010 में सफर लगभग समाप्‍त हो गया। हर क्रि‍केट प्रेमी की तरह मेरे लि‍ये भी यह नि‍राशा की बात थी। आखि‍र हमें अपनी टीम को हारते देख हमेशा ही दुख होता है। हम अपनी टीम को जीतते देखना चाहते हैं और जब
 
भारत मल्‍होत्रा
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एक राष्ट्रीय मुद्दे का अंत!

जि‍न दि‍नों आईपीएल का रोमांच अपने चरम पर था। क्रि‍केट से ज्‍यादा ललि‍त मोदी अखबारों और टीवी चैनलों में सुर्खि‍यां बटोर रहे थे। हर पत्रकार की कोशि‍श मैदान के खेल से ज्‍यादा मोदी के खेल में दि‍लचस्‍पी दि‍खा रहा था। सबको इस बात का इंतजार था कि आखि‍र मोदी की
 
भारत मल्‍होत्रा
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क्‍या जरूरी है..

क्‍या जरूरी है हर बात को बताया जायेबेहतर है कभी कभी चुप भी रहा जायेजो समझेंगे वो समझ जायेंगे खामोशी भी तुम्हारीजो न समझें, उनसे भला क्‍यों कुछ समझाया जायेबातों को बात में उड़ाना भी चाहि‍येकभी-कभी कुछ भूल जाना भी चाहि‍येजरूरी नहीं हर बात को दि‍ल से लगाया
 
भारत मल्‍होत्रा
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..तेरा इरादा क्‍या है

मैं खुशनसीब हूं, मेरे पास बाकी है तेरी यादतू सोच आखि‍र तेरे पास रखा क्‍या हैमेरे वजूद पर लगा है तेरा पहराहर जगह तू, बाकी अब मेरा क्‍या हैछोड़कर जाने वाले मुझे तन्‍हाई में इतना तो बता कि‍ मेरी ख़ता क्‍या हैमि‍टा हूं मैं जि‍नके लि‍ये अब तकवो पूछते हैं
 
भारत मल्‍होत्रा
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ज़ारा का वीर के नाम एक ख़त (व्‍यंग्‍य)

किंग्‍स इलेवन की हार के बाद ज़ारा (प्रीति‍ जिंटा) ने वीर (शाहरुख खान) को एक ख़त लि‍खा, जो डाक वि‍भाग की मेहरबानी के चलते मेरे पास पहुंच गया। सो, पाठकों के हि‍त को ध्‍यान में रखते हुये यहां चस्‍पा रहा हूं। प्‍यारे वीरतुम बहुत बदल गये हो। सच कहूं, तो अब
 
भारत मल्‍होत्रा
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नि‍राशा के पार...

न जाने क्‍यों आज मन रुआंसा सा हैरोने को दि‍ल तो चाह रहा हैपर आसूं हैं कि आंख से नीचे ही नहीं उतर रहेबहुत कसैला हो गया है मनजैसे नीम की पत्‍ति‍यां चबाई हों याखाया हो कच्‍चा करेला मैनेबहुत घुटन हो रही है आजजैसे कि तंग में कमरे में बंद हो गया हूंबि‍ना
 
भारत मल्‍होत्रा
Mar 21 2010 01:27 AM
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अपनों के गुनाहगार हो गये

हम खुद ही अपने गुनहगार हो गये।प्‍यार और भरोसे में गिरफ्तार हो गये।।अब किससे कहें हाल-ए-दिल अपना।जब गैर अपने सब यार हो गये ।।हम दोस्‍ती का दम भरते नहीं थकते थे ।और अब हम दोस्‍तों की नजरों में गुनहगार हो गये ।।हक है हर किसी को अपनी जिंदगी जीने का ।क्‍या
 
भारत मल्‍होत्रा
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थोड़ा पागल हूं मैं

अपनों के नश्‍तरों का घायल हूं मैंलोग कहते हैं दीवाना पागल हूं मैं यह जमाना और उम्‍मीदे वफायारों, माफ करना मुझे थोड़ा पागल हूं मैंतन्‍हां हो गया हूं दुनिया की भीड़ मेंकुछ ज्‍यादा ही साफगोई का कायल हूं मैं
 
भारत मल्‍होत्रा
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मैं लाजवाब हो गया..

लफ्जों में क्‍या बयां करूं, मैं लाजवाब हो गया। जो कहा आपने इतनी खूबसूरती से, एक शे’र ही पूरी किताब हो गया। शराब से कर ली हमनें तौबा, तेरी आंखों से जो एक बार पी ली, नशा उम्र भर का बेहिसाब हो गया। तेरे चेहरे को आखिर क्या कहूं मैं, जिसने देखा एक बार, वो
 
भारत मल्‍होत्रा
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... हम तो चाहत के गम उठाए जीते हैं

हम तो चाहत के गम उठाए जीते हैं, आंसू जुदाई के दिन रात पीते हैं। दुनिया में हमारा कोई नहीं हैं अपना, आंखों में मेरी कोई न कोई है सपना। बस उम्‍मीद के दीए जलाए जीते हैं, हम तो चाहत के गम उठाए जीते हैं। इश्‍क में न हार और न जीत का अहसास होता है, महबूब का
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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...ये आज का 15 अगस्‍त है

ये आज का 15 अगस्‍त है देश को याद करने का वक्‍त है चलो संदूक में धूल फांक रही भावनाओं को निकालें उनकी पर जमी धूल झाड़ें, साफ करें और शो केस में सजा दें फिल्‍मी गीतों की धुन गुनगुनाकर देश भक्ति दिखाएं आजकल कुछ करने का नहीं, दिखावे का वक्‍त है ये आज का
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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बहुत हुआ अब थक चुके हैं..

बहुत हुआ अब थक चुके हैं सच कहूं तो पक चुके हैं रोज-रोज की झिक-झिक से बेकार की खिट-पिट से वही पुराने कायदों से झूठे सब उन वायदों से सच कहूं तो पक चुके हैं बहुत हुआ अब थक चुके हैं काम के झूठे बोझ से बॉस की उस डांट से बंधती-टूटती आस से कभी न बुझती प्‍या
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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नयी शुरुआत

कब तक जिंदगी को रोकर गुजारा जाए चलो, अब तो इक पल हंस के संवारा जाए। हम तो बहाकर आंसू थक चुके हैं अब चलो, अब तो कुछ पल मुस्‍कुराया जाए। तमाम, रातें पुरानी अब दफन कर दो, चलो, नयी सुबह के नये सूरज को निहारा जाए। जो, लुट गए हैं काफिले भूल जाएं उन्‍हें अब
 
भारत मल्‍होत्रा
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अब ऐतबार के रिश्ते खत्‍म हुए जाते हैं..

अब ऐतबार के रिश्ते खत्‍म हुए जाते हैं, लोग दगा पे दगा दिए जाते हैं। किससे निभाएं रिश्तों का मिजाज, यहां रोज रिश्ते कत्‍ल किए जाते हैं। हम भरोसे का भरम पालते रहे, लोगों का खून भी पानी हो गया। हम हर बात को हंसी में टालते रहे, यहां हंसना रोना बेमानी हो
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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बस तुम ही तो हो..

बस तुम ही तो जिसे देखकर दिल को धड़कना याद आता है तुम ही तो जिसे छूकर मुझे मेरे होने का अहसास आता है हां सच में वो तुम ही हो जिसकी आवाज मेरे सांसो की तार है सच वो तुम ही हो जो मुझमें मुझसे ज्‍यादा रहता है मैं तुमसे अलग नहीं हो सकता क्‍योंकि फिर मिट जा
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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आपकी याद...

हर रोज आपको भूल जाने की कसम खाते हैं, रोज अपनी ही कसम भूल जाते हैं। कैसे भला आपकी याद दिल से निकाले हम, आप रोज ख्‍वाब में आकर जो हमें मिल जाते हैं।। तन्‍हा ये जिंदगी का सफर होगा, न कोई साथी, न हमसफर होगा। क्‍या गुजरता है राह में खुदा जाने, मुश्किल मग
 
भारत मल्‍होत्रा
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उनके अहसान...

उनके अहसान भला हम कैसे भूल पाएंगे उनके हर करम हमें याद आएंगे हमें चलने का सलीका न था, उनके बगैर अब कैसे कह दें कि हम मंजिल तक पहुंच पाएंगे ना जाने लोग क्‍यों उन्‍हें बेवफा कहते हैं उनके यूं चले जाने को दगा कहते हैं हम आज भी उन्‍हें अपनी मोहब्‍बत का ख
 
भारत मल्‍होत्रा
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मेरे आंसू उनकी हंसी...

हम रो पड़ते थे आंख में आंसू जिनकी देखकर, वो मुस्कुरा रहे हैं, रोता मुझको देखकर। क्या बिसरूं क्या याद करूं कोई बता दे मुझे, वो चूड़ी खनकाना तेरा या नाम लिखना रेत पर। बढ़ गया उस मोड़ से जहां हम थे मिले, अब ना आउंगा कभी उस राह पर मैं लौटकर। चलते रहे ताउ
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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आचार संहिता और मेरी सड़क

कुछ दिन पहले लिखा यह लेख अब ब्‍लॉग पर चिपका रहा हूं दो दिन पहले ही अपने हाथ पैर तुड़वाकर आया हूं। अरे... आप यह मत समझ बैठिएगा कि किसी पहलवान की बहन से इजहारे मोहब्‍बत कर दी थी। दरअसल, हमारे मोहल्‍ले की सड़क (माफ कीजिएगा रास्‍ता, वो भी अगर कहा जा सके
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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अब और कार्बन छाप नहीं...

कभी कभी सोचता हूं जिंदगी बिल्‍कुल कार्बन छाप हो गई है। कभी कभी क्‍या आमतौर पर ऐसा अहसास होता है। कार्बन छाप लाइफ... बोले तो, जैसे कागज के नीचे कार्बन लगाकर जो लिखा जाए नीचे वाले पन्‍ने पर वही लिखा आ जाता है। वैसे ही सोमवार से शनिवार तक वही एक जैसी दि
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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नजर खुद से मिला...

हौसला, जिंदगी का नाम है दूसरा, जो मिल गया मौज कर, भूल जा जो खो गया। पल में जीना सीख ले, भूल जा कल की फिक्र, झूम जा, झूम जा, तू खुशी में झूम जा। तू ज़रा ये बता, क्‍या है तेरे गम की दवा कुछ नहीं, कुछ नहीं, तू जरा सा मुस्‍कुरा। क्‍यों समझता है कि तेरे प
 
भारत मल्‍होत्रा
Dec 29 2009 11:52 AM
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... बस रहने दो

तुम मेरे साथ नहीं, तो कोई गम नहीं मेरे पास अपना अहसास रहने दो हम गुजार लेंगे जिंदगी तुम्हारे बिना तुम खुश रहो, हमें उदास रहने दो इक बार गले लग जाओ जाने से पहले एक लम्हा... मेरी जिंदगी का खास रहने दो रोशन रहने दो चौखट के दीए तुम्‍हारे आने की इक आस तो
 
भारत मल्‍होत्रा
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हर आसूं में तुम...

हम तुम्हें कतरा-कतरा कर भुलाते हैं। और तुम समंदर बन आंखों में चले आते हो ।। रोज खुद से वादा कि तुम्हें याद नहीं करेंगे । और तुम हो कि सांसों की तार में गूंथे चले आते हो।। हम राह में पड़े रहते हैं सूखे पत्ते की तरह। और तुम आंधी से गुजर जाते हो ।। नजरें
 
भारत मल्‍होत्रा
टैग: आसूं
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मुझे मंजिल का रास्‍ता‍ मिल गया

तुम आए तो जिंदगी को तराना मिल गया दिल को मेरे खुशियों का खजाना मिल गया। बहारें रूठी हुई थी मेरी गलियों ने न जाने क्‍यों आने से तुम्‍हारे, फिजा का हर एक गुल खिल गया। हम आंसूओं में गुजार रहे थे जीवन अपना तेरे आने से मुस्‍कुराने का बहाना मिल गया। दूर तक
 
भारत मल्‍होत्रा
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अनकही

शाम कुछ बोझिल सी है सुबह थकी-थकी उदास है दरिया के करीब हूँ फिर भी बुझती नहीं प्‍यास है अब रोने पर आंख में आंसू नहीं आते ग़मों इस कदर अपने हैं कि मुझसे दूर नहीं जाते चाहकर भी हम उन्‍हें भुला नहीं पाते हम भूले से भी उन्‍हें याद नहीं आते बात कहने को कई
 
भारत मल्‍होत्रा
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फ़लसफा जिंदगी का बदलने लगा है...

फ़लसफा जिंदगी का अब बदलने लगा है,अपना कहने से किसी को दिल डरने लगा है।मोड़ आते ही बदल जाते हैं रास्‍ते,हर शख्‍स यहां मौसम की तरह बदलने लगा है।हमने अरमानों को लुटते देखा है,दुनिया को अपनी उजड़ते देखा है।किसी को दिल में बसाने से अब दिल डरने लगा है,फ़लसफा
 
भारत मल्‍होत्रा
Aug 12 2009 07:21 PM
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क्‍या वास्‍तव में सच है 'सच का सामना'

क्‍या आप अपने पति के अलावा किसी और से शारीरिक संबंध बनाना चाहेंगी, अगर आपके पति को इसका कभी पता न चले तो] जरा सोचिए और फिर जवाब दीजिए कि कितनी भारतीय औरतें इस सवाल का जवाब ‘हां’ में देंगी और वो भी टीवी पर। शायद कोई नहीं, फिर चाहे इस सवाल का जवाब के ए
 
भारत मल्‍होत्रा
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चलो क्षितिज तक साथ चलें

चलो क्षितिज तक साथ चलें थाम हाथों को हाथ चलें सफर की हो न थकान कदमताल जब हो समान जब तक तन में हो प्राण बस यूं ही दिन रात चलें चलो क्षितिज तक सा‍थ चलें ना कुछ पाने का संकल्‍प हो ना कुछ खोने का विकल्‍प हो ना रूठने मनाने का प्रपंच हो बस यूं ही मस्‍त हाल
 
भारत मल्‍होत्रा
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अजीब है यह तहजीब भी

यह तहजीब भी अजीब सी लगती है, रकीब की शक्‍ल भी हबीब सी लगती है। * आईना भी गफ़लत में डालता है हमें, अपना अक्‍स भी उनकी तस्‍वीर सी लगती है। इस दुनिया का दस्‍तूर भी निराला है, प्‍यादे की औकात भी वजीर सी लगती है। जिंदगी से मैं परेशान तो नहीं, सांसे मगर जं
 
भारत मल्‍होत्रा
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खुद से मुलाकात...

अभी कुछ दिन पहले उसे देखा, हंसता, खिलखिलाता, बेपरवाह सा चेहरा, देख कर अनदेखा कर मैं आगे बढ़ने लगा, उसने नाम लेकर मेरा मुझे पुकारा, और कहा किधर जा रहे हो ‘भानू’ पहचाना नहीं मुझे। उसकी आवाज में जानी पहचानी सी लगी, पास जाकर देखा तो शक्‍ल में भी अपनापन स
 
भारत मल्‍होत्रा
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यादों का संदूक...

मेरे दिल के कमरे में एक संदूक रखा है जिसमें बंद हैं कई चीजें, और, अच्‍छा ही है हमारे लिए कि वो बंद ही रहे रखे है उनमें हमारी जिंदगी के कई खूबसूरत पल वो मिलन की बातें, वो जागती रातें, साथ ही बंद हैं, एक चुटकी आंसू और ढ़ेर सारी हंसी उन्‍हें बंद ही रहने
 
भारत मल्‍होत्रा
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आपकी चाहत...

जिस्‍म जुदा होते हैं, रूह नहीं । क्‍या हुआ जो आप हमसे रू-‍ब-रू नहीं ।। आपकी यादें ताउम्र दिल में महकती रहेंगी । पल में उड़ जाए, ये वो खुशबू नहीं ।। साथ रहकर भी रह गयी दूरियां । कुछ तो कमी हमारी मोहब्‍बत में रही ।। दिल के जख्‍म बहुत गहरे लगे हैं। अब क
 
भारत मल्‍होत्रा
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हम सब दोगले हैं...

हां, हम सब दोगले हैं आप मैं और हम सब पहले दिन पूजते हैं कि कन्‍याओं को ओर अगले ही दिन उन्‍हें गर्भ में मार देते हैं घर की लक्ष्‍मी बनाकर घर लाते हैं उन्‍हें और फिर अगले ही दिन उसे जिंदा जलाकर मार देते हैं क्‍योंकि हम सब दोगले हैं आप मैं और हम सब औरत
 
भारत मल्‍होत्रा
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मोहब्‍बत सच का नाम है...

सच कहने से डरते हो। और कहते हो मोहब्‍बत करते हो।। आंखों में कोई, दिल में कोई, जुबां पर कोई और है। अरे यह तो बताओ, इतना सब कैसे करते हो।। तुम कहते हो, हम ग़ैर हैं तुम्‍हारे। फिर यह क्‍यों बताओ, मेरे नाम से क्‍यों आहें भरते हो।। लाख बचा लो, हमसे दामन।
 
भारत मल्‍होत्रा
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कभी तु मेरे साथ होगी...

ख़ुदा हाफिज, ऐ दोस्‍त मेरे... फिर किसी दिन मुलाकात होगी रू-ब-रू न सही, कोई गम नहीं ख्‍यालों में तो कोई बात होगी सपनों के बगीचे में पूछेंगे हाल यादों के बिस्‍तर पर जब रात होगी वहीं मिलेंगे चंद पल सकून के हमें रकीबों को छोड़, तु मेरे साथ होगी मोहब्‍बत के
 
भारत मल्‍होत्रा
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तेरे नाम करता चलूं...

गुजरा इधर से सोचा दुआ सलाम करता चलूं मेरी जिंदगी, कुछ पल तेरे नाम करता चलूं जो साथ गुजारे थे हमने कभी उन लम्‍हों की यादें तेरे नाम करता चलूं वो हंसना-रोना, वो मिलना बिछुड़ना वो बातें तमाम तेरे नाम करता चलूं वो दरख्‍तों के साये, वो ऊंचा टीला बुलाए वो
 
भारत मल्‍होत्रा
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तुम मेरी हो..मेरी हो...मेरी हो प्रिये

तुम मेरी हो...मेरी हो...मेरी हो प्रिये यह कहता है हरपल मेरा ह्दय मेरी धड़कन में तुम तुम मेरी श्‍वास में मेरे जीवन के हर इक अहसास में मेरा जीवन है केवल तुम्‍हारे लिए तुम मेरी हो...मेरी हो...मेरी हो प्रिये तुमको पाऊं ये मेरी है कामना मैने की है तेरी अर
 
भारत मल्‍होत्रा
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यूं हो रहा है 'भारत निर्माण'

उसके पैरों में जूते नहीं थे जूते क्‍या कोई फटी चप्‍पल भी नहीं तन पर थे कुछ फटे पुराने कपड़े आंखों में उम्‍मीद की किरण लिए वो हर राहगीर को निहार रहा था एक आस था दामन थामे हाथ आगे बढ़ाता फैलाकर अपनी हथेली को सोचता शायद इस पर कोई भार रख दे, हर गुजरने वा
 
भारत मल्‍होत्रा
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तेरा नाम ही मेरा है

यूं ही लिखते लिखते कागज पर तेरा नाम लिख जाता हूं मैं फिर सोचता हूं कि, क्‍यों, आखिर क्‍यों... अब तक यह नाम मेरे इस कदर करीब है। कागज पर कलम की नोक से उकेरे अक्षरों को तेरा चेहरा बनते देखता हूं फिर, इक ख्‍याल दिल में दस्‍तक देता है बस यही, यही और यही
 
भारत मल्‍होत्रा
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संघर्ष..

भारत मल्‍होत्रा संघर्ष... जीवन में हर पल करना होता है संघर्ष अपनी जमीं तलाशने का संघर्ष... अपनी पहचान बनाने का संघर्ष... पर सबसे पहला संघर्ष खुद से ही होता है यह समझाने का संघर्ष कि गर करना है उत्‍कर्ष तो करना होगा संघर्ष... फिर जाकर बात परिवार की आत
 
भारत मल्‍होत्रा