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03 Jun 2010
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मैंने चुपके से.......

मैंने चुपके से कही थी बात तुमने आम कर दीमुहब्बत पाक़ होती है क्यूँ नीलाम कर दीदिल के राज़ों को कहा था दिल में रखनाजो तेरी मेरी थी वो बात सरे आम कह दीमेरी हालत को भरी महफ़िल में बयाँ करकेतूने इबादत भी मेरी बदनाम कर दी(बहुत पहले लिखी हुई रचना है.........आज
 
Shikha Deepak
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सोचती हूँ तुमसे किनारा कर लूं...........

सोचती हूँ तुमसे किनारा कर लूं..........क्यूँ इतना आश्चर्य क्यूँ...........चलो तुम्हारा आश्चर्य करना कुछ तो वाजिब है। वैसे भी तुम मेरे साथ थे ही कब??? जब साथ ही नहीं तो मुझे जाना ही कहाँ?? तुमको शायद याद भी न हो पर मेरे जेहन में तो वो पल आज भी वहीँ का
 
Shikha Deepak
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रे मन.........

रे मन पथिक तू किस ओर चला.........कहाँ जा रहा है यूँ..........किसके लिए इतना व्याकुल है....वो जो दूर से तेरी ओर आ रहा है.....पर कौन जाने वो किस लिए आ रहा है और किसके लिए आ रहा है..........तू तो बावरा है, तुझे कैसे पता कि वो तेरे लिए आरहा है............वो
 
Shikha Deepak
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अब के जो..........

अब के जो बिखरी तो न सँवरूंगी कभीअपने हाथों से बनी खुद अपनी ही तकदीर हूँरंग ले के लहू से नमी अश्कों सेखुद अपने में रंग भरती आप अपनी ही तस्वीर हूँजिनके पूरा होने की तमन्ना में हाँथ उठे ही रहेअपनी ऐसी अनसुनी दुआओं की ताबीर हूँजितनी बार आज़माओगे मुझे वैसा ही
 
Shikha Deepak
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तुमसे जलती हूँ मैं.............खुद पर इतराती भी हूँ !!!!!!

पता है मैं तुमसे जलती हूँ ..........सोचते होगे कि क्यूँ भला, मैं तुमसे क्यूँ जलने लगी.........बताऊँ ???? उस दिन जब मैंने तुमसे पूछा था कि क्या तुमको कभी इस बात की खुशी नहीं होती की कोई इस दुनिया में ऐसा है जो तुमसे बहुत प्यार करता है...........कोई दिल है
 
Shikha Deepak
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थोड़ा सा जी लेने दे..........

बड़ी घुटन सी हो रही है.........मैं सांस भी नहीं ले पा रही हूँ........जिंदगी ने तहज़ीब, रस्मों रवायतों और फर्ज के इतने लबादे मेरे ऊपर लपेट दिए हैं कि मैं उनके बोझ तले दबी जा रही हूँ........मैं भूलती जा रही हूँ कि मैं कौन हूँ क्या हूँ, सारा दर्द दिल में
 
Shikha Deepak
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मॉम यू आर टू गुड..............;;

शीर्षक से ही समझ गए होंगे कि मैं बच्चों की बात कर रही हूँ। जी सही समझा। कल मैं अपने कम्प्यूटर पर कुछ टाइप कर रही थी...........पता ही नही चला कि मेरे बेटे मेरे पीछे खड़े बहुत ध्यान से देख रहे हैं। ऐसा आम तौर पर होता नहीं है क्योंकि कुछ मिनट तो क्या कुछ पल
 
Shikha Deepak
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रण बांकुरा

पहले पहल घबराता था हृदयजीवन की कठिनाइयों सेसहमी सहमी सी मैं डर जाती थीकभी कभी अपनी ही परछाइयों सेलगता था जीवन पथ मुश्किल हैमैं पार नहीं कर पाऊंगीमन के इस भय रूपी दानव परकभी मैं वार नहीं कर पाऊंगीयह भय बन कर दरियामुझे डुबाता चला गयाजब कुछ सूझा ना मैं
 
Shikha Deepak
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कितनी अजीब शै ..........जिन्दगी

बिछड़ चला है तो मेरी दुआएं लेता जावहाँ वहाँ मुझे पाए जहाँ जहाँ जाए !!!कुछ लोग चंद लाइनों में कितना कुछ कह देते हैं। पुरानी डायरी के पन्ने पलट रही थी तो कहीं बीच में यह लाइनें लिखी हुई दिखीं.........किसने कही, कब कही और कहाँ कही यह तो पता नहीं पर पढ़ कर
 
Shikha Deepak
Apr 13 2010 08:00 PM
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रण बांकुरा

पहले पहल घबराता था हृदयजीवन की कठिनाइयों सेसहमी सहमी सी मैं डर जाती थीकभी कभी अपनी ही परछाइयों सेलगता था जीवन पथ मुश्किलमैं पार नहीं कर पाऊंगीमन के इस भय रूपी दानव परकभी मैं वार नहीं कर पाऊंगीयह भय बन कर दरियामुझे डुबाता चला गयाजब कुछ सूझा ना मैं कैसेइस
 
Shikha Deepak
Apr 13 2010 07:41 PM
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सोचती हूँ तुमसे किनारा कर लूं...........

सोचती हूँ तुमसे किनारा कर लूं..........क्यूँ इतना आश्चर्य क्यूँ...........चलो तुम्हारा आश्चर्य करना कुछ तो वाजिब है। वैसे भी तुम मेरे साथ थे ही कब??? जब साथ ही नहीं तो मुझे जाना ही कहाँ?? तुमको शायद याद भी न हो पर मेरे जेहन में तो वो पल आज भी वहीँ का
 
Shikha Deepak
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कमाल की कला..........फ़ूड आर्ट!

मेरी किसी मित्र ने मुझे यह तस्वीरें मेल की हैं। आप भी देखिये। हैं न कमाल। पता नहीं इन्हें बनाने वाला कलाकार कौन है, पर वो बधाई का पात्र जरूर है।
 
Shikha Deepak
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Mar 25 2010 01:59 PM
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कितनी अजीब शै ..........जिन्दगी

बिछड़ चला है तो मेरी दुआएं लेता जावहाँ वहाँ मुझे पाए जहाँ जहाँ जाए !!!कुछ लोग चंद लाइनों में कितना कुछ कह देते हैं। पुरानी डायरी के पन्ने पलट रही थी तो कहीं बीच में यह लाइनें लिखी हुई दिखीं.........किसने कही, कब कही और कहाँ कही यह तो पता नहीं पर पढ़ कर
 
Shikha Deepak
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शुक्रिया ......ऐ दोस्त !!!!!!

करीब दस महीनों के बाद आज अपने ब्लॉग पर कुछ लिख रही हूँ। इतने दिनों न लिखने के बहुत ढेर सारे कारण हैं, उनको फिर कभी बताउंगी पर अभी बताती हूँ कि मैं क्यों फिर लिख पा रही हूँ...............इतने दिनों लिखा तो नहीं पर बहुत कुछ पढ़ा और बहुतों को पढ़ा। उस बहुत
 
Shikha Deepak
Mar 19 2010 03:54 PM
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शुक्रिया ......ऐ दोस्त !!!!!!

करीब दस महीनों के बाद आज अपने ब्लॉग पर कुछ लिख रही हूँ। इतने दिनों न लिखने के बहुत ढेर सारे कारण हैं, उनको फिर कभी बताउंगी पर अभी बताती हूँ कि मैं क्यों फिर लिख पा रही हूँ...............इतने दिनों लिखा तो नहीं पर बहुत कुछ पढ़ा और बहुतों को पढ़ा। उस बहुत
 
Shikha Deepak
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बुलबुला

बरसात हो रही है.........जमीन पर पड़ती बूँदें.........बनते बिगड़ते बुलबुले.........इन्ही बुलबुलों सी ही तो है जिन्दगी.......एक पल बनती अगले ही पल बिगड़ती पर इन दो पलों के बीच एक पूरी जिंदगी। कश्मकश.......होड़......आपाधापी......संघर्ष.......औपचारिकता, यही
 
Shikha Deepak
Jan 20 2010 03:26 PM
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बुलबुला

बरसात हो रही है ......... जमीन पर पड़ती बूँदें ......... बनते बिगड़ते बुलबुले ......... इन्ही बुलबुलों सी ही तो है जिन्दगी ....... एक पल बनती अगले ही पल बिगड़ती पर इन दो पलों के बीच एक पूरी जिंदगी। कश्मकश ....... होड़ ...... आपाधापी ...... संघर्ष ....
 
Shikha Deepak
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चाँद

अभी अपने घर की छत पर थी...ठंडी हवा चल रही थी...आसमान में चाँद, तारे, बादल सभी थे...बिजली चले जाने से घरों और सड़कों में अँधेरा था पर इससे आसमान के नज़ारे स्पष्ट दिख रहे थे....देखते देखते कुछ शब्द मन में घूमने लगे................. वो दूर आसमान में चाँद
 
Shikha Deepak
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चाँद

अभी अपने घर की छत पर थी...ठंडी हवा चल रही थी...आसमान में चाँद, तारे, बादल सभी थे...बिजली चले जाने से घरों और सड़कों में अँधेरा था पर इससे आसमान के नज़ारे स्पष्ट दिख रहे थे....देखते देखते कुछ शब्द मन में घूमने लगे................. वो दूर आसमान मेंचाँद पिघल
 
Shikha Deepak
May 05 2009 08:25 PM
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कहानी..........बीज

उसका जन्म हो चुका था..........पर वो संसार के लिया अदृश्य था...........वो जीवन के अन्य रूप की परतों के भीतर छुपा था..........वो एक बीज था। एक विशाल वृक्ष के ढेरों फलों में से एक के भीतर छुपा..........जीवन का आरंभ..........एक बीज। सब कुछ अनोखा था उसके
 
Shikha Deepak
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कहानी..........बीज

उसका जन्म हो चुका था..........पर वो संसार के लिया अदृश्य था...........वो जीवन के अन्य रूप की परतों के भीतर छुपा था..........वो एक बीज था। एक विशाल वृक्ष के ढेरों फलों में से एक के भीतर छुपा..........जीवन का आरंभ..........एक बीज। सब कुछ अनोखा था उसके लिए,
 
Shikha Deepak
Apr 23 2009 10:50 PM
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कमाल की कला..........फ़ूड आर्ट!

मेरी किसी मित्र ने मुझे यह तस्वीरें मेल की हैं। आप भी देखिये। हैं न कमाल। पता नहीं इन्हें बनाने वाला कलाकार कौन है, पर वो बधाई का पात्र जरूर है।
 
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कहानी........औरत

यह कहानी एक औरत की है............औरत............एक ऐसी औरत जो सभी घटनाओं का केन्द्र थी फ़िर भी उसका महत्त्व किसी ने नहीं समझा और जब समझा तब बहुत देर हो चुकी थी। वो औरत................एक व्यापारी के घर पैदा हुई...........कन्या रत्न की प्राप्ति घाटे में
 
Shikha Deepak
Apr 17 2009 01:35 PM
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कहानी........औरत

यह कहानी एक औरत की है ............ औरत ............ एक ऐसी औरत जो सभी घटनाओं का केन्द्र थी फ़िर भी उसका महत्त्व किसी ने नहीं समझा और जब समझा तब बहुत देर हो चुकी थी । वो औरत ................ एक व्यापारी के घर पैदा हुई ........... कन्या रत्न की प्राप्ति
 
Shikha Deepak
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शिद्दत......

लिखा नसीब का आज मेरी नज़रों के सामने है आया वो दिल भी तड़पा याद में था जिसने मुझे भुलाया जब मेरा दिल राह भूला जिंदगी भी ख़ुद से बिछड़ी मैंने मंजिल की राह पायी जब वो रहनुमा बन के आया आज गहराइयों से दिल की तुमको आवाज मैंने दी है दीद की आरजू ने तुमको महफि
 
Shikha Deepak
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शिद्दत......

लिखा नसीब का आज मेरीनज़रों के सामने है आयावो दिल भी तड़पा याद मेंथा जिसने मुझे भुलायाजब मेरा दिल राह भूलाजिंदगी भी ख़ुद से बिछड़ीमैंने मंजिल की राह पायीजब वो रहनुमा बन के आयाआज गहराइयों से दिल कीतुमको आवाज मैंने दी हैदीद की आरजू ने तुमकोमहफिल में आज
 
Shikha Deepak
Apr 11 2009 09:17 PM
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कुछ यादें कुछ हकीक़त !!!!!!!!

आज सुबह सुबह समीर जी का लेख पढ़ा। उन्होनें ठेठ हिन्दुस्तानी अंदाज में बिताये अपने अवकाश के एक दिन का जो विवरण दिया उसने हमें बहुत कुछ याद दिला दिया। मन जैसे पल भर में बचपन की गलियों में दौड़ आया। नवाबों के शहर लखनऊ में मेरा जन्म हुआ, वहीं पली बढ़ी, पढाई
 
Shikha Deepak
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Apr 02 2009 01:43 PM
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ट्रैफिक सिग्नल पर.........

अभी दो दिन पहले अपनी एक मित्र के साथ किसी काम से घर के पास ही एक बाजार गयी थी। जाते समय हमने देखा कि कुछ औरतें अपने बच्चों के साथ सड़क के किनारे बैठ कर खाने के डब्बे निकाल कर अपने बच्चों को खिला रही हैं और बीच बीच में ख़ुद भी खा रही हैं। माएं अपने बच्चों
 
Shikha Deepak
Mar 30 2009 09:49 PM
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ट्रैफिक सिग्नल पर.........

अभी दो दिन पहले अपनी एक मित्र के साथ किसी काम से घर के पास ही एक बाजार गयी थी । जाते समय हमने देखा कि कुछ औरतें अपने बच्चों के साथ सड़क के किनारे बैठ कर खाने के डब्बे निकाल कर अपने बच्चों को खिला रही हैं और बीच बीच में ख़ुद भी खा रही हैं । माएं अपने ब
 
Shikha Deepak
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जन्म

पहचाने जब अनजाने लोग देखी दुनिया और उसकी सोच कोई अपना जब दूर गया या कोई दूर से पास आ गया मिली खुशी या आयी विपदा संतोष मिला या मिली जो चिंता तृष्णाओं को जब भी नापा शब्दों के अर्थों को मापा जब जब ख़ुद को पढ़ा है मैंने अंतर्मन को सुना है मैंने तब तब मेरे
 
Shikha Deepak
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जन्म

पहचाने जबअनजाने लोगदेखी दुनियाऔर उसकी सोचकोई अपनाजब दूर गयाया कोई दूर सेपास आ गयामिली खुशी याआयी विपदासंतोष मिला यामिली जो चिंतातृष्णाओं कोजब भी नापाशब्दों केअर्थों को मापाजब जब ख़ुद कोपढ़ा है मैंने अंतर्मन कोसुना है मैंने तब तब मेरेमनस हृदय मेंएक कविता
 
Shikha Deepak
Mar 25 2009 12:13 PM
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न आए आप ............

न आए आप याद आपकी आती रही बस इस तरह से जिन्दगी भरमाती रही देख लूँ आपको बस एक आखिरी बार इसी हसरत में साँसें भी आती जाती रहीं जब भी आना चाहा हमने आपके पास राहें भी मेरे सफर को ठुकराती रहीं सीने में उठ के दर्द की लहरें बार बार दिल को मेरे थपकाती सुलाती र
 
Shikha Deepak
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न आए आप ............

न आए आप याद आपकी आती रहीबस इस तरह से जिन्दगी भरमाती रहीदेख लूँ आपको बस एक आखिरी बारइसी हसरत में साँसें भी आती जाती रहींजब भी आना चाहा हमने आपके पासराहें भी मेरे सफर को ठुकराती रहींसीने में उठ के दर्द की लहरें बार बारदिल को मेरे थपकाती सुलाती रहींखाई थी
 
Shikha Deepak
Mar 16 2009 09:26 PM
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बचपन की बातें........

प्यारी प्यारी वो बचपन की बातें दोपहर सी जाड़े की साँझ जैसे गरमी की हर रूप धरती थीं बचपन की बातें वो झूले सावन के वो झोंके पवन के महकते मौसम सी बचपन की बातें वो गुड्डे वो गुडियां सहेली और सखियाँ कितनी निश्छल थी बचपन की बातें वो हंसना वो गाना रूठना और म
 
Shikha Deepak
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बचपन की बातें........

प्यारी प्यारी वो बचपन की बातेंदोपहर सी जाड़े कीसाँझ जैसे गरमी कीहर रूप धरती थीं बचपन की बातेंवो झूले सावन केवो झोंके पवन केमहकते मौसम सी बचपन की बातेंवो गुड्डे वो गुडियांसहेली और सखियाँकितनी निश्छल थी बचपन की बातेंवो हंसना वो गानारूठना और मनानाकितनी सरल
 
Shikha Deepak
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Mar 07 2009 11:50 AM
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सुपर मॉम नेवर क्राइस !

आप सोच रहे होंगे की यह कैसा शीर्षक है...... बताती हूँ पहले इसकी भूमिका बना लूँ। पिछले कुछ दिनों से मेरे छह वर्षीय जुड़वाँ सुपुत्रों को वायरल बुखार है। अब बुखार है तो स्कूल की छुट्टी पर आदत से मजबूर कि पल भर भी टिक के नहीं बैठते। जितनी देर बुखार ज्यादा
 
Shikha Deepak
Mar 03 2009 12:57 PM
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सुपर मॉम नेवर क्राइस !

आप सोच रहे होंगे की यह कैसा शीर्षक है...... बताती हूँ पहले इसकी भूमिका बना लूँ। पिछले कुछ दिनों से मेरे छह वर्षीय जुड़वाँ सुपुत्रों को वायरल बुखार है। अब बुखार है तो स्कूल की छुट्टी पर आदत से मजबूर कि पल भर भी टिक के नहीं बैठते। जितनी देर बुखार ज्याद
 
Shikha Deepak
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हाथियों के साथ एक दिन....दुबारे

पिछले साल कूर्ग जाना हुआ (कर्नाटक के मडिकेरी नामक स्थान पर कूर्ग या कोडुगु नाम से जाना जाने वाला एक हिल स्टेशन) इसके बारे में तो हमने सुन रखा था। रास्ते में हमें पता चला की यहाँ पर हाथियों का एक ट्रेनिंग सेंटर है जिसका नाम है दुबारे एलिफैंट कैंप है । यह
 
Shikha Deepak
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Mar 01 2009 02:09 PM
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हाथियों के साथ एक दिन..

पिछले साल कूर्ग जाना हुआ ( कर्नाटक के मडिकेरी नामक स्थान पर कूर्ग या कोडुगु नाम से जाना जाने वाला एक हिल स्टेशन ) इसके बारे में तो हमने सुन रखा था । रास्ते में हमें पता च ला की यहाँ पर हाथियों का एक ट्रेनिंग सेंटर है जिसका नाम है दुबारे एलिफैंट कैंप
 
Shikha Deepak
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"गुम" ..........."राह"

चलते चलते थक गईराह भी गुम हुईमगर मुझे मंजिल कीछाया भी दिखाई न भी पड़ीहर खुशी मेरी लुट गईफ़िर भी न पलकें नम हुईंजो ख़ुद की आँखों में कैद हैमैं आंसुओं की वो झड़ीजिंदगी में अब कोईअरमान बाकी न रहा जिसके मोती बिखर गएमैं ऐसी सपनों की लड़ी तन्हा चली थी तन्हा
 
Shikha Deepak
Feb 28 2009 12:56 PM