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मैंने चुपके से.......
मैंने चुपके से कही थी बात तुमने आम कर दीमुहब्बत पाक़ होती है क्यूँ नीलाम कर दीदिल के राज़ों को कहा था दिल में रखनाजो तेरी मेरी थी वो बात सरे आम कह दीमेरी हालत को भरी महफ़िल में बयाँ करकेतूने इबादत भी मेरी बदनाम कर दी(बहुत पहले लिखी हुई रचना है.........आज
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Jun 03 2010 11:28 AM


Shuffle








