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सरस पायस

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17 Jun 2010
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आए जब दो पाखी उड़कर : रावेंद्रकुमार रवि का नया बालगीत

आए जब दो पाखी उड़करमेरे घर में बना एक घर,आए जब दो पाखी उड़कर!मादा ने दो अंडे देकर,गरम किया फिर उनको सेकर!कुछ दिन बाद निकलकर आए,उसके दो बच्चे मन भाए!चोंच खोलकर चुग्गा खाते,पर उनके ना निकले थे पर!मेरे घर में ... ... .माँ आती जब चुग्गा लेकर,हल्ला करते
 
रावेंद्रकुमार रवि
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हम क्या उगाते हैं? : हेनरी एबे की अँगरेज़ी कविता का हिंदी अनुवाद

हम क्या उगाते हैं?हम क्या उगाते हैं, जब पेड़ लगाते हैं?हम पानी का जहाज उगाते हैं, जो समुद्र पार करेगा।हम मस्तूल उगाते हैं, जिस पर पाल बँधेगी।हम वे फट्टे उगाते हैं,जो हवा के थपेड़ों का सामना करेंगे।जहाज का तला, शहतीर, कोहनी,हम पानी का जहाज उगाते हैं, जब
 
रावेंद्रकुमार रवि
Jun 14 2010 12:40 PM
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सूरज बन मुस्काऊँ : अक्षिता पाखी के चित्रों के साथ रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

सूरज बन मुस्काऊँमैंने चित्र बनाए सुंदर,आओ, तुम्हें दिखाऊँ!इन्हें बनाकर ख़ुश होता है,मेरा मन, मैं गाऊँ!तोता लटका है बादल से,देखे सूरज नीला!खरबूजा भी लुढ़क रहा है,आसमान में पीला!चूहा, हाथी, फूल हँस रहे,मैं भी सबको भाऊँ!मैंने चित्र बनाए ... ... .गुड्डा मेरा
 
रावेंद्रकुमार रवि
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पेड़ लगाकर भूल न जाना : रावेंद्रकुमार रवि का नया बालगीत

पेड़ लगाकर भूल न जानाआओ, हम सब पेड़ लगाएँ,अपनी धरती ख़ूब सजाएँ!पेड़ लगाकर भूल न जाना,इनको पानी रोज़ पिलाना!रोज़ सवेरे इन्हें चूमकर,बहुत प्यार से फिर सहलाना!इन पर बैठ सदा चिड़ियाएँ,गीत ख़ुशी के हमें सुनाएँ!आओ, हम सब ... ... .पेड़ों को भाती है मस्ती,इनकी
 
रावेंद्रकुमार रवि
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टर्र-टर्रकर मेढक गाए : सलोनी राजपूत का नया शिशुगीत

टर्र-टर्रकर मेढक गाए! ----------------------------------------------------- कूद-कूदकर गीत सुनाए, टर्र-टर्रकर मेढक गाए! जहाँ देखता कोई कीड़ा, झट-पट अपनी जीभ बढ़ाए! टर्र-टर्रकर मेढक गाए! छप-छप करके नाच दिखाता, तैर-तैर के गोते खाए! टर्र-टर्रकर मेढक गाए!
 
रावेंद्रकुमार रवि
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आओ, नाचें ता-ता-थइया : श्याम सखा श्याम का बालगीत

आओ, नाचें ता-ता-थइया!बादल भइया, बादल भइया,आओ, नाचें ता-ता-थइया!बंद पड़ी दादुर की टर-टर,बहे पसीना झर-झर-झर-झर!बछिया ढूँढ रही है मइया!बादल भइया, बादल भइया, आओ, नाचें ता-ता-थइया!पिहू-पिहू कर मोर पुकारे -आजा-आजा बादल प्यारे!सूखे हैं सब ताल-तलइया!बादल भइया,
 
रावेंद्रकुमार रवि
May 30 2010 08:44 AM
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मन ख़ुशियों से फूला : डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" की नई बालकविता

♥ ♥ मन ख़ुशियों से फूला ♥ ♥उमस-भरा गरमी का मौसम,तन से बहे पसीना!कड़ी धूप में कैसे खेलूँ,इसने सुख है छीना!!कुल्फी बहुत सुहाती मुझको,भाती है ठंडाई!दूध गरम ना अच्छा लगता,शीतल सुखद मलाई!!पंखा झलकर हाथ थके जब,मैंने झूला झूला!ठंडी-ठंडी हवा लगी तब,मन ख़ुशियों
 
रावेंद्रकुमार रवि
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कितने सुंदर हैं गुब्बारे : कृष्णकुमार यादव की नई शिशुकविता

कितने सुंदर हैं गुब्बारेलाल-बैंगनी-हरे-गुलाबी,रंग-बिरंगे हैं ये प्यारे।एक नहीं हैं इतने सारे,कितने सुंदर हैं गुब्बारे।गुब्बारों की दुनिया होती,कितनी-प्यारी और निराली।हँस देते रोनेवाले भी,खिल जाती चेहरे पर लाली।हम सब दौड़ें इनके पीछे,कसकर पकड़े इन्हें हाथ
 
रावेंद्रकुमार रवि
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हम भी उड़ते : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

हम भी उड़तेहम भी उड़ते आसमान में जैसे उड़े पतंग! सजाकर सुंदर-सुंदर रंग! देख-देख जिनकी उड़ान हम रह जाते हैं दंग, वे चिड़ियाएँ उड़ें मज़े से मस्त हवा के संग! सजाकर ... ... . उड़ती हैं तितलियाँ बाग़ में भर पंखों में रंग, रुक-रुक जो कहतीं फूलों से -"चलो
 
रावेंद्रकुमार रवि
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सबके मन को भाए : दीनदयाल शर्मा की एक बालकविता

सबके मन को भाएइसके बिन है सरकस सूना,दर्शक एक न आए।उल्टे-सीधे कपड़े पहने,करतब ख़ूब दिखाए।गुमसुम कभी न देखा इसको,हर पल यह मुस्काए।ख़ुद तो हँसता ही रहता है,सबको ख़ूब हँसाए।गिरते-गिरते बच जाता यह,पल-पल में इतराए।जोकर ही हो सकता है, जोसबके मन को भाए।दीनदयाल
 
रावेंद्रकुमार रवि
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बैठ खेत में इसको खाया : डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक' की एक बालकविता

बैठ खेत में इसको खाया-----------------------------------------------जब गरमी की ऋतु आती है!लू तन-मन को झुलसाती है!!तब आता तरबूज सुहाना!ठंडक देता इसको खाना!!यह बाज़ारों में बिकते हैं!फुटबॉलों जैसे दिखते हैं!!एक रोज़ मन में यह ठाना!देखें इनका
 
रावेंद्रकुमार रवि
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जन्म-दिवस पर मुझे मिला एक अनमोल उपहार

मेरे जन्म-दिवस की सुहानी भोर मुझ पर ख़ुशियों की बरसात करने के लिए तत्पर थी, पर आभासी दुनिया में खोया बंद कमरे में बैठा मैं बाहर निकल ही नहीं पा रहा था!- "अंकल! अंकल!" -अचानक एक सुरीली आवाज़ ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया!दरवाज़े पर मेरी भतीजी दिव्या
 
रावेंद्रकुमार रवि
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अपनी माँ का मुखड़ा : रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत

♥♥अपनी माँ का मुखड़ा मुझको सबसे अच्छा लगता - अपनी माँ का मुखड़ा! कल-कल करती नदिया अच्छी, पंछी की सुरलहरी अच्छी, हर मंदिर की घंटी अच्छी, मेघों की सरगम भी अच्छी! लेकिन मुझको अच्छी लगती - अपनी माँ की मीठी
 
रावेंद्रकुमार रवि
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ख़ुशी : यश तिवारी की कविता का हिंदी भावानुवाद

ख़ुशीजब मैं भूल जाता हूँ -अपनी क़िताब! कोई समस्या नहीं होती, क्योंकि मैं इसे साझा कर लेता हूँ! लेकिन एक दिन यदि मैं भूल जाता हूँ - अपना बस्ता! तब क्या होता है? मैं बाहर खड़ा हो जाता हूँ! कोई समस्या नहीं होती, क्योंकि मेरे पास हैं दो पैर खड़े होने के लिए!
 
रावेंद्रकुमार रवि
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आदित्य रंजन के लिए रावेंद्रकुमार रवि की एक बालकविता

प्यार से ... ... . मम्मी की गोदी में चढ़कर, जब उनकी आँखों में देखा, आँखों में था सपना! सपने में देखा, तो देखा -- दौड़-दौड़कर, कूद-कूदकर, खेल रहा हूँ मैं, प्यार से खेल रहा हूँ मैं! मम्मी की गोदी में चढ़कर, जब उनकी नथनी में देखा, नथनी में था अपना! अपने को
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मेरा मन मुस्काया : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

मेरा मन मुस्काया------------खिल-खिल करके, खिल-खिल करके,मेरा मन मुस्काया!मेरी चिड़िया ने जब मुझको,मीठा गीत सुनाया -खिल-खिल करके, खिल-खिल करके,मेरा मन मुस्काया!मेरे पिल्ले ने जब बढ़कर,मुझसे हाथ मिलाया -खिल-खिल करके, खिल-खिल करके,मेरा मन मुस्काया!मेरे तोते
 
रावेंद्रकुमार रवि
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म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती : आकांक्षा यादव की नई शिशु कविता

म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती दिन-भर टें-टें करता रहता, राम-नाम भी जपता रहता। बहुत प्यार से मैंने पाला, मेरा तोता बहुत निराला। उसको मिर्ची ख़ूब खिलाती, पानी लाकर उसे पिलाती। म्याऊँ करके उसे चिढ़ाती, बिल्ली से मैं उसे बचाती। आकांक्षा यादव
 
रावेंद्रकुमार रवि
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लैपटॉप : अजय गुप्त का नया बालगीत

लैपटॉपनई अटैची-जैसा आख़िर,भालू दादा क्या ले आए?मित्रो, यह तो लैपटॉप है,कंप्यूटर का छोटा भाई।जो कुछ भी है कंप्यूटर में,इसमें भी वो हर अच्छाई।बहुत कठिन से कठिन प्रश्न सब,इस डिब्बे ने हैं सुलझाए।इस डिब्बे में मीठे गाने,चलते-फिरते चित्र मनोरम।बटन दबाओ मॉनीटर
 
रावेंद्रकुमार रवि
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रंग-रँगीला : कृष्णकुमार यादव की एक बालकविता

रंग-रँगीला गाल गुलाबी, नाक नुकीली, लंबी टोपी पहन चिढ़ाए। उछले-कूदे, चले मटककर, पहिए पर चढ़ उसे चलाए। रंग-रँगीला बनकर आए, सबके मन को ख़ुश कर जाए। हम सब देख बजाते ताली, जोकर सबको ख़ूब हँसाए। झूला झूले चहक-चहककर, चढ़े सायकिल, तो लहराए। कितना अच्छा है यह
 
रावेंद्रकुमार रवि
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माँग नहीं सकता न : पंकज शर्मा की एक लघुकथा

माँग नहीं सकता नबस-स्टैंड पर खड़ा हुआ मैं, बस का इंतज़ार कर रहा था । मेरे सामने खड़ी बस में बैठा एक आदमी पकौड़े खा रहा था । उसने खाते-खाते पकौड़े का एक टुकड़ा करीब दस साल के उस लड़के के हाथ पर धर दिया, जो कुछ देर से उसकी सीटवाली खिड़की के पास हाथ फैलाए
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मेरे मन को भाई : सलोनी राजपूत का पहला शिशुगीत

मेरे मन को भाई!रंग-बिरंगे पंखोंवालीतितली उड़कर आई!मेरे मन को भाई!देखा सुंदर फूल जहाँ पर,अपनी सूँड़ उठाई!चूसा उसका रस मीठा फिर,धीरे से मुस्काई!मेरे मन को भाई!मैंने सोचा पकड़ूँ इसको,मगर हाथ ना आई!इधर उड़ी फिर उधर उड़ी वह,उसने रेस लगाई!मेरे मन को भाई! सलोनी
 
रावेंद्रकुमार रवि
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बोलो, मेरी गुड़िया रानी : संगीता स्वरूप का नया शिशुगीत

बोलो, मेरी गुड़िया रानी! क्यों करती हो तुम मनमानी?बोलो, मेरी गुड़िया रानी!बिस्किट, टॉफी, केक, मिठाई,बोलो, क्या तुमको मन-भाई?चीज़ कौन-सी तुमको खानी?बोलो, मेरी गुड़िया रानी!शरबत, कोकाकोला लाऊँ,या फिर जलजीरा बनवाऊँ?लोगी, क्या तुम नींबू-पानी?बोलो, मेरी
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मैं भी पढ़ना सीख रही हूँ : आकांक्षा यादव का नया बालगीत

मैं भी पढ़ना सीख रही हूँमैं भी पढ़ना सीख रही हूँ,ताकि पढ़ सकूँ मैं अखबार।सुबह-सवेरे मेरे द्वार,हॉकर लाता है अखबार।कभी नहीं वह नागा करता,शीत पड़े या पड़े फुहार।मैं भी ... ... .दादा जी का हो जाता है,आते ही पहले अखबार।चश्मा ऊपर-नीचे करके,पढ़ते वे दुनिया का
 
रावेंद्रकुमार रवि
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पाखी के लिए जन्म-दिवस का उपहार : रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

पाखी के लिए जन्म-दिवस का उपहारआज मैं अचानक पाखी की दुनिया में पहुँच गया! पाखी ने कहा - "देखो मेरी गुड़िया"फिर बोली - "इसको भी एक गीत सुनाना!"मैंने वहाँ बैठी गौरइया को देखकर एक गीत रचा और सुनाने लगा -गौरइया जब आती है, मीठा गीत सुनाती है! गौरइया जब आती है,
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मेरी शोभा प्यारी है : रावेंद्रकुमार रवि का नया बालगीत

मेरी शोभा प्यारी है! मेरे आगे फीकी सारे, रंगों की पिचकारी है! मुझको पाकर सरसा करती, बगिया की हर क्यारी है! मैं जब खिलता हूँ मुस्काकर, सज जाती फुलवारी है! मेरे-जैसी बस दुनिया में, बच्चों की किलकारी है! मेरे अंदर ख़ुशबू भी है, सुंदरता भी न्यारी है! मैं
 
रावेंद्रकुमार रवि
Mar 19 2010 01:45 PM
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सावधानी में ही समझदारी है : राहुल सिंह की एक बाल-चित्रकथा

सावधानी में ही समझदारी हैक्या हुआ?पढ़ने में परेशानी हो रही है?ज़रा एक बार चित्रकथा के किसी भी स्थान परक्लिक् करके तो देखिए।अब आप इसे अपने कंप्यूटर में सहेज सकते हैंऔरडेस्कटॉप पर सजाकर भीपढ़ने और पढ़ाने का आनंद ले सकते हैं।-- राहुल सिंह -- Posted by
 
रावेंद्रकुमार रवि
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क्या मुझसे डर जाती हो : चंदन कुमार झा का पहला शिशुगीत

क्या मुझसे डर जाती हो? चिड़िया रानी, चिड़िया रानी, मुझे सुनाओ अपनी बानी! जब मैं तुमको पास बुलाता, दूर चली क्यों जाती हो? मैं तो हूँ छोटा-सा बच्चा, क्या मुझसे डर जाती हो? आओ, तुम्हें पिला दूँ पानी!चिड़िया रानी, चिड़िया रानी, मुझे सुनाओ अपनी बानी! बिना थके
 
रावेंद्रकुमार रवि
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ख़ूब रसीला : संगीता स्वरूप का एक शिशुगीत

------------------------------ख़ूब रसीला------------------------------------------------------------गोल-गोल है लाल टमाटर,सबके मन को है भाता ।स्वाद बढाता है सब्जी का,जब उसमें डाला जाता ।खट्टा -मीठा , ख़ूब रसीला,मन होता खाते जाएँ ।रंगत लाल टमाटर-जैसी,अपने
 
रावेंद्रकुमार रवि
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हम हैं बच्चे सबसे अच्छे : विश्वबंधु की एक बालकविता

हम हैं बच्चे सबसे अच्छे-----------आज आपको 7 साल के एक नन्हे कवि की कविता पढ़वाई जा रही है, जो शाहजहाँपुर (उ.प्र.) के एम. आर. सिंधिया पब्लिक स्कूल में कक्षा - 2 के छात्र हैं । नन्हे कवि की अभिव्यक्ति को ज्यों का त्यों प्रकाशित किया जा रहा है -
 
रावेंद्रकुमार रवि
Mar 03 2010 06:36 PM
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हो... हो... होली है : अरविंद राज का एक बालगीत

हो... हो... होली है ! मन में तरंग है, तन में उमंग है । धरती रंगीली है, अंबर सतरंग है । रंगों में रँगी हुई मस्तों की टोली है । होली है... हो... हो... होली है !आज नहीं दिल में है कोई मलाल । छेड़ रहे सब मिलकर खुशियों की ताल । रंगों में आज भली प्रेम-भंग घोली
 
रावेंद्रकुमार रवि
Feb 25 2010 10:17 PM
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सेब निराला : संगीता स्वरूप का एक शिशुगीत

सेब निरालालाल-लाल है सेब निराला,ख़ुश होता हर खानेवाला ।प्रतिदिन इसको जो है खाता,वह रोगों को दूर भगाता । संगीता स्वरूप
 
रावेंद्रकुमार रवि
Feb 24 2010 10:28 PM
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श्रम करने से मिले सफलता : डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" का एक बालगीत

बालगीत : परीक्षा सिर पर आई के लिए "सरस पायस" को आशीष के रूप में मिला डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" का बालगीत इतना अच्छा है कि मैं उसे पोस्ट के रूप में प्रकाशित करने से अपने आप को रोक नहीं पाया!श्रम करने से मिले सफलताखेल-कूद में रहे रात-दिन, अब पढ़ना
 
रावेंद्रकुमार रवि
Feb 23 2010 04:57 PM
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परीक्षा सिर पर आई : रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत

परीक्षा सिर पर आई खेल-कूद अब छोड़ें कुछ दिन,आओ, जमकर करें पढ़ाई!परीक्षा सिर पर आई!! टीवी-सीडी ख़ूब देख ली,ख़ूब किया है सैर-सपाटा!अब तो केवल देखें पुस्तक,छोड़ें सुस्ती की अँगड़ाई!परीक्षा सिर पर आई!! गणित हमारी माता हैं अब,और पिता विज्ञान हमारे!इनकी सेवा अब भी
 
रावेंद्रकुमार रवि
Feb 19 2010 11:20 PM
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मान्या की दादी का एक बालगीत : पीछे-पीछे सब डिब्बों से

गिरिजा कुलश्रेष्ठ पीछे-पीछे सब डिब्बों सेनन्ही मान्या घुटनों-घुटनोंचलती किलक-किलककर!उसे पकड़ने दौड़ पड़ा हैपीछे-पीछे सब घर! चश्मा रखकर दौड़ीं दादी,पुस्तक रखकर दादा,हड़बड़-गड़बड़ पापा-मम्मी,काम छोड़कर आधा,चकराए चाचा चिल्लाए --रोको, अरे, सँभलकर!नन्ही
 
रावेंद्रकुमार रवि
Feb 15 2010 06:34 PM
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कह रहीं बालियाँ गेहूँ की : डॉ॰ नागेश पांडेय संजय का एक बालगीत

कह रहीं बालियाँ गेहूँ की मधुर कान में काली कोयल गाए मस्त मल्हार!बाँट रहे हैं फूल सभी को ख़ुशबू का उपहार!पेड़ों ने पहनी है कोमल-नई-मनोहर वर्दी!भीनी-भीनी धूप निकलने लगी कम हुई सर्दी! लदे बौर से पेड़ आम के मस्त हवा संग झूमें!सुध-बुध छोड़ तितलियाँ सरसों पर
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मानसिकता : संगीता स्वरूप की एक लघुकथा

मानसिकता-- संगीता स्वरूप--"माँ ! मैं कक्षा में प्रथम आई हूँ !" -  बिटिया ख़ुशी से चिल्लाती हुई घर में घुसी । माँ ने कहा - "अव्वल आई है तो क्या? पराये घर जाकर चूल्हा ही तो झोंकना है तुझे । इतना चिल्ला क्यों रही है ?" माँ की बात बेटी के
 
रावेंद्रकुमार रवि
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रवि मन : स्वरचित रचनाओं से सजा मेरा नया ब्लॉग

"रवि मन" यह है - मेरे  नवेले ब्लॉग का सुनहरा नाम! इस पर मैं स्वरचित  रचनाओं का प्रकाशन किया करूँगा! मैं "रवि मन" पर स्वागत करता - आप सभी मनमानों का, मन में भरकर सरस मिठास! मन से आइए और मन से पढ़िए - मेरी मन-भाती रचना - मुझको बता
 
रावेंद्रकुमार रवि
टैग: रवि मन
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रावेंद्रकुमार रवि का एक शिशुगीत : मीठा-मीठा-मीठा

मीठा-मीठा-मीठा----बकरी का बच्चा, बच्चे की मम्मी, मम्मी का दुद्-धू, मीठा-मीठा-मीठा, बच्चा दुम उठा के पीता!--रावेंद्रकुमार रवि
 
रावेंद्रकुमार रवि