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राजू बिन्दास!

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08 Jun 2010
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इति मूत्राभिषेक!

वो रातें अभी भी मुझे याद हैं. सुस्सू वाली रात के बाद की सहर (सुबह), कहर बन कर टूटती थी मेरे कोमल मन पर. मेरी तरह आप भी तो बिस्तर पर सुस्सू करते बड़े हुए होंगे. अब सुस्सूआएगी तो करेंगे ही. कभी साफ टॉयलेट में, कभी गंदे टायलेट में, कभी दीवार पर, कभी किसी
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‘जहर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा’

लोगों को सिगरेट पर सिगरेट फूंकता देख बशीर बद्र का ये शेर बरबस याद आने लगता है-‘मैं खुदा का नाम लेकर पी रहा हूं दोस्तों,जहर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा’ दवा कितनी है ये तो पता नहीं लेकिन टोबैको के अर्ज के मर्ज में लोगों की जिंदगी तेजी से खर्च हो रही
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ब्लॉगिंग में ब्रेक

ब्लॉगिंग में भी ब्रेक होते हैं. ब्रेक लेना तो जैसे फैशन हो गया है. थोड़ा काम किया नहीं कि ब्रेक, थोड़ा बात की नहीं कि ब्रेक, मूड बना तो ब्रेक, नहीं बना तो भी ब्रेक. बिना रुके कोई अगर सरपट भागा जा रहा है तो वो बैकवर्ड है. मार्डन कहलाना है तो भागिए मत
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कान पर जूं

आप कैसे अपेक्षा कर लेते हैं कि अधिकारियों के कान पर जूं रेंगेगी. मेरे भी कान पर कमबख्त जूं नहीं रेंगी तो नहीं रेंगी. जब खूब घने बाल थे तब भी और अब जब चांद की ओर बढऩे की तैयारी है तब भी. जब खोपड़ी में जूं नहीं है तो कान पर रेंगने का सवाल ही नहीं उठता.
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...तुम्हारी याद सताती है

चलिए आज फॉरेन घूम आएं. लेकिन यहां फॉरेन की कार, कंपनीं, गेम और मेम का जिक्र नहीं करने जा रहा. एक समय था जब फॉरेन की कारें और फॉरेन रिटर्न लोगों का इंडिया में बड़ा क्रेज था. विदेश से आए लेटर्स को भी लोग सहेज कर रखते थे. जब छुट्टियों में विदेशी इंडियन अपने
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पाsss ! की पावर

प से पवार, प से पॉवर, प से प्रफुल्ल पटेल, प से पापा, प से पूर्णा, प से पॉवर प्ले, प से प्लेन, प से पैसा, प से पुष्कर, प से प्रेमिकाप की महिमा अपरम्पार. प में आ की मात्रा लग जाए तो हो जाता है पाsss! पा माने पापा.पॉवरफुल पवार की पार्टी के पॉवरफुल मंत्री
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एक ‘नाइस’ चपत

चलिए आज थोड़ी नोकझोंक, थोड़ी दिल्लगी, थोड़ी बंदगी और थोड़ा इमोशनल अत्याचार हो जाए. ब्लॉग के मैदान में भी क्रिकेट की तरह हर कैटेगरी के खिलाड़ी मिल जाएंगे. कुछ टेस्ट मैच की तरह टुक-टुक कर देर तक खेलने वाले, कुछ वन डे मैच की तरह मौके की नजाकत समझ कर शाट
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...चंद्रवदन मृगनयनी बाबा कहि कहि जाय

केशव केशन अस करी अरिहु ना जस कराय, चंद्रवदन मृगनयनी बाबा कहि-कहि जाय. केशव जी व्यथित हो कहते हैं कि उनके बालों ने उनकी जो गत बनाई है वैसा तो कोई दुश्मन के साथ भी नही करता. सफेद बालों के चलते सुंदर बालाएं उन्हें बाबा कह कर संबोधित करती हैं. केशव के जमाने
Apr 03 2010 11:22 PM
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पंक्षी बनूं उड़ती फिरूं मस्त गगन में

पंक्षी बनूं उड़ती फिरूं मस्त गगन में आज मैं आजाद हूं दुनिया के चमन में...जब भी परिंदों को उड़ते देखता हूं तो ये लाइनें याद आने लगती हैं. कल्पनाओं को पर लग जाते हैं. उस दिन भी जब पिंजरें से करीब पचास गौरैया मुक्त की गई तो सब फुर्र-फुर्र कर उड़ गई सिर्फ एक
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बज़बज़ाते ब्लॉगर

आपने भुन-भुनाहट सुनी है ना. अरे वही जिसे इंग्लिश में बज कहते हैं. भौंरे, भुनगे, मक्खी या मच्छर, भुन-भुनाहट किसी की हो, हम इसे इग्नोर नहीं कर सकते. इनकी साउंड फ्रीक्वेंसी इरिटेट भी करती हैं लेकिन ब$ज इरिटेट नहीं अट्रैक्ट करता है. वो सेलेब्रिटी, इंवेंट या
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संइयां भये लड़कइयां ...

कुछ दिन पहले मालिनी अवस्थी परफार्म कर रहीं थीं-सइयां भये लड़कइयां मैं का करूं. जिसे देखो आजकल वही 'बच्चा' बना हुआ है. ये समय ही ऐसा होता है. पहले बसंत फिर फागुन इसी के बीच में वैलेंटाइंस डे और अब होली. हवा में कुछ ऐसी खुनक, ऐसी महक होती है कि छोटे तो
Feb 28 2010 11:25 AM
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जॉर्ज और लाल मुनिया

आइए आज आपको जॉर्ज शेपर्ड से मिलाता हूं. हमारी टीम के सबसे सीनियर मेंबर. अ जेंटिलमैन विद सिंपल लिविंग. नो कम्प्लेंस नो रिग्रेट्स एंड इंज्वाइंग लाइफ ऐज इट इज. एक अच्छे इंसान और अच्छे नेबर. सो एक दिन उनके पड़ोसी एक हफ्ते के लिए कहीं बाहर जा रहे थे. उन्होंने
Feb 20 2010 10:48 PM
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...और फैल गया रायता

ये रायता क्यों फैला है भाई. बारात तो विदा हो गई लेकिन शादी के पंडाल के किनारे ये गाय, कौवे और कुत्ते किस ढेर पर मुंह मार रहे हैं. अच्छा-अच्छा कल रात में यहां भोज था. भुक्खड़ लोग जिस तरह भोजन पर टूट पड़े थे उसे देख कर रात में ये कुत्ते शरमा कर भाग खड़े हुए.
टैग: कम खाओ
Feb 19 2010 08:29 PM
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ब्लॉगर बाबाओं की जय हो

इस समय मौसम सेंटियाना हो चला है यानी बाबाओं का बोलबाला है. कल शिवरात्रि पर भोले बाबा की धूम थी, हरिद्वार महाकुंभ में शाही स्नान के समय हरि की पैड़ी बाबामय हो गई थी. ज्यादातर न्यूज चैनल्स में बाबा विराजमान थे. अब तो ढाबाओं की तरह हर तरफ बाबा ही बाबा दिख
Feb 13 2010 09:48 PM
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इब्ने बतूता राहुल का जूता..उठाओ तो बोले चुर्र...

इब्ने बतूता राहुल का जूता..ता..उठाओ तो बोले चुर्र... आज कल हर जगह जूतों की जयकार है. भला हो इब्ने बतूता, सर्वेेश्वर दयाल सक्सेना और गुलजार का कि जूता राग लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है. शुक्रवार को राहुल मुंबई में थे. कभी यहां कभी वहां. अम्बेडकर प्रतिमा
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रूम नं. 317

हे रेल देवता ट्रेन थोड़ी लेट कर देना, बड़ी कृपा होगी. आमीन! जा बच्चा ऐसा ही होगा. और उसके बाद हुआ वो जिंदगी भर नहीं भूलूंगा. इसी लिए कसम खाई है कि विश सोच समझ करूंगा, पता नहीं कब सही हो जाए. पिछले दिन अपने आर्गेनाइजेशन के वार्षिक जलसे में आगरा जा रहा था.
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राजू बिन्दास!: ...और फोन पर आई भूत की आवाज

राजू बिन्दास!: ...और फोन पर आई भूत की आवाज
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त्रिवेदी की फोल्डिंग और भटनागर की रजाई

डा. प्रदीप भटनागर उदयपुर पहुंच गए हैं लेकिन चंडीगढ़ की उनकी रजाई पराए की लुगाई की तरह पता नहीं कहां गुम हो गई है. अनिल त्रिवेदी अभी भी चंडीगढ़ में ही हैं और मेरी फोल्डिंग फिर उनके पास पहुंच गई है. जिंदगी की कुछ छोटी-छोटी बातें ऐसी होती हैं जो बार-बार याद
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...और फोन पर आई भूत की आवाज

अचानक मेरे एक साथी का फोन आया नए वर्ष की बधाई देने के लिए लेकिन मुझे भूत-पिशाच याद आने लगे. मेरे नाम के आगे ओझा जरूर लगा है लेकिन भूत से कोई वास्ता नहीं पड़ा है अभी तक. पता नहीं क्यों मेरे साथी अमित गुप्ता का फोन आते ही भूत याद आने लगते हैं. अमित अम्बाला
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सुना है उस चौखट पर अब शाम रहा करती है ...

मुझे पता नही क्यों एक गाना याद आ रहा है- चुन-चुन करती आई चिडिय़ा, दाल का दाना लाई चिडिय़ा, मोर भी आया कौआ भी आया...ये गाना तो बहुत पुराना है. लेकिन ऐसा ही गाना तो आजकल भी गाया जा रहा है. हां, सुर और स्वर थोड़ा बदले हुए हैं. आजकल चुन-चुन करनेवाली चिडिय़ा से
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मार देब चोट्टा सारे...

मेरे पड़ोस में एक अधिकारी रहते थे. आजमगढ़ के रहने वाले थे. छुट्टियों में कभी-कभी उनका एक भतीजा आता था नाम था बंटी. उम्र यही कोई आठ-नौ साल. खाने पीने में थोड़ा पिनपिनहा. मैं और अधिकारी का बेटा अक्सर बंटी को छेड़ते थे, कुछ यूं- बंटी, दूध पी..ब ? नाहीं.
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डा. कलाम और अनुष्का

आज आपको अनुष्का के बारे में बताते हैं. अनुष्का लखनऊ के लामार्टिनियर गल्र्स स्कूल में पढऩेवाली एक बच्ची है. आम बच्चों की तरह वो भी उन लोगों से मिलना चाहती है, उनके आटोग्राफ लेना चाहती है जो उनके रोलमॉडल हैं. पिछले कुछ दिनों से बीमार होने की वजह से अनु
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हम सब में है एक मंजुनाथ

खबर आई है कि मंजुनाथ पर फिल्म बनेगी. आजकल के यंगस्टर्स मंजुनाथ की तरह ही हैं. हंसमुख, फिल्मी गाना गुनगुनाते अपने में ही मगन. मंजुनाथ जब आईआईएम लखनऊ में थे तो उन्होंने अपना एक रॉकबैंड ग्रुप बनाया था नाम था 3.4 केएम. क्योंकि मेन रोड से आईआईएम की दूरी इ
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याद आएंगे रामलाल

अखबार में काम करता हूं. हत्या, हादसा और भी तमाम बुरी खबरें आती रहती हैं. हम बिना विचलित हुए अपना काम करते रहते हैं. लेकिन कभी कभी कोई खबर दुखी कर जाती है. संडे रात खबर आई कि पुलिस हेड कांस्टबल की कार्बाइन छीन कर उसकी हत्या कर दी गई. मरने वाले का नाम
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मेरा पहला प्यार!

पिछले हफ्ते की ही तो बात है, अपनी प्रिया की सर्विर्सिंग कराई थी. उसका टायर बदलावाया था. नया सीट कवर लगवाया था. कितनी फ्रेश फ्रेश लग रही थी अपनी प्रिया. कुछ यंग सी, कुछ इठलाती सी. एक बार फिर फिर फिदा हो गया था उस पर. मैकेनिक से पूछा आयल-वायल तो चेक कर
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ब्लॉगर्स नैनो मीट

आज कल ब्लॉगर्स मीट का फैशन सा चल पड़ा है. तीन-चार ब्लॉगर्स मिले और हो गई मीट. कॉफीहाउस, होटल किसी के घर की बैठक, चौपाल, खटाल, कहीं भी हो सकती है ब्लागर्स मीट. पिछले हफ्ते ऐसी एक मीट हमारे यहां भी हुई. सुना है कि छह-सात लोगों की दो-तीन घंटे चकल्लस को
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कुछ जज्बात जंगली से!

कुछ जज्बात जंगली से! चलिए आज आपको सच का सामना कराते हैं झूठ की स्टाइल में. मैं आज आप से एक शर्त लगाता हूं. आपने अब तक कम से कम एक हजार बार झूठ जरूर बोला होगा, छोटा या बड़ा और आपकी लाइफ में हजार बातें ऐसी होंगी जिसे आप आजीवन किसी से शेयर नही करेंगे, अ
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नाट्य रूपांतर 26/11

हम... हम... सिर्फ हम! सबसे पहले, सबसे बेहतर, सबसे तेज. तुम कौन? अच्छा तुम्हारा कोई अपना शहीद हो गया था 26/11 को. चच्च... अफसोस की बात है...लेकिन मैं बता दूं कि सबसे पहले ये खबर मेरे चैनल ने ब्रेक की थी कि ये आतंकी हमला है. एक साल हो गए 26/11 को. जख्म
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शुष्क शौचालय!

मैं भारतीय हूं. मुझे भारतीय होने पर गर्व है. लेकिन मुझे उन ढेर सारे भारतीयों पर गर्व नहीं हैं जो अपनी संतुष्टि के लिए मुंह में शौचालय चला रहे हैं. शायद शुष्क शौचालय. पता नहीं आम भातीय इतना क्यों थूकता है. कहीं भी कभी भी. जो पान और पान मसाला खाते हैं
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'बिंदास हिन्दी अच्छी'

ये हैं जार्जिआ ड्वेट. वैसे तो डच हैं लेकिन रहने वाली हैं बेल्जियम की. उनकी मातृभाषा लैटिन है. फिर भी 'बिंदास' हिन्दी बोलती और लिखती हैं. बिंदास इस लिए कि जार्जिआ को उतनी हिन्दी आती है जितनी कि आम भारतीय को अंग्रेजी आती है. उन्होंने हिन्दी और संस्कृत
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इस धुंधली सुबह बसी है रात की खुशबू

थोड़ी खुशबू, थोड़ी खुनक, थोड़ी खुश्की और थोड़ी खामोशी. और कैसी होती है खुशनुमा सुबह. विंटर को वेलकम करने का इससे सुंदर तरीका और क्या हो सकता है. ऑटम तो आता ही है विंटर को वेलकम करने. उफ्, शरद ऋतु की ये शीतल चांदनी और मिस्टी मॉर्निंग दीवाना बना रही है
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अब कहां जाएगी पिंकी!!

स्टार बनना किसे अच्छा नहीं लगता. यंगस्टर्स का सपना होता है सेलिब्रिटी बनने का. पैरेंट्स भी तो चाहते हैं उनके बच्चे नाम रौशन करें पूरी दुनिया में. सपनों को साकार होते देखना अच्छा लगता. टीवी-फिल्म एक्टर, राइटर, डाइरेक्टर, स्कॉलर, क्रिकेटर, दूसरे प्लेयर
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'तंदुरुस्ती गुरू'

प्रेमचंद को बहुत नहीं पढ़ा लेकिन जितना भी पढ़ा है मन लगा के. बचपन से अब तक कहीं किसी रोज किसी मेड़ पर, किसी मोड़ पर, अनायास कोई मिल जाता है तो प्रेमचंद का कोई पात्र या बचपन में सुनी कहानी का कोई किरदार याद आने लगता है. ऐसे ही एक कैरेक्टर थे मेरे दादा
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बारिश, बादल और सूंस

अक्टूबर के पहले हफ्ते में कई ऐसी चीजें हुई जो अलग-अलग होते हुए एक-दूसरे से जुड़ी हुईं हैं. पूरे देश में वन्य जीव सप्ताह मनाया गया. पिछले संडे शरद पूर्णिमा थी और 7 अक्टूबर को करवाचौथ था. ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की शीतल चांदनी में आकाश से अमृत ब
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गांधी बोले तो मुन्नाभाई वाले बापू!

साल में एक बार फिर याद आए बापू. अब आप इसे मजबूरी का नाम महात्मा गांधी कहें या कुछ और. अखबार के दफ्तर में ढेर सारे प्रेस नोट आए गांधी जयंती को लेकर. लगा कल कुछ और नहीं होगा सिर्फ गांधी जयंती मनाई जाएगी. पूर्व संध्या पर हमने भी शहर का चक्कर लगाया कि पत
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रावण आसानी से नहीं मरते

मायावी रावण ने जुगाड़ कर ही लिया और पूरे परिवार के साथ मुख्य मैदान में आ डटा विजयदशमी के दिन. शाम को काफी भीड़ जुटी राम-रावण युद्ध देखने. अंतत: वही हुआ बुराई पर अच्छाई की जीत और रावण धू-धू कर जला. मैदान से बाहर आ रहा था कि किनारे रामलीला के कुछ पात्र
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कहने को साथ अपने एक दुनिया चलती है...

किसी से कहूं के नहीं कहूं ये जो दिल की बात है, कहने को साथ अपने एक दुनिया चलती है पर छुपके इस दिल में तनहाई पलती है....यही है आज का सच जिसका सामना अर्बन सोसायटी का एक बड़ा तबका कर रहा. टीवी पर एक सीरियल आता था 'सच का सामना'. अंतिम कड़ी में रूपा गांगुली
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बंदर, गुरुवा और भांग के लड्डू

मेरे अजीज ज्ञानदत्त जी प्रकृति प्रेमी हैं. उन्हें पशु-पक्षियों, वनस्पति और नदियों से उतना ही लगाव है जितना मुझे. एक कुक्कुर उन्होंने पाल रखा है. उस जीव ने पिछले जन्म में कुछ पुण्य किया होगा जो पांडे जी जैसे सात्विक और संस्कारी परिवार की सेवा कर रहा है या
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टेंशन में रावण

वैसे तो न$फासत और नजाकत के शहर लखनऊ के लोग आमतौर पर खुशमिजाज होते हैं लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां का रावण दशहरा आते ही टेंशन में आ जाता है. आप गलत समझे. रावण को दहन को लेकर कभी टेंशन में नहीं हुआ. ही..ई ..इ हा...हा...हा करते वो खुशी-खुशी जलता है. लेकिन
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यूं ही कोई गुजर गया यारों

हर्षित और गगनदीप आईईटी लखनऊ के होनहार छात्र थे. बीटेक थर्ड ईयर के इन छात्रों के आंखों में सपने थे कुछ बनने के, कुछ कर दिखाने के. दोनों रोबोट का मॉडल बननाने में जुटे थे. देर रात चाय की तलब लगी. कैम्पस की कैंटीन रात आठ बजे ही बंद हो जाती है सो रात दो बजे