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09 Jun 2010
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चैनल,जो कल कार्पोरेट मीडिया के खिलाफ नजर आए..

आजतक से लेकर एनडीटीवी,स्टार न्यूज,जी न्यूज,IBN7 सबके सब भोपाल गैस कांड में आए फैसले को लेकर खफा नजर आए। एक जमाने के बाद लगभग सभी चैनलों का सुर एक था जिसमें मझोले और छोटे कद के चैनल भी शामिल दिखे। बल्कि मझोले और छोटे चैनलों के सुर बड़े कार्पोरेट की शक्ल
 
विनीत कुमार
टैग: bhopal-genocide
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टेलिविजन की स्टैंडिंग कामेडी

मूलत: प्रकाशित- दैनिक जागरण 1 अप्रैल 2010स्टैंडिंग कॉमेडी। टीवी पर यह नई चीज है। इसमें स्त्री-पुरुष संबंधों को लेकर सस्ती गॉसिप्स हैं, जजों के बेवजह ठहाके हैं, डबल मीनिंग पैदा करने वाले जबर्दस्ती के प्रयोग हैं, तो बोलने से ज्यादा हरकतों से हास्य पैदा
 
विनीत कुमार
टैग: stand-up comedy
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रिश्तों की नाजुक डोर को टच करता टेलीविजन

राहुल महाजन से मेरा क्या लेना-देना है भला? ये डिम्पी गांगुली कौन है,आज से तीन सप्ताह पहले मुझे कुछ भी पता नहीं था। लेकिन आज राहुल महाजन ने जैसे ही उसे ये कहते हुए अंगुठी पहनायी diamand is forever सो love is forever,मेरी आंखों से आंसू छलछला गए। फेसबुक पर
 
विनीत कुमार
टैग: rahul mahajan
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चर्चित एंकरों को क्यों नहीं मिलती टीआरपी?

टेलीविजन अखाड़ों में इन दिनों टीआरपी को लेकर बहस जारी है। टेलीविजन और मीडिया के दिग्गज इस अखाड़े में विचारों की अपनी-अपनी पेंच भिड़ाने में जुटे हैं। सबों के पास कुछ न कुछ कहने को है और सबों ने इसके लिए अपनी-अपनी सुविधा के लिए मंचों का चुनाव कर लिया है।
 
विनीत कुमार
टैग: trp
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अजीत अंजुम ने खोला टेलीविजन अखाड़ा

न्यूज24 के मैंनेजिंग एडीटर अंजीत अंजुम ने टेलीविजन विमर्श के लिए कोई ब्लॉग या साइट बनाने के बजाय फेसबुक को ही अखाड़े के तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं। कमेंट के लिहाज से देखें तो ये ब्लॉग या साइट से ज्यादा फायदेमंद सौदा है। ब्लॉग या साइट में अपनी बात लिखने
 
विनीत कुमार
टैग: facebook
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क्‍या IBN 7 के एंकर संदीप चौधरी में भाषाई शऊर नहीं है?

IBN7 के एंकर संदीप चौधरी के आक्रामक अंदाज़ का मैं कायल हूं। उनके इस अंदाज़ का असर मुझ पर कुछ इस कदर है कि अगर पहले से लेटकर टीवी देख रहा होता हूं तो उनके आते ही उठ कर सीधे बैठ जाता हूं। एक-एक वाक्य और उस हिसाब से चेहरे और नसों के खिंचाव को समझने औऱ महसूस
 
विनीत कुमार
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इस टेलीविजन पत्रकार से सीखिए भाषा

यूँ तो कल से ही सभी चैनलों पर 26/11 के एक बरस पूरे होने पर खास शो चल रहे थे. लेकिन आजतक के शम्स ताहिर खान की स्टोरी अपने आप में सबसे जुदा थी. ऐसे मौके पर अपनी बातों को किस तरह से कोई एंकर रखे उसका एक शानदार नमूना था. वैसे शम्स का अपना एक अलग अंदाज़ ह
 
विनीत कुमार
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IBN7 पर हमला किस लोकतंत्र पर हमला है?

मूलतः प्रकाशित मोहल्लाLIVE पोस्टर- साभारः मीडियाखबर डॉट कॉम IBN7 और IBN7 लोकमत के मुंबई और पुणे दफ्तर में शिवसेना के गुर्गे ने जो कुछ भी किया, वेब लेखन के जरिये हम उसका विरोध करते हैं। दफ्तर के अंदर घुसकर शिव सैनिकों ने महिला मीडियाकर्मियों के साथ जो
 
विनीत कुमार
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2 नवबंर 09: टेलीविजन के इतिहास में एक अश्लील दिन

मूलतः प्रकाशित- मोहल्लाlive हमें स्क्रीन पर तीन-चार बुज़ुर्ग टकले, सिर्फ सिर दिखाई देते हैं। एक के ऊपर एक आपाधापी करते हुए मीडियाकर्मी आगे बढ़ते हैं। बादशाह उन्हें बार-बार बैठने की सलाह देता है। कभी मुस्कराते हुए,कभी आवाज़ में थोड़ी तल्खी बरतते हुए ल
 
विनीत कुमार
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उत्सव के बहाने आइने में झांके दूरदर्शन

मूलतः समाचार-विचार पाक्षिक प्रथम प्रवक्ता 1 नवंबर में मामूली संशोधनों के साथ प्रकाशित) सामाजिक प्रतिबद्धता के सवालों के साथ खड़े होने का दावा करनेवाले किसी भी देश के टेलीविजन के लिए पचास साल पूरे कर लेना कोई आसान काम नहीं है। आज अगर दुनिया के सबसे बड
 
विनीत कुमार
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नए टीवी सीरियलःस्त्री-चिंता या छलना का पुनर्पाठ

मूलतः प्रकाशितः हंस , स्त्री विमर्शः अगला दौर स्मृति प्रभा खेतान संपादकः राजेन्द्र यादव ,अतिथि संपादकः अर्चना वर्मा , बलवंत कौर मूल्यः35 रुपये/ भारतीय टेलीविजन में पिक्चर ट्यूब के दम पर पैदा की जानेवाली उत्सवधर्मिता के बीच पहले बालिका वधू और फिर उसका
 
विनीत कुमार
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कार्पोरेट मीडिया के ध्वस्त होने के दिन शुरु,फर्स्ट फेज वीओआई

वाइस ऑफ इंडिया के ब्लैकआउट होने के बाद अंदर की खबर सार्वजनिक करने और अपने हक की लड़ाई में हम जैसे लोगों का नैतिक समर्थन जुटाने के इरादे से इस चैनल के मीडियाकर्मियों ने long live voi नाम से एक ब्लॉग बनाया जिसे कि बाद में समझौते के आसार देखकर बंद कर दिया।
 
विनीत कुमार
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कहीं ये भाषा एंकर अतुल अग्रवाल की तो नहीं

टेलीविजन स्क्रीन पर इतने आक्रामक अंदाज में बात करने वाला शख्स भीतर से इतना खोखला होगा कि अपने मालिक के प्रति वफादारी दिखाने के लिए गुंडे-मवालियों की भाषा का इस्तेमाल करने लग जाएगा,सोचकर किसी भी एंगिल से यकीन नहीं होता। एक नामचीन पत्रकार के बारे में ऐसा
 
विनीत कुमार
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वाइस ऑफ इंडिया के बहाने जरा सोचिए,कुछ कीजिए

उस समय तक वाइस ऑफ इंडिया की सांसें लगभग उखड़ चुकी थीं, जब साईं भक्त और चैनल के सीईओ अमित सिन्हा इसे मज़बूती के तौर पर खड़े करने की बात करते नज़र आ रहे थे। मीडिया ख़बरों से जुड़ी एक वेबसाइट पर बतौर सीईओ उन्होंने कहा कि मैं साईं का भक्त हूं और मुझे उन पर
 
विनीत कुमार
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टीआरपी का कंटेट से कोई संबध नहीं-अंबिका सोनी

टेलीविजन औऱ मीडिया में दिलचस्पी रखनेवाले लोगों के लिए 27 जुलाई को राज्य सभा में "देश के सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध विभिन्न चैनलों पर दिखाए जा रहे टीवी कार्यक्रमों में बढ़ती अश्लीलता और अशिष्टता" को लेकर होनेवाली चर्चा पर विचार करने की जरुरत है। भाजपा
 
विनीत कुमार
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बरखा दत्त की फिल्म के बहाने जरा सोचिए

विजय दिवस के नाम पर पर देश के अधिकांश हिन्दी चैनल भले ही लोगों को शर्तिया तौर पर भावुक करने में जुटे हों,हम तुम्हें आज रुला कर ही छोड़ेगे के अंदाज में भाषा और शब्दों का जबरन इस्तेमाल कर रहे हों लेकिन इन सबसे अलग NDTV24*7 पर बरखा दत्त की ओर से पेश की
 
विनीत कुमार
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भकुआए टीवी पत्रकार आज आप हमें गरिआइए

ये अपने रवीश ने सूर्यग्रहण के चक्कर में अपना क्या हाल बना रखा है? बिखरे हुए बाल,चेहरा उड़ा हुआ,आंखें ऐसी कि बेमन से खोल-बंद कर रहे हों,पलकों के उठने-गिरने में जबरदस्ती करनी पड़ रही हो,ताकत लगानी पड़ रही हो। बोलने का उनका मन ही नहीं हो रहा। कभी हंसते
 
विनीत कुमार
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अब सच का सामना पर लट्टू हैं न्यूज चैनल्स

क्या इंसान की जिंदगी में सेक्स,शारीरिक संबंध और स्त्री-पुरुष के बीच होनेवाली गतिविधियां और उस बीच महसूस की जानेवाली भावनाएं ही जीवन के सबसे बड़े सच हैं। क्या जिंदगी का सच यही जाकर खत्म हो जाता है? न्यूज24 के एंकर अखिलेश आनंद ने चैनल के विशेष कार्यक्र
 
विनीत कुमार
Jul 18 2009 11:58 AM
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क्या कीमत लेकर ही आप सच का सामना करेंगे ?

रोजमर्रा की जिंदगी में ये मुहावरा आम हो चला है कि सच बोलना आसान काम नहीं है,इसकी हमें भारी कीमत चुकानी पड़ती है। ये कीमत किस तरह की हो सकती है,ये किसी को पहले से पता नहीं होता। संभव है सच बोलते हुए किसी को अपनी नौकरी से हाथ धोनी पड़ जाए,किसी से आपसी
 
विनीत कुमार
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कपिल सिब्बल की बात पर,बिफरिए मत कुर्बान अली

आज शाम,पत्रकार स्व.उदयन शर्मा की याद में हुए कार्यक्रम में कपिल सिब्बल की ओर से दिए गए बयान के बाद से पत्रकारों के बीच जबरदस्त बौखलाहट औऱ मलाल है। कुर्बान अली के शब्दों में - आज हमारी हालत ये हो गयी है कपिल सिब्बल आता है और हमारे मुंह पर तमाचा मारते
 
विनीत कुमार
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बेलगाम हुए आसाराम,मीडिया को कहा कुत्ता

अब तक जिस मीडिया ने आसाराम को अपने जरिए लोगों के घर-घर तक पहुंचाने का काम किया,उनके संयम और प्रवचन की मार्केटिंग करते हुए,उनके नाम पर एक बड़ा बाजार पैदा करने में उनकी मदद की,आज वही मीडिया आसाराम की नजर में कुत्ता है। गुरु पूर्णिमा के मौके पर जब कि उन
 
विनीत कुमार
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आम आदमी की चिंता में बजट को आम बनाते न्यूज चैनल्स

केन्द्र में आम आदमी की चिंता करनेवाली सरकार बनने के साथ ही न्यूज चैनलों की जुबान पर आम आदमी मुहावरे की तरह चढ़ गया है। ग्लैमर,फैशन और मनोरंजन से जुड़ी खबरों को छोड़ दें तो बाकी ऐसी कोई खबर नहीं होती जिसमें कि हिन्दी के चैनल्स आम आदमी शब्द का प्रयोग न
 
विनीत कुमार
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एस.पी.सिंह ने पत्रकारिता में नस्लभेद को खत्म किया- आशुतोष,IBN7

कल यानी 27 जून को संवादधर्मी टेलीविजन के जनक एस.पी.सिंह की बारहवीं पुण्यतिथि का आयोजन प्रेस क्लब में किया गया। एस.पी.सिंह की याद में मीडिया मंत्र ने उन पर एक विशेषांक निकाला जिसका लोकार्पण भी किया गया। इस मौके पर एक तरफ टेलीविजन पत्रकारिता से जुड़े प
 
विनीत कुमार
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आजतक चैनल एस.पी.सिंह का ही चमत्कार था- कमर वहीद नकवी

कमर वहीद नकवी,न्यूज डायरेक्टर- आजतक शुरुआत में सुरेन्द्र प्रताप सिंह से परिचय 'रविवार' पत्रिका के माध्यम से हुआ. उन दिनों मैं बनारस में था. बनारस के अखबारों में छपे विज्ञापनों से यह पता चला कि हिन्दी की एक नई पत्रिका 'रविवार' नाम से छपने वाली है. उस
 
विनीत कुमार
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टेलीविजन पर आनेवाली है मैट्रीमोन्यल कार्यक्रमों की बाढ़

पीटीसी देते हुए स्टार न्यूज के संवाददाता ब्रजेश राजपूत ने कहा कि- कहते हैं जोड़ियां उपर से बनकर आती हैं लेकिन अब टेलीविजन शादी का सेहरा बांधने का काम कर रहा है । ब्रजेश राजपूत की बात करें तो साफ संकेत है कि टेलीविजन अब वो भी काम करने लग गया है जो कि
 
विनीत कुमार
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शैलेन्द्र सिंहः एक सर्जक टीवी पत्रकार का गुजर जाना

आज दिनभर करीब सात-आठ मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मैंने महसूस किया कि वो टेलीविजन के वरिष्ठ पत्रकार शैलेंन्द्र सिंह की अचानक मौत की खबर सुनकर रोजमर्रा अंदाज से बिल्कुल अलग ढंग से बात कर रहे हैं। वो उन मसलों औऱ मिजाजों पर बात कर रहे हैं जिनसे व्यक्त
 
विनीत कुमार
Jun 18 2009 10:02 PM
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जातिवाद पर बेला और बिरजू की कहानी आज से

बिरजू ,रुक काहे गए। तुम भी अंदर आओ न,भगवानजी जांत-पांत थोड़े न मानते हैं। बेला के कहने पर बिरजू मंदिर की सीढियों पर चढ़ना शुरु करता है तभी बेला के दद्दाजी का चिल्लाना शुरु हो जाता है- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मंदिर में घुसने की। उसके बाद वीओ शुरु होत
 
विनीत कुमार
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न्यूज चैनलों के लिए कैसे-कैसे आम आदमी

न्यूज चैनलों को याद आता है आम आदमी का अगला और अंतिम हिस्सा इन सबसे अलग देश के आम आदमी की एक तीसरी तस्वीर भी है जिसे कि चैनल अक्सर प्रमुखता से दिखाते हैं वह है भावावेश में आकर अपनी ही प्रत्याशी को पीटनेवाली जनता। चैनल यहां आकर हाइपर डेमोक्रेसी पैदा कर
 
विनीत कुमार
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न्यूज चैनलों को याद आता है आम आदमी

मूलतः मीडिया मंत्र मई अंक में प्रकाशित धारावी(मुंबई) की सीढ़ियों से उतरते हुए एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ ने गुनगुनाना शुरु किया- आ जा,आ जा जिंद शामयाने के तले,आ जा जरीवाले नीले आसमां के तले, जय हो....। इस दो लाइन को गाने के क्रम में वे आसमा
 
विनीत कुमार
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मीडिया और चुनावी सच को दिखाया एनडीटीवी ने

आर्थिक मंदी की मार से हांफ रहे न्यूज चैनलों को जिन राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने चुनावी विज्ञापन देकर उसे मीडिया इंडस्ट्री में दौड़ लगाते रहने लायक बनाए रखा,आज वही न्यूज चैनल उनकी इस स्ट्रैटजी की धज्जियां उड़ाने में जुट गए हैं। आप चाहें तो न्यूज चै
 
विनीत कुमार
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हवा हो जाएगा एनडीटीवी ?

एनडीटीवी इंडिया आजकल बहुत परेशान है। एनडीटीवी इंडिया के लोग बहुत परेशान हैं। एनडीटीवी इंडिया रेगुलर देखनेवाली ऑडिएंस परेशान है। उपरी तौर पर देखने से ऐसा लगता है कि इन तीनों की परेशानियों की अपनी-अपनी वजह है और इसलिए इसका विश्लेषण भी अलग-अलग स्तर पर क
 
विनीत कुमार
May 09 2009 02:09 PM
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मतदाता को सिर्फ ऑडिएंस मत समझिए

नया ज्ञानोदय में प्रकाशित लेख- टेलीविजन,राजनीतिक विज्ञापन और छवि-निर्माण का लोकतंत्र की अंतिम किस्त आर्मन्ड ने राजनीतिक विज्ञापनों की चर्चा करते हुए इसे “टोटल कम्युनिकेशन” यानी सम्पूर्ण संचार कहा है।( आर्मन्ड मैटेलार्टः1991,पेज न-187,एडवर्टाइजिंग इंट
 
विनीत कुमार
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राजनीति में टेलीविजन,सरोगेट पार्टी वर्कर है

विज्ञापनों के माध्यम से छवि निर्मिति में सबसे बड़ी सहूलियत है कि इसे जरुरत के अनुरुप बदले जा सकते हैं, इसमें कुछ जोड़े-घटाए जा सकते हैं, नयी छवि पुनःस्थापित की जा सकती है।( डेनिअल बोअर्सटिनः1962,दि इमेज,पेज नं-186-87,न्यूयार्क,एथेनम)। 2004 में आडवाणी
 
विनीत कुमार
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टेलीविजन,राजनीतिक विज्ञापन और छवि निर्माण का लोकतंत्र

मूलतः प्रकाशित नया ज्ञानोदय मई 09 सिनेमा के जिस गाने के दम पर पूरी दुनिया का दिल जीता जा सकता है, ऑस्कर जीते जा सकते हैं, तो फिर उसी गाने के बूते देश की जनता का मन और लोकसभा चुनाव क्यों नहीं? अपने चुनावी विज्ञापन के लिए,स्लमडॉग मिलेनियर के गीत ‘जय हो
 
विनीत कुमार
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पिक्चर ट्यूब का लोकतंत्र

न्यूज 24 की रिपोर्टर शैलजा सिन्हा ने लगभग दस लोगों से ये सवाल किया कि चुनावी महौल में नेता लोग मुद्दों पर बात न करके एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में लगे हैं। कभी मनमोहन सिंह आडवाणी के बारे में कुछ कहते हैं तो कभी आडवाणी मनमोहन सिंह के बारे में
 
विनीत कुमार
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टीवी अख़बार जैसा लगता है

यह पोस्ट रवीश कुमार के ब्लॉग कस्बा से ली गयी है। टीवी प्लस पर पुनः चढ़ाने के पीछे का लोभ सिर्फ इतना भर है कि यह मेरे और बाकी दूसरे टेलीविजन पर रिसर्च करनेवाले लोगों के सरोकार से जुड़ी है।- विनीत आजकल सभी न्यूज़ चैनलों के स्क्रीन एक जैसे लगते हैं। हर
 
विनीत कुमार
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क्या न्यूज 24 के एंकरों का इस शक्ल में आना सही था ?

संगति का असर किस पर नहीं होता है,चाहे वो हमारी-आपकी जैसी ऑडिएंस हो या फिर न्यूज 24 जैसे चैनल। दिन-रात जिस महौल में हम काम कर रहे होते हैं, उसका असर हमारे काम करने और सोचने तरीके पर तो पड़ता ही है। न्यूज 24 सहित देश के बाकी चैनल लंबे समय से प्राइम टाइ
 
विनीत कुमार
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जर्नलिस्ट को एक्टिविस्ट नहीं होना चाहिए- जरनैल सिंह

के खास कार्यक्रम डंके की चोट पर में आशुतोष ने करनैल सिंह से सवाल किया कि- करनैल,क्या एक जर्नलिस्ट को एक्टिविस्ट होना चाहिए? जिस तरह से आपने काम किया,क्या आपको लगता है कि ये आपको शोभा देता है?(9:23PM) करनैल सिंह ने आशुतोष के इस सवाल का जबाब देते हुए क
 
विनीत कुमार
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एडिटिंग मशीन की संतानें,अंतिम भाग

प्रतिलिपि में छपे लेख का अंतिम भाग ऑडिएंस आतंकवाद की जिन खबरों में अपने एक निजी संदर्भ की तलाश करती है,उसे खबर प्रसारित करनेवालों के अनुसार अर्थ ग्रहण करें तो इसके दिखाए जाने के पीछे राष्ट्रचिंता और मानवता के स्वर छिपे हैं। नोम चॉमस्की ने ब्राजील तक
 
विनीत कुमार