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10 Apr 2010
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बच्चों की फीस जमा हुई कि नहीं? – दंतेवाड़ा से शहीद लोकसेवक

ऑल इज वेल की जानकारी देने के बाद पत्नी इंद्रावती ने घर पहुँचने पर बात करने को कहा था लेकिन अब वह बार-बार रो रही है कि उसके मोबाइल पर अब कौन कॉल करेगा? इन्द्रावती से अंतिम बार बात उस समय हुई थी जब वे 5 अप्रैल को बैंक से लौट रहीं थी। रामपुर में बैंक से
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
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हथिया अभी यहीं है साहब: सुगदा वन समिति, नगड़ी

ग्राम वन प्रबन्धन समिति सुगदा के आम ग्रामीण मेरी प्रतिक्षा में कटहल पेड़ के नीचे इंतजार कर रहे थे। मैं करीब 12 बजे दोपहर में सुगदा जंगल के वन पथों से होकर सुगदा गाँव पहूँचा। मुझे आते हीं लोग प्रफुल्लित हो गये। बैठक शुरू हुई,समस्याओं की बौछार हो गयी। हाथी
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
Feb 17 2010 07:44 PM
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मत करो वन विभाग को हतोत्साहित

वन विभाग का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। अब झारखण्ड प्रदेश विकास की राह खोज़ रहा है, तब इस महकमें के दो भारतीय वन सेवा के अधिकारियों पर हरिजन उत्त्पीड़न का मामला ठोक दिया गया जो एकदम से झूठा है। आरोपित वन पदाधिकारियों ने वन सुरक्षा के लिए अपराधियों पर अपने
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
Feb 12 2010 08:00 PM
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“एकला चलो “ की राह पर एक अंग

मैं बात कर रहा हूँ वन विभाग के एक ऐसे इकाई की जिसमें पदस्थापन की अनिच्छा रखता हैं कोई भी कर्मचारी एवं पदाधिकारी, क्योकि यहाँ काम करने को कुछ था हीं नहीं। लेकिन इस भ्रांति को दूर किया सिस्टम के मारे एक वनपाल या कह लें वन क्षेत्र पदाधिकारी श्री कमलेश्वर
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
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लाज लजाती जिसकी कीर्ति से, धृति उपदेशक वो है।

राहगीर नहीं दीपक बनें- (डा0 अशोक कुमार सिंह, डायरेक्टर जेनरल, एटीआई के अमूल्य विचार) युथ को सन्देश देते हुए अशोक कुमार सिंह कहते हैं कि “Leave nothing to chance.” इतनी तैयारी करें कि किस्मत को भागने का मौका हीं नहीं मिले। लक तो फिक्स है, पर लेबर वैरि
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
Dec 29 2009 12:00 PM
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वनों में आग : क्या है वन पदाधिकारियों से अपेक्षा?

भारतीय वन अधिनियम 1927 की विभिन्न्न धाराओं एवं राज्य सरकार द्वारा उक्त अधिनियन अंतर्गत बनाये गये Fire Protection Rule के आधार पर वन पदाधिकारियों से आग से बचाने के लिए निम्नलिखित कारवाई अपेक्षित है:- 1. वनों की अग्नि सुरक्षा से लिए प्रत्येक प्रादेशिक
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
Dec 29 2009 12:00 PM
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झारखण्ड वन विकास निगम उपेक्षित लोगों का आँसू पोछ रहा है?

वन विकास निगम, झारखण्ड के वनों में वन से नैसर्गिक रूप से उत्पन्न उपज का व्यापारिक संस्थान है एवं वन विभाग के माध्यम से राज्य सरकार को राजस्व प्राप्ति कराता है। मैं आप को बता दूँ कि इसके संचालन का जिम्मा भारतीय वन सेवा वरीयतम पदाधिकारी को दिया जाता है
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
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अच्छे कार्यो के बाद भी विभाग बदनाम

वन विभाग में नरेगा का कार्य बहुत अच्छे ढंग से हो रहा है। योजना का क्रियान्वन वनरक्षियों एवं वनपालो के माध्यम से संपादित होते हैं, लेकिन कुछेक पदाधिकारियों के अरुचि के चलते कार्य का निगरानी सही ढंग से नहीं हो रहा है। अपने विवेक पर योजना को कार्यान्वित
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
Dec 29 2009 12:00 PM
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ये सिस्टम दुःखदायी है- शहीद फ्रांसिस इंदवार

शहीद फ्रांसिस इंदवार नक्सली हिंसा के शिकार हुए लेकिन जब उनकी पुलिस में सेवा काल का जिक्र आता है तो सरकारी व्यवस्था में कार्य कर रहे सिस्टम का उल्लेख हिन्दुस्तान के संवाददाता, राँची ने कलमबद्ध किया है जिसका मै स्वच्छ प्रति हू-बहू रख रहा हूँ जो सिस्टम
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
Oct 14 2009 07:58 PM
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कुपथ कुपथ जो रथ दौड़ाता पथ निर्देशक वह है

जब मैं आइएससी में पढ़ रहा था तब हमारे ममेरे भाई श्री बिरेन्द्र कुमार सिंह अपने कॉग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ जहानाबाद से तत्कालीन मुख्यमंत्री से मिलने पटना आये थे। वे एक ठिका दिलाने के लिए गया के डी।एम. को पैरवी करवाना चाहते थे। जब शाम में मुख्यमंत्री आवास
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
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विश्व पर्यावरण दिवस मनाने में भागीदार मैं भी हूँ!

विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का सिलसिला पूरे विश्व में जारी है। सरकारी, गैर सरकारी संस्थाऐं तथा पूरा विश्व समुदाय भी अपने – अपने तरीके से विश्व पर्यावरण दिवस मनाता है। विश्व पर्यावरण दिवस मैं भी मनाऊँगा, “बोले राँची के नवनिहाल। ये बातें राँची के छोटे-छो
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
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नैमिषारण्य, चित्रकूट, दण्डकारण्य, पंचवटी को लील गयी जिंदगी?

आर्यो के आने से पूर्व इस देश के द्रविड़ लोग वनों में हीं रहते थे और उन्होने अपनी सभ्यता का विकास किया। आर्य लोग प्रधान रूप से पशुपालक थे। अतः उन्होने आते हीं वनों को साफ कर अपने तथा पशुओं के लिए स्थान बनाये। नदी-घाटी सभ्यता विकसित हुई एवं केवल नदियों
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
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हिरण छोड़ खरगोश तक छिपने के लिए वनस्पति नहीं

विनाश की ताण्डवलीला का अनुमान सर जिराल्ड ट्रैवर के उस भाषण से लगता है, जो उन्होंने 1935 में साम्राज्जीय वानिकी सम्मेलन में दिया – “ जब सम्राट जहाँगीर ने साम्राज्ञी नूरजहाँ के लिए नूरपुर में महल बनवाया तो, स्वयं जहाँगीर के विवरणों से स्पष्ट है कि पक्ष
 
प्रेम सागर सिंह [Prem Sagar Singh]
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देश के 55% वन क्षेत्र प्रतिवर्ष आग से प्रभावित : कारण व क्षति एक नज़र में

वनों के समुचित प्रबंधन में वनों का अग्नि से बचाव एक महत्व्पूर्ण कार्य है। देश में प्रति वर्ष लगभग 3 करोड़ 50 लाख हे0 वन क्षेत्र में आग लगती है। भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून ने वर्ष 1995 में एक सर्वेक्षण किया था जिसका निष्कर्ष यह था कि लगभग 55% वन क्ष
 
प्रेम सागर सिंह
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दावाग्नि : दलमा धु-धु कर जल रहा है !

दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी, जमशेदपुर में दिनांकः23 फरवरी से आग लगी हुई है। आग का विस्तार क्षेत्र सीमित है लेकिन अगर इसे काबू में नहीं लाया गया तो ये विभाग की असफलता होगी। दलमा हाथी आश्रयणी के रूप में विकसित हो रहा जैव विविधता से परिपूर्ण प्रकृति का अनम
 
प्रेम सागर सिंह
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महामहिम मेरी आवाज सुनों…

फरवरी-2009 की सुबह से ही वन भवन प्रागंण में वर्दीधारियों की हुज़ुम जमा होने लगी। आज नौजवान से लेकर 59 साल के वरिष्ठ कर्मी भी अपनी वर्दी पर आयरन कर पूरी तरह से फिट-फाट थे। दिन के 12 बजे तक पूरी शमां बँध गयी। पूरा वन भवन वर्दीधारियों की अचानक उपस्थिति स
 
प्रेम सागर सिंह
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झारखण्ड के वनों में क्रांति : ग्रामीण महिलाओं ने वनों का किया रक्षा-बन्धन

झारखण्ड प्रांत के वनों में अवैधपातन को रोकने एवं भाई के रूप में प्रतिबिम्बित कर सुरक्षा देना क्या झारखण्ड की ग्रामीण महिलाओं की क्रांतिकारी सोच को उजागर करती है? जंगलों में अवैधपातन से त्रस्त ग्रामीण एवं जंगलों के आस-पास निवास करनेवाली महिलाओं में एक
 
प्रेम सागर सिंह
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बुढमू के जंगलों में अवैधपातन : क्या हमारी विफलता है?

बुढमू , कर्रा, तोरपा, तमाड़, सोनाहातु, रनिया इत्यादि, घने वनों से आच्छादित प्रकृति कि अनमोल धरोहर है। एक ओर यह क्षेत्र वन सम्पदा के मामले में धनी है, वहीं इसका लाभ अपराधी एवं आतंकवादी समूह भी शरणस्थली के रूप में उठाते हैं. सबसे ज्यादा वनों का विनाश ए
 
प्रेम सागर सिंह
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भुसूर वन में अवैधपातन- वन सुरक्षा समिति की नाकामी वनों के विनाश का कारण बना

भुसूर जंगल में जायेंगे तो ग्रामीणों एवं वन विभाग के साझा कार्यो का प्रतिफल मिलेगा, जहाँ कुछ वर्ष पहले जंगल अपनी अन्तिम सांसे ले रही थी , आज सखुआ एवं मिश्रित प्रजाति के बृक्ष अपनी यौवन विखेर रहे हैं , लेकिन आज वन सुरक्षा समिति अपने लक्ष्य से भटकी और ब
 
PREM SAGAR SINGH