Patna Gandhi Maidan's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
15 May 2010
कुल प्रविष्टियां
55
पाठक भेजे
1570
पसंद
159
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
28.55
पसंद करें
1
नापसंद करें

राजधानी पटना के एक हाई स्कूल में शिक्षा , शिक्षक और बेचारे विद्यार्थियों का हाल - दैनिक जागरण , पटना , से एक खबर

राजधानी पटना के एक हाई स्कूल में शिक्षा , शिक्षक और बेचारे विद्यार्थियों का हाल - दैनिक जागरण , पटना से एक खबर दैनिक जागरण , पटना के हवाले ,पटना जिले के धनरुआ प्रखंड में स्थित पभेडा हाई स्कूल की एक खबर आई है. पभेडा , पटना मसौढ़ी गया रोड के निकट एक बड़ा
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर ;
पसंद करें
2
नापसंद करें

ताज़ी तस्वीरें- बिहार के खेत ,घर और सडकों से

बिहार के खेत - खलिहानों ,घर - बाहर की ये चंद तस्वीरें क्या कहती हैं ? खेत में हार्वेस्टर कोम्बायीन टाटा की नैनो को मात देती देसी जुगाड़ जिसे लोग बाग़ झर झरिया गाडी कह रहे हैं. घर घरौंदा हुक्का खेत में मूर्ति अनमोल विरासत की हालत
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर ;
पसंद करें
2
नापसंद करें

कुहेलिका . कुहेलिका

पूरे उत्तरी भारत में ठंढ का ऐसा आलम है की अखबार और टी वी चैनल वालों को उपयुक्त विशेषण नहीं मिल रहे हैं .अनुप्रास अलंकार की तो बात hin नहीं है .मित्र नीरज ने दिल्ली के कुहरे , ठंढक और उसमें बनते बिगड़ते मनोविज्ञान का बढ़िया खाका अपनी इस कविता में किया
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिहार विमर्श (१) -- और रोने को क्या चाहिए ?

वीरेन्द्र का लेख बिहार पर . और रोने को क्या चाहिए? अगर आप बिहारी हैं; और बिहार से बाहर रहते हैं; और साल में दो-चार बार कुछ दिनों के लिए ही वहां जा पाते हैं तो मैं यकीन से कह सकता हूँ कि आपने भी बहुत कुछ ऐसा देखा सुना होगा जिसके आधार पर आप मौजूदा बिहा
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
Dec 29 2009 11:48 AM
पसंद करें
5
नापसंद करें

ड़ी पी एस आर के पुरम ,नयी दिल्ली ,से आई आई टी में दाखिले का सुपर हाई वे

ड़ी पी एस आर के पुरम से सीधे आई आई टी में दाखिले का सुपर हाई वे . आई आई टी प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए निम्नतम योग्यता + २ परीक्षा में 80 या 85 % किये जाने की चर्चा है . अगर कोई विद्यार्थी +२ की बोर्ड परीक्षा में निर्धारित 80 -85 % से कम अंक
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
पसंद करें
0
नापसंद करें

मगध के ऐतिहासिक धरोहर की हिफाजत कौन करेगा ?

दैनिक जागरण , पटना के हवाले से एक खबर आई है . नालंदा जिला , हिलसा अनुमंडल के थरथरी प्रखंड के राजबाद गाँव में तालाब की खुदाई में प्राचीन भगनाव्शेष मिलाने की खबर आई है . कहने की जरूरत नहीं की इस की मुकम्मल पुरातात्विक उत्खनन और संरक्षण की जरूरत है . यूँ
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
पसंद करें
0
नापसंद करें

पटना के आला पुलिस अफसरों का तबादला : दोषियों को उचित सजा मिलना बाकी है

एक्जीविशन रोड की शर्मसार करने वाली घटना में अभी सारे दोषियों को गिरफ्तार किया जाना बाकी है .पर सरकार ने फौरी कार्रवाई करते हुए इलाके में तैनात आला पुलिस अफसरों का तबादल कर दिया है.लेकिन इतने से नहीं होगा . इस शर्मनाक घटना में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
पसंद करें
0
नापसंद करें

शर्मसार माहौल में संवेदनशीलता और मानवता की किरण - सी आई एस एफ के जवान और कार चालक को सलाम

कल पटना गाँधी मैदान से सटे एक्जिविसन रोड में दिन दुपहरिया जो शर्मनाक वाकया हुआ उसकी जितनी भी भर्त्सना की जाय कम है. हम सब को मिल बैठकर सोचने की जरूरत है की ऐसी घटनायों की पुर्नावृत्ति कैसे रोकी जाय .इस तरह का वीभत्स व्यवहार तो निरा बर्बर समुदायों में ही
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
पसंद करें
3
नापसंद करें

दरवाजे पर तिरंगे में बी पी एल ,परिवार ( बिलो पावर्टी लाइन )का ठप्पा - दृश्य सोनीपत , हरियाणा के एक गाँव से

इस तस्वीर को गौर से देखें .जिला सोनीपत , हरियाणा के इस गाँव में गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाले (बी पी एल) हर घर की चौन्खट पर यह ठप्पा लगा हुआ है . इस का प्रारूप देने वाले का सौन्दर्य बोध तो देखें , इसे तिरंगें में बनाया गया है . यह ठप्पा गरीब
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
पसंद करें
4
नापसंद करें

पटना गाँधी मैदान में जून महीने की एक शाम

पापा ,एक फोटो मेरा भी गाँधी मैदान में . बस यूं हीं कुछ भाग दौड हो जाय . पटना कलेक्ट्री से घर लौटता किसान . मैदान में क्रिकेट . चिन्तन अखबार के संग . दफ्तर से लौट कर सुस्ताते और ताश खेलते सरकारी मुलाजिम . पटना गाँधी मैदान में पर्याप्त गुन्जायिश है . ज
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर
पसंद करें
6
नापसंद करें

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी : आई आई टी प्रवेश परीक्षा -सुपर थर्टी , पटना और कोटा का अंतर.

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी : आई आई टी प्रवेश परीक्षा ,सुपर थर्टी ,पटना और कोटा का अंतर . राजस्थान का कोटा शहर ,डेढ़ दो दशकों से +2 के बाद कि मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा कि तैयारी का अहम् मुकाम बना हुआ है .पचासों हजार लडके लडकियां ,
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
5
नापसंद करें

बिहार का चुनाव परिणाम - बदलता बिहार ?

बिहार में परिवर्तन ,विकास की शक्ल अख्तियार कर रहा है .जिस किसी से बात करें वो इस की पुष्टि करेगा.ऐसा लगता है की लम्बे ठहराब के बाद पहली बार कुछ सकारात्मक होते घटते लोग बाग़ देख रहें हैं. एक सपना बुनने लगे हैं लोग.उम्मीद की किरण दिखने लगी है. पिछले २५
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
6
नापसंद करें

उन दिनों कैसा था पटना कॉलेज ! बिहार विमर्श -9

आलेख वीरेन्द्र . कैसा था पटना का पटना कॉलेज.अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों के बदौलत ,बिहार के सिरमौर कॉलेज के रूप में ख्याति रही है इस कॉलेज की .यह अंक पटना कॉलेज कथा की नवीनतम कड़ीहै . तो आप बीती पर उनके इस लेख में जमाने की शक्ल -ओ -सूरत भी साफ़ नजर आती है.
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

बिहार विमर्श - 8 : पटना कॉलेज की यादें II

आलेख - वीरेन्द्र मैं पहले ही बता चूका हूँ कि पटना कॉलेज में मेरा कैसा भव्य (या कह लीजिये धमाकेदार) प्रवेश हुआ था. आज भी मैं तय नहीं कर पाता कि इस प्रवेश प्रकरण को ' प्रथम ग्रासे, मच्चिको पातः ' के रूप में याद करुँ या ' बिल्ली के भाग्य से छीकें के टूट
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

बिहार विमर्श - 7 : अथ स्कूल कथा : उडी जहाज को पंछी फिर जहाज पै आवै

उडी जहाज को पंछी, फिर जहाज पै आवै आलेख - वीरेन्द्र 'अथ स्कूल कथा' के नाम से जो संस्मरण लेकर मैं आपके सामने उपस्थित हुआ था, वह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. प्राईमरी स्कूल के बारे में तो जैसे-तैसे बात पूरी हो गयी है, किन्तु हाई स्कूल की चर्चा मे
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

बिहार विमर्श : 6 : पटना कॉलेज के शुरूआती अनुभव

वीरेन्द्र पटना कॉलेज में दाखिले के बाद के शुरूआती अनुभव बता रहें हैं .पढें और इस विमर्श को आगे बढायें. ' अथ स्कूल कथा' से आगे की दास्तां पहले छपरा और बाद में पटना में शुरू हुई. स्कूल की पढाई पूरी करने के बाद मैं पहले छपरा गया जहाँ के नामी-गिरामी राजे
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
2
नापसंद करें

चल रे मन कहीं और चल .

चल रे मन कहीं और चल ले चल मुझे सावन के फुन्हारों के बीच पूर्वा हवा और सफ़ेद दीवाल बना , आता हुआ बारिस का झोंका . कुएं के पास की दीवाल पर चढ़ , पेड़ के पके अमरुद के पास कि झट पट खायूँ , उतरूं और भागूं घर की ओर . बारिस से बचते - बचाते हुए . चल रे मन , क
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
6
नापसंद करें

मेरे हमउम्र मुस्लिम लड़के कहाँ थे ?

से लेकर 1990-91 तक के मेरे विद्यार्थी काल में मेरे हम उम्र मुस्लिम लड़के कहाँ थे ? मेरा यह मानना है के अगर समाज अपनी बुनावट में सतरंगी है तो सातो रंग , हर सामाजिक इकाई में दिखें ,यही स्वाभाविक कहा जायेगा . और अगर मेरी इस मान्यता को सुधी और गुणी जन सही
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
1
नापसंद करें

बहुत कठिन है डगर पनघट की

सुजीत चौधरी : अपने नए संपादित पोस्ट में मित्र सुजीत पटना शहर और कॉलेज के शुरुयाती अनुभव को विस्तार से बता रहें हैं.बातें आप बीती हैं पर जमाने के दर्द और हसरतों को समेटे हुए. ( मित्र कौशल ने बिहारी विद्यार्थियों के दिल्ली जाने के शुरुआती दौर , उस समय
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

अथ स्कूल कथा : कैसा था पटना का यह स्कूल १९७५ में ?

ग्रामीण छात्रवृति योजना के तहत मेरा चुनाव हुआ और जनवरी सन १९७५ में मेरा दाखिला पटना कौलेजिअट स्कूल में हुआ. रहने की व्यवस्था स्कूल होस्टल में. दाखिले के समय मैं ग्यारह साल का था . छात्रवृति की यह योजना ग्रामीण छात्रों के लिए थी. हर प्रखंड से दो छात्र
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

हाल -ये -बयान ,पटना के कॉलेज ओं का -१९८०, की शुरुआत में

सुजीत चौधरी ,सुना रहें हैं अपनी आप बीती , बरास्ता पटना शहर और बी एन कॉलेज .पढिये और अपने अनुभवों से इस सिलसिले को आगे बधाईये. ( मित्र कौशल ने बिहारी विद्यार्थियों के दिल्ली जाने के शुरुआती दौर , उस समय के बिहार के (खासकर पटना के) कॉलेज और पटना विश्वव
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
5
नापसंद करें

कैसा था गाँव का स्कूल ? बिहार विमर्श की अगली कड़ी , अथ स्कूल कथा - भाग दो

वीरेन्द्र , बिहार विमर्श की अगली कड़ी : अथ स्कूल कथा - भाग दो . कैसा था गाँव का स्कूल ? 'अथ स्कूल कथा' के नाम से जो संस्मरण मैंने सुनाया था, वह कई कारणों से मुझे अधूरा लगा. अव्वल तो यही कि मैं उन तमाम लम्हों से आपको रु-ब-रू नहीं करा सका जो मेरे बनने-ब
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
1
नापसंद करें

बिहार विमर्श -५ : अथः स्कूल कथा

वीरेन्द्र की अथः स्कूल कथा अथ स्कूल कथा ( मित्र कौशल के आग्रह पर मैं यहाँ अपने उन अनुभवों को सूत्रबद्ध करने की कोशिश कर रहा हूँ जिनसे होकर एक विद्यार्थी के रूप में मैं बिहार के अपने छोटे-से गाँव की पाठशाला से निकलकर पहले दिल्ली विश्वविद्यालय और बाद म
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
6
नापसंद करें

बिहार विमर्श - 4 : दिल्ली के कॉलेज , यूनिवेर्सिटीयों में आना बिहारी छात्रों का

दिल्ली विश्वविदयालय में बिहारी छात्रों का आगमन 70 के उत्तराधार्ध में शुरू हुआ . 1974 के बिहार आन्दोलन और बाद के घटनाक्रम छात्रों के पलायन की फौरी वजह बने .पर सातवें दशक की धीमी शुरुयात ,आठवें दशक के मध्य तक बबंडर का रूप ले लिया . और दिल्ली व जवाहर ला
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
0
नापसंद करें

माँ का घर और माँ की स्मृति

माँ को गुजरे हुए डेढ़ दशक हो गया . एक दुर्घटना में माँ अचानक चल बसी . मार्च के महीने में माँ रोजाना याद आती है . पिछले जून में घर से लौटते समय रास्ते में माँ के घर पर नजर पड़ी . घर का वर्तमान मन में कहूं तो यादों की बारात ले आया . साथ में कैमरा था .सो
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
4
नापसंद करें

बिहार विमर्श (२) - दिल्ली में बिहारी: घर के न घाट के

वीरेन्द्र - बिहार विमर्श की दूसरी किस्त . विमर्श में आपकी भागीदारी हमारे सत्य शोधक प्रयास बहु आयामी और कारगर बनाएगा . ( मित्र ,बिहार पर जारी विमर्श में दोबारा और उतावाली में कूदने का दोषी तो हूँ, लेकिन करुँ तो क्या करुँ? किसी और आहर-पोखर के भूगोल से
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

जीना हुआ दुश्वार

संजीव रंजन की कविता . कविता का सन्दर्भ मित्र संजीव ने लिख भेजा है.पढें और अपनी राय से सब की हौसल अफजाई करें. कौशल जी, प्रस्तुत कविता प्रिय वीरू के हौसले का प्रतिफल है. मैंने टेलीफून पर कभी बात-चीत के दौरान उनसे अपने बालकनी के नीचे-के पार्किंग स्पेस म
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
4
नापसंद करें

पटना शहर की मुख्य सड़क "चौक" - इसवी सन 1814, सीता राम की कलाकृति

क्या आपको भी पटना शहर समृद्ध दिख रहा है ? आज से करीब दो सौ साल पहले पटना सिटी चौक ऐसा दिखता था .इस चित्र में चौक से मंदिर ,मस्जिद और दुकानों का खूबसूरत नज़ारा मिलता है .चौडी और साफ़ सुथरी सड़क पर हाथी, बैलगाडी और छकडा की गरिमामय उपस्थिति को कलाकार ने चि
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
5
नापसंद करें

गंगा के मझधार से एक नजारा पटना का - 1780 की कलाकृति

१८ वीं सदी में मुग़ल सल्तनत के कमजोर होते हीं बिहार यूरोपीय तिजारती कंपनियों , मराठों ,नबावों के बीच अधिपत्य की लडाई अखाडा बन गया. १७४५ तक बिहार मराठों ,बंगाल के नबावों और अफगानी फौजों के द्वारा रौंदी जाती रही .बेहाल रियाया .बिहार की हुकूमत के कई हक़
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
1
नापसंद करें

दीवाली - वीरेन्द्र की भोजपुरी कविता

वीरेन्द्र की भोजपुरी कविता - दीवाली .पटना गाँधी मैदान का यह मंच ,हम सब के लिए बिहारी जन जीवन , इतिहास ,समाज ,आशा और निराशा , जय पराजय अर्थात हमारे सामूहिक जीवन के राग रंग का आइना या कहें की मेटाफर है. मित्र वीरू ने कविता का सन्दर्भ दिया है . इसे पढें
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
1
नापसंद करें

नारी - तुम मेरी माँ हो ,बेटी और पत्नी भी हो -----( वीरेन्द्र की नयी कविता )

प्रिय कौशल, मेरी घुसपैठिया कविता आपको अच्छी क्या लगी कि मैं उन्मादी हो गया. और पुरातात्त्विक हो चुकी डायरी से एक और कविता निकाल लाया. इस उत्साह को अन्यथा न लें. आगे कविता नियमित रूप से न भेज सकूंगा. वीरेन्द्र नारी तुम मेरी मां हो बेटी और पत्नी भी हो.
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

वीरेन्द्र की कविता - समाचार

वीरेन्द्र की कविता - समाचार मित्र कौशल, आज मैंने भी एक कविता लिख डाली. सोचा कि कर ही लूं मन की मुराद पूरी. क्या पता फिर पूरी हो न हो. तो मित्र, कविता के क्षेत्र में एक और घुसपैठ. समाचार कमरे में पड़ा अखबार कोई खबर शायद दमदार मिल जाये यही सोचकर उठाता
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
2
नापसंद करें

"---- दोनों हाथ ऊलिचियो ,यही सयानो काम " अर्थात बिहार की व्यथा -कथा

बिहार के मध्यम वर्ग या सत्ता धारी वर्ग , ( भाव ग्रहण करते हुए जिसमें भी सहूलियत हो वैसा माने ) में खास तरह के उद्यम और बुनियादी मुद्दों पर आम सहमति रही है .व्यक्ति ,परिवार ,कुल , गोतिया ,गाँव, समाज इन बुनियादी चीजों को कहें तो आदरणीय मानता रहा है. इस
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
5
नापसंद करें

दिल ही तो है, न संगोखिश

संजीव रंजन , मुजफ्फरपुर :मित्र संजीव आखिर हम सब के चंगुल में फँस ही गए.अपनी आप बीती सुना रहें हैं . वायदा है की इसकी कड़ियाँ वो क्रमशः जोड़ते जायेंगें .लुत्फ़ उठाएं और उनकी हौसला अफजाई करें. प्रस्तुत है उनकी रचना ) प्रिय कौशल, यह पत्र मैंने २००७ के जु
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
2
नापसंद करें

विश्व को ललकारने की धृष्टता - मित्र की राय सर आंखों पर

वीरेन्द्र के लेख पर प्रिय संजीव की टिपण्णी -आप ब्लॉग पर आए हम सब अनुगृहित हुए।जैसा की हम सब मित्रों की बरसों पुराणी राय रही है की आप बाचिक परमम्परा के दुरंधर एवं बेजोड़ रहें है.आपके इस अनमोल और दुर्लभ गुण के कारण , ज़माना गवाह है ,आपके मित्र कितना कुछ
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

बिहार नायक तिरस्कार के अभिशाप की पीड़ा से जूझ रहा है

वीरेन्द्र - अपने नए पोस्ट में बिहार के मौजूदा दौर की बदहाली के कारणों की तलाश इसके इतिहास में कर रहे हैं। लेख को पढ़ें और अपनी प्रतिक्रया से अवगत कराएँ ।) बिहार नायक-तिरस्कार के अभिशाप की पीडा से जूझ रहा है बिहार की वर्तमान दुरवस्था के लिए किसी एक का
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
2
नापसंद करें

माटी का मोह - कथा कई समंदर पार से

कैसा होता है माटी का मोह ? राजीव जी अपनी आपबीती बता रहें हैं इस पोस्ट में । इन्हें देश दुनिया का व्यापक अनुभव है .दुनिया के सारे समंदर पर कर चुके हैं और कथायों का भंडार है इनके पास । प्रस्तुत है पहली कड़ी ) प्रवासी भारतीय और भारतीय संस्कृति के लिए उन
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
2
नापसंद करें

वैलेंटाइन डे के बहाने - चाल और चेहरा

मित्र वीरू का वैलेंटाइन डे पर केंद्रित पोस्ट की दूसरी किस्त प्रस्तुत है। वीरेंदर का कहना है की इस विषय पर इससे ज्यादा शिष्ट वो नहीं हो सकते हैं .पढ़ें और अपने उदगार से अनुग्रहीत करें .) वैलेंटाइन डे के बहाने: भाग II अपने लेख के पहले अंश में वैलेंटाइन
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
3
नापसंद करें

वैलेंटाइन डे के बहाने

मित्र वीरू का वैलेंटाइन डे पर पोस्ट अभी अभी मिला है । उसे पेश कर रहा हूँ .आपके उदगार का इंतज़ार रहेगा ) वैलेंटाइन डे के बहाने मैं तकरीबन पचास साल का हूँ. फिर भी मुझे बेसब्री से वैलेंटाइन डे का इंतजार रहता है. इस साल भी था. इंतजार की वज़हें तो कई हैं,
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna
पसंद करें
1
नापसंद करें

सवाल जमात में शामिल होने का है ?

क्या आप अभिव्यक्ति की स्वंत्रता , नारी स्वन्त्रत्य ,भारतीय समाज में बन्धुत्व की भावना को विकसित करने वालों ,लोकतांत्रिक मूल्यों - या यूँ कहें की भारतीय समाज ,राजनीति और संस्कारों के व्यापक और मुकम्मल लोकतांत्रिक करण में विश्वास रखते हैं ? या फिर धर्म
 
Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna