0
" फिर दिखा वो आइना ...."
चंद कतरे ज़िंदगी की ओस के, होंठों पे रखमैं खुश हुआ था,फिर किसी उम्मीद के अहसास ने आकर के यूँमुझको छुआ था !एक पल में उड़ चले थे , सोच के पर जाने कहाँ,सच मेरी लाचार हालत का भी मुझको झूठ सालगने लगा था ! .......कि अचानक दिख गयी तस्वीर वो जो थी हकीकत, फिर दिखा
- 7 00 टिप्पणियां [0]
Feb 14 2010 03:21 PM


Shuffle








