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15 Jun 2010
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दोस्ती और धोखा

मेरी तकलीफ की तफसीर में न जा ए दोस्ततू नही समझेगा मेरी तक़दीर की तासीर जिसने हर तबस्सुम के एवज  में मुझे ताजिर दी है ये दोष महज लकीरों का नही गुनेहगार हूँ बराबरी की मैं भी खुद की भी औरअपने उन अजीजों की भी जिन्होंने
 
हिमानी
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कविता में अभाव

एक दिन देश के गैर राजनीतिक बुद्धिजीवियों से मामूली आदमी पूछेगाउन्होंने तब क्या किया जब हल्की और अकेली मीठी आग की तरह देश दम तोड़ रहा था ?कोई नहीं पूछेगा उनसे उनकी पोशाकों के बारे में दोपहर के भोजन के बाद लंबी झपकी के बारे मेंकोई भी नहीं जानना नहीं
 
हिमानी
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कलयुग की माया

ये द्वापर युग नही है न ही सतयुग .कि यहाँ कंस और रावन जैसे राक्षस मिले लेकिन ये जो कलयुग है यहाँ भी लोग कम मायावी नही है  हर बदलते पल के साथ यहाँ लोगों का नजरिया और व्यवहार बदल जाता है  जाने कैसे ये लोग पल भर में प्यार को नफरत और नफरत
 
हिमानी
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रूठे हुए कुछ शब्द

कुछ शब्द जिंदगी से गायब हो गए हैं ...बहुत चुप चाप न जाने कहा चले गए है रूठ कर ....न मेरे पास हैं ...न उसके पास और तुम्हारे पास भी नही मिले वोउन शब्दों का अकाल है या किसी ने आपातकाल लागू कर दिया है अक्षरों पर की जुड़कर वो शब्द बन ही न
 
हिमानी
टैग: kavita
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मीडिया इंस्टिट्यूट -हर मोड़ पर है मिलावटी माल की एक महंगी दूकान

 मेरी अपनी कहानी भी कुछ ऐसी ही है ...और जितने लोगों को मीडिया में पढने की कोशिश करती हूँ उनका अनुभव भी कुछ वैसा ही है ........घर से भागकर , घरवालों के खिलाफ जाकर , घर पर बिना बताये , पिता जी से लड़कर..माँ को मनाकर .....पत्रकारिता की पढाई करने की
 
हिमानी
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डूबता सूरज

उगते सूरज को मैंने कभी नही देखारात भर नींद से चली अनबन जब तडके ख़त्म होती है तब अक्सर आँख लग जाया करती है और यूँ हर बार छूटता रहता है वो दृश्य जबकि मैं देख पाती एक स्वर्णिम सवेरे को मगर हर दिन, जब ढलती है शाम मैं देखती हूँ डूबते सूरज को सफ़ेद से स्वर्णिम
 
हिमानी
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मुखोटे लगा लो , मनी कमा लो

तू बेवकूफ है झूठ नही बोल सकती थी ...........तेरी शकल पर झलक जाता है तेरे मन का भाव ....ऐसे कैसे काम करेगी तू अच्छी बातें करने वाले सारे लोग ही अच्छे हो ऐसा जरुरी नही होता ...जितना दूर रह सको ऐसे लोगो से उतना दूर रहो ................उसने पुछा और तुने बता
 
हिमानी
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हमें अपना हुनर मालूम है

एक चाँद ही को पाने का न सोचा हमने वर्ना हर एक सितारे क़ी चाहत रही वो टूटे तो घूरा गुस्से से आसमान को क़ि क्यूँ न संभाल सका वो हमारे प्यार को वो टिमटिमाये तो दुआओं में भीउनकी ही वफा मांगी  सिर्फ उगते
 
हिमानी
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कुछ सवाल - स्त्री ( मुक्ति या मौत )

कुछ दिन पहले मोबाइल पर एक एस ऍम एस आया ...एक लड़की बस स्टॉप पर खड़ी थी तभी वहां एक आदमी आया और बोला ऐ चलती है क्या नौ से बारह लड़की ने पलटकर देखा और कहापापा मैं हूँ मेरे छोटे भाई-बहिन जो इस सन्देश कि गहराई को भांप नहीं सके उन्हें इस पर हंसी आ गई ..लेकिन
 
हिमानी
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भ्रष्टाचार-रिस रहा है मवाद

आस पास से शुरू करे तो सब कुछ खूबसूरत लगता है. रोटी और सुकून के लिए जद्दोजहद करते चेहरों के बीच यह कहना बेहद मुश्किल हैं की कौन भ्रष्ट है. एक एक चेहरे को परखने लगे तो सभी और सबके भीतर झांके तो कोई भी नही. फिर भी क्यों हमारी छवि भ्रष्ट होती जा रही है. क्या
 
हिमानी
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वापसी का विकल्प

आगे बढ़ना किसे अच्छा नही लगता ....लेकिन ऐसे वक़्त में जब कदम लड़खड़ाने लगे तब .........................................वापसी का विकल्प होना वरदान सरीखा हो जाता है ........वर्ना तो लौटना आखिर कौन चाहता है बीच सफ़र से
 
हिमानी
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पतंग से जुडी जिंदगी की डोर

शादी को लेकर दुनिया भर में तमाम विचार प्रचलित है. दार्शनिक या  विचारक हो या फिर हर शक्स की निजी सोच ...शादी से जुड़े विचार की गहराई में उतरना आसान नही लगता. कही सोच ..अनुभव को बदल देती है तो कही अनुभव... सोच को. इन तमाम उहापोहो के बीच एक
 
हिमानी
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घर लौटने का डर .......

घर लौटने का डर .......वो लोग भी है मेरे ही आसपास जो साल में एक दो बार ही सही मगरजाना चाहते है घरयहाँ नौकरी की जद्दोजहद से दूरकुछ पल... एक अलग तरह की जुस्तजू में गुजारने के लिए जहाँ खाने की थाली में माँ को हर बार
 
हिमानी
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तारीखों के तिलिस्म

एक फिल्म के मशहूर संवाद तारीख पर तारीख के अलावा भी कई बार मेरा इन तारीखों के तिलिस्म से सामना हुआ. यहाँ सिर्फ कोर्ट ही तारीख नही देता किसी भी  ओहदे पर बैठा हर शक्स यहाँ तारीख देने के लिए तत्पर है.हालाँकि फेहरिस्त खासी लम्बी है
 
himani
May 03 2010 04:31 PM
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क..ख..ग..घ..ड़.?????

क से कोशिश होती है मेरी कि ख से खुश हो जाऊ अक्सर नही तो अमूमन ही सही ...ये सोचकर कि दर्द दिए जिंदगी ने तो कुछ  दोस्त भी दिए          दिल कि देहलीज पर दस्तक देते हुए मगर फिर एक भय एक संशय सामने आ जाता है ग
 
himani
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हाँ.... ये भी सच है

डूबता हुआ सूरज सूखी हुई नदीपिघलते पर्वत उजड़ता जंगल अब सब अपने से ही लगते है ....हाँ.... ये भी सच है कि इन अपनों से पहलेसपनो वाली एक दुनिया मेंसलाम किया करती थी मैं भी उगते सूरज को संग बह लेता था मेरा भी मन...कल कल करती
 
himani
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लुप्त होते खेल और लिप्त होते खिलाडी

बचपन में मैंने गुड़े गुडिया और घर घर वाले खेल खूब खेले ...कोई भाई बहिन नही है और इस्कूल के दोस्त घर के बहुत नजदीक नही रहते थे इसलिए घर में ही किताबे पढ़कर वक़्त बीतता था. कहने का मतलब ये है की मैं outdoor खेल बहुत ज्यादा नही खेल पाई. क्रिकेट, फूटबाल वगैरह
 
himani
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क्या मैं नास्तिक हो गई हूँ

कभी तुम्हे देखा नही था मैंने न कभी देखने की जरुरत ही दिखी 'मेरे मन में तुम्हारे लिए नमन था कब से मैं नही जानती माँ की दिया- बाती में मुझे तुम्हारी रौशनी दिखती थी मंदिर की घंटियों में मैं तुमसे कुछ कहने की धून सुनती थी सारे मंत्रो और श्लोको को रट
 
himani
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दिखावा न हो दरम्यां

मैंने बचपन में एक कविता पढ़ी थी चिड़िया वाली ...एकदम सही से तो नही याद लेकिन उसका मतलब कुछ इस तरह था कि चिड़िया का बच्चा जब घोंसले से बाहर निकाल कर देखता है तो उसका ये भ्रम टूट जाता है कि सारी दुनिया महज उसका ये घोंसला ही है ...कुछ इस तरह थी लाइन कि ....अब
 
himani
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बस... किये जा रहे है

जाने क्यों मुझे ऐसा लगता है की हम सब अपनी जिंदगी की थर्ड क्लास कहानी को फर्स्ट क्लास एंडिंग देने के लिए सारे सेकंड क्लास काम किये जा रहे है ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;ऐसे काम जो शायद हमें नही करने चाहिए या जो हम खुद भी करना नही चाहते
 
himani
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एक मुगालते में

एक मुगालते में अब महफूज है मेरी खुशियाँ सबकी जिस ओर से जिस छोर तक                 जिस सड़क से जिस मोड़ तक रास्ता है वहीँ से निकलती चालू बसमक़ाम मिलना यूँ भीमुमकिन नही हर किसी
 
himani
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एक जगह

जनसत्ता में अभिव्यक्ति को मिली जगह  जोश है जज्बा है जूनून है और है जुस्तजू भी चाहिए तो बस वो जमीन जहाँ अपने लिए एक जगह बना सकू
 
himani
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जंगल और जमीन से जुडी एक दुनिया

मेरा बच्चा मेरी बात ही नही मानता...दिन पे दिन बिगड़ता जा रहा है...इस पर इसके दोस्तों का ज्यादा असर हो रहा है जो वो कहते है वाही मान लेता है ..इसे सख्ती से लेना पड़ेगा...अब इसने ऐसी कोई हरकत कि तो सीधा डंडे से इसकी धुनाई होगी तभी मानेगा ये
 
himani
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मुस्कुराने की आदत

दर्द से कभी सिर्फ एक रिश्ता था अब याराना हो गया है हर रोज का ही आना जाना हो गया है कभी आसुओं कि दवा मिल जाया करती थी अब परहेज के तौर पर आदत मुस्कुराना हो गया है
 
himani
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हंगामा नही इन्साफ करें .....रिश्तों के साथ

महफ़िल और तन्हाई..दोनों का ही अपना लुत्फ़ है कभी दुनियादार हो जाने को जी चाहता है तो कभी सारे बंधन तोड़कर अपनी सी अलग दुनिया बसाने का मन करता है..लेकिन समाज में रहते हुए कई अनकही सी सीमाओं से बंधकर हम अक्सर चाहतों को पूरी करने की बजाये सही और गलत के फेर में
 
himani
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शब्दों से भारी होते भाव

भाव कभी कभी शब्दों से ज्यादा भारी हो जाते है ...बयाँ ही नही हो पाते. शुन्य से शुरू होकर सोच शिखर तक पहुँच जाती है ....लेकिन सच कि परछाई वापस जमीं पर ले आती है...उन बातों को कैसे बयाँ करू जिनमे बंधन है ...बाधा है और ऐसी सरहदे है जो सिर्फ सपनो में ही पार
 
himani
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सपनो से मिली सजा

सीले हुए से कुछ शब्द सुखी हुई सी कुछ उम्मीदेंखालीपन से भरे इस दिल में         अब और बचा ही क्या है सोचे बिन ही समझ लेने की भूल और जाने बिन ही देख लेने का अपराध सपनो के इस गुनाह की बाकी सजा भी क्या है जोप जुर्म किया
 
himani
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शायद... बयाँ हो जाये

लिख रही हूँ इबारते कभी मन ही मनकभी कागज पर कलम सेसोच कर यही कि शायद इस बार हाल ए दिल आरजू ए जिंदगी और जुस्तजू ए सफ़र बयाँ हो जाये मगर मुक्कदर की मुफलिसी में ये मुनासिब कहाँ जितना चलती हूँ रास्तें उतने ही लम्बे हो जाते है हकीकत की बात हो तो कह
 
himani
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सुख की तलाश में

सुख की तलाश में गई थी दूर तलक मैंजब खाली  हाथभारी  मनलौटना हुआ तो देखा दुःख अब भी वहीँ बैठा मेरी राह तक रहा है ज्यो का त्यों जरा भी नही बदला एक तरफ मेरी तलाश अधूरी थी दूसरी तरफ मुझसे जुदाई में दुःख भी उदास सा दिखा मुझेकुछ और तो न कर
 
himani
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खबर थी उसे

चाँद, तारे,आकाशनदिया,बदल,बारिश, झरनेफूल,भँवरे,पंछी,पेड़क्यों बनाये उस रहबर नेशायद खबर थी उसे की एक दिन जब किसी वक़्तसपनो सी इस दुनिया में किसी शक्स को सच दिखेगा, चुभेगा, चोट करेगा तब वो कुदरत की आगोश में कल्पना की चादर लेकर कुछ पल पैर पसारकरनींद की एक
 
himani
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मैं

एक मुक्कमल सुबह का इंतज़ार है मगर हर रात आने वाले चाँद  से भी बेहद प्यार है नींद जरुरी है सेहत के लिए मगर सपने दवाओं से ज्यादा तीमारदार हैएक दिल, एक जाँ है मुझमेएक ही शक्स हूँ मैंफिर भी आईने में देखकर
 
himani
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सच को बदलने का सपना

जब फूलों को खिलते देखा....तो मैंने एक ख्वाब लिखा झरने को नदी में ..नदी को सागर में गिरते देखा...तो मैंने एक ख्वाब लिखा पतली सी सफ़ेद लकीर को पूरा होकर चंद बनते देखा ...तो मैंने एक ख्वाब लिखा हवा को जब महसूस किया मुझे छु कर गुजरते हुए ...तो मैंने एक ख्वाब
 
himani
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आम आदमी

उर्दू शायर कैस रामपुरी ने कभी फ़रमाया था "आ गया गुमराह करने का हुनर जाइये अब रहबर हो जाइये" और इस फरमान या कहे  कि फरमाइश को  देश के रहनुमाओ ने बखूबी अपनाया है.इस बार का  बजट हो या
 
himani
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रास्तों का फर्क

सफ़र में सभी है हम किसी को हाई वे ही मिल गया है पहले कदम पर कोई सड़क पर चल रहा है और किसी को पगडंडियों पर से गुजरना है मंजिल के लिए  
 
himani
Feb 22 2010 04:36 PM
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आत्महत्या..एक अपराध या इन्साफ

आत्महत्या..एक अपराध या इन्साफ पिछले कई दिनों से लगातार आ रही आत्महत्या की खबरों ने जैसे मन को कचोट कर रख दिया है और फिर एक ८-१० साल का बच्चा आत्महत्या कर रहा है ..क्या सोच कर ..सिर्फ कुछ सोच कर ही ...या फिर कुछ ऐसा समझ में आ चूका है उसे की जिंदगी बिलकुल
 
himani
Feb 21 2010 09:34 AM
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अब हम बड़े हो गए है

........बात उन दिनों की है जब....कब पढ़ते पढ़ते आँख लग जाती थी पता ही नही चलता था.......और ये किस्सा आज का है की नींद नही आती तो आधी रात तक किताब पढ़ते पढ़ते ही  गुजर जाती है ....उन दिनों ठंडी हवाओ से इतना डर लगता था की जुराब और टोपी पहन कर ही बाहर
 
himani
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सरेराह चलते चलते ...

हर पल न जाने कितनी बातें   मन के अन्दर ही कहीं दफ़न हो जाती है कभी जुबान नही मिल पाती कभी जस्बातअभी थोड़ी देर पहले जंगले से झांकते हुए मैंने कबूतर के एक जोड़े को देखा ...कभी लड़ते और फडफडा कर एक दुसरे से अलग हो जाते फिर पास आते और न जाने अपनी
 
himani
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इश्क का उत्सव

बागों से निकलकर गुलाब सबबाजार में आ गए है प्यार कि दुकानों में मोहब्बत के सामान फिर एक बार छा गए है गलती से कोई कोई
 
himani
Feb 10 2010 04:46 PM
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काश जिन्दगी फिल्म होती

किसी उपन्यास के चरित्र,किसी कहानी के किरदार और किसी के फिल्म के पात्र सरीखा ही लगता था उसे अपना जीवन. उसे लगता था कि उसकी ज़िन्दगी भी एक फिल्म है. कभी ख़ुशी है कभी गम है ...आजकल का लव  न सही इश्क तो है ...ये मानने कि बाद कि मैंने प्यार किया
 
himani
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ख्वाब और जिंदगी

ख्वाबों की तस्वीर में खुशियों की खुशबू होती है बन्दे कि तक़दीर में ख्वाब कि हकीकत नहीमहज आरजू होती है अफ्सानो कि चांदनी पर जब असलियत कि धुप पड़ती है तब जिंदगी की कहानी पीछे छूट चुके किसी मोड़ की तरफ मुडती है बेशक होती है आवाज कुछ कहने के लिए आँखें होती है
 
himani