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सलाम करता चलूं

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02 Jun 2010
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खूं रगों में खाली है

बातों की बतीहर से रौशन, रातें काली काली हैरातें लम्बी लम्बी काली, खूं रगों में खाली हैहै उचक्का दिल अगर तो, दिनभर दिवाली हैतू कहीं गर रुक गया तो, वक़्त की तू साली हैहै बड़ा जालिम सिपाही, आँखों में तेरी लाली हैमिल गया हाथों से हाथ, तो समझना ताली हैये कबीरा
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शादी की ३७वीं सालगिरह

कोई ३-४ सौ किलोमीटर चलके आता है.पुराने हो चुके किसी ३७ साल की बात के लियेज़ुबां पे एक शब्द तक नहीं,सुबह से घर में चहल-पहल रहती हैपुलाव और मटर की खुश्बू मेंकुछ रिश्ते महक रहे हैं,२९ मई २०१० कोशादी की ३७वीं सालगिरहमुबारक हो.
May 30 2010 03:38 PM
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उम्र की उपलब्धि

उम्र की उपलब्धिरोज़ माथे पर सवार हो जाती हैकुछ खुदबुदाहट होता हैऔर सर के कई बाल सफ़ेद हो जाते हैथोड़े खुशफहमी में दिन कटता हैऔर कुछ खुशबू आसपास चक्कर लगाती हैएक बाती में फंसी अगरबतीखुशबू और धुँआ उगलता हैअपनी तक़दीर की अगरबती बनाकेजलाओगे तो खुशबू तो आयेगी
May 20 2010 06:47 PM
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यादगार पात्र होने की चाह ज़िन्दगी.

मेले में बिक रहे किसीबैलून, चश्मे, लाई-पकौडीझूला, सेवई, जलेबीरास्ते का सबसे घना पेडफट चुकी किताबलाल रंगहिन्दी फ़िल्मों का 'राज', 'विजय'बंगाली बाबा का जादूहाशमी दवाखाना की शीशीकमजोरी भगाने वाली खुराकमोटा वाला बैंक अकाऊंटज़ीरो साईज़ टेंशनखाके सोने वाली
May 12 2010 04:11 PM
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रात सो गई मीठी होके

१. रात बिकी है इतनी जल्दी,सुबह, धूप की बाज़ार लगी है. औने पौने भाव तो लेलो, सूरज की दुकान सजी है.२.रात बावली, कालीकरवट करवट डांटेमुझे भोर तक सोने न देघर घर निन्दियां बांटे३.ओ मेरी प्यारी रतियामान ले मेरी बतियाफूंक फूंक के तुझे बुझाऊंजलती तू सारी
Feb 23 2010 11:13 PM
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हुक्का पानी बन्द हुआ है

दूध मलाई लड्डू बरफीरसगुल्ला कलाकन्द हुआ हैशोर मचाओ ऐ दिलवालोंहुक्का पानी बन्द हुआ हैनैनों के नज़राने गयेखूश्बू के अफ़साने गयेखोया सोया रोया धोयामिलने पे प्रतिबन्ध हुआ हैदिन दोपहरी रात का मंज़रतीर चलाये मारे खंज़रदिल को है तारीख पे जानावक्त का बडा पाबन्द
Feb 21 2010 12:51 AM
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अपने अपने हिस्से की धूप

हम समेटे अपने अपने हिस्से की धूपअपने हक की बारिशेंलगाये फांट बगीचे में उगेआम और अमरूद के पेडों काअपने अपने हिस्से काआटा गूंथे, पूडी तलेचवन्नी डाले अपने अपने गुल्लक मेंएक बिस्तर पर बांटे करवटों कोअपने अपने हिस्से की चांदनी से रौशन होअगल अलग ख्वाहिश पे
Feb 20 2010 10:40 AM
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हंसते हंसते रात हुई है.

चार आने की बात हुई है थोडी सी मुलाकात हुई हैवो भी भीगी, मैं भी भीगाआंखों से बरसात हुई है.किसने ये साज़िश की हैकिसकी ये खुराफ़ात हुई हैबुझे बुझे से आग थे कल तकसुलगी सुलगी रात हुई है.सन्नाटे में शोर बहुत हैखामोशी में बात हुई हैथोडे ज़िन्दा थोडे मर गयेये
Feb 20 2010 10:39 AM
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न देव न देवदास.

किनारे किनारे हीमोहब्ब्त का दर्द गुजर गयाहौले-हौले, आहिस्ते, बडे धीमेटीस उठी भी तो चवन्नी छापइश्क की मोटी लकीरकब साईज़ ज़ीरो हो गईपता ही न चलापाकेट में एक फ़ोटू तक नहींमेहबूब की.सब कुछ बडे सस्ते हुआनदी उस पार जाने काकभी मौका ही नहीं मिला.कई दफ़े आसुओं
Feb 14 2010 09:01 AM
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उफ्फ!

जाने किस घडी सोया था,मेरे शब्द कहां गयेऔरमेरी अक्ल कहां गईअब नहीं आती कभी करीबमेरी सारी कवितायेंविदेश चली गई है. उफ्फ!
Feb 11 2010 09:57 PM
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तकदीर इतनी तो बेरहम हो मुझ पर

तेरे शहर में कुछ दिन ज़िन्दा रहूं तेरा इतना तो रहम हो मुझ परखुदा का नाम तेरे बाद आयेतेरा इतना तो करम हो मुझ परवो दीवार गिरे जो तुमने उठाये हैंवो आग बुझे जो तुमने लगाये हैंकिसी दिन बारिश हो इस वीराने मेंआंखों से इतनी रमझम हो मुझ पर वो अपने घर में, मैं
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धीरे धीरे

रातें काली,सफ़ेद दोपहर,सूरज आता पुरब सेजाता पश्चिम,आसमां ऊपरनीचे जहां,खाने पीने का समय सही,फिर भी,दिल का घटता वजनसोचता हूं,कहीं तुम्हारे पास तो नहीं जा रहाधीरे धीरे.
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आज की रात चांद को नहलाया जाये

ज़ख्म थोडा थोडा दिखाया जायेआज साथ साथ बतियाया जायेन तुम मेरे हुए न कोई तुम्हारापुराने गम को हंसके भुलाया जाये बेच के नीयत, जमीर दूकानों मेंकुछ कुछ बाज़ार से कमाया जायेन तुम भूखे रहो न हम भूखे रहेदाना डालके चिडियां फंसाया जायेहो रौशन चांद की रात झक
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तुम प्यार क्यों नहीं करते?

जबकि तुम्हारे लिये तारों की बारात आ सकती है,फूलों से खूश्बू,हवायें सा रे गा मा गा सकती है,तुम्हारे वास्ते बातों की कई किताबें छप जाये,बारिश की पानी से कौफ़ी बन सकती है,सारी रातें, सारे दिन तुम्हारे नाम हो सकते हैं,छोटी टोकरी में सूरज समा सकता है,सर्दी
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विचार टिकता नहीं.

कभी कोई विचारटिकता नहींछोटे से दिमाग के हर कोने मेंखलबली सी चले हैकल ही एक बडा विचार पैदा लिया थाआज किसी कोने में दफन हैकई चीजें एक साथ करने का विचारमेला देखने का,लाल किला घूमने का,चांदनी चौक की रबडी,मूली परांठा, खुरचन परांठा, रायता,किताबें खरीदने
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कभी कोई विचार टिकता नहीं

कभी कोई विचार टिकता नहींछोटे से दिमाग के हर कोने मेंखलबली सी चले हैकल ही एक बडा विचार पैदा लिया थाआज किसी कोने में दफन हैकई चीजें एक साथ करने का विचारमेला देखने का,लाल किला घूमने का,चांदनी चौक की रबडी,मूली परांठा, खुरचन परांठा, रायता,किताबें खरीदने
Feb 02 2010 05:32 PM
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जबसे बबुआ भईल बारन दू पर दू बाईस के

जबसे बबुआ भईल बारनदू पर दू बाईस केतबसे बबुआ पहिन तारनजीन्स लिवाईस केठेलत ठालत इ साहब बी.ए. पास कईलन हआपन बाप मतारी के नाम खास कईलन हआवते आवते आ गईलन हदिल्ली के बाज़ार मेंकांपी-किताब खरीद खरीद केशामिल भईलन हज़ार मेंफोन-फान आ जूता-चश्मासौ रंग के बात हउजर
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हंसी

खुरदुरे चेहरे के रास्तों पे किलोमीटर तक चलती हंसीकिसी मोड दिल रह गयाकिसी गली जान फंसीहोठ से निकलते हुएनाक से गुजरते हुएआंखों की दूकान पेकानों की सुरंगों मेंसर पे पसर गयाबालों की झाडियों मेंलिपटी, फंसी, रची-बसीकिलोमीटर तक चलती हंसी.
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आज़ादी की मरम्म्त करनी होगी.

होठ से हंसी निकलेगले से सुरमई गीतऐसी कोई टैबलेट खिलाई जाये,चेहरे पे निखार आयेकोई निशां न होऐसी फ़ेयरनेस क्रीम लगाई जाये,रहे मज़बूत सालों तकहड्डियां सलामत रहेअच्छे ब्रांड की च्यवनप्राश दी जाये,मूंछ बडी-बडी हो लम्बीसूट-बूट में लगे गंवारऐसे सजाया जायेबालों
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..तो नज़र आना सिर्फ़ तुम.

मेरी करवटों में सोना,धडकनों में होना,आहटों में आना,मेरे होठों से कहना,आंखों से बहना,पलकों से झपकना,मेरी माथे पे चमकना,खुशियों में चहकना,नशे में बहकना,मेरी सुबह में उतरना,शाम में ढलना,रात में बदलना,मेरी रगों में चलना,किसी भोर उठकेआंख मलते हुए जब आईना
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चलो, प्याली में चांद पीया जाये.

१.धूप की सरकार गिर गईसूरज नज़रबंद हुआ हैमौसम का दिल है जलाकोहरे की धुंआ है.२.बदन पें बूंदेंजुबां से कोहरे की सांस छोडती हैबर्फ़ीले मौसम मेंपुराने रिश्ते उभर रहे हैशिमला की मैसेरी बहन निकली, दिल्ली.३.अलाव जलाये रास्तों पेआग से दोस्ती कर लेंकोहरे की खाट
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दो-दो दिन पे खफ़ा होना, तुम

कुछ अगर होना हो तोमेरे लिये मां होनातुमसारी दुनियां एक तरफ़मेरा सारा जहां होनातुमरिश्ते नाते सब है बातेंछोटी मोटी वफ़ा होनातुममुझमें रहके कभी कभीहल्के फ़ुल्के जुदा होनातुमधन-दौलत न चांदी सोनामेरे लिये हवा होनातुममंदिर मस्जिद मैं न जाऊंमेरे भीतर खुदा
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दो-दो दिन पे खफ़ा होना, तुम

कुछ अगर होना हो तोमेरे लिये मां होनातुमसारी दुनियां एक तरफ़मेरा सारा जहां होनातुमरिश्ते नाते सब है बातेंछोटी मोटी वफ़ा होनातुममुझमें रहके कभी कभीहल्के फ़ुल्के जुदा होनातुमधन-दौलत न चांदी सोनामेरे लिये हवा होनातुममंदिर मस्जिद मैं न जाऊंमेरे भीतर खुदा
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सफ़ेद-सफ़ेद ओस

सफ़ेद-सफ़ेद ओस उतर आती है.शाम होते ही रोआं सिहरने लगता है.चाय की तलब दिन भर लगी रहती है.जैकेट को लिहाफ़ बनाने की नाकाम कोशिशेंचलती है दिन भर.उठो तो बैठने का जी नहींबैठो तो उठने का मन नहीं करता.किसी कब्र में लेटने को जी करता है.इन कोहरों कोकोई टोपी
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नया साल, बूढी चांद.

नया साल.वही पुराना सूरज, पीली धूपबूढी चांद, थकेली चान्दनीएक्वागार्ड से निकला पानीईटों का कब्र, मकानरिश्तों में मीलों के फ़ासलेहरी घास, घिस चुके गुलाबपापी पेट का रोनाबुजूर्ग ख्वाहिशें, मकान, गाडी, अच्छी नौकरीटी.वी, फ़्रिज, वाशिंग मशीनठेकों पे लम्बी
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नया साल, बूढी चांद.

नया साल.वही पुराना सूरज, पीली धूप बूढी चांद, थकेली चान्दनीएक्वागार्ड से निकला पानीईटों का कब्र, मकानरिश्तों में मीलों के फ़ासलेहरी घास, घिस चुके गुलाबपापी पेट का रोनाबुजूर्ग ख्वाहिशें, मकान, गाडी, अच्छी नौकरी टी.वी, फ़्रिज, वाशिंग मशीनठेकों पे लम्बी
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मां के कई मौसम होते है.

चंदा मामा. चंदा मामा. बच्चे को मनाना हो या उसे खाना खिलाना हो. बच्चे को गोद में लिये मां चंदा को ही मां कहने लगती है. मां ने किसी घडी चांद की कलाई पे धागा बांधा और चांद मामा हो गया. मां इतनी अच्छी हो गई कि चंदा को भी मामा होना पडा. दो-दो मा. चंदा जैस
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दूल्हनियां

उछाल मारती उम्मीद से अब कोई भी उम्मीद बेमानी है. लाख रगड के, दिमाग के कोई भी पेंच खोल के, कुछ ऐसा हो जाये कि लोग नाम लेने लगे एक बार, बस. गोल, चाकर चाहे तिरपिटाह ढंग की कोई गोली मदद नहीं करती ऐसे में. मन रोज़ इस लालच से दौड लगाता है कि अबकी बार त फर्
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फईसन देखा

अईसन देखा वईसन देखाजगह जगह पर फईसन देखाकईसन देखा कईसन देखाजगह जगह पर फईसन देखाअईसन देखा अईसन देखाअन्तर मन्तर जन्तर देखापाउडर लगाए बन्दर देखादेसि मुर्गी विलायती बोलचउक चउक जोगिन्दर देखाअईसन देखा अईसन देखाछोट कपड में लईकीसननील गगन में उडत जायेकान में ठ
Dec 29 2009 11:52 AM
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कितना साधारण

होठ पे हंसी की बूंदाबूंदीआंखों में ख्वाबों की चहल-पहलइशारों में कलाकारीबातों से तीरंदाजीसब बातें तुममेसबकुछ खास तुम्हाराऔर मैं... कितना साधारण.
Dec 29 2009 11:52 AM
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बनकर फूल खिलो

बनकर फूल खिलो गुलशन में, डरकर तुम क्या पाओगेजो पाया है बांट दो सबकुछ, लेकर तुम क्या जाओगेहंसते खिलते चेहरो से, दिल का दर्द मिटाओगे बांटोगे जो बबूल के बीज, बेर कहां से पाओगेखुशी के दीप जलाकर तुम, गम की रात भगाओगेसूरज को दिखा के राह, नया सवेरा लाओगेबनक
Dec 29 2009 11:52 AM
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मुंहजोड नींद

नींद भूल सा गई है रास्ता मेरे दरवाजे तक का. जाने किस गली गुम हो गई है? किस चौखट डेरा जमाये हुए है? जाने किस विचार ने रोक रखा है उसे मेरे पास आने से? वैसे सुना है विचार सौत है नींद की. नींद न हुई महबूबा हो गई. मुझे याद है मैं रिषिकेश गया था और एक गुरु
Dec 29 2009 11:52 AM
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सिफर

तुम्हारे लिये मैंने कुछ नहीं खरीदा ईश्वर को भी आजतक कुछ नहीं दिया मां भी वंचित है मेरे द्वारा कुछ भी पाने से, तुम सबों से अभी तक लेता ही आया हूं, ममता की छांव, मां की आंचल से, ईश्वर ने दिया है ये जीवन, और तुमने, तुमने दिया है प्रेम, जीने की वजह. सोचत
Dec 29 2009 11:52 AM
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खत

मां,आशा है कि तुम ठीक होगी.मेरा ये है कि,जब तक सुबह बूढी नहीं होतीनींद अपनी पूरी उम्र जीती है.हर सुबहयहां की सर्दी कोगर्म पानी से पीटता हूं.गुनगुने पानी की धारऔरदूबली हो चुकी धूपतुम्हारी बात मानती होगी.धड-फड तैयार होता हूं.पर मां,आफिस फिर भी वक्त पर
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सूरज अब नहीं नहाता

सूरज अब नहीं नहाताधूप जैकेट पहनके आताधूप की गहराई अब कम हो गई हैसर्दी की डर सेभागी फिरती हैशाम पसर जाती हैदिनसे ही.कोहरे की शोरतडके शाम सेभोर तक.हाथ में थामे चाय की प्यालियों सेधुआं निकलता है.गर्दन में शाल लपेटेया गुलबन्द बांधेबसों मे लोग.कोहरों की श
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विग्यापन

घरों की दीवारोंमकानों की चबूतरों गली, मोहल्लेकस्बों की मोड पेहर तरफलगा है, एक लुभावना खिलौनासटा है, एक खूबसूरत तस्वीरऔर नीचे लिखी हैदो-चार मीठी-मीठी बातेंहर जगह बाज़ार फैल रहा है अब.
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छोटी सी दुनियां

अपनी छोटी सी दुनियां होगी बिल्कुल छोटी सी,उस छोटी सी दुनियां मेंदो-तीन चांद होंगे औरएकाध सूरज,एक छोटा सा जंगलजिसमें चन्दन के कई सारे पेड होंगे,एक भरा-पूरा इत्र का कुआंहरा-भरा खेतमकई की बालियां,हर मंगलवारखुश्बू का बाज़ार लगेगा,एक हंसी का साहूकार होगा,
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मुंबई २६/११

एक बात बताओ मेरे प्यारों धर्म का रंग चढाते क्यों हो?जहां न दिखता अपने सा रंग, उसका घर जलाते क्यों हो?प्रेम, भाईचारा मिटाकर, आतंक का लहर उठाते क्यों हो?सब अपने है बात ये भूलकर, बस्तियां जलाते क्यों हो?एक बात बताओ मेरे प्यारों धर्म का रंग चढाते क्यों ह
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एक लडकी

एक लडकी सूरज की पहली किरण जैसीधरती पे उतरती हैऔरटूटकर दूर तक बिखर जाती है,पहली बार किसी चीज काटूटना और बिखर जाना बुरा नहीं लगता.
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जरूरत भर की चीजें

जरूरत भर की चीजेंहोनी चाहियेज़िन्दगी में,एक घर या कमराकमरे में एक तरफ लगी होदादी की तस्वीर, गणेश जी की मूर्तिअगरबत्ती का पैकेट, माचिसएक स्वादिष्ट रसोईघरएक घडा, दो गिलासएक कलम, कुछ किताबें,एक छोटी कुर्सी, एक टेबलपुराना फोटो अलबमस्टैन्ड वाला फोटो फ्रेमछ