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कड़वी खट्टी मीठी

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31 Dec 2009
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इंटरनेशनल इयर ऑफ़ अस्ट्रोनोमी २००९

सन १९५९ से संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष को किसी न किसी विशेष वर्ष के रूप में मनाता रहा है जिससे को दुनिया का ध्यान कुछ क्षेत्र विशेष के तरफ आकर्षित किया जा सके. सन २००९ को इंटरनेशनल इयर ऑफ़ रेकोन्सिलिएसन, इंटरनेशनल इयर ऑफ़ नेचुरल फाइबर, और इंटरनेशनल इयर ऑ
 
प्रवीण शर्मा
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"Your " India

कडवी खट्टी मीठी', किन्तु हमें तो आपके चिट्ठे पर कडवी और खट्टी के अपेक्षा मीठा ही मीठा दिखाई दिया........मेरे पहले ब्लॉग पर pt. डी. के. शर्मा वत्स जी की ये टिप्पड़ी प्राप्त हुई. सच है जिंदगी हमेशा मीठी ही नही रहती है कुछ कड़वा खट्टा भी साथ चलते रहता ह
 
प्रवीण शर्मा
Dec 29 2009 12:00 PM
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क्या लिखूं

क्या लिखूं ये सोचते सोचते एक साल बीत गए, फ़िर याद आए पदुम लाल पुन्ना लाल बख्शी जी, उनका एक ललित निबंध था क्या लिखूं? सोचा चलो इसिस शीषर्क के साथ कुछ अगड़म बगड़म लिख डाला जाय, तभी गूगल महाराज की याद आई और सोचा की भाई खोज लू कितने लोग मेरी तरह क्या लिख
 
प्रवीण शर्मा
Dec 29 2009 12:00 PM
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भारतीयता का पुनर्निमाण

सितम्बर का बीता सप्ताह भारतीय विज्ञान के लिए बहुत ही उत्पादक रहा, चंद्रयान१ के सहायता से चंद्रमा पर जल की संभावना की पुष्टि को लेकर के मीडिया का हर हिस्सा बहुत उत्साही रहा. लेकिन एक खोज जो की हर भारतीय के लिए अहम् थी उसकी चर्चा कुछ समाचार पत्रों और हिंदी
 
प्रवीण शर्मा
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क्वान्ट्स ऑफ़ सोलास ?

१४वी लोकसभा से कई गुना बेहतरीन होगी १५ वी लोकसभा. कई विद्वानों का मत रहा है की १४ वी लोक सभा में काम की चीजों पर बहस कम हुई, इधर उधर की हरकते ज्यादा होती रही. हालाँकि ये कहने वाले हमेशा इस सत्य को झुठलाते रहे की १४ वी लोकसभा में ऐसे सदस्यों की बहुत क
 
प्रवीण शर्मा
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९९ के चक्कर में मेरा स्कोर

महाजनों गतः सः सुपंथा इस आदर्श वाक्य के साथ समीर जी के बताये हुए ९९ के चक्कर में मेरा स्कोर तो ऐसा है कि अगले कई जनम लग जायेंगे तृतीय श्रेणी में पास होने में. फिर भी ९९% इमानदारी से मेरा स्कोर भी देख लीजिये - १. छद्म नाम से ब्लॉग खोला. २.बेनामी जाकर
 
प्रवीण शर्मा
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क्या आप को याद है आज का दिन?

१३ अप्रैल १९१९ याद कीजिये जलियांवाला बाग़ के शहीदों को. मुश्किल से मिली आज़ादी को सफल बनाइये.
 
प्रवीण शर्मा
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शर्म करो NDTV

का हमेशा से ये दावा रहा है की वो और सब टीवी कम्पनियों से अलग है. इसके लिए वो तमाम तरह की हरकत करते रहते है, कभी उनके प्रसेंटर इस तरह की हरकत करते रहते है जैसे उनसे ज्यादा समझदार इंसान पुरे श्रृष्टि में नही है. लेकिन शायद आज तो हद ही हो गयी है, आज पर्
 
प्रवीण शर्मा
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गांज-भांग, रेशम और असबेस्टस की समानता

कल के चिट्ठे के क्रम को आगे बढ़ते हुए आज कुछ चर्चा हो जाए इंटरनेशनल इयर ऑफ़ नेचुरल फाईबर की. इस प्रोग्राम के बारे में आप पूरी जानकारी यहाँ से प्राप्त कर सकते है. अब आते है आज के चिट्ठे के शीर्षक पर, गांजे, रेशम और असबेस्टस में क्या समानता हो सकती है?
 
प्रवीण शर्मा