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02 Jun 2010
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शुगर की लीची

कल्लन मियां शाम को लीची ले आये। अदालती बैग मैं ताकि किसी को शक ना हो। मोहल्ला क्या यहाँ तो सब ही मुखबर हैं। बेगम से शिकायत हो गयी तो सुगर की सारी दवा नाले को गिरा देंगी। तय हुआ की बगीचे की तरफ चला जाये। एक बोतल पानी यूँ ठांस ली की गर्मी बड़ी है। थोड़ी तो
 
rajkumar jha
Jun 02 2010 10:28 PM
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आँखें नम हैं..

वो अपनों को विदा करने आये थे, कुछ उनके हाथ अपनों केलिए संदेसा देने। कुछ आये थे लौट जाने को अपने गाँव अपनों के बीच और कुछ लौट जाने को हमेशा के लिए। फिर एक बार दिल्ली के स्टेशन पर भगदड़ मैं कुछ जाने चली गयीं । कुछ ज़ख़्मी हुए, कुछ चोटिल हुए, कुछ के दिल के घाव
 
rajkumar jha
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बदन की गंध समाज का गंद

बताएं... कोई बात हुई भला। बदन की दुर्गन्ध को भागने वाले स्प्रे के इश्तहारों ने हद्द ही कार दी है। पुरानी दिल्ली मैं मजमा लगाके वाशिकर्ण ताबीज़ बेचा करता था एक बन्दा, अब यह काम इन्होने शुरू कार दिया है। खुशबू तो बाद की बात है बस लगाया और महिला आन पड़ी। एक
 
rajkumar jha
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मोदी बाबा चालीस चोर

कुछ दिन पहले की बात है, चोरों के सरगना मोदी बाबा अपने चालीस चोरों के साथ आई पी एल चलाते थे। इस चोरी को इस तरह से बुना गाया था की जब तक लोग खेल देखते अलग अलग तरीको से करोड़ओं रूपए अपनी अपनी जगह पहुँच जाते। मोदी बाबा को एक जलाली ने बताया था की शोहरत सोहबत
 
rajkumar jha
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जासूसी मोहतरमा और कल्लन

अम्मा हमारी समझ मैं ये नहीं आता की जब खबरें हैं ही नहीं तो आप क्यों इस पिटारे को खोल लेते हो। भाभी जान को उलझन सुलझन उतरन चद्दन देखनें दें और आप कुछ और करें। कल्लन मियां नाले मैं पीने का पानी नहीं मिलता ।मसला यूँ है की एक खबरी चैनल ने यह जानने की कोशिश
 
rajkumar jha
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आदमी की खरीद फरोख्त जारी है

सब बिकता है। इतिहास बताता है की बादशाह गुलाम खरीद क़र उनको शतरंज की मोहर तरह चलते थे। वो पलट वार वाला खेल जिसमें एक हत्या तय थी। अपने मनोरंजन के लिए तवायफ , पहलवान, तीतर तोते सब खरीद के लाये जाते हैं । ना मशाल यूँ छिड गया की कल्लन कियां ने वह महिला जो
 
rajkumar jha
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राम नवमी के मेला

अपना गाँव सडक के किनारे है। थोड़ी बहुत चहल कदमी तो चौबीस घंटे ही रहती पर मेले ठेले के दिन रौनक कुछ और हो होती है। झुण्ड के झुण्ड जाते आते हैं। शहरी प्राणी होने के नाते जल्दी उनमें मिलने की अनुमति नहीं थी। बच्चा है, गुम जायेगा, अकेला कैसे ,किसके साथ रुको
 
rajkumar jha
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gaon ki kahaniyan

आम के तिकुले पेड़ पे दिखने लगे थे. गर्मी पींग बढाने लगी थी. हांफता कुत्ता भी छाया खोजता खड़ी बैलगाड़ी के नीचे जाकर लेट गया, कल्लन की पुरानी कार गर्म हो गयी है, ड्राईवर ने उसे पीपल के पेड़ के नीचे लगा  दिया और उसका बोन्नेट खोल दिया. हम माजरा
 
rajkumar jha
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Need Help, Auto hindi function does not work here

पर यहाँ काम करता है...मदद करें.
 
rajkumar jha
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aap kya kartey hain

कुकुर ह्गास्सी करते हैं आप से मतलब. ना ना पहले इतना गुस्सा नहीं आता था किसी के पूछने पर की आप क्या करतें हैं. इधर जब से दो चार विज्ञापन ऐसे आये हैं की मुझे लगता है यह मुझे तंग करने के लिए ही पूछ रहा है. अब कल चाय टापरी पर एक आम आदमी हमसे पूछ रहा है की
 
rajkumar jha
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mere ko Headley Hona

कल्लन मियां का दरबार, कुछ गरीब से पुलिस वाले , कुछ राजनीतिज्ञ, कुछ बुध जीवी , खूब सारे केमरे, प्रेस, और कुछ आम जनता. ले देकर किसी फ़ालतू सिनेमा का सेट जिसमे गब्बर की भूमिका मैं कल्लन खडे हैं. उनके सामने मामूली से दिखने वाले दो तीन नीरीह प्राणी. गब्बर
 
rajkumar jha
Mar 20 2010 06:57 PM
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rally ke baad

अब का बतया जाए, रैली के बीच मैं बार बार मंच तक जाने की प्रयास मों एक गरीब लोचन के स्थान विशेस पर लाठी का प्रहार करते दरोगा जी एक हड्डी के ढांचे को ले आये. उसकी
 
rajkumar jha
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kidhar ho

सब पूछते हैं कहाँ हो. कुछ लिखते नहीं. क्या हुआ तबियत कैसी है...पता नहीं. दीप्ति नवल जी की कुछ पंक्तियाँ दिमाग को कुरेद रही हैं. तुम्ही से शुरू तुम्ही पे ख़त्म हर नज़्म मेरी, तुम ख्यालो दूर जाओ तो कुछ और लिखूं.  मेरे और इस पैर के दर्द के बीच का
 
rajkumar jha
Mar 14 2010 05:46 AM
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कुम्भ नहा आये..

मेरे मेला विभाग के दोस्त कुम्भ नहा आये। गए थे विज्ञापन को समेटन लगे आशीष ! गलत भी क्या है। गप श मैं मालूम चला की मेले मैं अनेक तरह के लोग थे। सबसे पहेल वह जो आर्थिक पुण्य मैं लगे थे जैसे की हम। फिर वह जो इंतजाम मैं लगे थे , अधिकारी महोदय।( कल्लन कह रहे
 
rajkumar jha
Feb 28 2010 09:24 AM
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जब लगे रौद सुहानी

देर रात जब बड़े बाज़ार की दूकान बंद हो जाती तब अपने पान बीडी के गुमटी के नीचे गाता था भगत। किर्तनिया था, मंगलवार, एकादशी, और विशिष्ट पर्व वाले दिन दो झंका के गाता था। जितना ही हाथ हारमोनियम पे साधा था उतना ही ढोल पर..साथ के बीडी बांधने वाले ताल से ताल
 
rajkumar jha
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एक पतंग उसकी थी एक पतंग मेरी थी

मैं बाज़ार मैं अपने विगयापन के कम से आया था, अहमदाबाद के बाहर का एक गाँव। बाज़ार मैं पतंग का मेला है। सनाक्रांत जो है परसों। तरह तरह के पतंग। अब इनके भी ब्रांड हो गए है। मंझे धागे के बडे बडे रील रखे हैं।कांच का पावडर , चिपकाने को फेविकोल , और धागे को रंगने
 
rajkumar jha
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दिल्ली की सर्दी

घनी धुंद मैं माँ के पैरों के बीचशाल मैं लिपटे नन्हे नन्हे से जिस्मममता ने जिनका हर हिस्सा ढक रखा हैवह स्कूल चले जाते हैं,मोटर गाड़ियां राह टटोल टटोल के आगे बढती हैंचुप रहो की मुंह से धुआं निकलता हैकौन कहता है की दिल्ली की सर्दी मैं दम घुटता है।गर्म चाय
 
rajkumar jha
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आउट लुक का तस्वीर वाला अंश

सालाना छपता है साहिब और मुझे कुत्ते की दूम की तरह खरीदने की आदत है। पिछला साल तस्वीरों मैं कैसा गुजरा इसकी कल्पना भी रूह कांप कंपा देगी । कवर पर अवाम के सामने एक व्यक्ति को सजाए मौत दी जा रही है। अन्दर के पृष्ठ और घिनौने हैं। लाशें कब्र, खून खून..तबाही।
 
rajkumar jha
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अच्छा देखो गुस्सा न करो

हम जानते हैं की हम उपस्थिति के बारे में थोड़ा गड़बडकर रहे हैं पर कसम कल्लन की जवानी की माशूका की हम अपने से इसके जिम्मेदार नहीं हैं। इधर तबियत है की न पूरी तीख है न पूरी ख़राब। रात रात दर्द से जागते कोल्हू के बैल की तरह एक दरवाज़े से निकल कर दूसरे से घ
 
rajkumar jha
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जंगल की रानी

बात टीवी की निकली तो इसके बारे में भी बता दूँ। यह जंगल वाला देखा आपने..कीडे खा रहे हैं वो तो है ही पर जो मोहतरमा नहा रही है झरने में...टीवी पर इस से पहले यह मंजर हमने कभी नहीं देखा। मोहतरमा नए अपनी गंजी भी फाड़ कर छोटी कर ली है...नेकर कहाँ शुरू हो यह
 
rajkumar jha
Dec 29 2009 11:41 AM
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तोते की मातम पुरसी

कल्लन आये हैं। माशाल्लाह सेहत भी सही लग रही है। क्यों मियाँ धान कटवा आये? अरे कल्लन भाई गायब आप थे दो हफ्ते की कह के गए और फिर अब लौटे और सवाल भी हम से। बनो मत ना, हमने भी देख लिया इन्टरनेट पे तस्वीर लगा राखी है तुमने...वोह शकील का लौंडा है ना तुम्हर
 
rajkumar jha
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फसल से भरा घर खलिहान

पहुँच ही जाता हूँ मैं कोई ना कोई बहाना कर के। खलिहान मैं नई फसल है, ओस में रात जलाये गए लकड़ी के धुएं की खुश्बो है । पंची भी दाना खा खे धूप मैं अलसाये पंखो को फुलाए, करीने से साफ़ कर रहे हैं। हम तो रहते नहीं यहाँ बस आते जाते है। जिन लोगों ने मेहनत मशक्
 
rajkumar jha
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एक जलजला है दीदों में , दीदार नहीं होता

तीस सितम्बर सन ९३ की बात है जब किल्लारी को दुनिया जान गयी थी। लातूर जिले का यह क़स्बा तबाह हो गया था। इमारतें चूरा हो गयीं और जिंदगी बेमानी। तब भी आया था और आज फ़िर लौटा हूँ, इंसान के पास अल्लाह है और पेट है, एक से भरोसा आता है दूसरे कोलेकर जीता है। वह
 
rajkumar jha
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भारती भोजन की विडंबना

काम ही ऐसा है की सारे देश में घूमते रहो,यायावर। और भूखे पेटन हो भजन गोपाला। पौ फटते दन्त पंक्ति को मांजसुबह से इस दिशा में सजग हो जाते हैं। जिस भी होटल में रुकता हूँ वहां ब्रेक फास्ट आठ बजे तक लग जाता है। यहीं से भोजन की राजनीती शुरू हो जाती है। दक्ष
 
rajkumar jha
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कुत्तों और मनुष्य समानता पर शोध

गाँव में दीवार पे इश्तेहार लिखने वाले आए। पहले तो एक झुण्ड कुत्ते उन पर भोंकते रहे, फ़िर एक एक कर के चल दिए। एक काला कुत्ता जमा रहा, पास के एक खम्बे पर लात उठा, प्रकृति में अपना यौग्दान दे , उसे अपना क्षेत्र घोषित किया। उसके बाद से हर आने जाने वाले कु
 
rajkumar jha
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आपको पता है कोपेन हैगेन कहाँ है

कसम कल्लन के जवानी की माशूका की हूमें कोपेन हैगेन कहाँहै कछु नहीं मालूम। अजी हमें अपने गाम के सिवा कहू नहीं मालूम, हम अपने सिवा किसी और के पायजामे में पैर न डालते। अब अख़बार में पढ़ा के संसार के वे सब पापी जिन्होंने इस पृथ्वी और आकाश की ऐसी तैसी कर द
 
rajkumar jha
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फिर ट्रेन पलटा दी !

भइया जी तुम माऊ वादी हो या म्याऊ वादी देखो ये काम बहुत ग़लत है। तुम आओ धरना दो.नारे लगाओ। इतनी अच्छे काम करो की लोग तुम्हरे साथ हों पर ये इन बेजुबान आम आदमी को मार के क्या मिलेगा। मुझे मालूम है की आपमें भी कुछ लोग उकता जाते होंगे और ऐसी हद्द पार कर ग
 
rajkumar jha
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यह कौन सा मज़हब है ?

क्या इस तस्वीर को देखने के बाद भी बिना अपने जेहन पर ज़ोर डाले मुझे बता सकते हैं की इस खुदा के बंदे मासूम जान का मज़हब क्या है? क्या कसूर है इसका? क्यों दर्द में है यह? क्या आप के दिल ने एक बार भी कहा की मरने दो यार पाकिस्तानी है? क्यों हो रहा है यह।
 
rajkumar jha
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सेंटी पीड कहीं का

कल्लन भी कमाल हैं, सर्कस बंद हो गयी वरना जोकर का काम जरुर दिलवा देता इनको। शाम को समोसा जलेबी ले आए और चाय अदरक वाली का फरमान जरी कर दिया। हमने कहा भाई इंसुलिन तीव्र गति से बढ़ रहा है रहने दो..वह खींस निपोरते बोले बढ़ने दो यार। अब सामने पतली पतली रस भ
 
rajkumar jha
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ऊपर वाले से झगड़ बैठा में

अब तो हद्द ही कर दी इसने, जितना दबो उतना दबाता है। शरीर से लाचार कर दिया, मान लिया, गिरा पड़ा थका में फ़िर चल दिया। उसको सुलग गयी। पिछले ढाई साल से लगातार दर्द में हूँ पर आज तक उफ नहीं की। पर इधर जो बीती है कुछ दिन से उसका क्या कहूं। बस अपना दिल बहला ल
 
rajkumar jha
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बापू माफ़ कर दो

विदेश में उनके चश्मे की नीलामी की ख़बर लग्गी तो कल्लन भी गुल्लक तोड़ के तैयार हो गए। सब मिल के खरीद लेंगे हमारी चीज़ है। पर अब इसका क्या करें, बापू की अपनी औलादें ही बापू को बेच रही हैं। विश्वव की सबसे उम्दा कलम बनने वाली कंपनी ने ७२ लाख का अनुदान दे
 
rajkumar jha
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हिन्दी है हम..वतन है..इंग्लैंड हमारा

सब को विजय दशमी की बधाई और शुभ कामना। अत्र कुशलं तत्रास्तु बात यह है की हम अपने प्रयोग के लिए अंग्रेज़ी सॉफ्टवेर वर्ड में हिन्दी फॉण्ट बदल कर लिखते हैं, अर्थात हम लिखने के लिए अंग्रेज़ी का जी और ई टंकित करते हैं। अब जब इस ब्लॉग पर आते हैं तो ऑटोमेटिक च
 
rajkumar jha
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गाँव की पूजा

याद नहीं एक बार या दो बार गाँव में पूजा के दिनों में था। उम्र कोई पाँच बरस पर उसे भी आप कम न समझें। बचपन से ही बातों की राफुगिरी सीख ली थी। शाम को एक खेत पर कम करने वाले के साथ कुछ चील्लर दे कर भेज दिया गया। घर से कोई दो मील होगा। हजूम चल रहा था हम भी चल
 
rajkumar jha
Sep 26 2009 06:54 PM
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पूजा की बातें..वो भी क्या दिन they

बुरा न माने हम दिल के अच्छे हैं पर बात की खाल निकलने के पेशे में है...इसलिए मियां कल्लन ने बड़े तहजीब से एक बंगाली मित्र से पुछा यह लडकियां साल के बाकी दिन कहाँ रहती हैं? भाई चक्र गए बोले यहीं और कहाँ..कल्लन उन से तो कुछ बोले नहीं , हमसे बोले यार आर्ट है
 
rajkumar jha
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वज़ह नहीं मालूम

कल्लन पूछे मियां लिख नहीं रहे हो आअज कल...में बोला लिख लिख के हाथ की उँगलियाँ टेढी हो रही हैं और आप कह रहे हो की लिख नहीं रहे..साबुन, तेल, जच्चा बच्चा, टीकाकरण ,ऐड्स लिखता ही जा रहा हूँ। अख़बार क्या टीवी क्या रेडियो क्या...फ़िर इधर कुछ राजनीतिक कार्य भी
 
rajkumar jha
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अम्मी जान और अजान

मूंछो ने खुल कर जीना भी न सीखा था। बचपना जा नहीं रहा था और जवानी को हम लिवाने कश मारते फ़िर रहे थे। स्कूल गर्मी की छुट्टियों के लिए बंद हुए ही थे। धूप और लू सुबह से ही जान लेवा हो जाती और ऐसे में रमजान का महिना । कल्लन सारे रोजे रखेंगे, दादी ने कहा है...
 
rajkumar jha
Sep 06 2009 10:56 AM
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बढ़ रहे हैं गर्भाशय के व्यापर..

इतने दिनों से गुजरात में था। निरंतर बढती गर्भाशय निकलवाने की घटनाओ को लेकर महिला समूह में कैसी जानकारी है यह मालूम करने। पन्द्रह की उम्र में प्रथम मासिक, १८-२० तक विवाह, २७ -३० के बीच में दो से तीन बचों का जन्म...अब क्या करना हैं झंझट पल के निकलवा
 
rajkumar jha
Aug 14 2009 11:44 AM
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राखी जी का स्वयम्वर

आधुनिक भारत का जब इतिहास लिखा जाएगा तब आप का नाम लोहे के अक्षरों में लिखा जाएगा। आपने बेवकूफी की हर परीक्षा को जिस फौलादी जज्बे से अंजाम दिया वह काबिले तारीफ हैं। इस सदी में रानी लक्ष्मी बाई तो जन्म लेंगी नहीं..पर आप की बहादुरी के चर्चे भी कुछ कम नहीं।
 
rajkumar jha
Aug 04 2009 12:43 PM
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पुस्तक प्रकाशित करानी है मदद चाहिए

जीवन के इस भाग दौड़ मैं और ग्रामीण जगत के विज्ञापन लिखने और करने के कारण बहुत से लोगों से मिलना जुलना हुआ। कुछ छोटी मोटि घटनाये हुईं जो दिल को लग गईं । उनमें तेल मिर्च मसाला लगा , कुछ पत्रों का जामापहना एक किताब तयार कर ली है । दस पंद्रह कहानियां है और
 
rajkumar jha
Aug 04 2009 07:57 AM
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बदहाल है दिल्ल्ली का हाल

सुबह आठ बजे निकल कर भी कहीं नहीं पहुँचा हूँ..उत्तर जाना है..पूर्व जा रहा हूँ। जिस तरफ़ जाता हूँ जाम लगा है।क्या हो गया है..क्या सब के पास गाड़ी है..शायद!! क्या सब को कहीं जाना है...शायद!! हर रंग हर साइज़ में चारो तरफ़ गाडियां ही हैं..में दिल लगाने की
 
rajkumar jha
Aug 03 2009 02:29 PM