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अधूरा सपना

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15 Jun 2010
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Micromax MMX 300G Modem in UBUNTU 9.10

  Installation steps – 1. Start terminal & type “lsusb” manish@ubuntu:~$ lsusb Bus 005 Device 002: ID 1241:1503 Belkin Keyboard Bus 005 Device 001: ID 1d6b:0001 Linux Foundation 1.1 root hub Bus 002 Device 001: ID 1d6b:0001 Linux Foundation 1.1
Jun 15 2010 09:27 AM
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बाबा का भभूत

वो हमारे तो नहीं लेकिन किसी खूबसूरत बला के सबसे बढ़िया वाले, एकदम करीबी दोस्त हैं, एक तकनीकी आपदा के चलते मुझे इलाहाबाद में खोज रहे थे, लेकिन हमारा आश्रम तो हमारे साथ तबादले का दंश झेल रहा है। इसी बीच किसी भले मानुष ने मेरा दस अंको का गुप्त कोड उन्हें दे
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शादी के रंगारंग महफिल से लौटे हैं, अब प्रवचन…

(शादी ब्याह का माहौल ज़रा अलग तरह का होता है, श्रृंगार रस से ओतप्रोत… मेरी आज की बकवास में रस तो नहीं है लेकिन रसगुल्ले हैं…जो कि शादी ब्याह के अवसरों पर लगभग हर रोज़ ही दिख जाता है…… दिखता भर है… खाने के लिए बड़ी मारा मारी है… :) ) बहुत समय पहले, एक नगर
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सत्यनारायण भगवान की कथा

  दुनिया वैज्ञानिक हो चली है, लेकिन अभी भी “ईश्वर”, वैज्ञानिक भाषा में “सुपरनेचुरल पावर” की तस्वीरों / मूर्तियों के आगे शुद्ध देशी घी के दिये जलाये जाते हैं, भले ही शुद्ध देशी घी खुद खाने को मिले या न मिले। शुरुआत बृहस्पतिवार की सुबह, ब्रह्ममुहूर्त
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मेरी किताबें…

      आज न जाने कैसे मुझे उन धूल खाती किताबों की याद आ गयी, जिन्हें कई बरस पहले अपने सिरहाने रख कर सो जाता था। उन किताबों की खुशबू मुझे आज तक याद है, जब अचानक बिजली चली जाती थी और उन खुली किताबों से मुँह को ढकते हुए बिजली आने का
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भोपाल गैस त्रासदी : उस दिन क्या हुआ था?

  तब मैं पैदा भी नहीं हुआ था। मुझे आज तक यह नही पता था कि उस दिन आखिर क्या हुआ था? सामान्य ज्ञान की किताबों में थोड़ा सा लिखा रहता,   ऐसी दर्दनाक घटना के बारे में सुन कर ज्यादा जानने की इच्छा होती लेकिन टीचर्स ज्यादा खुल कर नही बताते थे। बस!
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श्याम तेरी बंशी पुकारे……

आज कल गाने सुना जा रहा है, चाहे हम शादी ब्याह की चमक दमक में हो (धमाकेदार आवाज और आधुनिक प्रेम प्रवचन वाले गाने……) या फिर (सैम्पल लगा है, खुद सुन लीजिये………) ऐसे गाने रात में छत पर चमगादड़ की तरह उल्टा लटक कर सूने आसमान में छितराये सितारों को निहारते हुए
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हँस दो ना……

मुझे खुद को मनाना भी आता है। कोई मनाये चाहे न मनाये…… छुटपन में नानी के बागीचे में रोते रोते ऐसे ही अपने आप को मना लेता था। काफी अच्छी प्रैक्टिस है। :)
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मैं क्यों लिखता हूँ?

जी का जंजाल बन गया है ये सब, जब से घर वालों ने मेरा ब्लाग देख लिया। अच्छा हुआ अभी डायरी नहीं देखी…… लेकिन क्या भरोसा?! आज नहीं तो कल उनके हाथ लग ही जायेगी। इतनी बातें सुनने को मिल गयी कि ऐसा लगता है मानो हमने कोई गुनाह कर दिया, अक्सर रात में ही सबके सोने
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कोई किसी का नहीं……

न जाने कैसे, कल मुझे सत्संग में लिवा जाने की जिद मेरे पिता श्री ने ठान ली, धमकाते हुए बोले – चल रहे हो कि नहीं…… उनके सामने मेरे मुँह से आज तक कभी “ना” नहीं निकला, बस मन में एक सोच आ गयी कि इनके प्रवचनों में आखिर क्या कमी रह गयी थी जो पूरी कराने ले जा
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मम्मी!!…… आप रो क्यों रहीं हैं?!……

20-21 साल बाद, गाँव से आई कुछ औरतों से विदाई के समय, मम्मी की आखों से बह रही अश्रु धारा को देख कर मेरी सबसे छोटी बहन नें मम्मी से यह प्रश्न पूछा। मम्मी ने इस प्रश्न को अनसुना कर दिया…… शायद वे अभी तक उन औरतों से जुड़ी अपनी पुरानी यादों में खोईं थीं…… या
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मस्ती की पाठशाला

( अनुरोध : ज़रा लम्बा लिख मारा है, आपको यहाँ समय देने की कोई ज़रूरत नहीं है, यह बकवास उनके लिये है जो 12वीं तक गणित के छात्र रहे हैं…… मुझे लगता है कि 12वीं की मैथ पढ़े बिना आपको यह लेख समझ में नही आ सकता……) तीन पुराने मित्र पहली बार मेरे घर आये थे, जब
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सर ! मैं आपका जूनियर… आपको याद है?

विवाह की रंगीन संध्या और खाने पीने के शुभ अवसर पर हम भी पंडित जी के घर इकठ्ठी भीड़ में शामिल थे… भीड़ के कोलाहल से थोड़ी दूर बैठे हम अपनी बारी का इन्तज़ार कर रहे थे… साथ ही यह सोच भी रहे थे कि माता श्री की आज्ञा का पालन किया जाय, (जिसमें सबको खिलाने पिलाने
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बादल और बारिश की बूँदे

बादल और बरिश की बूँदे…… मतलब एक दूसरे से बने हुए…… एक दूसरे के बगैर अस्तित्वहीन…… सच्चे प्रेमियों की तरह… कई मीलों का सफर करके इस दुनिया में अपना प्यार बरसाने चले आते हैं, धूप से झुलसती धरती, पेड़ पौधों, जीव जन्तुओं और प्यसी नदी को सींच कर खुद एक दूसरे से
May 28 2010 09:59 AM
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समय कितना बदल गया

मिट्टी के खिलौने नीले आँखों वाली गुड़िया दीपावली के बुझे दिये का तराजू बाल नुचवाना अंगूठा दिखाना टूटे दाँतो के साथ वो जीभ का हिलाना   समय कितना बदल गया !!!! आज वह अपने बच्चे को गोंद में लिए शर्माती है……
May 27 2010 08:46 PM
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मन से रावण जो निकाले, राम उसके मन में हैं……

एक सीधी और सरल कहानी, “राम के चरित्र और जीवन पर आधारित” – ‘रामायण’ अपने आप में जीवन के हर एक पहलू को समेटे हुए…… अस्पताल से थोड़ी ही दूर पर एक मन्दिर हैं, वृक्षों की शीतल छाँव के नीचे बना एक प्यारा सा मन्दिर…… यहाँ ज्यादा भीड़ नही होती, एक दो लोग टहलते नज़र
May 27 2010 05:23 PM
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पिछ्ले बकवास की व्याख्या

सौरभ भैया मुझसे नाराज चल रहे हैं, नाराजगी जायज भी है…… हमारे जैसे दोस्त केवल नाराज ही तो कर सकते हैं…… करें भी तो क्या करें!! हम ठहरे निठल्ले, दिन भर फालतू की बकवास लिखते रहते हैं.… मेरी बकवास “शायद वहाँ रात नहीं हुआ करती…” पढ़कर पिछले दिनों उन्होंने जम
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शायद वहाँ रात नहीं हुआ करती……

रात के सन्नाटे में बेबस कदम पुराने टीले की तरफ बढ़ते हैं…… सुना है, वहाँ उनका राज है, जिन्हें अपने जीवन से शिकायतें थी अधूरे उजाले से रोशन, टीला अब भी डरावना लगता है खुद में समेटे अनगिनत सिसकियॉ टीला अब भी खामोश है बरसों पहले सूख चुके कुएँ से सड़ी गन्ध आज
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Good Night…

पुराने गानों को भले ही समय ने पुराना बना दिया हो, लेकिन जब ये गूँजते हैं तो ऐसा लगता है मानो वर्तमान की बात हो रही है…… पुराने की तारीफ करना तो बहाना है, असल बात तो यह है कि जहाँ अपने जैसी की गयी खुराफात नज़र आ जाती है, वही भा जाता है…… चाहे वो बीन की बीन
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काइट्स : अब मेरी भी सुन लीजिये……

कल हमारे कुछ दोस्तों ने हमारे सामने एक प्रस्ताव रखा…… मनीष !! काइट्स देखने चलोगे? जबर्दस्त स्टोरी है…… जिसे देखकर तुम्हारा ब्लागिया शौक और निखर जायेगा…… जितने फोन काल्स आये, सबमें यही वाक्य कहा गया……… विशेष रूप से “जबर्दस्त” शब्द का जबर्दस्ती उपयोग किया
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बस यूँ ही……

क्षेत्रीय अखबार पढ़ने का कभी मन नहीं करता, लेकिन जब गलती से पढ़ लेता हूँ तो दिन भर दिमाग उधेड़बुन में लगा रहता है। जमाना हाईटेक हो चला है, कभी ऐसा भी समय हुआ करता था कि माँ – बाप की डाँट से बच्चे अच्छे बुरे की समझ से परिचित हो जाया करते थे, लेकिन आजकल तो
May 22 2010 03:54 AM
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बीन भैया भी डेटिंग-सेटिंग करने लगे हैं....

  भैया बीन की परीक्षा हो गयी.....परीक्षा अच्छी हुई हो चाहे खराब हुई हो......ये अपनी आदत से बाज़ नहीं आने वाले....Dating के नाम पर ..अपनी दोस्त के साथ भूतों वाली फ़िल्म देखने चल दिए.... दोनों भूतों को देखने के शौकीन लगते हैं.... अरे! एक दूसरे को देख कर
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आखिरी पड़ाव

               सिन्दूरी शाम, मन्द गति से चलती हवाएँ और डूबता हुआ सूरज। इन सबसे बेखबर गाड़ियाँ नैनी ब्रिज पर दौड़ रही है और कुछ लोग चहलकदमी कर रहे हैं। कुछ लोग उफान ले रही यमुना नदी को निहार
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…ए बेटी रखती तोहके कुँवार

         भोजपुरी गाने अकसर फूहड़ ही  होते हैं, लेकिन इसे देख मेरी सोच बदल गयी।               कुछ तो ऐसे हैं जो आँसू निकाल देते हैं।
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"भैया बीन" परीक्षा देने बैठे हैं.......

परीक्षा तो मुझे भी देनी हैं....... सोच रहा हूँ इनसे एक आध टिप्स ले ही लिया जाय.... :) :D लेकिन इनके साथ जो कुछ भी हुआ, उसे देख कर दुःख हुआ..... कहीं ऐसा न हो कि मैं भी..... माता श्री को याद करके रो पडूँ.... :) :) :)
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रात की हलचल

“कोई सीमा होती है, किताबों में घुसे रहने की………” चलो मस्ती कर आते हैं सभी ने अपना सिर खुजलाते हुए कहा, और हम अपनी लाइब्रेरी से बाहर निकल पड़े…… और इसके बाद शुरु हुआ मस्ती का दौर…… कुछ तो सो रहे कुत्तों को कुत्तों जैसी आवाज निकालकर उन्हें कन्फ्यूज़ करने लगे,
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चिठ्ठियाँ और ई - मेल.....

एक वह दौर था, जब बम्बई से मौसी जी की चिठ्ठियाँ आया करती थीं, और हम लोग नानी जी के उस बड़े आम के बागीचे के किसी घने पेड़ की छाँव में बैठकर चिठ्ठियाँ पढ़कर नानी जी को सुनाया करते थे. ज्यादातर चिठ्ठियाँ दीदी ही पढ़कर सुनाया करती थीं और पढ़ते पढ़ते नानी के
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प्रेम पर परिचर्चा

  आधी रात को बिजली के तारों पर एक कौआ युगल बैठा नज़र आया, दोनों आपस में मुँह फुलाये विपरीत दिशाओं में देख रहे थे। कोई बात रही होगी हमने सुना है कि कौवे घोसले बना कर रहते हैं, लेकिन ये बिचारे पूरी रात बिजली के तारों पर गुजार देते हैं, हो सकता है कि
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मेरी नृत्यकला

Mr. Bean को सभी जानते होंगे, ब्रिटिश हास्य कलाकार Rowan Atkinson………… Mr. Bean की भूमिका में, जिस व्यक्तित्व को उन्होनें अपनी अभिनय कला से प्रदर्शित किया है, बिल्कुल वैसे ही व्यक्तित्व का भूत मुझ पर भी चढ़ जाता है। आखिर चढ़े भी क्यों नही!!!? मंगलवार की
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ठहाके की भूमिका

5वीं की परीक्षायें समाप्त हो चुकी थी। मेरे माता-पिता इस बात को लेकर भिड़े थे कि हम लोगों को गाँव जाना है या नानी के यहाँ……पिता जी गाँव भेजने पर अड़े थे कि वहाँ जाकर सब दूध दही खायेंगे, सेहत बनेगी।माता जी इस बात पर अड़ी थी कि गाँव भेजकर अपने बच्चों को
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ठहाके की भूमिका

5वीं की परीक्षायें समाप्त हो चुकी थी। मेरे माता-पिता इस बात को लेकर भिड़े थे कि हम लोगों को गाँव जाना है या नानी के यहाँ…… पिता जी गाँव भेजने पर अड़े थे कि वहाँ जाकर सब दूध दही खायेंगे, सेहत बनेगी। माता जी इस बात पर अड़ी थी कि गाँव भेजकर अपने बच्चों को
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तस्वीरों में छिपी एक कहानी……

    इंजीनियरिंग कालेज के बाहर, सभी बसों से बाहर निकले छात्राओं का मुआइना करने के बाद प्रसन्न मुद्रा में इंजीनियरिंग का एक छात्र…… सर्किट हाउस आजमगढ़, के बाहर सर्किट के साथ मुन्ना भाई…… अपनी इंजीनियरिंग का कान्सेप्ट लगा कर सूर्य की परिधि
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शायद इसी को दुर्भाग्य कहते हैं………

पिछली बार जो हुआ, कबूल लिया कि अपनी बेवकूफी थी जो भिखारिन को 2 रूपये दे दिये और दूध खरीदने के लिए लिए 2 रूपये कम पड़ गये। लेकिन इस बार तो बाकायदा एक सौ रूपये की नई नोट लेकर निकले थे, ये अलग बात है कि वापस आते आते वह नोट चंद सिक्के में बदल गयी। इस बार दो
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बिखरी बातें और दो जोड़ी आँखें

i dnt need ne1... और वह आफलाइन हो गया। आज रात वह मेरी बेकार की बातों से ज्यादा परेशान हुआ होगा। मुझे इसका अफसोस हुआ, आज के बाद कभी उससे चैट नहीं करूंगा, न ही वह परेशान होगा। उसे लगता होगा कि कैसा फालतू आदमी है? इसका रास्ता अलग है लेकिन मेरे रास्ते में
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इंतज़ार

ढलती शाम सड़क पर छितराये सूखे पीले पत्तो की चरमराती आवाज से वह चौंकता है   उस वीरान मन्दिर की टूटी सीढ़ियों के पत्थरों के चटकने से वह घबराता है   सहमा सा वह निहारता है उस सूनी राह को जिससे होकर वह भोली सी लड़की आयेगी   सूखे पत्तों की कड़कती
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झुंझलाहट – आज की डायरी

                            कल देर शाम कुछ मित्र मेरे कमरे पर आनन्द की प्राप्ति कर रहे थे, मूंगफली का छिलका पूरे कमरे
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सूखी रोटियाँ

     कल होली का दिन था। पूरे दिन खाने का दर्शन तक नही हुआ, Tutorials लिखने में दिन भर लगा रहा, बिना खाये पिये…     शाम को जब भूख अपनी चरम सीमा पर पहुँची, तब होश आया कि पेट अभी तक खाली है। बर्तन अभी धुले नही थे और कोई
Mar 02 2010 02:54 PM
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तीन शब्द

“वह जापानी था, नाम था ओका… वह एक होनहार छात्र था, दिखने में आकर्षक और बेहद शर्मीला भी। उसके इस स्वभाव के चलते वह औरों से बिल्कुल अलग दिखता था। उस रिसर्च सेन्टर में वह एक अकेला अविवाहित पुरुष था नतीजन सभी उससे मजाक करते और उससे उसकी गर्लफ्रैंड के बारे में
Feb 24 2010 11:30 PM
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प्रेम : इस आधुनिक युग का…

पहली बार जब इस शब्द से परिचित हुआ तब मैं छ्ठवीं कक्षा का छात्र था। इस शब्द के साथ एक और शब्द जुड़ा था और वह था “पत्र”…… काफी भीड़ जुटी थी स्कूल में… जिसे देख मैं तहकीकात में जुटा था कि हुआ क्या है… पूछने पर विभिन्न प्रकार के उत्तर आते लेकिन उनमें एक शब्द
Feb 15 2010 12:07 PM
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"उलझी लटें" (A Short Story)

               इधर कई दिनों से मैने विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में प्रवेश करने के लिये एक शार्टकट लिया है, पहले दिन कुछ मिनट देर होने के कारण मैने इस शार्टकट की खोज की थी। इसी रास्ते पर