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04 Jun 2010
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सुल्ताना डाकू और उसका दोस्त

हिंदुस्तान दैनिक 30 मई 10 में एन सी शाह के शोध के माध्यम से छपे एक समाचार ने मेरा बचपन मुझे याद दिला दिया। सुल्ताना डाकू पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी आख्यान के नायक की तरह था। स्कूलों में नाटक खेले जाते थे, नौटंकियां और सांग होते थे। वह डाकू कम नायक
 
गिरिराज किशोर
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वनवासियों का दर्द

23 अप्रेल 2010 को लोकसभा में आदिवासी विकास के बजट पर बहस में झारखंड के पूर्व मुख्य मंत्री अर्जुन मुंडे को सुन रहा था। अर्जुन मुंडे बी जे पी से संसद सदस्य हैं। बी जे पी से हों या कांग्रेस या किसी साम्यवादी पार्टीँ से अगर बात दिल की गहराई से आती है तो असर
 
गिरिराज किशोर
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May 01 2010 01:05 PM
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फिलहाल

‘द गिरमिटिया सागा’ का विमोचन यह ‘द गरिमिटिया सागा’ क्या है यह सवाल दिमाग में आना स्वाभाविक है। मैं शायद इस बारे में न लिखता क्योंकि यह अपने बारे में है। यह पहला और अलग अनुभव है। मेरे मित्र और आई आई टी कानपुर के सहयोगी प्रो. प्रजापति साह ने पहला गिरमिटिया
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

राजनीति की गति जानी न जाए राजनीति में कुछ लोग अब दो वजह से आते हैं एक, अधिकाधिक सत्ता और पद लाभ उठाने दूसरे अपने अंदर जमा गंदी निसारने। कभी राजनीति सेवा और बलिदान का माध्यम थी। लेकिन अब अरबपतियों की मंडी है। अपने रसूखों से वे पार्टियों को बनाने बिगाड़ने
 
गिरिराज किशोर
Jan 21 2010 03:29 PM
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ज्योति बाबू चले गए।

(1914-2010) ज्योति बाबू का निधन राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से एक दुखद घटना है। सी पी एम में वे हरिकृष्ण सुरजीत के जाने के बाद अकेले कद्दारवर नेता बचे थे जिनके पास देश की बढ़ोत्तरी क ब्ल्यू प्रिंट था। वे समर्पित कम्यूनिस्ट होने के बावजूद समन्व्य की
 
गिरिराज किशोर
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साहित्य अकादमी की स्वायत्तता?

देश हो या संस्था उसकी स्वायत्तता को खतरा अंदर के लोगों से होता है। या कहिए उन हां-बरदार मित्रों से होता है जो संस्था-हित से अधिक अपने स्वार्थों को ‘चिड़िया की आंख’ की तरह ताकते रहने की कुव्वत पैदा कर लेते हैं। मित्र मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि संस्था का
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

हैदराबाद से मेरे पास एक पत्रिका Towards A Better Mankind आती है। दिसंबर 2008 का अंक सामने है। उसके टाइटिल कवर पर देशवासियों के लिए अंग्रेज़ी में कुछ चेतावनियां लिखी हैं जैसे- Citizens of India;- your country is in grave peril stand up and be counted
 
गिरिराज किशोर
Dec 29 2009 11:52 AM
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आज़ादी के संदर्भमें गांधी

यह सवाल विचारकों और लेखकों के लिए परेशान करने वाला है। कैंसरवार्ड के लेखक सालझेनित्सिन को इसलिए साइबेरिया भेज दिया गया था कि सोवियतसंघ की सरकार उनके मत से असहमत थी। यह तो मान लिया कि वह सरकार तानाशाहनुमा सरकार थी। लेकिन हिंदुस्तान एक जनतंत्र है। ऐसा
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

साहित्य, संवेदना भाषा परंपरा साहित्य यानी भाषाई साहित्य हमारी पहचान है। लेकिन माना जाता है कि जो साहित्य अंग्रज़ी में लिखा जा रहा है वह देश की पहचान है। ज़िंदगी से हम जूझते हैं उसके साथ दो दो दो हाथ हम भाषाई लोग करते हैं, भूख और तिरस्कार हम ओटते हैं।
 
गिरिराज किशोर
Dec 29 2009 11:52 AM
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फिलहाल

गांधी कितना मंहगा कितना सस्ता अमेरिका एक मात्र ऐसा बाज़ार है जहां सब कुछ बिकता है। हर चीज़ की बोली लगती है। हीरे जवाहरात से लेकर सोने चांदी की मूर्तियों तक, आधुनिकता से लेकर इतिहास तक, हर वह वस्तु जिसको ईश्वर ने या कलाकार ने कोई शक्ल दी है वह खरीद फ़
 
गिरिराज किशोर
Dec 29 2009 11:52 AM
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दिल्ली में 19 नवबर 09

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 ज़िलों के गन्ना किसानों का अद्भुत जमावाड़ा था। किसान एकता का यह प्रशंसनीय उदाहारण है। किसान एक होकर अगर खड़े हो गए होते तो जिस प्रकार ज़मीनों का अधिग्रहण होता रहा है वह नहीं होता। न ही रसूमों के ख़रीद फरोख्त के दामों में मन
 
गिरिराज किशोर
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कहां है संविधान और कहां है जनतंत्र?

मैं संविधान और जनतंत्र की बात क्यों कर रहा हूं? फिर सोचता हूं सब ही कर रहे हैं तो मैं भी कर रहा हूं तो क्या गुनाह कर रहा हूं? जब संज्ञाएं और शब्द अर्थ खो देते हैं तो उनका कोई महत्त्व नहीं रहता। ऐसे में अर्थहीन शब्द बोलना गुनाह नहीं रहता। जब किसी भाषा
 
गिरिराज किशोर
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प्रभाष जोशी हिंदी के अंतिम समर्पित सेनानी

आज सवेरे हिंदुस्तान दैनिक के पहले पृष्ठ पर सूचना देखी तो सन्न रह गया प्रभाष जी चुपके से निकल गए। मुझसे एक साल छोटे थे। पहले मैं उन्हें अपने से बड़ा ही समझता था। जब यह राज़ खुला कि मैं उनसे एक साल बड़ा हूं तो वे बोले अब मैं तुम्हें प्रणाम किया करूंगा।
 
गिरिराज किशोर
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अपणी ढोणी

राजस्थानी के लिए तो समझना कठिन नहीं है कि अपणी ढोणी क्या है। लेकिन बिना देखे और जाने किसी दूसरे प्रदेश वासी के लिए शायद आसान न हो। किसी भी प्रदेश के रहने वाले क्यों न हों, हम लोग अपनी ग्रामीण संस्कृति की न शब्दावली से रले मिले रहे और न जीवन से। बस सु
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

 
गिरिराज किशोर
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हिंदी राजभाषा होने का अर्थ

मैं यह कह सकता हूं और कहना भी चाहता हूं कि हिंदी का राजभाषा होना हमारे लिए सम्मान की बात है पर चाह कर भी कह नहीं पाता। ‘राजभाषा’ नेहरू सरकार द्वारा हिंदी के धंधेबाज़ों को दिया गया स्वर्ण खिलौना है। हिंदी के लिए राजभाषा नाम उस वक्त निर्मित यानी कॉयन किया
 
गिरिराज किशोर
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असहमति सहमति का नाज़ुक फ़ंडा

यह सवाल विचारकों और लेखकों के लिए परेशान करने वाला है। कैंसरवार्ड के लेखक सालझेनित्सिन को इसलिए साइबेरिया भेज दिया गया था कि सोवियतसंघ की सरकार उनके मत से असहमत थी। यह तो मान लिया कि वह सरकार तानाशाहनुमा सरकार थी। लेकिन हिंदुस्तान एक जनतंत्र है। ऐसा
 
गिरिराज किशोर
Aug 24 2009 05:20 PM
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सामान्य आदमी और ज़मीदोज़ कलाकृतियां

7 जून 09 के हिंदू में ‘A grocer with an eye for antiques, archaeological sites’ पढ़ा तो मुझे राहुल जी के साथ हुई एक घटना याद आई। वे इलाहाबाद आए हुए थे। सवेरे महात्मा गांधी रोड़ पर टहलने जा रहे थे। साथ में स्व. व्यास जी और कोई और एक सज्जन थे। व्यासजी
 
गिरिराज किशोर
Jul 25 2009 06:50 PM
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मुख्यमंत्री जी बधाई, घनश्याम मारा गया

घनश्याम केवट डाकू था, अच्छा हुआ मारा गया। जिस तरह वह मारा गया उससे तो लगता है कि वह किसी को भी मार सकता था। कितना बहादुर है आपकी पुलिस उस अकेले पर 51 घंटों के बाद 500 जवान भारी पड़े। ऐसे में उसे क्या हक़ था जीने का। अगर वह जीता रहता तो वह उत्तर प्रदे
 
गिरिराज किशोर
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कहां आ रहे हैं हिंदी-चानी

जून 09 के सभी समाचर पत्रों में एक ख़बर छपी है ‘सावधान, आ रहे हैं हिंदी-चीनी’। हिंदी चीनी जब साथ छपा देखता हूं तो मैं चौंक जाता हूं । चाऊ एन लाइ और नेहरू ने हिंदी चीनी भाई भाई का नारा लगाया था उसका नतीजा जो हुआ उसने सबसे पहले नेहरू की ही बलि ली। ईश्वर
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

सामान्य आदमी और ज़मीदोज़ कलाकृतियां 7 जून 09 के हिंदू में ‘A grocer with an eye for antiques, archaeological sites’ पढ़ा तो मुझे राहुल जी के साथ हुई एक घटना याद आई। वे इलाहाबाद आए हुए थे। सवेरे महात्मा गांधी रोड़ पर टहलने जा रहे थे। साथ में व्यास जी
 
गिरिराज किशोर
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Lohia aur sahitya

लोहिया और साहित्य 23 मार्च 09 को डा. राममनोहर लोहिया की जन्म शताब्दी का आरंभ हुआ। दिल्ली के मावलंकर हॉल में उसकी शूरूआत खांटी लोहियावादी नेता और साथी जनेश्वर मिश्रा ने की। मुझे भी उसमें शिरकत ranकरने के लिए बृजभूषण जी और आनन्द भाई ने बुलाया था। एक गो
 
गिरिराज किशोर
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Prathmikta se door

शिक्षा जान का जंजाल आज संसार के सबसे बड़े जनतंत्र का चुनाव हो रहा है। मुद्दे क्या हैं? कुछ नहीं। विदेशों मे जमा धन 100 दिन में ले आऐंगे जनता को क्या मिलेंगा? ऐसा लगता है अडवानी जी प्रधानमंत्री बनते ही आर्डर देंगे और स्वीटज़रलैंड के बैंक दरवाज़े खोल द
 
गिरिराज किशोर
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चुनाव और जनतंत्र हर पांच साल मे ﴾यदि मिड टर्म न हो﴿ राजनीतिक पार्टियां अपने गिरहबान में झाकने के बजाय जनता को वोटर का दर्जा देकर उसका जायज़ा लेती हैं कि वह पांच साल में मूर्ख से कितना अक्लमंद हुई। वे चाहती हैं कि वोटर बैल ही बना हमारी गाड़ी खींचता रह
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

भारतीय पत्रकार का जूता और गृहमंत्री की क्षमा 7 अप्रेल 09 को गृहमंत्री पी चिदंबरं की प्रेस कान्फ़्रेंस देख रहा थी, एकाएक एक जूता उछला और उनके दाहिने कान के पास से होता हुआ निकल गया। यह इतना अचानक हुआ कि शायद ही वहां बैठे पत्रकारों को भी समझ में देर लग
 
गिरिराज किशोर
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सरकार समाज और देहदान कानपुर में हरिद्वार से संचालित गायत्री केंद्र, शांति कुंज के एक कर्मठ कार्यकर्ता श्री सेंगर ने देहदान की योजना इस दृष्टि से चलाई की मेडिकल कालिजों के छात्रों को डिसेक्शन के लिए मानव देह नहीं मिलती इसलिए देहदान के लिए लोगों को तैय
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

लोहिया और साहित्य 23 मार्च 09 को डा. राममनोहर लोहिया की जन्म शताब्दी का आरंभ हुआ। दिल्ली के मावलंकर हॉल में उसकी शूरूआत खांटी लोहियावादी नेता और साथी जनेश्वर मिश्रा ने की। मुझे भी उसमें शिरकत करने के लिए बृजभूषण जी और आनन्द भाई ने बुलाया था। एक गोष्ठ
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

चुनाव और चेतना का समय फिर आ गया। बंधु नमस्कार, 16 मई 09 तक सारी ताकत अब आपके हाथ में है। स्याह भी आप ही करेंगे और सफ़ेद भी। उसके बाद फिर बाड़े के दरवाज़े बंद। लेकिन घबराएं नहीं। हम जनतंत्र के वासी हैं। सब तरफ़ जो हो रहा वह आपके सामने है। पहले खेल भाव
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा हिंदी लेखकों का नुमायशी सम्मान आज 28 फ़रवरी 09 है। अमर उजाला में आज ही डा केदारनाथ सिह जी का उत्तरप्रदेश के केबिनेट पर वरिष्ठता में जूनियर मंत्री जी के कर कमलों से भारत भारती सम्मान लेते हुए फोटो छपा है। केदार जी हमारी भा
 
गिरिराज किशोर
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साहित्य अकदेमी की फैलोशिप का मज़ाक

आज़ादी के बाद जो राष्ट्रीय संस्थाएं देश के नेताओं ने स्थापित की थीं वे आज छोटे छोटे स्वार्थो के साधन बन गई हैं। लोग अपनी अपनी आकांक्षाओं को पूरी करने के लिए इस्तेमाल करके अपने को बड़ा सावित करने में लगे हैं। हमारे द
 
गिरिराज किशोर
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फिलहाल

हैदराबाद से मेरे पास एक पत्रिका Towards A Better Mankind आती है। दिसंबर 2008 का अंक सामने है। उसके टाइटिल कवर पर देशवासियों के लिए अंग्रेज़ी में कुछ चेतावनियां लिखी हैं जैसे- Citizens of India;- your country is in grave peril stand up and be counted
 
गिरिराज किशोर
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Bhasha ka tap tyag aur upeksha

भाषा का तप त्याग और उपेक्षा भाषा का प्रृश्न अब इतना आसान नहीं रहा। ख़ासतौर से हिंदी का सवाल तो चौतरफ़ा से घिरा हुआ है। राजनीतिक दृष्टि से भी व्यवसायिक और शैक्षिक स्तर पर भी। जिस प्रकार से लोग बंटते जा रहे हैं उससे लगता है कि हिंदी सिमटकर क्षेत्रिय भा
 
गिरिराज किशोर
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Alibagh-anubhav

सागर रात में चुपचाप आता है....? मुंबई का तीसरा पड़ाव! पहला पड़ाव तो बेटी का घर था। दूसरी सिरड़ी की यात्रा। तीसरे का मैं अब ज़िक्र कर रहा हूं। मुंबई से गोवा मार्ग पर 120 किलोमीटर पर एक मिनी गोवा है। उसका नाम है अलीबाग। लगभग एक लाख लोगों की बस्ती। वहां
 
गिरिराज किशोर
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JANTA KO SAWAL PUCHNE KI ADAT DALNI HOGI

जनता को सवाल पूछने की आदत डालनी होगी आप क्या चाहते हैं यह आप भी नहीं जानते। आपने अपने से पूछा कि आप क्या चाहते हैं या हवा का रूख़ देखा और राय पर राय देनी शुऱू कर दी। आप मारना चाह सकते हैं पर मरना नहीं चाहेंगे। उसमें अपनी जान जाती है। यह प्रक्रिया अपन
 
गिरिराज किशोर
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Sain Baba ke Nam ek Kripakanshi ki Chithi

साई बाबा के नाम एक कृपांक्षी की चिट्ठी बाबा पाँव लागी, जब सत्य सांई बाबा के बारे में कोई कहता था कि वे सिरड़ी के बाबा के अवतार हैं तो मुझे यक़ीन नहीं होता था। उसका कारण था। सच्चाई कुछ भी हो। जो कुछ सुना था उससे जो चित्र मन ही मन बने थे उनमें और सत्य
 
गिरिराज किशोर