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बचपन की कहानियां

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15 May 2010
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कुन्नू

कुन्नू घर में मैं सबसे बड़ा हूं पर पिताजी सदा कुन्नू की ही तरफदारी करते हैं। यह कुन्नू की बच्ची घर में सबसे छोटी है पर है सबकी नानी। पिताजी को घर की एक-एक बात की खबर देती है। किसने पढ़ाई की और किसने नहीं। किसने मां का कहना नहीं माना। यह कुछ भी नहीं भूलती
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कुन्नू

कुन्नूघर में मैं सबसे बड़ा हूं पर पिताजी सदा कुन्नू की ही तरफदारी करते हैं। यह कुन्नू की बच्ची घर में सबसे छोटी है पर है सबकी नानी। पिताजी को घर की एक-एक बात की खबर देती है। किसने पढ़ाई की और किसने नहीं। किसने मां का कहना नहीं माना। यह कुछ भी नहीं भूलती
May 15 2010 08:50 PM
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बचपन की कहानियां

अब नहीं बाबूजी शहर के मुख्य चैराहे पर स्थित उस हनुमान मंदिर से मेरी बहुत सी भूली बिसरी बातें जुड़ी हुई हैं। मैं बचपन में पिताजी के साथ अक्सर हर मंगलवार को मंदिर जाया करता था। मेरे मन में सदा यही लालच रहता था कि मंदिर जाने पर ढेर सारा प्रसाद खाने को म
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चन्नी : Hindi story by Hem Chandra Joshi

चन्नी जब भी रक्षा बन्धन का त्योहार आता है तो मुझे एकाएक चन्नी की याद आ जाती है। बचपन की बात है एक दिन मैंने अपने कमरे की खिड़की से देखा । हमारी कोठी के नौकरों वाले क्वार्टर में एक नया नौकर आ गया था । मेरी हमउम्र उसकी एक बेटी थी । रूखे-सूखे बालों वाली
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शिखर की अंतरिक्ष यात्रा By Hem Chandra Joshi

बाल उपन्यास शिखर की अंतरिक्ष यात्रा शिखर बहुत खुश था क्योंकि उसे अभी अभी अपने मामा जी का पत्र मिला था. उस के मामा अंतरिक्ष में स्थित भारत के विक्रम साराभाई नगर में वैज्ञानिक थे. पत्र इस प्रकार थाः विक्रम साराभाई अंतरिक्ष नगर, दिनांक 22 नवंबर, 2025 प्
Dec 29 2009 11:49 AM
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कटघरा: Hindi story by Hem Chandra Joshi

कटघरा मेरे जीवन की यह एक अविस्मरणीय घटना है । अपनी प्रथम नियुक्ति पर मैंने कांकेर हायर सेकेण्डरी स्कूल में गणित के प्राध्यापक का कार्यभार संभाला था । छात्रा जीवन की एनसीसी की उपलब्धियों को देखकर प्रधानाचार्य जी ने मुझे गर्मियों में लगने वाले एनसीसी क
Dec 29 2009 11:49 AM
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अब नहीं बाबूजी

अब नहीं बाबूजी शहर के मुख्य चैराहे पर स्थित उस हनुमान मंदिर से मेरी बहुत सी भूली बिसरी बातें जुड़ी हुई हैं। मैं बचपन में पिताजी के साथ अक्सर हर मंगलवार को मंदिर जाया करता था। मेरे मन में सदा यही लालच रहता था कि मंदिर जाने पर ढेर सारा प्रसाद खाने को म
Dec 29 2009 11:49 AM
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अन्तरिक्ष मे चोरी

कैंचियों से मत डराओ तुम हमें हम परों से नहीं होसलों से उड़ा करते हैं PURCHASE MY BOOK: कितना सच? कितना झूठ?? at: http://pothi.com/pothi/node/79
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बचपन की कहानियां

अन्तरिक्ष मे चोरी आखिर एक दिन वह मामा के साथ अंतरिक्ष स्टेशन में पहुंच गया. अंतिरक्ष शटल में बैठने से पहले उन्हें विशेष प्रकार के कपडे दिए गए, जिन का नाम अंतरिक्ष सूट था. आव’यक सुरक्षा जांच के बाद वे अपनी सीटों पर जा बैठे. अटैची उन से स्टेशन पर ही ले
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कुन्नू :कहानी: हेम चन्द्र जोशी

घर में मैं सबसे बड़ा हूं पर पिताजी सदा कुन्नू की ही तरफदारी करते हैं। यह कुन्नू की बच्ची घर में सबसे छोटी है पर है सबकी नानी। पिताजी को घर की एक-एक बात की खबर देती है। किसने पढ़ाई की और किसने नहीं। किसने मां का कहना नहीं माना। यह कुछ भी नहीं भूलती है
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शाबाश मोतीचूर: कहानी: हेम चन्द्र जोशी

शाबाश मोतीचूर बहुत पहले की बात है। जंगल के छोर पर एक बरगद का वृक्ष था। जिसमें कबूतरों का झुण्ड रहता था। उनके नेता का नाम शान्तिप्रिय था। वह बुद्विमान व दूरदर्शी कबूतर था। उसके नेतृत्व में सारे कबूतर ऊँची - ऊँची उड़ाने भरते और मीलों की यात्रा करने के
Dec 29 2009 11:49 AM
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शिखर की अंतरिक्ष यात्रा :अंतिम भाग: कहानी :हेम चन्द्र जोशी

जब शिखर ने पूरी बात बताई तो रजत ने उस को बताया कि इस प्रकार के बाल पेन यहां प्रयोग नहीं किए जा सकते इसलिए उन को उपहार के रूप् में बांटने से कोई फायदा नहीं है. शिखर ने आश्चर्यचकित हो कर कहा- "क्यों ये पेन अंतरिक्ष में काम क्यों नहीं आ सकते है. मैं ने
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बचपन की कहानियां

अप्पू की नाराजगी अप्पू एक बहुत ही प्यारा बच्चा है। मोहल्ले के नुक्कड़ पर उसके पिताजी की किराना की दुकान है. मैं सालो पहले जब इस मोहल्ले में आयी तो अप्पू छोटा सा बच्चा था। तब वह ठीक से बोल भी नहीं पाता था। उसके पिताजी अक्सर उसको दुकान पर ले आते थे। मै
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अगली सुबह

दीपावली के अवसर पर एक बार यह कहानी फिर अगली सुबह मेरे घर की चहारदीवारी कुछ नीची है। इसीलिए सड़क में आने-जाने वालों को मैं आसानी से देख लेता हूँ । इस चलती सड़क पर न जाने कितने अपरिचित होते हुए भी जाने पहचाने से हो जाते है। उन्ही में से एक वह लड़का भी
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पीड़ा में सहभागी

घर में बहुत गरीबी थी। इतनी गरीबी कि सुबह खाना खाते समय शाम के खाने का पता नहीं होता था। घर में हम पांॅच भाई बहन खाने वाले थे और कमाने वाली मात्रा हमारी मां थी। सच। कभी कभी दुखी होकर मैं सोचता था कि घर छोड़कर कहीं दूर चला जाऊंॅ । पर फिर विचार आता था कि
Sep 10 2009 05:53 PM
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थैंक्यू डाक्टर: कहानी: हेम चन्द्र जोशी

थैंक्यू डाक्टर मेरा काम ही ऐसा है कि छोटे बच्चे मेरे पास आना पसंद नहीं करते हैं। जो आता भी है उसे जाने कितना बहला व फुसला कर उनके माता-पिता मेरे पास लाते हैं। मेरे क्लीनिक के आगन्तुक कक्ष तक तो अक्सर सब ठीक ठाक चलता है। पर डैंन्टल चेयर पर बैठते-बैठते
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शिखर की अंतरिक्ष यात्रा भाग-५ :कहानी: हेम चन्द्र जोशी

एक पल में जब सब ने आंखें खोली तो देखा एडवर्ड अपनी जगह पर न था. वह तेज गति से पीछे की ओर उड.ता हुआ अंतरिक्ष में चला जा रहा था शिखर झटके के साथ दौड.ता हुआ मामाजी के पास पहुंचा. उनको को मुसकराता देख कर उस की जान में जान आई. लिफ़्ट से उतरते ही शिखर ने मा
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शिखर की अंतरिक्ष यात्रा भाग-५: कहानी: हेम चन्द्र जोशी

शिखर की अंतरिक्ष यात्रा भाग-५: कहानी: हेम चन्द्र जोशी शिखर ने रैकेट और शटल काक हाथ में पकड. कर चारों ओर देखा. मामाजी उस को अपनी ओर बुला रहे थे. वह दौड. कर उनके पास पहुंच गया. उस ने देखा कि मामाजी भी कुछ परेशान है. उस ने हेडफोन द्वारा मामाजी से पूछा क
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शिखर की अंतरिक्ष भाग-४ कहानीः हेम चन्द्र जोशी

अंतरिक्ष मे खेलकू द पिछले 5-6 दिनों से शिखर ने अंतरिक्ष नगर व अंतरिक्ष के विषय में काफी जानकारी हासिल कर ली. उस ने पाया कि कनी दीदी और रजत स्कूल नहीं जा रहे हैं. उस का विचार था कि उसी की भांति उन दोनों की भी छुटिट्यां चल रही हैं. पर एक बात जान कर वह
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कहानी:बैसाखियाँ : हेम चन्द्र जोशी

बैसाखियाँ हमारी कक्षा आठ की क्लास टीचर स्कूल छोड़ कर चली गयी थीं। उनकी जगह आई नई क्लास टीचर बहुत ही सख्त थीं। निगाहें इतनी तेज थीं कि उपस्थिति लेते लेते भी समझ जाती थीं कि कक्षा के किस कोने में क्या गड़बड़ चल रही है। उनकी यह तीसरी आंख कहां थी ? हम सब
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कहानी: पहली सीढ़ी: हेम चन्द्र जोशी

कितना सच? कितना झूठ?? से http://pothi.com/pothi/node/79 पहली सीढ़ी हम लोगों की गर्मियों की छुट्रटीयां चल रहीं थीं।विचार मेरे मन में आ रहा था। इसके अलावा सड़ी गर्मी में न जाने कितनी बार कस्बे की बिजली गुल हो जाएगी ? इसका कुछ अता पता ही नहीं था। पिछली
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कहानी: पहली सीढ़ी: हेम चन्द्र जोशी

कितना सच? कितना झूठ?? से http://pothi.com/pothi/node/79 igyh lh ge yksxksa dh xfeZ;ksa dh NqVzVh;ka py jgha FkhaA,d fnu 'kke dks firkth us crk;k fd mudks ljdkjh dke ls iUnzg chl fnu ds fy;s ckgj tkuk gSA ckrksa gh ckrksa esa ;g fujkkZ; fy;k x;k fd ge
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कहानी:शिखर कि अंतरिक्ष यात्रा भाग-3 हेम चन्द्र जोशी

शिखर कि अंतरिक्ष यात्रा भाग-3 शिखर बहुत देर तक सोया रहा. अचानक उस के कानों में रजत की आवाज आई. वह कह रहा था कि जागने का समय हो गया है ’शिखर ने उनींदी आंखों से देखा, तब भी घनघोर काली रात थी. खिडकी में से ढेर सारे तारे चमक रहे थें पर एक खास बात थी. तार
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कहानी : हेम चन्द्र जोशी :अगली सुबह

अगली सुबह मेरे घर की चहारदीवारी कुछ नीची है। इसीलिए सड़क में आने-जाने वालों को मैं आसानी से देख लेता हूँ । इस चलती सड़क पर न जाने कितने अपरिचित होते हुए भी जाने पहचाने से हो जाते है। उन्ही में से एक वह लड़का भी था। मैला कुचैला सा। अपनी पीठ पर एक बड़ा
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पापा क्यों रोये ? A hindi story by Hem Chandra joshi

पापा क्यों रोये ? पिछले कई महीने से मैं व विक्की, पापा से एक ही मांग किये जा रहे थे । उधर पापा थे कि सदा हामी भर देते थे और आश्वासन दे देते थे कि अगले महीने वेतन मिलते ही हमारी मांगों को जरूर पूरा करे देंगे। हमारी मांग भी छोटी-मोटी थीं । मुझे अपनी मि
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शिखर कि अंतरिक्ष यात्रा भाग-2 STORY BY: Hem Chandra Joshi

शिखर कि अंतरिक्ष यात्रा भाग-2 कब रात होगी उन की आवाज सुन कर मामी भी घर से बाहर आ गई.शिखर ने उनके पैर छुए ही थे कि रजत ने आवाज लगाई, ”शिखर, छत पर आ जाओ. “ ”पर कहां से ? मुझे तो सीढियां दिखाई नहीं दे रहीं . ”उछल कर छत पर आ जाओ. तुम आराम से यहां पहुंच ज
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अब नहीं बाबूजी A story by Hem Chandra Joshi

अब नहीं बाबूजी शहर के मुख्य चैराहे पर स्थित उस हनुमान मंदिर से मेरी बहुत सी भूली बिसरी बातें जुड़ी हुई हैं। मैं बचपन में पिताजी के साथ अक्सर हर मंगलवार को मंदिर जाया करता था। मेरे मन में सदा यही लालच रहता था कि मंदिर जाने पर ढेर सारा प्रसाद खाने को म