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16 Jun 2010
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ऐ जिन्दगी ! मैं संवारूं भी तुझे तो क्या सोचकर !

जख्म जो दिए, वो रखे है मैंने ज़िंदा खरोंचकर !ऐ जिन्दगी ! मैं संवारूं भी तुझे तो क्या सोचकर !! मुरादें बही सब धार में, फंसा ही रहा मझधार में,अब लाभ है क्या, सैलाब के अवशेषों को पोंछकर !ऐ जिन्दगी ! मैं संवारूं भी तुझे तो क्या सोचकर !!मन में बसा इक घाव है,
 
पी.सी.गोदियाल
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मन की !

आजकल यात्रा एवं अत्यधिक व्यस्तता की वजह से अपने ब्लॉग के लिए कुछ लिख पाने में असमर्थ हूँ , फिर भी जब भी वक्त मिलता है कंप्यूटर खोल टिपियाने बैठ जाता हूँ ! इस टिपियाने और ब्लॉग जगत का विचरण करने का भी अपना ही अलग मजा है ! यहाँ जो दो बाते मेरे मन को अक्सर
 
पी.सी.गोदियाल
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कशमकश !

कशमकश बढ़ जाती है खुद-व-खुद,जब कभी उनका हाल नहीं मिलता,अश्क बहाने को जी करता है किन्तु,पोंछ्न्रे को स्वच्छ रूमाल नहीं मिलता !ये जिसने भी कहा, सच ही कहा है किऐनवक्त पर साला कुछ भी काम नहीं आता,थक चुका हूँ सुबह से ट्राई कर-करके,मगर कमबख्त उनका कॉल नहीं
 
पी.सी.गोदियाल
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टन्न और चियर्स !

एक साथ ऊपर उठकरहवा में छलकते पैमाने,मदयम 'टन्न' की स्वर लहरी,चेहरे पे मंद-मंद बिखरतीसारे दुःख-दर्द , ग़मों पर मानोकोई विजयी मुस्कराहट ,और मटकती आँखों कावो नशीला अंदाज !मुद्दत से, सोचता हूँपता नहींक्या खता हुई किकानो ने नहीं सूनी"चियर्स" की आवाज !!नोट : कल
 
पी.सी.गोदियाल
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ज्वलंत सवाल: क्या भोपाल त्रासदी मसले पर कौंग्रेस ने देश को धोखा दिया है-आपकी क्या राय है ?

ब्लॉगबाणी पढने वाले पाठक एवं ब्लॉगर मित्रों, आपसे एक सवाल: देश, काल और परिस्थितियों में घटनाएं और दुर्घटनाये एक अलग विषय है, जिन पर अलग से बहस चल ही रही है, लेकिन भोपाल त्रासदी पर हाल के न्यायिक फैसले के बाद जो बाते एन्डरसन के मामले में सामने आयी है,
 
पी.सी.गोदियाल
Jun 12 2010 03:03 PM
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इस तरह फर्ज अदा करते मंत्रालय !

जितनी सरकारी रकम खर्च करके सम्बद्ध मंत्रालयों द्वारा अपने चेहते अखबारों की इस विज्ञापन के द्वारा आर्थिक मदद की जाती है, उतने धन से या यूं कहूँ कि सिर्फ एक दिन के विज्ञापन पर खर्च की गई रकम से शायद दस हजार बाल मजदूरों का जीवन संवर जाता ! इस विज्ञापन से आप
 
पी.सी.गोदियाल
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भोपाल !

छवि गुगुल से साभारवो अशुभ काली रात उनकी, राह में मौत पसर गई,लाशों के कफ़न बेच कुछ की जिन्दगी बसर गई! जो त्रासदी में बच गए वे,अपंग देह का बोझ ढ़ोकर,न्याय पाने की उम्मीद में, सदी चौथाई गुजर गई! क़ानून, न्याय-व्यवस्था के वो बन फिरते है रहनुमा,इंसाफ का दम भरने
 
पी.सी.गोदियाल
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कभी सोचा !

आने वाले दौर के लोग पूछेंगे,कि आज के दौर में ये मंज़र आये क्यों थे !सब कुछ अगर ठीक-ठाक था,तो हर तरफ शरीफों ने खंजर उठाये क्यों थे !तब तुम सफाई दोगेकि गलती सरकार की थी,तो वो तुम पर हँसेंगे और कहेंगे, बेशर्मो ,तुमने ताजो-तख़्त पे कंजर बिठाए क्यों थे !!
 
पी.सी.गोदियाल
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विरह गीत !

छवि गूगल से साभारमीत तुम कब आओगे,कब तक यूं तडपाओगे,जान बाकी है,अरमान बाकी है,पास कब बुलाओगे,मीत तुम कब आओगे !झुठलाओ न मुझे,झूठे वादों की तरह,ये नयन झरते हैसावन-भादों की तरह,कब तक यूं सताओगे,मीत तुम कब आओगे !!दिल में आस है,मन मेरा उदास है,क्या तुम्हे भीयह
 
पी.सी.गोदियाल
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समीप तेरे मकाँ खोल दी मैंने !

समीप तेरे मकाँ खोल दी मैंने.इक अपनी दुकाँ खोल दी मैंने,चाहे तो जी भर खरीददारी करन चाहे तो फुकां खोल दी मैंने !हुश्न पे जिया जो , हुश्न पे मरेंगा ,वादाखिलाफी न हरगिज करेंगा ,उम्मीदी की जुबाँ खोल दी मैंने,इक अपनी दुकाँ खोल दी मैंने!किसने कहा, कोई ना जानता
 
पी.सी.गोदियाल
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दर्द की इक दुकाँ खोल ली मैंने !

झंझटों की पोटली मोल ली मैंने,ब्लोगिंग जीवन में घोल ली मैंने,गम खरीदता हूँ, खुशियाँ बेचता हूँ,दर्द की इक दुकाँ खोल ली मैंने !सुबह-शाम कंप्यूटर पर जमे रहकर,वक्त कट जाता है,खुद में रमे रहकर,फुर्सत के हिस्से का परिश्रम बेचकर,यह चीज बड़ी ही अनमोल ली मैंने!दिल
 
पी.सी.गोदियाल
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वह रीत नहीं दोहरानी है !

जीवन नदिया की धार है, ख्वाइशे बहता पानी है,बयाँ लफ्जों में करूँ कैसे, दो दिलों की कहानी है!पानी में उठ रहे है जो बुलबुले बारिश की बूंदों से,मौसम के कुछ पल और, न खुलने की निशानी है!रुकावटें बहुत सी आयेंगी हमारे सफ़र के दरमियाँ,तू अपने हुश्न को संभाले रख,
 
पी.सी.गोदियाल
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भ्रष्ट राजनीति और रसूकदारों की रखैल बनकर रह गई है, हमारी यह न्याय व्यवस्था !

शुरू करने से पहले एक छोटी सी पहेली ; "यू मस्ट ब्रिंग दी चेंज" (You must bring the change !)यह महान वाक्य किसने कहा ?अगर न मालूम हो तो आप इसका उत्तर लेख के नीचे देख सकते है ।किस तरह हमारी न्यायिक व्यवस्था की खामियों को अपने फायदे का हथियार बना ये
 
पी.सी.गोदियाल
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हौंसला !

इसलिए प्यार है मुझे,इसलिए मिस करता हूँ उन्हें,उन ख़ूबसूरत ऊँचे पहाडो को,जिनके, कहीं चिकने, कहीं खुरदुरे सीनों पर,मरहम की तरह लिपटी,नरम-मुलायम बर्फ जब पिघलकर, बूँद-बूँद आंसुओ की तरह बहकर कहीं ओझल होती है तब भी,अपने ह्रदय को पिघलता छोड़ जग दिखावे को वह दृडता
 
पी.सी.गोदियाल
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स्टेयरिंग कवर !

समझ नही आता कि इसे आत्म-कथा कहूं, लघु कथा कहूं या फिर कोई एक बेसुरा गीत, मगर जीवन सफ़र मे कुछ बातें ऐसी होती रहती है जिनके निष्कर्शों को हम अपने-अपने अन्दाज मे, अपनी-अपनी विश्लेषण शैली मे समायोजित करने की कोशिश मे लगे रहते है। आम दिनचर्या से निकलकर आने
 
पी.सी.गोदियाल
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सदविचार !

Patience(धैर्य)और Sense(विवेक)एक दूसरे के पूरक है, मगर जहां Patience दिखाने वाला उसे जरूरत से ज्यादा दिखा रहा हो,समझ लीजिये कि उसमे Sense की कमी है! - पी सी गोदियाल
 
पी.सी.गोदियाल
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दो शब्द, इजराइल की तारीफ़ में, Well done Israel !

अगर कोई देश संकल्प के साथ अपने दुश्मन का डटकर मुकाबला करता है तो आज की इस सभ्यता में उसकी निंदा की जाती है ! लेकिन मैं यह कहूंगा कि बहुत अच्छा किया इजराइल , वेल डन ! इजराइल अगर इस तरह का प्रतिघाती नहीं होता तो ये निहायत स्वार्थी अरबवासी उसे कब का ज़िंदा
 
पी.सी.गोदियाल
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सोचो-सोचो !!

सिर्फ मुद्दा उठाने व चिंता व्यक्त कर देने भर से,क्या सोचते हो देश-तंत्र सुधर जाएगा ?जाने-अनजाने ये विनाश का बीज जो बो रहे है,क्या पौधा बनके हमारे ही समक्ष आयेगा?सोचो-सोचो !लिख देने या फिर किसी एक के कहने भर से,क्या यह देश कभी सुधरने वाला है ?देश सुधारने
 
पी.सी.गोदियाल
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छिटपुट शेर !

सीने में संजोई तेरी याद, कैसे मैं भुला लूंगा,तुम जितने मर्जी गम दो, मैं मुस्कुरा लूंगा,गुजारिश बस इतनी है, तेरे चेहरे की रौनक न बुझे,अपने हिस्से के आंसू मुझे दे देना, मैं बहा लूंगा !!~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~खुशी सदा तेरे दर पे ठहर जाए, ये दुआ मांगता
 
पी.सी.गोदियाल
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सोसिअल स्वैप !

पश्चिम से इम्पोर्ट किया हुआआइडिया है यह अपने देश में,और दिनोदिन लोकप्रिय भी हो रहा है,सोसिअल स्वैप यानिवस्तु विनिमय केंद्र,जहां आप घर की फालतू वस्तुवेआसानी से डंप कर सकते है !सुनने में आया है किबंगलौर में ऐसे ही एकवोमन सोसिअल स्वैप में,बहुत सी महिलाएअपने
 
पी.सी.गोदियाल
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जमाना !

क्या ज़माना आ गया कि आईने में उभरतेअपने ही अक्श का संज्ञान नंगे नहीं लेते,सरे राह किसी को एक रूपये का सिक्काभीख में देना चाहो,तो भिखमंगे नहीं लेते !गली से गुजरती इक मस्त-बयार कह रही थीकि ये दुनिया सचमुच में बहुत खराब हो गई,इसीलिये हम आजकल किसी से पंगे
 
पी.सी.गोदियाल
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मैं चिंतित हूँ !

वो अमृत तलाशा जा रहा हैजिससे कि इंसान, यानिभ्रष्ट, कातिल, दुराचारी,व्यभिचारीऔर इन सबका बाप राजनेता, मरेगा नहीं, चिरजीवी हो जाएगा !गर शरीर का कोई अंगनिष्क्रिय हो जाए कभी,तो नया अंग उग आयेगा ,अपने ही जैसा एक औरभ्रष्ट, निकृष्ट व कमीना चाहिए तोक्लोनिंग की
 
पी.सी.गोदियाल
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छि घृणित राजनीति !

अभी कुछ दिनों पहले देश ने वह भयावह मंजर देखा, जब हावडा-कुर्ला लोकमान्य तिलक ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस, जोकि कलकता से मुंबई जा रही थी, के १३ डिब्बे जगराम से १३५ किलोमीटर दूर सरडीहा और खेमासुली रेलवे स्टेशनों के बीच रेलवे स्टेशनों के बीच तडके १:३०
 
पी.सी.गोदियाल
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दो जून की रोटी !

सुबह जागा तो अचानक याद आया,वो पहली मुलाकात, दो जून याद आया,जब तुम आई थी, मेरी कुटी पे,चंचल, झील से दो नयना,चेहरे पे वो कातिलाना मुस्कराहट लिए,मैंने भी संकुचाते हुए पूछा था जब तुम्हारा नाम ,कुछ बलखाते , कुछ शर्माते हुए तुमनेअपना नाम बता भी दिया था !सुनकर,
 
पी.सी.गोदियाल
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जवानो के लिए मौत बिछवा रही है सरकार !

ज्यों-ज्यों समय बीतता जा रहा है, माओवादियों और नक्सलियों के देशभर के करीब २० राज्यों में फैलते जा रहे जाल और केंद्र सरकार की इस ओर बरती जा रही बेहद उदासीनता पूर्ण निति के चलते, आने वाले समय में हमारे सुरक्षा बलों के जवानों के लिए इन राज्यों में किसी भी
 
पी.सी.गोदियाल
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लिखने की कला !

आज दोपहर बाद थोड़ी देर को किसी काम से गाडी लेकर सड़क पर उतरा ! मेरे आगे-आगे एक ब्रैंड न्यू टाटा-नानो जा रही थी ! उसके पिछले भाग के शीशे पर एक सन्देश को पढ़ मैं सहसा मुस्कुरा दिया था! मोबाईल से फोटो लेने की भी कोशिश की थी, मगर ले नहीं पाया ! सन्देश कुछ यूँ
 
पी.सी.गोदियाल
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सबके सब बिन पैंदे के लोटे हो गए है !

बापू, अब तेरे देश में, अच्छे लोगो के टोटे हो गए है ,जिधर देखो, सब के सब बिन पैंदे के लोटे हो गए है !कोई लल्लू बन के लुडक रहा, कोई चिकना मुलायम,खुद को अमर बताने वाले, खा-खा के मोटे हो गए है !!तेरे इस देश के गरीब की तो माया भी निराली हो गई,धन चिंता में दिल
 
पी.सी.गोदियाल
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विकसित होता भारत देखो !

अटल, सोनिया, एपीजे, मनमोहन और प्रतिभा-रत देखो,लालू, मुलायम, ममता , येचुरी, प्रकाश-वृंदा कारत देखो !संतरी देखो, मंत्री देखो, अफसर, प्रशासक सेवारत देखो,आओ दिखाएँ तुमको अपना,विकसित होता भारत देखो !! शहर,सड़क व गलियों की 'प्रगति-ज्वर' से हया मर
 
पी.सी.गोदियाल
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क्या इसे माओवादी और नक्सली कृत्य तक ही समेट लेना उचित होगा ?

आज तडके हावडा -कुर्ला लोकमान्य तिलक ज्ञानेश्वरी सुपर डीलक्स एक्सप्रेस, जोकि महाराष्ट्रा जा रही थी, के १३ डिब्बे आतंकवादियों द्वारा जगराम से १३५ किलोमीटर दूर खेमसोली और सर्दिया रेलवे स्टेशनों के बीच तडके १:३० बजे रेल पटरी पर किये गए ब्लास्ट की वजह से
 
पी.सी.गोदियाल
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हकीकत-ए-शहंशाह !

आज सुबह मेल चेक कर रहा था तो इस मेल पर भी नजर गई ! सोचा, थोडा इसमें तोड़-फोड़कर आपका भी मनोरजन किया जाये ! तो लीजिये, परिवार संग (सिर्फ पति-पत्नी ) मिल-बैठकर एन्जॉय कीजिये ;हो सकता है कि आप दुनिया के राजा हों ! ये भी हो सकता है कि आप दुनिया में सबसे
 
पी.सी.गोदियाल
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२२ साल पुराना गौमुख यात्रा वृतांत !

अभी चंद रोज पहले मैंने एक लेख ज्योतिषी और भविष्य बाणी से सम्बंधित लिखा था! और जिसमे मैंने गलती से यह दावा कर दिया था कि मैं लगभग सभी विषयों पर लिख चुका हूँ ! लेकिन बाद में घुमक्कड़ी के चैम्पियन , मस्तमौला श्री नीरज जाट जी की एक टिपण्णी प्राप्त हुई ,
 
पी.सी.गोदियाल
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"26/11 के अपराधी बनाम मलियाना हाशिमपुरा के दोषी" - क्या यही उच्च सोच है ?

एक तरफ २६/११ का मुंबई हमला, जिसे एक विदेशी मुल्क ने बड़े ही सुनियोजित ढंग से इस देश पर किया था! और एक तरफ मई १९८७ का मेरठ साम्प्रदायिक दंगा, जिसकी शुरुआत कैसे हुई थी, उसका वर्णन उन दंगो की रिपोर्ट में जो उस समय दी गई थी, चंद शुरुआती लाइने आप खुद पढ़
 
पी.सी.गोदियाल
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कहाँ ले जाना चाहते हो देश को ?

आपको नहीं लगता कि हमारे प्रधानमंत्री के पास अब बोलने के लिए भी कुछ नहीं बचा? जो इंसान खुद दूसरों की कृपा पर निर्भर हो , वह देश को क्या ख़ाक आत्मनिर्भर बनाने के सपने दिखाएगा? वे कहते है कि मैं तो रिटायर नहीं होना चाहता, मगर यदि राहुल जी आना चाहेंगे तो में
 
पी.सी.गोदियाल
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May 25 2010 07:22 PM
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यूं भी वफ़ा होते है लोग !

निसार राहे वफ़ा करके जाना कि राहे जफा होते है लोग,सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी खफा होते है लोग !हम सोचते थे कि ये जज्बा नेमत है खुदा की, किसे पता,वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग !आग लगा जाते है घरों में, दनल से नफरत करने वालों
 
पी.सी.गोदियाल
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मेरी भविष्यबाणी जिसके शत-प्रतिशत सच निकलने की उम्मीद है !

अगस्त २००८ के आस-पास मैंने ब्लॉग-जगत में कदम रखा था! तबसे ब्लोगर मित्रों और सम्माननीय पाठकों की प्रेरणा पाकर मैंने एक लघु उपन्यास, ४१ कहानिया , करीब १७५ कवितायेँ, गजल , करीब इतने ही आलेख भिन्न-भिन्न विषयों पर और दो-चार कार्टून ( हालांकि उसमे ग्राफिक्स
 
पी.सी.गोदियाल
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कल रात को मैं कुछ लिख न पाया !

मुझको मेरी रहमदिली ने सताया,कल रात को मैं कुछ लिख न पाया !धीमी- आहिस्ता शाम ढल रही थी,मेरे सामने इक शमा जल रही थी !तभी फिर वहाँ एक परवाना आया,कल रात को मैं कुछ लिख न पाया !पतंगा कोई एक गीत गा रहा था,शम्मा के इर्द-गिर्द मंडरा रहा था !प्यार के जुनून में था
 
पी.सी.गोदियाल
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ये नेता प्रजाति का प्राणी हर देश में एक जैसा ही है !

नेता प्रजाति का प्राणी हर देश में एक जैसा ही होता है यह बात एक बार फिर से सिद्ध कर दिखाई है, थाईलैंड में मौजूदा प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजिवा की सरकार के विरुद्ध पिछले मार्च से 'रेड शर्ट' आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे वहाँ के विपक्षी नेतावों ने। यह आन्दोलन
 
पी.सी.गोदियाल
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स्पष्ठीकरण !

इर्द-गिर्द सदा ही घूम पाता, मैंने तोतुमसे वो धूरी माँगी थी, दूरी नहीं,दिल की बात हम हक़ से कह जाते,वो सहभागिता माँगी थी, मजबूरी नहीं !मेरे दिल में रखने की आदत बुरी है,हर ख्वाब दिल के कोने में सजाता हूँ,इजहार-ए-इश्क मेरी पलकें कर लेती है ,हर बात लबों पे
 
पी.सी.गोदियाल
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संयम बरतने की आड़ जब वैचारिक नपुंसकता की हद को पार कर जाए !

आपको याद होगा कि इस साल की शुरुआत के पहले दिन, यानि १ जनवरी, २०१० को हमारे गृहमंत्री ने पाकिस्तान को यह नसीहत दी थी;" नयी दिल्ली १ जनवरी, 2010: केन्द्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने पाकिस्तान से मांग की कि वह अपनी जमीन पर संचालित होने वाले आतंकवादी ढांचों को
 
पी.सी.गोदियाल
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पहाडी सड़क !

आड़ी-तिरछी ,टेडी-मेडी,कहीं चिकनी,कहीं कड़क,सुनशानपहाडी सड़क,यों समेटे है खूबसूरतीवह भी शुद्ध सब,दीखने में मगरएकदम खूसट सीगंवार, बेअदब,रास्तों का मंजर औरखुशनुमा पलों का प्राकृतिक सौन्दर्य ,पथिक को भाता है,मगरकोप- इजहार सभी को डराता है!पथिक का मन रखने को,झूठ
 
पी.सी.गोदियाल
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