अर्ज़ है...'s Image

अर्ज़ है...

http://abyazk.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
13 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
53
पाठक भेजे
762
पसंद
38
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
14.38
पसंद करें
5
नापसंद करें

और वो हाथी को चट कर गए...

ये ख़बर किसी का भी दिल दहला सकती है। हो सकता है इसको पढ़ने के बाद आपके रोएं भी खड़े हो जाएं.. लेकिन ये ख़बर एकदम सच है.. इसी ज़मीन पर एक मुल्क ऐसा भी है, जहां लोग मिनटों में एक हाथी को चट कर गए। सुनकर अटपटा लग रहा है न आपको.. लेकिन ये एकदम सच है.. इंसान
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
0
नापसंद करें

मां तेरे चेहरे में मुझे भगवान नज़र आता है...

मां... मैंने कभी ख़ुदा की सूरत तो नहीं देखी..मगर तेरे चेहरे में मुझे भगवान नज़र आता है..मां जब मैंने इस दुनिया में आंखे खोली थीं... तो सबसे पहले तेरा ही चेहरा नज़र आया था.. तुम्हारे नाज़ुक हाथों में मेरी परवरिश हुई.. उंगली पकड़कर आपने ही तो मुझे चलना
 
अबयज़ ख़ान
May 09 2010 01:04 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मेरी किस्मत और मेरा चांद..

मेरी किस्मत और मेरा चांदमुझसे खेल रहे थे लुकाछिपी का खेलमेरा चांद मेरे क़रीब आकर भी दूर हो जाताऔर मेरी किस्मत मुझे ठेंगा दिखा जाती।चौदहवीं की रौशनी में चमकने के बावजूदनजूमी के पन्नों में दमकने के बावजूददूरियों का दायरा...चांद और किस्मत के दरम्यान और बढ़
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
0
नापसंद करें

इस शहर में अब मन नहीं लगता...

बंसत निकल चुका था... हर तरफ फागुन की मस्ती छाई थी.. खेतों में गेंहूं की फसल कट चुकी थी... गन्ना भी खेतों से उठ चुका था... दिल्ली में बहुत दिन रहने के बाद अकेलेपन में घर की याद सताने लगी थी... मैंने दफ्तर से कुछ दिन की छुट्टी ली और अपने घर चला गया... घर
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
0
नापसंद करें

गरीबों की कार का गरीबों जैसा हश्र...

अरे कहां हैं...आप..? आपके सपनों की कार अब आपसे विदा ले रही है... और आप खामोश हैं... पहले आपका स्कूटर आपसे विदा हुआ.. और अब आपकी कार... अरे वही कार जिसके लिए आपने अपनी जेब काटकर कुछ रुपये गुल्लक में जमा किया थे... वही कार जिसके लिए आपने अपना पुराना स्कूटर
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
2
नापसंद करें

ये तस्वीरें ज़रूर देखिए.. बहुत कुछ कहती हैं...

इस बार ब्लॉग की पोस्ट बिल्कुल ही अलग सी है.. इस बार कलम नहीं सिर्फ तस्वीरें बोलेंगी... देखने में भले ही ये तस्वीरें मामूली सी हों... लेकिन इनके पीछे कई सदियां छिपी हुई हैं.. इन तस्वीरों में जीकर तमाम पीढ़ियां गुज़र गईं... ये तस्वीरें बेशक गुजरे ज़माने की
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
0
नापसंद करें

दुनिया का सबसे ऊंचा पेट्रोल पंप...

सबसे पहले आप ये तस्वीर देख लीजिए.. और तस्वीर में इस बोर्ड पर जो लिखा है उसे भी गौर से पढ़ लीजिए... जी हां सबसे ऊंचा पेट्रोल पंप.. और सबसे ऊंचा सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे ऊंचा पेट्रोल पंप.. या ये भी कह सकते हैं कि भारत-तिब्बत सीमा
 
अबयज़ ख़ान
Feb 27 2010 12:43 PM
पसंद करें
2
नापसंद करें

जब कोई आपसे रूठ जाए...

जब आपका कोई आपसे रूठ जाए तो आप क्या करते हैं... उसे मनाने की कोशिश करते हैं न..? लेकिन फिर भी कोई आपसे रूठा ही रहे तो आप क्या करेंगे.. उसे एक बार फिर से मनाने की कोशिश करेंगे... लेकिन अगर वो आपसे मिलना ही न चाहे तब आप क्या करेंगे... क्या कोई किसी से इस
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
3
नापसंद करें

मेरी जुगाड़ यात्रा...

जुगाड़.. नाम सुनकर आपको कुछ अटपटा ज़रूर लगेगा.. लेकिन जनाब चौंकिए मत.. इस जुगाड़ पर तो आपकी और हमारी पूरी ज़िंदगी चल रही है.. ताज़ा-ताज़ा जुगाड़ आजकल झारखंड में चल रहा है.. क्या जुगाड़ लगाया, बीजेपी ने.. उन्हीं सोरेन साहब को पटा लिया, जिन्हें वो पानी
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
1
नापसंद करें

मेला.. जाने कहां गये वो मेले

बचपन में मुंशी प्रेमचंद की एक कहानी पड़ी थी ईदगाह... उसमें हामिद नाम का एक छोटा सा बच्चा था, जो अपनी दादी के लिए मेले से एक चिमटा लाया था, ताकि उसकी दादी के हाथ जलने न पाएं... उस कहानी को पढ़कर दो आंसू हामिद और उसकी दादी के लिए ज़रूर छलक आते थे... लेकिन
 
अबयज़ ख़ान
Jan 24 2010 09:57 AM
पसंद करें
3
नापसंद करें

पति-पत्नी और वो.. अब कोई झंझट नहीं

चलिए नए साल पर एक खुशख़बरी उन मर्दों के लिए जो शादी के बाद भी पति-पत्नी और वो के चक्कर से निकले नहीं हैं... और खुशख़बरी उनकी पत्नियों के लिए भी जो अपने दिलफेंक मियां से आजिज़ आ चुकी थीं... घबराइये मत... जो काम आपके पति कर रहे हैं वो उनकी ज़िंदगी में तो
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
2
नापसंद करें

किस पर करें भरोसा..?

भरोसा क्यों और किस पर किया जाए... किसलिए किया जाए... क्या सिर्फ़ इसलिए कि उसने आपको अपनी कसम खाकर ये एतबार करा दिया, कि मैं तुम्हारा भरोसा कभी डिगने नहीं दूंगा... क्या सिर्फ़ इसलिए कि उसने अपने बच्चों की कसम खाकर ये एतमाद दिला दिया, कि मैं तुम्हारे साथ
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
1
नापसंद करें

सर्दी ने मार डाला...

कोहरे में कुछ सुझाई नहीं दे रहा था.... हाथ को हाथ नज़र नहीं आ रहा था... लेकिन फिर भी घर तो पहुंचना ही था.. रात के करीब साढ़े बारह बज रहे थे... मोटरसाइकिल पर चलना दूभर हो चुका था... सड़क पर हर तरफ़ बस कोहरा ही कोहरा था... आगे वाली कार के पीछे मैं चलता चला
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक दर्दे मोहब्बत है...

हर अहद में हर चीज़ बदलती रही लेकिन एक दर्द-ए-मोहब्बत है जो पहले की तरह है। प्यार का कोई इतिहास तो नहीं है, लेकिन इसका दर्द हमेशा एक जैसा ही है। अगर माना जाए, तो प्यार की शुरुआत दुनिया में आदम और हव्वा के ज़माने से हुई थी। लेकिन प्यार की मिसाल में किस
 
अबयज़ ख़ान
Dec 29 2009 11:58 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अब पप्पू फ़ेल नहीं होगा

पप्पू अब फेल नहीं होगा, जब से ये ख़बर आई है, पप्पू के साथ-साथ उसके मां-बाप के चेहरे भी खिल उठे हैं। पंजे को वोट देने वाले मां-बाप को लग रहा है कि उनका वोट कामयाब हो गया है। पिछली दस साल से एक ही क्लास में पप्पू रिकॉर्ड बना रहा था, लेकिन न तो गिनीज़ ब
 
अबयज़ ख़ान
Dec 29 2009 11:58 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये बच्चे नहीं पटाखा हैं

ये बच्चे नहीं पटाखा हैं। ज़ीटीवी पर आजकल एक शो आ रहा है लिटिल चैंप्स। इसमें शामिल सभी 12 बच्चे एक से बढ़कर एक हैं। इतनी कम उम्र में इन बच्चों को सुरों की इतनी समझ है, कि अच्छा-अच्छा आदमी दांतो तले उंगली दबा ले। लेकिन यहां पर नई बात ये नहीं है। बल्कि
 
अबयज़ ख़ान
Dec 29 2009 11:58 AM
पसंद करें
3
नापसंद करें

इस एहसास को कोई नाम न दो...

इस प्यार को कोई नाम न दो.. इस एहसास को कोई नाम न दो.. इस जज़्बात को कोई नाम न दो... मगर ये कैसे मुमकिन है... जब एक ज़िंदगी दूसरी ज़िंदगी से मुकम्मल तरीके से जुड़ी हो... आंखो में लाखों सपने हों... दिल में हज़ारों अरमान हों... हज़ार ख्वाहिशें हों... फि
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
5
नापसंद करें

अशोक सर बेटे के लिए लौट आओ न...

मैं क्या लिखूं... मेरे हाथ आज जवाब दे रहे हैं... दिल बैठा जा रहा है... समझ नहीं आता.. आखिर ऐसा क्यों होता है... जो आपको सबसे प्यारा होता है, ऊपर वाला भी उसी को सबसे ज्यादा प्यार क्यों करता है... आज सुबह जब अमिताभ का फोन आया... तो मेरा जिस्म बेजान हो
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
3
नापसंद करें

मुझे यकीन है.. तुम आओगे ज़रूर

तुमने तमाम उम्र साथ रहने का वादा तो नहीं किया था.. लेकिन तुम मेरी ज़िंदगी में बहुत आहिस्ता से दाखिल हो गये थे.. मुझे एहसास भी नहीं हुआ. और तुमने मेरे दिल पर हुकुमत कर ली.. मैं तुम्हारी हर अदा और हर इशारे का गुलाम हो गया... हर आहट पर जान देने को तैयार
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
2
नापसंद करें

बेज़ुबान बच्चा बेज़ुबान जानवर बन गया...

उत्तर प्रदेश से तो सभी वाकिफ़ हैं.. उसी का एक हिस्सा है पश्चिमी उत्तर प्रदेश... धन-दौलत से मालामाल... गन्ना किसानों से भरपूर इस इलाके में पैसे की कोई कमी नहीं... रईसी इस इलाके की रग-रग में बसी है... उसी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक ज़िला है बिजनौर...
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
4
नापसंद करें

भारत में चाय की आखिरी दुकान

कड़कड़ाती सर्दी हो और एक गर्म चाय की प्याली हो तो कहने ही क्या... लेकिन चाय की चुस्कियां रोमांच भरी हों, तो गर्म चाय का मज़ा भी दोगुना हो जाता है... अक्सर आपने भी रज़ाई में दुबककर मूंगफली खाते हुए चाय की चुस्कियां ज़रूर ली होंगी... गुलाबी सर्दी में च
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
2
नापसंद करें

वीसीआर पर फिल्म और पुरानी यादें...

रंगीन टीवी पर फिल्म चल रही है राजा हिंदुस्तानी ... हर कोई मग्न होकर फिल्म देखने में लगा है... एक शॉट् में हीरो आमिर खान करिश्मा कपूर का चुंबन लेता है... और सीटियां बजने लगती हैं... नाइनटीज़ के आखिर में किसी हिंदी फिल्म का ये सबसे लंबा चुंबन सीन था...
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
1
नापसंद करें

किराए का घर और इतने सवाल...

छड़े हो जी... इस सवाल को सुनकर जैसे कुछ समझ ही नहीं आया... छड़े का मतलब... हमने तो अबतक छड़ी के बारे में ही सुना था... लेकिन ये छड़े क्या है? अरे मेरा मतलब है शादी हुई है या नहीं..? मेरा मतलब कुंवारे हो क्या..? जी मैंने कहा... माफ़ करना जी फिर हम आपक
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
0
नापसंद करें

मैं मेरे बाप का कौन...?

पागलखाने के डॉक्टर ने नये आने वाले मरीज़ का चेकअप किया, मरीज़ डॉक्टर को काफ़ी सेहतमंद लगा तो डॉक्टर ने पूछा तुम तो काफ़ी तंदरुस्त लग रहे हो। पागलखाने कैसे आ गये? मरीज़ ने ठंडी सांस लेते हुए कहा, डॉक्टर साहब मैं पागल नहीं हूं...मैं बिल्कुल ठीक हूं। दरअसल
 
अबयज़ ख़ान
Oct 24 2009 05:18 PM
पसंद करें
3
नापसंद करें

एक आवाज़ जो घुटकर रह गई...

आखिरी विदाई का वक्त था , तो माहौल थोड़ा ग़मगीन होना लाज़िमी था... जिसे अपने खून पसीने से सींचकर आशियां बनाया था, वो डेढ़ साल में ही ज़मीदोज हो गया... जिन सपनो में पंख लगाकर उड़ने की कोशिश की थी, उन्हे एक झटके में ही किसी ने कतर डाला था... तमाम किले ब
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
3
नापसंद करें

अरे कोई इन ढाबों से बचाओ...

ईद ख़त्म हो चुकी थी और अब घर से दिल्ली रवानगी का वक्त करीब आ रहा था। अम्मी ने बैग में करीब-करीब सारा सामान बांध दिया था। कपड़ों और किताबों के अलावा खाने का भी कुछ सामान बैग में था। फिर वो सुबह भी आई जब दिल्ली जाने का वक्त आया। घर से निकलते वक्त तमाम
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
0
नापसंद करें

बेचारे पिता और पति

पिता और पति.. दुनिया के किसी भी समाज के लिए इनकी वेल्यू एक जैसी ही है... एक मर्द की तमाम ज़िंदगी इन दो अल्फ़ाज़ों का बोझ ढोते-ढोते गुज़र जाती है... समाज में जब रिश्तों को नाम देने का चलन आया होगा, तो किसी को इस बात का गुमान नहीं होगा, कि जितने छोटे ये
 
अबयज़ ख़ान
Sep 19 2009 08:23 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

चीन से आये भगवान...

रोज़ की तरह दफ्तर में ख़बर को लेकर अफ़रा-तफ़री मची थी... सुबह, सुबह वैसे भी ख़बरों का टोटा होता है, लिहाज़ा हर ख़बर को स्क्रीन पर उतारने की जल्दबाज़ी रहती है। अचानक एक ख़बर पर नज़र पड़ी, पहले तो कुछ खास नहीं लगा। लेकिन फिर ध्यान आया कि कम से कम इसके
 
अबयज़ ख़ान
Aug 18 2009 12:22 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक चिट्ठी का इंतज़ार...

दरवाज़े पर टकटकी लगाए आंखे एक अदद चिट्ठी का इंतज़ार करती हैं... मन करता है कि साइकिल की घंटी सुनाई पड़े और दौड़कर दरवाज़े पर चले आयें, शायद कोई चिट्ठी आई हो, शायद कोई संदेशा आया हो, शायद कोई अपना हो, जिसने हाले-दिल लिखकर भेजा हो... लेकिन न तो साईकिल की
 
अबयज़ ख़ान
Aug 05 2009 10:14 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जिंदगी क़तरा-क़तरा गुज़रती है...

महीने की पहली तारीख़ गुज़र गई, लेकिन एकाउंट में पैसा अभी तक नहीं पहुंचा था। एक-एक दिन पहाड़ जैसा लग रहा था। जेब पूरी तरह खाली थी, पेट भरने से ज्यादा किस्तें अदा करने की फिक्र थी। खाना खाये बगैर भूखे रह लेंगे, लेकिन चैक बाउंस होने के बाद जो हालत होगी,
 
अबयज़ ख़ान
Aug 04 2009 12:24 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

तौबा बिन बुलाए मेहमान से...

मंदी, महंगाई और मेहमान... तंगी के इस दौर में जेब खाली है, आम तो आम गुठलियों के दाम भी नहीं मिल रहे हैं। बाज़ार में फलों का राजा पूरी धौंस के साथ बिक रहा है। 10 से 15 रुपये किलो वाला आम 50 से 60 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जियों का राजा आलू तो और भी कमाल कर
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
0
नापसंद करें

नुक़्ते पर नुक़्ताचीनी

नुक़्ता नहीं लगाना है...किसी भी लफ़्ज़ के नीचे नुक़्ता नहीं लगाना है...इसके लिए सभी को मेल भेज दिया गया है। आप सभी लोगों को बता भी दीजिए। स्क्रीन पर नुक़्ता नहीं दिखना चाहिए। क्यों... मैंने एतराज़ किया। नुक़्ता क्यों नहीं लगाना है। अरे अगर ज़मीन को जमीन
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
4
नापसंद करें

बर्बाद करेगा ये सच!

क्या आपने कभी अपनी बेटी की उम्र की किसी लड़की के साथ सेक्स किया है? जवाब मिलता हैं.. हां। क्या आप कभी अपने पति के अलावा किसी और के साथ गैर मर्द के साथ नाजायज़ रिश्ता बनाने की कोशिश करेंगीं? जवाब मिलता है.. नहीं। लेकिन ये जवाब गलत था। ये एक बानगी भर ह
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
2
नापसंद करें

घर की मिट्टी बुला रही है...

परदेस में रहके न अपने देश को भूलो तुम. दूरियां बेशक रहें, पर दिल के तारों को जोड़ो तुम.. एक चिट्ठी तो कम से कम अपनी हम को लिख दो तुम घर की मिट्टी बुला रही है, अब तो वापस आ जाओ ---------------------------------- तुम्हारा मनपसंद खाना, खलिहानों में गाना
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
5
नापसंद करें

राखी के स्वयंवर में नामर्द!

टीवी पर बीएसएनएल का एक एड आता था, जिसमें प्रीति जिंटा कहती थीं, कि अगर इनके पास बीएसएनएल का कनेक्शन नहीं है, तो वो इनके बेटे से शादी नहीं करेंगी। आजकल टीवी पर एक एड आता है अमूल माचो का.. जिसमें एक लड़के को देखने लड़की और उसके घरवाले आते है और बेचारा
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
6
नापसंद करें

मुर्गी ने दिया आदमी का बच्चा

मुर्गी ने आदमी के बच्चे को जन्म दिया है। सुनने में आपको थोड़ा अटपटा ज़रूर लगेगा, लेकिन ये ख़बर आई है मध्य-प्रदेश के रायसेन शहर से। एक टीवी चैनल पर ये ख़बर चलने के बाद दूसरे चैनलों के पत्रकार भी इसे कवर करने दौड़ पड़े। बिना ये जांच-पड़ताल किये, कि क्य
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
1
नापसंद करें

जब आंखो में नमी आती है...

जैसे सावन की घटा ज़रा सा बरसे और फिर धूप निकल आये। -जैसे कोई मेहमान चंद रोज़ घर में क़हकहे बिखेर कर वापस चला जाए। -जैसे छुट्टी का दिन आकर गुज़र जाए। -जैसे त्योहार के रोज़ की शाम। -जैसे दुल्हन की रुख़सती के बाद घर। -जैसे किसी परदेसी की अलविदाई मुस्कुर
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
2
नापसंद करें

कब मिलेगी सैलरी?

तारीख पहली जुलाई, सुबह छह बजे अख़बार वाले की आहट से आंख खुली, उनींदी आंखों से दरवाज़ा खोला, तो चौखट पर हिंदुस्तान अख़बार पड़ा था। ख़बर के चस्के में अख़बार उठाया, तो उसके मास्ट हेड पर बड़ा सा लिखा था आज पहली तारीख है। साथ में कैडबरी चॉकलेट का एड भी था
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
2
नापसंद करें

रामपुर का हब्शी हल्वा

नवाबों के इस शहर की हर अदा निराली है। तहज़ीब और उर्दू के इस शहर में चाकू की धार भले ही कुंद पड़ चुकी हो, लेकिन इस शहर में रफ्तार बाकी है। दिल्ली से करीब सवा दौ सौ किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे 24 पर बसा ये शहर मेहमानों के इस्तकबाल में हाथ फैलाए खड़ा रहता
 
अबयज़ ख़ान
पसंद करें
1
नापसंद करें

उन चुनावों का मज़ा अब कहां

चुनावी महाभारत अपने आखिरी पड़ाव में है, लेकिन इस बार जिस चीज़ की कमी सबसे ज्यादा महसूस की गई, वो था चुनाव प्रचार का ज़ोर-शोर। लोकसभा के लिए महासंग्राम का बिगुल तो बजा, लेकिन न तो बिगुल दिखा, न शोरशराबा करते चुनाव प्रचारक। आम-आदमी का चुनाव आम आदमी से
 
अबयज़ ख़ान