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07 Jan 2010
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जहां घर-घर में है वतन के रखवाले.

राष्ट्र की सेवा को समपिर्त उस गांव को सलाम,जहां हर मां का बस एक ही सपना,बेटा देश की सेवा करे,हर पिता की एक ही प्रेरणा 'बेटा देश की खातिर मरे'.हर बहन की एक ही इच्छा 'भईया देश को शत्रु से बचाए.और हर नोजवानो में एक जज्बा बनना जाबांज सिपाही.रोहतास जिले के
 
पिंटू कुमार
टैग: आर्मी
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यह भारत तो हमारा नही है !

माफ़ करे, मै लगातार देख रहा हू कि सारी दुनिया को परिबार माननेवाला भारत ओंर पासायंन के रूप में विशव कल्याण कि कामना करने वाला महाराष्ट्र- दोनों को लेकर अब यह कहने का समय आ गया है कि हम एक परदेश एक देश के रूप में रहने में लगातार असफल हो रहे है,यह भारत त
 
पिंटू कुमार
टैग: neta
Dec 29 2009 11:56 AM
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हैप्पी न्यू इयर.

मेरे सभी ब्लॉगर साथियों, आपको और आपके सहपरिवार, और आपके इष्ट-मित्र सभी को, नए साल की ढेरो शुभकामनाये। हैप्पी न्यू इयर।
 
पिंटू कुमार
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जी तो चाहा था मुस्कराने को!

आखरी टीस आजमाने को, जी तो चाहा था मुस्कराने को। कितने मजबूर हो गये होंगे, अनकही बा मुंह पे लाने को। खुल के हंसना तो सबको आता है, लोग तरसे है इक बहाने को। हाथ काँटों से कर लिए जख्मी, फूल बालो में इक सजाने को। आस की बात हो की साँस 'अदा', ये खिलोने थे ट
 
पिंटू कुमार
टैग: अक्स
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नाम भले ही हिंदुस्तान है.

नाम भले ही हिंदुस्तान है, यह एक टूटी हुई कमान है, अपनी रोटियों की सबको फ़िक्र है, इसलिए सस्ता हुआ ईमान है, नाम भले ही हिंदुस्तान है। अचरज मुझे इस बात पर है दोस्तों, बिना रीढ़ के भी चल रहा इंसान है, जी नही पता है अच्छा आदमी, अब जिन्दगी ही मौत का सामान
 
पिंटू कुमार
Dec 29 2009 11:56 AM
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एक सवाल आप सबसे!

एक सवाल जो आज सुबह से मेरे जहन में उठ रहा है। ओ मै आप लोगो से पूछ रहा हूँ.और इस सवाल को पढ़ कर आप लोगो के मन में जो भी जबाब आए दे सकते है। क्योंकि आप लोग अपनी प्रतिक्रिया देंगे तो मै उसी प्रतिक्रिया के ऊपर मै अपना प्रतिक्रिया दूंगा। सवाल - वह कोन सी म
 
पिंटू कुमार
टैग: आदमी
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एम्.बी. ऐ.वो है जो...

वो है जो अक्सर फसाता है . Interview के सवाल मे, बड़ी कम्पनियों की चाल मे, Boss और Client के बवाल मे, MBA वो है जो पाक गया है Meetings के जंजाल मे, Submission की गहराई मे, Teemwork की छंटाई मे। MBA वो है जो लगा रहता है, Schedule को फैलाने मे, Targets क
 
पिंटू कुमार
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ज्ञान बड़ा इस इन्सा का,पर अक्ल बड़ी छोटी है?रोटी के लिए हर जंग हुई,हर जंग के पीछे रोटी है!!

बाहर हमे लगता है, की हमने ज्ञान पा लिया है.जो आतंक बरपाते है-उन्हें लग रहा है की ज्ञान हो गयी है.वे सब जानते है,उन्हें जो बहकते है, वे सोंचते है,की उन्हें सब ज्ञान है.मुझे आशचर्य होता है की जो पैसे के पीछे पड़े है,उन्हें लगता है की उन्हें सब मालूम है.
 
पिंटू कुमार
Dec 29 2009 11:56 AM
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बम और हम! भाग २

आपको-शायद बहुतो को यह बात बुरी लगेगी.लेकिन एक बात जो बरी साफ है,कह दूं की आतंकवाद के लिए भले ही बीज विदेशी हो,जमीन हमारी है.हमने भी जमीन ऐसी उपजाऊ बना रखी है,की विदेशी आतंक का बीज आसानी से बो रहे है और हम है की जमीन को और उपजाऊ बना रहे है अब महाराष्ट
 
पिंटू कुमार
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बम और हम! भाग-1

हम एक-दुसरे की आंखो में आंखे डालकर तो देख नही सकते,और जब आंखो में ही इतनी निश्छलता,निर्दोषिता नही है,इतनी भी निर्भीकता नही है.तब हम आपस में एक-दुसरे से प्रेम कैसे करेंगे और प्रेम नही करेंगे तो बंधुत्व और एकता कहां से होगी?एसे में जब हम राष्ट्रिय एकता
 
पिंटू कुमार
टैग: सरकार
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जय महाराष्ट्र!

भारत एक राष्ट्र है.इस में एक महाराष्ट्र है तो दूसरी तरफ़ सोराष्ट्र है.और आदमी का नाम धिर्त्राष्ट्र है,और जब कभी भी धिर्त्राष्ट्र पैदा होता है तो वह अंधा होता है। इसलिए महाभारत होता है.मई चाहता हूँ की भारत-भारत ही रहे,प्रतिभारत रहे,लेकिन वह महाभारत कद
 
पिंटू कुमार
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हे ईश्वर...कहां हो...?

ईश्वर तो यकीनन है...एक बार की बात है ईश्वर अपने लिए एकांत खोज रहा था...मगर अनगिनत संख्या में मानव जाती के लोग उसे एकांत या विश्राम लेने ही नही देते थे...नारद जी वहां पहुंचे...ईश्वर का गमगीन चेहरा देख,परेशानी का सबब पूछा...कारण जान हंसने लगे...ईश्वर ह
 
पिंटू कुमार
टैग: आदमी
Dec 29 2009 11:56 AM
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माँ का हाल पूछने की फुरसत कहां है?

आज चैबिसो घंटे दुनिया में होने वाली घटनाओं पर हमारी नजर रहती है, मगर परिवार में वाले एक पल की ख़बर तक नही रहती आख़िर क्यों दुनिया से बढता संपर्क हमें अपनो से ही तोड़ रहा है,वैसे तो ये छोटी- छोटी सी बात लगती है, लेकिन हमारी आज की जिंदगी में यह बात बहुत
 
पिंटू कुमार
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हैप्पी दीपावली

आपको और आपके सहपरिवार को और आपके सभी शुभचिंतको को दपावली की हार्दिक शुभकामनाये।
 
पिंटू कुमार
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अनकही बाते

मेरे साथियो । मेरे सभी शुभचिंतको मै आपलोगों के बिच बहुत ही जल्दी आउंगा और मै अपनी सारे बातें आप लोगो को बताऊंगा की मै कैसे बिना बताएं आप लोगो के बिच में से कहीं खो गया। अभी फिलहाल आप इतना ही समझ लीजिये की। जाको रखे सैयां मार सके न कोई । कोई तन दुखी .
 
पिंटू कुमार
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बाते

चेक पोस्ट
 
पिंटू कुमार
टैग: चेक
Sep 23 2009 12:32 AM
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आज गणतंत्र दिवस

जय हिंद सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा हम बुलबुले है इसकी ये गुलिस्ता हमारा वंदे मातरम।। हैप्पी रेपुब्लिक डे! यह सिर्फ़ झंडा नही-दिल है हिंदुस्तान का! यह है,तो हम है... यह झंडा हमारी आन का... हमारे मान का... हमारे स्वाभिमान का! सिर्फ़ सिर झुकाना
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शर्म का पता!

लोग कहते है की इस देश के नेताओ को शर्म नही आती। अब,कोई नेता तो यह बताएगा नही की उसे शर्म क्यों नही आती। इसलिए मैंने सोंचा की जाकर शर्म से ही पूछना चाहिए की वह क्यों नही आती? लेकिन पूछने के लिए जाए कहां?किसी को शर्म का पता मालूम है? मैंने एक दुकानदार
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सम्मान के साथ अपमान

एक व्यक्ति मोहनदास करमचंद गाँधी,जिन्हें हम बापू कहते है,आजकल सरकार ने उनकी एक तस्वीर डाक टिकट के रूप में निकली है.जिसे हम जीभ से गीला करके लिफाफे पर रखकर ऊपर से जोर हाथ मरकर चिपकाते है.उसके बाद पोस्ट ऑफिस का कर्मचारी अपनी काली स्टांप मरकर राष्ट्रपिता
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दुश्मन को जब दोस्त बनायेंगे,

सदियों की पहचान मिटा दी जायेगी , पुरखो की तहजीब भुला दी जायेगी । जागो दहशत आ पहुची दरवाजे तक , घर - घर में बारूद बिछा दी जायेगी । बरवादी के बाद जो रिश्ते सोचेंगे , आंगन से दीवार हटा दी जायेगी । असली चेहरे सामने आने वाले है , कल सब की तस्वीर दिखा दी ज