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06 May 2010
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"कसब को दे दी गयी फांसी की सज़ा...तो ? इसमें खुश होने की क्या बात है ?"

क्या ज़बरदस्त शोर शराबा मचा रखा है पूरे मीडिया है ...हरेक की दूकान धड़ल्ले से चल रही है ....अपने अपने टी आर पी के चक्कर में जितने भी सनसनीखेज़ शीर्षक हो सकते थे ..जितने भी फ़िल्मी टोन की पंच- लाइन हो सकती थी उन सबका सहारा लेकर ...हर टी वी चैनल अपना अपना
 
रोमेंद्र सागर
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"सवाल यह नहीं है की हम कहाँ हैं ...सवाल यह है की हम जहाँ भी हैं वहाँ कर क्या रहे हैं !!"

कई बार कुछ लिखने को कलम ( आई मीन की- बोर्ड ) उठाया ...सोचा भी बहुत कुछ मगर ना जाने क्यूँ बस उँगलियों को चटखारे देकर ही रह गया ! जब ब्लॉग शुरू किया था तो सोचा था कि इसे अपनी आदत में शुमार कर लूंगा और गाहे बगाहे अगर रोज़ नही तो कम से कम हफ्ते में एक बार तो
 
रोमेंद्र सागर
May 03 2010 04:44 PM
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आज़ाद भारत का गला घोंट दो ... उर्फ़ हम आपके हैं कौन !

आज़ाद भारत का गला घोंट दो !......क्योंकी यहाँ आजादी या तो संविधान की किताब में हैं या फिरका परस्त मजहबी गुंडों के पास ! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है , तभी तो वे कुछ भी बोलते हैं ...किसी के नाम का फतवा , कभी भी जारी कर देते हैं ! जब चाहे खुलेआम लड़कियों को
 
रोमेंद्र सागर
Feb 26 2010 04:42 PM
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अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद इब्न अब्दुल्लाह अल लावती अल तन्जी इब्न बत्तुता...अब बोलो कापीराईट किसका ?

"इब्ने बतूता पहन के जूता , निकल पड़े तूफ़ान में....." यह कहा था सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने और " इब्ने बतूता बगल में जूता, पहने तो करता है चुर्र्र्रर्र्र ..." यह कहा गुलज़ार ने ! और बस हो हल्ला मच गया कि गुलज़ार साहब ने खुले आम कवि सर्वेश्वर दयाल की कविता की
 
रोमेंद्र सागर
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" मुंबई का डान कौन ... भीखू म्हात्रे " ! पन बोले तो भीखू म्हात्रे कौन ??

साठ के दशक में पश्चिमी भारत में ....अरब सागर के तट पर एक आन्दोलन चला था ....जिसके मुख्य प्रणेता थे भाई अमृत डांगे , अचुतराव पटवर्धन , एस एम् जोशी तथा अन्य और इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य था बम्बई ( आज की मुंबई ) को महाराष्ट्र में शामिल करना ! खूब शोर
 
रोमेंद्र सागर
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राजनीति ? न...न ...विशुद्ध गुंडागर्दी ....!

"मन्नत ( शाहरुख़ खान का घर ) मुंबई में है पाकिस्तान में नहीं ....उसे ज़रा मुंबई तो आने दो ...देख लेंगे " यह धमकी भरी गुर्राहट है शिवसेना के प्रमुख प्रवक्ता संजय राउत की ! शिव सेना जो सदा से ही स्वयं को महाराष्ट्र और मराठी माणूस की रहनुमा मानते हुए ,
 
रोमेंद्र सागर
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राजनीति ? न...न ...विशुद्ध गुंडागर्दी ....!

"मन्नत ( शाहरुख़ खान का घर ) मुंबई में है पाकिस्तान में नहीं ....उसे ज़रा मुंबई तो आने दो ...देख लेंगे " यह धमकी भरी गुर्राहट है शिवसेना के प्रमुख प्रवक्ता संजय राउत की ! शिव सेना जो सदा से ही स्वयं को महाराष्ट्र और मराठी माणूस की रहनुमा मानते हुए ,
 
रोमेंद्र सागर
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यह ग़लती है या शरारत ? .....आप क्या कहते हैं ?

चौबीस जनवरी का अख़बार देखा आपने ? अगर देखा है तो आपकी नज़र से महिला एवम् बाल विकास मंत्रालय का यह विज्ञापन बच नही पाया होगा ! अख़बार के पूरे पन्ने पर छ्पा यह विज्ञापन अपने आप में लापरवाही की एक अनूठी मिसाल क़ायम करता हुआ दिखाई देता है ! हमारे देश के
 
विक्षुब्ध सागर
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"नव वर्ष की शुभकामनायें "

समक्रमिकता से समस्वरता ... होती विस्तृत चेतनता ; पुष्पित कुसुमित होता अवचेतन धूम्राच्छादित परिवेश से परे अलमस्त कुछ सागर की तरह ; स्तनित नर्तन , अतिवर्तन औ ' जीवंतता , स्वर नियंता का चरैवेति .... चरैवेति ! है लक्ष्य से भी महत्वपूर्ण गंतव्य - यात्रा क
 
विक्षुब्ध सागर
Dec 29 2009 11:53 AM
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....यह उसकी ताक़त नही हमारी कमजोरी है !!

वर्षीय मंसूर अहमद , जिनके परिवार का एक एहम हिस्सा सरहद के उस पार कराची में रहता है - हर वर्ष किसी ना किसी अवसर पर पकिस्तान जाया करतें हैं , कभी कोई खुशी में शामिल होने तो कभी किसी ग़म में शरीक होने ! लेकिन इस बार उन्होंने ना जाने का मन बना लिया है। "
 
विक्षुब्ध सागर
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...बेचारे काका जी !

आपने गुरुवार १८ दिसम्बर का मिड डे देखा ? काफी हो हल्ला रहा उसमें छपी काका यानि अपने राजेश खन्ना की कुछ तस्वीरों को लेकर ! बच्चों से लेकर बड़े बूढे तक कहीं दबी ज़बान में तो कहीं ऊँचे सुरों में उन तस्वीरों के बारे में बोलते बतियाते नज़र आए ! ख़ुद मिड डे
 
विक्षुब्ध सागर
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हम नही सुधरेंगे ....

आप चाहे तो जग हसाई करो या फ़िर भर भर के लानत भेजो ....हम नही सुधरेंगे साहब ! यह माना कि हम एक सुघड़ सुंदर सुशील पत्नी के पति हैं....खासे जवान बच्चों के बाप हैं...पर आप यह क्यों भूलतें हैं कि हम खलनायक हैं.... सठिया गए हैं तो क्या हुआ , बंदर भी कभी गुल
 
विक्षुब्ध सागर
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उठ गए नींद से ???

लीजिये ....अभी अभी सुना की कुछ लोग अचानक नींद से जाग उठे हैं। छब्बीस नवम्बर की स्याह परछाईं लगता है उनके बिस्तरों पर से हट गयी है। तभी तो अचानक अंगडाइयां लेकर उठ बैठे हैं...जय हो !! जय महाराष्ट्र , जय भारत . " भई...इस कसाब को तो फांसी दे दो...छोडो यह
 
विक्षुब्ध सागर
Dec 29 2009 11:53 AM
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क्या लिखा जाए ...???

कुछ लिखा था जो अचानक असंगत सा लगने लगा...शायद ब्लोगिंग के रस्ते का नया राहगीर होने की वजह से या...! अभी डिलीट करना समझ नही आ रहा सो , एडिट के बहाने कुछ और लिखने से शायद काम चल जाए ! लेकिन सवाल यह उठता है कि आख़िर लिखा क्या जाए ? क्या पाकिस्तान कि कार
 
विक्षुब्ध सागर
Dec 29 2009 11:53 AM
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जागो मेरे मन अचेतन.... जागो !!

ना असमर्थताओं से ना संभावनाओं से हम घिरे हैं अपनी ही मान्यताओं से ...!! ओढी है चादर ऐसी कि छोटी हो तो काट लें हाथ पैर सर गला अपना ( बाहिर न निकलना चाहिए ) सिकुडन साँस लेने देगी मगर कब तक ? हर कण आज विस्तार चाहता है... पनपता है हर बीज विस्तृत हो पेड़
 
विक्षुब्ध सागर
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....मगर बुरा क्या हुआ ?

हुआ...फ़िर से हुआ....पहले से कहीं ज्यादा हुआ! मगर बुरा क्या हुआ ? सुस्ताये पड़े कुछ लोगों की दुकानदारी फ़िर चल निकली , बना बनाया तैयार मसाला मिल गया ! टी वी चैनल जो कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से ऊंघ रहे थे ...फ़िर से अपना डोरी-डंडा लेकर मुस्तैद हो गए इस
 
विक्षुब्ध सागर
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नया ' टेरर म्युज़िअम ' : हमारा ताज

साहिबान ...हाँ जी ! ज़रा मैं आपका ध्यान इधर चाहूँगा ...यह देखिये , यह वोह कमरा है जिसके बाहर वो लंबा वाला आतंकवादी मारा गया गया था ...और उधर आपके दाहिने हाथ ...वोह निशान है हमारे कमांडो द्वारा दागी गयी गोलियों का ....अब ज़रा आगे आयें...." हाँ..इसी तर
 
विक्षुब्ध सागर
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हम किसे बदलने की बात कर रहे हैं ?

बदल दो ! हटा दो...! शिवराज पाटिल इस्तीफा दे ...आर आर पाटिल त्यागपत्र दे ....सी एम् को गद्दी छोड़ देनी चाहिए ...! एक टी वी चैनल पर पूर्व पुलिस अधिकारी ज़ोर ज़ोर से कह रही थी नेतृत्व बदलना होगा ! किस नेतृत्व को बदलने की बात कर रहे हैं सब ? रावन के कितने
 
विक्षुब्ध सागर
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vikshubdha

सवाल यह नहीं है की हम कहाँ हैं ... सवाल यह है की हम जहाँ भी हैं वहाँ कर क्या रहे हैं !! "
 
विक्षुब्ध सागर
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"सिगरेट पियेंगे ...लोगों के कपडे जलाएंगे और फिर कहेंगे "सौरी भाई साब" !

हाँ साब ! यही तो हो रहा है महाराष्ट्र में ! परसों महारष्ट्र विधान सभा में जो शर्मनाक हरकत हुई , सुना है उसके लिए एम् एन एस के लोग माफ़ी मांगेगे ! राम कदम कह रहे थे कि हम सदन के सामने खेद जतलायेंगे , अबू आज़मी से माफ़ी नहीं मांगेगे ! यह माफ़ी का फरमान भी
 
विक्षुब्ध सागर
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"कोई जिए या मरे...द शो मस्ट गो ऑन "

जी हाँ ! ठीक ही कहा है किसी ने ...कुछ भी हो जाए , कोई मरे या जिए , काम नहीं रुकना चाहिए ! ...हमारे यहाँ तो वैसे भी काम को भगवान् माना गया है ! पिछले दिनों कुछ इसी बात को चरितार्थ होते हुए देखने का मौका मिला ! इधर दिल्ली में फैशन की दुनिया का हंगामे-द
 
विक्षुब्ध सागर
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" शुभकामनायें "

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें "
 
विक्षुब्ध सागर
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ज्ञान पर , वैभव पर साम्राज्यवादी पिपासा की विजय ...

बचपन से न जाने कितने रूपों में, कितने अलग अलग संस्करणों के चेहरे लगाए रामायण की कथा सुनते पड़ते आयें हैं....यह रामचरितमानस है , गोस्वामी तुलसीदास की लिखी हुई ...यह रामायण है ...वाल्मीकि की ...यह कंबन की ....यह दक्षिण भारतीय , और यह पश्चिम प्रांतीय !
 
विक्षुब्ध सागर
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यार यह तो हद्द है....!!

बचपन से कुछ आलतू फालतू मैगजींस आदि में हम चित्र पहेलियाँ मज़े मज़े से सुलझाया करते थे ...कहीं कुछ अंकों को जोड़ कर खाली स्थान भरना या आँखों आदि को देखकर किसी फिल्म स्टार को पहचानना वगैरह ! खूब बेवकूफ बना करते थे ! बच्चे थे ....चलता था !लेकिन कहते हैं न
 
विक्षुब्ध सागर
Sep 22 2009 05:01 AM
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vikshubdha

विरोध की आग में धूं धूं जलती रेलगाडी के डिब्बों को देख एक अजीब सी कसमसाहट होती रही...रेलगाडी अब फलां स्टेशन पर नहीं रुकेगी तो इसे फूंक ही डालो ! ना रहेगी गाडी ऑर न ही बचेगा उसके चलने -रुकने का कोई सवाल ...सारी परेशानी ख़त्म ! वाह क्या सोच है ! लेकिन
 
विक्षुब्ध सागर
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" कहानी रौशनी की कभी ख़त्म नहीं होती, अँधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो "

कितने किस्से हैं ...कितनी ऐसी बातें जो पिछले दिनों रह रह कर उद्वेलित करती रही ...मनोभावों को किसी टूटे कांच की किरच की तरह कुरेदती रही....खुरचती रही पर कभी अपनी तो कभी नेटवर्क की खराब सेहत के चलते लिख नहीं पाया ...समग्रता से समेट नहीं सका ! कोई वक़्त
 
विक्षुब्ध सागर
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यार फ़िल्म है , इसे फ़िल्म ही रहने दो !

लीजिये ! फ़िल्म वीर को चार दिन और , उसी किले में शूटिंग की इजाज़त मिल गयी -जहाँ पहले शूटिंग क्र्यू द्बारा किले को नुक्सान पहुंचाने की बात हो रही थी , या जहाँ एक पुरानी दीवार ध्वस्त ही हो गयी थी ! राजस्थान सरकार का कहना है कि फ़िल्म निर्माता को इस नुक्
 
विक्षुब्ध सागर
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"...कुछ नही करेंगे तो कटेंगे ही !"

गुजरात में दंगे हुए ....जाने कितनी बेदर्दी से लोगों ने लोगों का क़त्ल किया . जिंदा तो जिंदा , कोख में पल रहे अजन्मे बच्चों तक को नहीं छोड़ा ....किसने किया ? कई नाम सामने आए ...कई जांच कमेटियां बैठी ...रिपोर्टें भी आ गयी , मगर.......! फिर कुछ मुंबई मे
 
विक्षुब्ध सागर
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"चुप हूँ , तुमको हैरानी है ......बोलूँगा परेशानी होगी ..."

ब हुत अरसा हुआ .....एक कवि मित्र हुआ करते थे ! उन दिनों मोबाइल फ़ोन तो थे नही बल्कि लैंड लाइंस भी घरों में कम ही हुआ करते थे ! एक बार फ़ोन बुक कर दो और फिर बैठे रहो साल दो साल इंतज़ार में ! बस आपसी मेल मिलाप ही संपर्क का सीधा साधा सा माध्यम था ...टच म
 
विक्षुब्ध सागर
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.....लेकिन अफ़सोस हमें आस्कर चाहिए !

मैं तो पहले ही जानता था की यह होगा और होकर रहेगा ! उनकी समझ में ' लगान ' नही आती .... ' तारे ज़मीन पर ' तो सर के ऊपर से ही निकल जाती है ! मगर झोपड़पट्टी का करोड़पति कुत्ता उनके कानो में भोंकता है और खूब भौंकता है ! क्यो न हो आख़िर डैनी बोयल ने जो तैय
 
विक्षुब्ध सागर
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झोपड़ पट्टी का करोड़पति कुत्ता और रहमान का गोल्डन ग्लोब अवार्ड !

कोई कुछ कह रहा है तो कोई कुछ, लगता है जैसे हर किसी के लिए "झोपड़ पट्टी के करोड़पति कुत्ते " ( Slumdog Millionaire ) पर कुछ न कुछ कहना ज़रूरी हो गया है ! तो चलिए , हम क्यों पीछे रहें ....इस शोर शराबे में हम भी अपनी तूती फूँक देते हैं ...चलते चलते ! इस
 
विक्षुब्ध सागर
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"सार्थकता"

स्पर्श भर लहर का भिगो दे मन सारा आकाश , तब तो सार्थकता है सागर की ; वरना धूल बन कर आंखों में चुभने की आदत तो हर किसी सूखी आंधी में होती ही है !!
 
विक्षुब्ध सागर
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....क्या यह जायज़ है ?

कला को कभी भी बन्दूक के मुहाने खडा नहीं किया जा सकता .... सास्कृतिक आदान प्रदान को रोकना किसिस काम नहीं आ सकता ! यह तो लोगों को परस्पर मिलाने का काम करता है , इसे राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए ..." यह कहना है प्रख्यात फ़िल्म निर्देशक श्याम बेनेगल का
 
विक्षुब्ध सागर