नई सोच's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
13 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
79
पाठक भेजे
1633
पसंद
87
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
20.67
पसंद करें
3
नापसंद करें

भोपाल का मृतलेख

भोपाल की त्रासदी के 26 वर्षों बाद उसपर जो हालिया फैसला आया है वह चौंकाने वाला है। उसी फैसले का विरोध दर्ज करती ये कुछ पंक्तियां उन लोगों को को समर्पित जो बेवजह इस त्रासदी के शिकार हो गये और उन कई पीड़ितों के साथ खड़े होने की एक कोशिश जो इस अन्यायी फैसले
 
उमेश पंत
पसंद करें
3
नापसंद करें

जंगलों में जीवन तलाशता वो

इन टू द वाईल्ड.....और एक दिन वो सब कुछ छोड़ कर चला जाता है। कहीं दूर अलास्का के जंगलों की तरफ। अपने मां बाप और बहन को छोड़कर। बिना कुछ बताये। क्यों। इसके लिये उसके पास कई कारण हैं। वो अपने मां बाप को बचपन से देख रहा है छोटी छोटी बातों पर लड़ते हुए। वो
 
उमेश पंत
पसंद करें
1
नापसंद करें

सिनेमा पर कार्यशाला

जामिया एमसीअसारसी के कुछ पूर्वछात्र फिल्मों से जुड़ी हुई एक कार्यशाला आयोजित कर रहे हैं। सिनेमा तकनीक में यदि आपकी रुचि हो और और आप कम समय में इसके मूलभूत सिद्धान्तों को समझना चाहते हों तो यह आपके लिये एक अच्छा मौका है। सिनेमाथैक नाम से शुरु हो रही इस
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

इनक्रोचमेंट, डिमोल्यूशन एंड डिस्प्लेसमेंट

सुबह सुबह नौएडा मोड़ से गुजरते हुए सड़क के किनारे देखा तो वहां मां दुर्गा की वो मूर्ति नहीं थी, ना ही नटराज की। वहां कुछ लोग थे जो बुल्डोजर लेकर कच्ची ईंटों से बने उन कच्चे घरों को तोड़ रहे थे जहां अब तक वो कुछ लोग रहते थे, जिनका रहना वहां गैवाजिब था, उन
 
उमेश पंत
May 21 2010 07:41 PM
पसंद करें
1
नापसंद करें

बांधों की टूटन से उपजते आन्दोलन

बड़े बांधों को बनाये जाने को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं हो रही हैं। विश्वभर में कुलमिलाकर 47665 छोटे बड़े बांध हैं जिनमें से सबसे ज्यादा 22 हजार बांध चीन मे, 6600 से ज्यादा बांध संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके बाद 4291 बांध भारत में हैं। लेकिन अब इन बांधों
 
उमेश पंत
टैग: बांध
May 01 2010 08:34 PM
पसंद करें
3
नापसंद करें

एक दोस्त का प्रोफेश्नल हो जाना

कई बार अपने आसपास लोगों को निहायत प्रोफेश्नल होता देख डर लगता है। समझ नहीं आता कि क्या ज्यादा जरुरी है। इन्सानी भावनाओं को जिन्दा रखते हुए जीना या प्रोफेश्नल होना। जल्दबाजी, बेचेनी फलतह तुनकमिजाजी, गुस्सा। समझ नहीं आता कि क्यों कोई काम शुकून से नहीं किया
 
उमेश पंत
पसंद करें
2
नापसंद करें

फिल्म में काम करने के इच्छुक सम्पर्क करें

ब्लाग जगत से सम्पर्क रखने वालों के लिये जो खास तौर पर फिल्मों के शौकीन हैं एक खबर अनुरोध की शक्ल में यहां दे रहा हूं। जामिया के एमसीआरसी में शूट हो रही स्टूडेन्ट फिल्म के लिये एक लीड एक्टेस की आवश्यकता है। अदाकारा की उम्र 20 से 25 साल के बीच हो। थियेटर
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

कुरुसावा के सपने

कई बार हम सपने देखते हैं और जब जागते हैं तो सोचते हैं जो हमने देखा उसका अर्थ आंखिर था क्या। पर अक्सर ज्यादातर सपनों को हम भुला ही देते हैं ऐसे जैसे उन्हें हमने कभी देखा ही न हो। पर क्या आपको नहीं लगता कि किसी दूसरे के सपने अपनी आंखों से देखना कितना
 
उमेश पंत
पसंद करें
1
नापसंद करें

पंचेश्वर बांध के सवाल पर

पंचेश्वर बांध पर इस ब्लौग में पहले भी लिखा जा चुका और इसी क्रम में रोहित का ये लेख यहां छापा जा रहा है। इस लेख के अंश दैनिक भास्कर और जनपक्ष् आजकल में छप चुके हैं। आशा है कि पंचेश्वर से जुड़े जनपक्षीय सवालों को समझने में यह लेख कारगर साबित होगा।रोहित
 
उमेश पंत
पसंद करें
2
नापसंद करें

लव.. सेक्स.. धोखा. और सच

लव, सेक्स और धोखा। इन तीनों में से कोई भी शब्द हाईपोथैटिकल और नया नहीं है। तीनों इन्सानी फितरत के हिस्से हैं। और इसी तरह हिन्दुस्तानी फिल्मों के भी। लेकिन दिबाकर बनर्जी जिस तरीके से इन तीनों को स्क्रीन पे दिखाते हैं उससे फिल्म की ग्रामर को ही एक नई धारा
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

सम्भावना डाट काम से तीन कविताएं

यहां दांईं ओर कमेन्ट बौक्स में एक मैसेज मुस्कुरा रहा है जिसमें हिन्दयुग्म के हालिया प्रकाशित काव्यसंग्रह सम्भावना डाट काम में प्रकाशित मेरी कुछ कविताओं को छापने का जिक्र है। रोहित की इस दोस्ताना गुजारिश पर उनकी कुछ कलाकृतियों के साथ उनके कुछ चित्रों और
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

उन्हें आपकी कोई केयर नहीं है जी

उफ एक बुरी खबर उनके लिये जो फेसबुक पर अपने दिल की बात कहकर जी हल्का कर लेने में भरोसा करते हैं। जो ये सोचते हैं कि दिल में उठे भावनाओं के तूफान को शब्दों के लबादे में लिपटाकर दुनिया को बता ही दिया जाय ताकि कुछ लोग जो इस हाले दिल से इत्तेफाक रखते हैं अपनी
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

रंग तो बहुत सारे पर अपना रंग हल्का

कुमाउनी होली के अपने अलग रंग हैं। इसमें में भी इतनी विभिन्नता है कि हर क्षेत में होली का कुढ नया जायका देखने को मिल जाता है। पिथैरागढ़ के छोटे से कस्बे गंगोलीहाट की होली के रंग में हमें होली से पहले ही डुबो रहे हैं युवा साहित्यकार महेश चन्द्र पुनेठा -महेश
 
उमेश पंत
Feb 27 2010 12:12 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

भूत के प्रकोप से मुक्ति की सच्ची कहानी

निलिता वचानी एक जानी मानी डाक्यूमेंट्री फिल्म मेकर हैं ये बात कल उनकी फिल्मों के अंश देखते और उन पर उन्हीं की टिप्पणियों को सुनते मालूम हुई। आईज आफ स्टोन उनकी उल्लेखनीय वृत्तचित्रों में शुमार है। साथ ही सब्जी मंडी के हीरे भी चर्चा में रही है। ऐसा कल ही
 
उमेश पंत
Feb 21 2010 11:27 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

1411- बाघों के नाम

आज के दौर में जंगल उदास हैंऔर वो लड़की जो बाघ की खाल से बना फर पहनकरशीशे में देख मुस्कुरा रही हैहमें जंगली सी दिखती है।पर ये उस दौर की बात हैजब जंगल उतने जंगली नहीं थेन ही आदमी उतना शहरी।जब एक दहाड़ सुनाई देने परअक्सर कहते थे गांव के लोगकि बाघ आ गया।हम
 
उमेश पंत
टैग: कविता
पसंद करें
1
नापसंद करें

डाट काम में सम्भावनाओं को तलाशती कविताएं और हिन्दयुग्म

प्रगति मैदान के गेट नम्बर सात के पास हाल नम्बर 2 में आज हिन्दयुग्म अपना वार्षिकोत्सव मना रहा था। साथ में होना था 38 उभरते हुए सम्भावनाषील कवियों की कविताओं के संकलन सम्भावना डाट का विमोचन। कुछ जाने पहचाने चेहरों के अतिरिक्त वहां जो लोग लोग मौजूद थे उनका
 
उमेश पंत
पसंद करें
2
नापसंद करें

ताकि चीते जीते रहें...

कल मेरे एक क्लासमेट और आत्मीय दोस्त शशांक वालिया का अचानक फोन आया। "यार तुम बडे ब्लौग शौग लिखते हो। एक ब्लाग मेरी रिक्वेस्ट पे भी लिखो यार। मैं चाहता हूं कि चीतों पर तुम कुछ लिखो। सेव टाईगर्स का टीवी पर एड देखा तो सोचा कि तुम्हें फोन कर लूं।" बडा अच्छा
 
उमेश पंत
पसंद करें
3
नापसंद करें

लाशों से कफन बीनने वालों पर बनी फिल्म को नेश्नल अवार्ड

जामिया के मासकम्यूनिकेशन रिसर्च सेन्टर में साउन्ड के लेक्चरार मतीन अहमद को फिल्म चिल्ड्रन आफ पायर की साउन्ड डिजाईनिंग के लिये इस बार का नेश्नल अवार्ड दिया जा रहा है। ये फिल्म वाराणसी के उन 6 बच्चों की कहानी है जो मरघटों पर जलती हुई लाशों पर लिपटे हुए कफन
 
उमेश पंत
पसंद करें
2
नापसंद करें

एक बेजुबान आक्रोश

सारे आक्रोष महज एक दुर्घटना बनकर समाप्त हो जाते हैं। ये आक्रोश भी कुछ ऐसा ही था। गोविन्द निहिलानी की इस फिल्म को देखकर ताजा ताजा बस यही समझ में आता है कि आक्रोश की अपनी असल आवाज उसके सन्नाटे में दबी होती है। मगर अक्सर इस चुप्पी के पीछे जो आक्रोश दबा होता
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

पंचेश्वर- टूटती उम्मीदों का बांध

पंचेश्वर बांध इन दिनों उत्तराखंड में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और संभावित डूब क्षेत्र के इलाकों में ये बांध प्रतिरोध को भी जन्म दे चुका है। ये प्रतिरोध जाहिर तौर पर उन लोगों का है, जो इस बांध के बन जाने के बाद सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। इस बांध के कारण
 
उमेश पंत
पसंद करें
1
नापसंद करें

पहाड़ी जायके के बहाने

मम्मी ने रात को भट के दाने भिगा दिये । सुबह सुबह मैं जब इन दानों को देखता हूं तो इनमें एक अजीब सी विशालता आ जाती है। रात को ये दाने इतने बड़े कहां थे। मुझे हैरानी होती है। कहीं संबह सुबह की धूप के घुलने से तो ये दाने फूल नहीं गये होंगे। मैं इस समय
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

यारसा गुम्बा के साईड इफैक्ट

कुछ समय पहले जब उत्तराखंड जाना हुआ तो वहां यूं ही चलते चलते यारसा गम्बू पर विनोद भाई से बात हो रही थी। बात करते करते महसूस हुआ कि कुछ रोचक जानकारियां सामने आ रही हैं। मैने बिना उन्हें बताये अपना फोन निकाला और उनकी सारी बातें रिकोर्ड कर ली। विनोद उप्र
 
उमेश पंत
Dec 29 2009 11:43 AM
पसंद करें
3
नापसंद करें

बदतर होते ये सरकारी स्कूल

जामिया के एमसीआरसी में उस दिन एक अजीब वाकया सुनने को मिला। सुनकर सभी चैंके। और एक अजीब वितृष्णा से मन भर उठा। फस्र्ट ईयर के कुछ छात्रों ने बताया कि उनकी क्लास की एक लड़की को भरतनगर के सरकारी स्कूल के लड़कों ने स्कूल कैंपस में मोलेस्ट किया है। दिल्ली
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

कोपेनहेगन के बहाने

जलवायु परिवर्तन के मुददे पर बहुत कुछ लिखा जा रहा है आजकल। बहुत सी बहसें। बहुत से जुलूस। बहुत से कोंन्फ्रेस, सेमीनार, किताबें और न जाने क्या क्या। पर असल में किया क्या जा रहा है कम से कम ऐसे बड़े श्हरों में जहां बहसें अपने इन्टलैक्चुअल रिदम के साथ उफा
 
उमेश पंत
पसंद करें
1
नापसंद करें

डेज़ आफ हैवन यानि खूबसूरती के पल

डेज़्ा आफ हैवन उन कमाल की फिल्मों से एक है जिन्हें आप चाहें तो बस उनकी सिनेमेटोग्रेफी के लिए देख सकते हैं। इस फिल्म को कम्प्यूटर पर देखते हुए आपकी स्पेस की परेषान हो सकती है। क्योंकि हर दूसरा फ्रेम आपको मजबूर कर देता है कि फिल्म को रोककर बस उस फ्रेम
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक वीडियो ब्लाग के बारे में

हिन्दी में ब्लाग कैसे बनायें कई लोग ये सवाल करते मिल जाते हैं। शुरुआती दिनों में ब्लाग कैसे बनायें यह भी लोगों की समस्या का विषय था। कई लोगों के लिये अभी भी ये समस्या का विषय है। ब्लाग बनाते हुए और बनाने के बाद कुछ छोटी छोटी दिक्कतें आती हैं। मसलन शु
 
उमेश पंत
पसंद करें
2
नापसंद करें

क्या आपका फोन चोरी नही हुआ

सिट यार फोन चोरी हो गया। घर आकर बताया तो भाई लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर आई। पहली बार जब घर आकर बताया था तो ऐसा नहीं हुआ था। तब सबको लगा था कि हां कुछ चोरी हो गया। ऐसा होना नहीं चाहिये था। कैसे कोई फोन चोरी कर सकता है। जेब से निकाल कैसे लिया फोन
 
उमेश पंत
पसंद करें
1
नापसंद करें

लगत जोबनवा मा चोट को खोजती एक फिल्म

लगत जोबनुवा में चोट, फूल गेंदवा न मार। ये शब्द फिर गाये नहीं गये। ठुमरी के ये बोल कहीं खो गये होते।शब्द ही थे। खो जाते। अगर सबा उन्हें ढ़ूढ़ने की कोशिश नहीं करती। लेकिन सबा दीवान को न जाने क्या सूझी कि वो इन शब्दों को ढ़ूढ़ते ढूंढ़ते एक सिनेमाई सफर त
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

युद्व का उन्माद और सोल्जर ब्लू

युद्व का उन्माद कितना विभत्स, कितना भयावह और अमानवीय हो सकता है सोल्जर ब्लू में देखा जा सकता है। ये एक अमेरिकन फिल्म है। इतिहास में झांकती, जंग के मैदान में ले जाती और उस मनहस्थिति से रुबरु कराती जो एक आदमी को निहायत जंगली बना देने पर उतारु कर देती ह
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

और तीन की टिकट नहीं रही.......

दिल्ली की बसों में एक और बड़ा दर्दनाक वाकया हुआ। बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इस हादसे में 3 रुपये की टिकट नहीं रही । दिल्ली में बसों के किराये बढ़ गये। पांच का टिकट दस का हो गया और दस का पन्द्रह में बदल गया। सात की बिसात भी अब नहीं रही। इस घ
 
उमेश पंत
पसंद करें
1
नापसंद करें

खरगोश औडियन्स पोल में सबसे आगे

सोने जा ही रहा था कि एक सूचना मिली। सूचना बड़ी अच्दी लगी तो सोचा आपको बता ही डालूं। खरगोश को ओसियान के दर्शकों ने सबसे ज्यादा पसंद किया। ये तो पता ही था। लेकिन बात और साफ हो गई जब ओसियान के पुरस्कारों की घोषणा की गई। औडियन्स पोल कैटेगरी में खरगोश ने
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

ओसियान उड़कर आया सुपरमैन आफ मालेगांव

वे फैज नहीं हैं फैजा हैं इसलिए उनका अंदाजे बयां अलहदा है। फैज शब्दों से अपनी बात कहते थे फैजा ने वृत्तचित्र के जरिये कही। और जो कही कमाल कही। किसी कविता सी दिल में उतर गई चित्रों के कई वृत्त सी बनाती जैसे नदी के शान्त प्रवाह में कंकड़ को हल्के धकेल द
 
उमेश पंत
पसंद करें
1
नापसंद करें

ओसियान् में खरगोश

ओसियान्स में दिखा वो खरगोश रगों में अब तक एक अजनबी सी रुमानियत पैदा कर रहा है। एक मासूम सी, बच्ची सी पर पर फिर भी प्रौढ़, परिपक्व सी है ये रुमानियत। बड़ा रुहानी सा होकर भी रुहानी भाव न होने सा कुछ, पर फील पूरा रुहानी, पूरा नशा लिए हुए। सात बजकर पैंता
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

ओसियान का दूसरा दिन

ओसियान फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन आज तीन फिल्में देखी। तेजा, मैन वूमेन एंड अदर स्टोरीज और ब्लाईंड पिग हू वान्टस टू फलाई। पहली फिल्म तेजा हेला जर्मिया के निर्देशन में बनी है। फिल्म अफ्रिका के इन्टलेक्चुअल युवाओं के पलायन पर केन्द्रित है। फिल्म मुख्य
 
उमेश पंत
पसंद करें
2
नापसंद करें

ब्लागिंग से जुड़े कुछ डर कुछ शिकायतें

एक फिल्म आई थी, तारे जमी पर। फिल्म की सफलता के बाद फिल्म के मुख्य कलाकार दर्शील ने एक सवाल उठाया था कि जब उनकी अदाकारी बेहतर है तो उन्हें बेस्ट 'बाल कलाकार' की जगह बेस्ट 'कलाकार' का पुरस्कार क्यों नहीं दिया जा सकता। मायने यही थे कि किसी चीज को रिकोर्
 
उमेश पंत
पसंद करें
1
नापसंद करें

अब आयेगा इन्टरनेट पर दुकानदारी का दौर

इन्टरनेट इन दिनों दुकानों का काम भी कर रहा है। यहां पर कई ऐसी साईटस मौजूद है जो आपको विभिन्न प्रोडक्टस की जानकारी दे देती हैं वो भी घर बैठे। आपके मनपसन्द कपड़े हों या फिर अन्य कोई एसेसरी इन्टरनेट पर उनके मूल्यों के साथ उनकी गुणवत्ता की भी जानकारी ली ज
 
उमेश पंत
पसंद करें
3
नापसंद करें

एक ज्यादती है कपिल साहब का बयान

जुलाई 2009 को कपिल सिब्बल ने लोकसभा में अपने भाषण में कहा था कि शिक्षा व्यवस्था में सभी तरह के नये प्रयोगों को शामिल किया जायेगा। और हाल ही में उन्होंने बयान जारी किया आआईटी में प्रवेश के लिए 80-85 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होना चाहिये। 15 जुलाई को द
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

आस्था के लिए जीता एक नगर: त्रयम्बकेश्वर

इस बार त्रयम्बकेष्वर जाना हुआ। लगा कि भक्ति और आस्था ये ऐसे शब्द हैं जिनका कटटरवाद से कोई लेना देना नहीं है। महाराष्ट में नासिक के पास एक छोटा सा कस्बा है त्रयम्बकेश्वर जिसका अस्तित्व अगर है तो उसके पीछे बस यही भक्ति और आस्था है। लगता कि है कि ये कस्
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

नई सोच

महेश चंद्र पुनेठा जी की कविताएं इस ब्लाग पर मैं लगातार प्रकाशित करता रहा हूं। इसी कड़ी में आज पेश हैं उनकी ये दो उम्दा कविताएं..... अपनी जमीन पहाड़ इसलिए पहाड़ है क्योंकि जितना फैला है वह आसमान में उससे अधिक धॅसा है कहीं अपनी जमीन में उतरन प्रवाह है
 
उमेश पंत
पसंद करें
0
नापसंद करें

ईद मुबारक.....

हम ईदगाह पढ़ते बड़े हुए। और जब जब हामिद के चिमटे ने उसकी दादी की आंखें को खुशी से सराबोर कर दिया हमें लगा कि ईद आ गई। और आज फिर जब ईद आई है हमें हामिद की दादी याद हो आई है। उसी चिमटे उन्हीं खुशी भरे आंसुवों के साथ। जामिया में पढ़ते उसे समझते मुझे पांच
 
उमेश पंत
टैग: ईद पर
Sep 21 2009 01:29 AM