M A D (Make A Difference)'s Image

M A D (Make A Difference)

http://madmandate.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
11 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
32
पाठक भेजे
2050
पसंद
52
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
64.06
पसंद करें
1
नापसंद करें

हीलियम के हम ग़ुब्बारे

काँच,कीलें,पिन नुकीले,धूर्त धरती,छत,दीवारें जल रहे धू-धू अंगारे,हीलियम के हम ग़ुब्बारे; सब हमें ही ताकते हैं,साधते हम पर निशाना, वो ज़माना लद गया , आसान था जब पार पाना, जन्म से वो 'खल' मैं 'नायक' , वो 'कमीने' हम 'बेचारे', जल रहे धू-धू अंगारे,हीलियम के हम
पसंद करें
3
नापसंद करें

"मत-लब" की कुछ बात

तन्हाई से आज करेंगे,मतलब की कुछ बात,सन्नाटे!भन्नाते रहना, झींगुर वाली रात।गहन-मनन में शून्य न होगा, होगा एक विचार,कुंठा का उपचार करेगा,परामर्श का सार,कुकुरमुते,बुदबुदे न होंगे पल-प्रतिपल जज़्बात;तन्हाई से आज करेंगे,मतलब की कुछ बात।विगत दिवंगत पूज्य न
पसंद करें
1
नापसंद करें

उनका रुधिर उबलता होगा?

करतल ध्वनि, ललायित चेहरे, मनस पटल पर चलता होगा,जो इतिहास मिटाते लिखते, उनका रुधिर उबलता होगा?क्या विक्षुब्ध न होते होंगे? भाग्य-भाग्य न रोते होंगे?या फिर देन ईश की कह दूँ, वो विशेष ही होते होंगे,किस टकसाल ढले ? किस धातु ? जिनका सिक्का चलता होगा,जो इतिहास
पसंद करें
2
नापसंद करें

लाल-बत्ती/हरी-बत्ती

हङबङाहट,चिङचिङाहट,छटपटाहट,ज़बरदस्ती;टुकङा-टुकङा,शहर सिकुङा, "लाल-बत्ती/हरी-बत्ती"।घोसले से चोंचले देखे,तो चाहत थी बङी,पंख फूँको शंख शक्ति का,वहाँ मंज़िल खङी,दलदली दल, चल चले चल, सर झुका, है सरपरस्ती;धुंध,धूलें,धूप,रातें,
टैग: green
पसंद करें
0
नापसंद करें

बेतरतीब

अंगुर-अंगुर, भंगुर-भंगुर, झींगुर-झींगुर झन्नाटाकतरा-कतरा, पसरा-पसरा,बिखरा-बिखरा सन्नाटा।बढते-बढते, चढते-चढते, लुङके-लुङके चित्त पङे,उजले-उजले, पिघले-पिघले, बिखरे-बिखरे चित्र बङे।पस्त-पस्त फिर सुस्त-सुस्त फिर ज़बरदस्त एक फर्राटा,कतरा-कतरा,
टैग: कविता
पसंद करें
0
नापसंद करें

मैं क्या हूँ?

मंद हुआ कोलाहल, हालाहल मन में भर बैठा हूँ, जो समक्ष, वो है सक्षम,वो ही उत्तम,तो मैं क्या हूँ? चढ आया अब तो सूरज सर, परछाईं तक छोटी है, अब तक तो थी कानाफूसी,प्रखर बात अब होती है, हर करतल,हर नज़र पूछती,मैं उसका क्या लगता हूँ? जो समक्ष, वो है सक्षम,वो ही
पसंद करें
0
नापसंद करें

जोगी आया रे...

अगर उन्होंने हमारे पास एक फिदायीन भेजा है दिखाने के लिये कि वो क्या हैं,तो हम उनके पास एक इंसान भेजेंगे दिखाने को कि हम क्या हैं"'ब्लैक एण्ड व्हाईट' के अंत में बोला गया ये संवाद फिल्म का सार लगा, कहने को देशभक्ति के पुराने ढर्रे पर ही बनी एक और फिल्म
पसंद करें
0
नापसंद करें

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर

पठान के आखिरी ऒवर की चौथी गेंद फेंकने की देर थी कि बस...उसके बाद मैदान और दर्शक दीर्घा में अंतर करना नामुमकिन सा हो गया, 105 करोङ (..और जारी) भारतीयों के गले रुँध गये, कुछ की आँखो की कोरों पर आँसू चिपक गये और कुछ के ढुलक पङे, जोश में मदमस्त किसने कैस
पसंद करें
0
नापसंद करें

मज़ा आ रहा है,

पलक दर पलक कुछ नया आ रहा है, बदलने दो जीवन मज़ा आ रहा है, कभी जो किताबों में किस्से पढे थे, पलटते-पलटते, पलटते बङे थे, खङे थे कभी जो पहाङों के ऊपर, अचानक ज़मीं पर वो औंधे पङे थे, हद-ए-मोङ पर रास्ता आ रहा है, बदलने दो जीवन मज़ा आ रहा है। कई रास्ते जैसे ह
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बहादुरः भाग २

मेरा एक जैसी चीनी शक्ल वाला भ्रम तो टूट चुका था और काफी अच्छी पहचान हो चुकी थी बहादुर से,फिर एक दिन पापा का ट्रांस्फर हो गया और हम पास के शहर में चले गये, बात आयी गयी हो गयी, मैं हर सप्ताहांत घर जाता,वो मेरा इंजीनियरिंग का आखिरी साल था, एक दिन अचानक
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सूरज नहीं डूबने दूँगा

एक वर्ष और बीत गया, हर वर्ष की भाँति समय की चौखट पर फिर क़दमों की रफ़्तार मंद हो चली है, थोङी बेचैनी, थोङी उदासी, कुछ झूठी सच्ची उम्मीदें, और गठरी भर अधूरे वादे और सपने, ...आग़ाज़!, शुरूआत!, शुभारंभ!,उदघाटन!, ये शब्द बङे रंगीन से हैं, रोशन और आशा से भ
पसंद करें
0
नापसंद करें

10 Things To Do Before We Die...'क्या?!!' 'कुछ नहीं।'.....

घण्टे ,Final-Assault,'Operation-Tornedo',NSG,Deccan-Mujahiddin,Taj,Tridant, Nariman, आतंकवादी / वाद , हमला , लापरवाही , ...सुर्खियाँ , सुर्खियाँ , सुर्खियाँ ,... लांछन , आक्रोश , बैचेनी , क्रोध , विजय , गर्व ,... भावनाएं , भावनाएं , भावनाएं ,... ये त
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

फैशन का है ये जलवा..

बङे सपने छोटे शहरों में ज़्यादा बिकते हैं,क्योंकि वहाँ की बोरिंग ज़िंदगी को चटपटा बनाने के लिये ख़ूबसूरत सपनों का सहारा लेना ही पङता है..." "जब सपने टूटते हैं तो उनकी गूँज का असर गहरा होता है.." "सपने देखते हैं तब हमें कोई नहीं बताता कि उनके बदले हमें
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक दीवाली ऐसी बीती

कानों में अनवरत पटाखे, आँखें ताक रहीं थीं भीति, एक दीवाली ऐसी बीती। कुछ तो हो-कुछ तो हो,कहकर, मन तो उछल रहा था बल्ली, अरमानों को पंख लगे थे , कदमों की थी गति पुछल्ली। अल्हङपन अधमरा रह गया, अब के मायूसी ही जीती; एक दीवाली ऐसी बीती। कंधों के बाज़ार हो ग
पसंद करें
0
नापसंद करें

ख़ुदा जाने ये क्यों हुआ...

जो कल बीत गया उसके लिये कुछ किया नहीं जा सकता, पर आने वाले कल को बेहतर बनाने के लिये, आज को सँवारना होगा"* *(भावनाओं पर ध्यान दें,लफ्फाज़ी पर नहीं) राज महाराज के इसी जीवन दर्शन पर आधारित है बहुचर्चित फिल्म 'बचना ऐ हसीनों', और जीवन दर्शन का प्रेरणा स्त
पसंद करें
0
नापसंद करें

आओ सेण्टियाप मचाएं...

हम आज फिर भावुक हो लिये, भावुक अर्थात 'इमोशनल' जिसका तद्भव चल रहा है 'सेण्टी मारना' 'सेण्टी होना' और न जाने क्या क्या क्रियाएं लगाकर 'सेण्टी' शब्द की फजीहत की जा रही है, पहले तो ये था कि सेण्टित्व का भी एक वातावरण होता था, नदी का शांत किनारा, कमरे का
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मित्र

रचने वाले ने रच डाली,दुनिया बङी विचित्र, रिश्ते नाते पल दो पल के जीवन भर के मित्र। कष्ट समेटे रहना मुश्किल,मन की बातें कहना मुश्किल, छिन में हो मन में हल्कापन,रहें मित्र जो गम में शामिल, रहे साफगोई बन जाते कलुषित वचन पवित्र। रिश्ते नाते पल दो पल के ज
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ऊँगलियाँ उदास, पाँव पूछते नहीं पता...

बिन जली वो बिजलियाँ , जो तार से लटक रहीं, नहर ठहर गयी है प्यास, भागती सङक रही। ऊँगलियाँ उदास, पाँव पूछते नहीं पता, वो कँपकँपी कपाल की गाल से ढुलक रही। डील की दलील में, दलील के दलाल गुम, सवाल का पता नहीं, जवाब की ढिशुम ढिशुम, दण्ड,भेद,साम,दाम, आम आदमी
पसंद करें
0
नापसंद करें

अवकाश क्यों नहीं लेते तुम?

खिङकी से देखा तो सूरज डूब रहा था पर्वत में; मैं भागा झटपट उस ओर,सवार हवाओं के रथ में; रोक कहूँगा आज न जाओ,डर लगता है अँधेरे में; आज करो आराम,रुको न कुछ दिन मेरे बसेरे में; कल प्रभात से मैं कह दूँगा,पेट दर्द है लेटे तुम; कभी कभी कुछ ऐसा कह,अवकाश क्यों
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

शौर्य क्या है?

शौर्य क्या है? 32 गोलियाँ खाकर , 21 तोपों की सलामी पा लेना, या अपने आप से लङकर तारीख को बचा लेना, अपने विश्वास को अटल सत्य मान, भगवान को नकार देना, या सत्य पर अटल विश्वास करके,आसमान को चुनौती देना; शौर्य की स्टार कास्ट देखकर एक सहज उत्सुकता तो जागती
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

'फर्स्ट इम्प्रेसन इज लास्ट इम्प्रेसन'

फर्स्ट इम्प्रेसन इज लास्ट इम्प्रेसन' इसी जुमले को बार बार उछाल कर प्रचार किया गया था 'टशन' का,अब प्रतीत हो रहा है कि ये जुमला इन पर ही भारी पङ गया, जिस तरह से फिल्म के प्लाट को गुप्त रखा गया और रफ टफ छवि वाले प्रोमो दिखाये गये वो उत्सुकता जगाने के लि
पसंद करें
0
नापसंद करें

'सितारे ज़मी पर...

उम्रः14 वर्ष संपत्तिः30-40 लाख आयः10-20 लाख या ज़्यादा पेशाःस्टेज परफॉर्मर किसी ज़माने में इक्का दुक्का ही ऐसे प्रोफाईल्स सुनने को मिलते थे, किंतु आज हर तीसरे महीने दो-तीन सितारे जन्म ले रहे हैं, रियालिटी शो का फॉर्मूला हिट हो चुका है,और हर मध्यम वर्गी
Dec 29 2009 11:51 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्यारा सा बचपन

लगता है ज्यों कल ही खिला था, बंद कली सा जो सिकुङा था , पंखुङियों पर पङी ओस पर, चंचल रविकर चमक उठा था, सात रंग की विभा समेटे माँ के आँचल में सिमटा था , वो मेरा प्यारा सा बचपन, पावस सा लुकता छिपता था। नहीं मिला जब कोई बहाना,मजबूरी थी शाला जाना, वहाँ पह
टैग: Innocence
पसंद करें
0
नापसंद करें

चलो कमबख़्त हो जायें

हकीकत मार लेती है , चलो कमबख़्त हो जायें,जताकर प्यार 'लेती है' , चलो कमबख़्त हो जायें।हाँ अक्सर 'खूँ' में खौले हैं , शहादत के कई किस्से,'बनो तारीख़', ऐसी सीख देते , सुरमयी किस्से, मेरे मक़सद की खिङकी पीट आये फिर वही किस्से,हमें कर ज़ार देती है , चलो
Aug 23 2009 04:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बङप्पन बचपनाने लग गया

चटकती चट्टान,चिल-चिल चमकती चिंगारियाँ,धधकती सी धूप , धूल-धूसरित सी धारियाँ,चिङचिङा सुनसान रस्ता बङबङाने लग गया,ग़र्म मौसम धूल से साज़िश रचाने लग गया,बूँद वाले बारिशी गीले ग़लीचे बिछ गये।फ़र्ज़ में बाँधा बङप्पन बचपनाने लग गया।आँख के मोती छिटककर बूँद बारिश
टैग: कविता
पसंद करें
2
नापसंद करें

क्यों इतने बेचारे हम?

कभी शराफ़त , कभी मुसीबत , कभी वक्त़ के मारे हम , क्यों इतने बेचारे हम ? उहापोह में फँसे , धँसे उस मोह में जिसका ग्यान नहीं ; कहीं किये समझौते अगणित , बिके कहीं सम्मान नहीं , बिफरे - बिफरे फिर भी झेलें , थू - थू की बौछारें हम , क्यों इतने बेचारे हम ?
पसंद करें
2
नापसंद करें

भभक उठा जो क्रोध

भभक उठा जो क्रोध , भस्म हो गयी मति , सती हुई विमर्श की विरल विडंबना। रक्त रक्त हो गया , विधी विरक्त हो गया , प्रहार के , संहार के , श्रंगार में है संजना। घमण्ड है प्रचण्ड , मुण्ड दर्प सर्प कुण्डलित , लोभ , मोह , प्राप्ति से हो रहे नयन ललित , शुचित लग
टैग: Love
पसंद करें
1
नापसंद करें

हर मकान ओट ढूँढते न फिरो

कसमसाहट सी ,खलबली सी है, शाम फिरसे धुली-धुली सी है, रूठ कर लापता हुआ है दिन, रात कर चुगली,अब भली सी है, ग़म,गिले,गालियाँ,ग़ुबार,गरज; ग़ल्तियाँ,गाज,गनीमत,ग़फ़लत, दिल-दबा-तार्रूफ़-ए-ज़ुबाँ तो करो, हर मकान ओट ढूँढते न फिरो। आज फिर ख़ाक हो गया मक़सद, और क
पसंद करें
2
नापसंद करें

जय हो!

ऑस्कर में 10 नामांकन,3 श्रेणियों में किसी भारतीय का नामांकन, 'Slumdog Millionair' ने नये कीर्तिमान रच डाले, 'तीसरी दुनिया' 'पिछङा देश' 'निर्धन' 'निम्न' अकिंचन' हतोत्साहित कर देने वाले संबोधन सुन-सुन कर हम इतने नकारात्मक हो गये कि फिल्म की भारतीयता पर
पसंद करें
5
नापसंद करें

रॉक ऑन...ज़िंदगी मिलेगी न दोबारा...

जियो अपने सपनों को' ये है संदेश युवाओं में लोकप्रिय हो चुके फरहान और उनकी 'रॉक ऑन' टीम का,सबसे पहले तो टीम को बधाईयाँ विश्व में प्रतिष्ठत 'रोलिंग स्टोन्स' पत्रिका के मुखप्रष्ठ में आने के लिये, ए. आर. रहमान के बाद ये दूसरे भारतीय हैं जिन्हे यह गौरव प्