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16 Jun 2010
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अब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरे

अब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरेअब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरेजग की ज्वाला में जला मन, ढूंढे तेरी छाँव रेअब तो बस............................................एक तेरी प्यास तेरी आस, हर एक श्वास मेंतुझको पा जाऊं तड़पता मन ,इसी विश्वास में रिश्ते  नाते तोड़ रख
 
योगेश स्वप्न
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आ भी जाओ

आ भी जाओ (भजन) जब तड़प उठ ही गई है, तुमको पाने कि ह्रदय मेंदूर तुम रह ना सकोगे , श्याम मेरे आ भी जाओहम तुम्हारे हो चुके  , क्यूँ तुम मेरे होते नहींगैर तुम कह ना सकोगे , श्याम मेरे आ भी जाओये मिलन कि चाह मेरी , ये विरह कि पीर मेरीऔर तुम सह ना सकोगे,
 
योगेश स्वप्न
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इस दुनिया में अपना कोई घर ना बने तो अच्छा है

इस दुनिया में अपना कोई घर ना बने तो अच्छा है ( आत्म - चिंतन)इस दुनिया में अपना कोई, घर ना बने तो अच्छा हैजो फक्कड़ बन घूम रहा है , वो ही साधू सच्चा हैये दुनिया परदेस है इसमें ,रहने कि क्यूँ ठान रहासभी पराया है इस जग का, जिसको अपना मान रहाये सपनों कि नगरी
 
योगेश स्वप्न
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बस यही मुश्किल है

प्रस्तुत है एक और पुरानी लिखी रचना.  बस यही मुश्किल है तोड़ दूं कसमें तमाम, और वादे भूल जाऊंबस यही मुश्किल है मेरी , कैसे मैं उसको भुलाऊंमुझसे ज्यादा कीमती हैं अश्क मेरे यार केहै अभी नादान मेरा यार क्यूँ उसको रुलाऊंकोई सब कुछ जानते भी जब बने
 
योगेश स्वप्न
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दूसरों में क्यूँ बुराई खोजता

दूसरों में क्यूँ बुराई खोजता दूसरों में क्यूँ बुराई खोजताअपने भीतर भी कभी तो झांक लेसबके अपने कर्म  हैं अपने हैं फलअपने कर्मों को भी थोडा आँक लेदूसरों में क्यूँ बुराई खोजता.............................. रब अगर करता है सब, "कर्ता"  है "वो"क्यूँ
 
योगेश स्वप्न
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श्याम मेरा हाथ मत ना छोड़ना

चल चलें, होली कि टोली में मचाने को धमालरंग दे अपने रंग में, सबको, लगा, रंग-ओ-गुलालबीती बातें भूल जाएँ, क्यूँ करें उनपर मलाल आ ,गले लग जा, ह्रदय पर ,प्यार के कुछ रंग डालहोली के पवन पर्व पर आपको और आपके परिवार को शुभ कामनाएं.प्रस्तुत है श्याम के रंग
 
योगेश स्वप्न
टैग: भजन
Feb 28 2010 08:37 PM
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हम तो ऐसे ही कहेंगे जी "गज्जल"

हम तो ऐसे ही कहेंगे  जी "गज्जल" (होली के अवसर पर विशेष ) टोकरी ये भर गई , कविताओं सेसुनलो फिरता हूँ गधे-सा लाद करदेर से बैठा हूँ इस उम्मीद मेंमैं सुनाऊं और तू इरशाद करएक दो मजबूर हो कह देंगे "वाह"और सब सोचेंगे "मत बकवाद" करतू किये जा कर्म गज्ज्लें
 
योगेश स्वप्न
Feb 27 2010 04:20 PM
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झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्याम

झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्याम (एक भजन)झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्यामझड़ी लग गई है अविराम , अब तो आन मिलो मेरे श्यामकहाँ -कहाँ खोजा प्रभु तुमको, मंदिर मस्जिद तीरथ छानेभटक भटक कर तुम्हें खोजते, बीत गए कितने युग जानेहार
 
योगेश स्वप्न
Feb 18 2010 08:46 AM
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प्रीत की पहली निशानी याद है

चलिए आज  VALENTINE DAY  पर कुछ पुरानी यादें ताज़ा करते हुए निम्न दो रचनाएँ प्रस्तुत कर रहा हूँ . हालाँकि  VALENTINE DAY  का  चलन कुछ ही वर्ष पूर्व शुरू हुआ है, तो समय की धारा के साथ बहते हुए  क्यूँ न इसका आनंद लें.प्रीत की
 
योगेश स्वप्न
Feb 14 2010 08:20 AM
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कुछ दोहे

धन की खातिर ना किसी, मिले मनुज का शाप नेता गर तू बन गया , कर्म ना अपना भूलसच्ची सेवा कर सदा यही धर्म का मूलव्यापारी है तू अगर , नानक से कुछ सीखसच्चा सौदा कर सदा, मानव जैसा दीखबना चिकित्सक तो सदा, जान बचा निष्पाप धन की खातिर ना किसी, मिले मनुज का
 
योगेश स्वप्न
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प्यार किसी से, ना कर, ज्यादा, दुःख होगा

प्यार किसी से,  ना कर, ज्यादा, दुःख होगा प्यार किसी से,  ना कर, ज्यादा, दुःख होगा बदल ले अपना अभी इरादा दुःख होगादुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगाप्यार किसी से, ना कर .......................वो समझेगा, कोई स्वारथ है तेरालिपट रहा क्यूँ, कोई
 
योगेश स्वप्न
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खुल गई है फिर पुरानी डायरी

खुल गई है फिर पुरानी डायरीखुल गई है फिर, पुरानी डायरीआ गई फिर याद, भूली शायरीहो गए पीले सभी, पन्ने मगरगंध अब तक भी, सुहानी आए रीफूल सूखे कह रहे, रोते हुएयाद ना दिल से पुरानी, जाए रीक्या कहें मुश्किल, हमें उसके सिवाआज तक दूजा ,कोई ना भाए रीआज भी सुनकर,
 
योगेश स्वप्न
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चाँद पर बादल, घनेरा हो गया

चाँद पर बादल, घनेरा हो गया  कौन था क्यूँकर, वो मेरा हो गयाआरजूओं का, सवेरा हो गयाधडकनों में आ गया, तूफ़ान-सादिल में ये किसका, बसेरा हो गयाहाल मेरा देख, सब पूछें हैं क्यूँ ?बात क्या है? कौन तेरा हो गया?दर्द का अहसास भी होने लगाराम जाने, क्या बखेड़ा हो
 
योगेश स्वप्न
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छिपा हुआ जो एक गुण , सिर्फ उसी को देख

छिपा हुआ जो एक गुण , सिर्फ उसी को देख  झूठे धोखेबाज़ को, लानत औ धिक्कारलेनदार होवें खड़े,आकर जिसके द्वारकसमें खा , फिर जाए जो, कितना है वो नीचकरिए चौराहे उसे, नंगा सबके बीचजो दाता के नाम पर, धोखा देता जाएनिश्चय ही खा जायेगी ,उसको सबकी हायसबका पैसा
 
योगेश स्वप्न
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राधिका

राधिका प्रेम की तुम पहचान राधिकातुम हो मेरी प्राण राधिकामैं हूँ तुम बिन, जैसे ह्रदयधड़कन बिन निष्प्राण राधिकाप्रेम की तुम पहचान........................अमर प्रीत का गान राधिकाकान्हा का सम्मान राधिकावंशी के स्वर से भी प्रतिक्षणनिकल रही है तान "राधिका"प्रेम
 
योगेश स्वप्न
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ना धन , ना सम्मान चाहिए

ना धन , ना सम्मान चाहिए ना धन , ना सम्मान चाहिएसिर्फ तुम्हारा ध्यान चाहिएतेरे नाम गुणों को गायेऐसी मधुर जबान चाहिएना धन ना सम्मान..................................तुमसे ही पहचान चाहिएनिर्मल मन औ प्राण चाहिएतेरे नाम गुणों को गायेऐसी मधुर जबान चाहिएना धन
 
योगेश स्वप्न
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मो से रूठ गए री घनश्याम

लीजिये एक और रचना "श्याम -श्याम  भजो" कैसेट से. मो से रूठ गए री  घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं-२ मो से रूठ गए री  घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं-२मोहे सूझे ना कुछ हाय राम, बता दो उन्हें कैसे  मनाऊं -2  बता दो उन्हें कैसे
 
योगेश स्वप्न
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तेरी याद मेरे साथ है तन्हा नहीं हूँ मैं

लीजिये एक और रचना पुरानी डायरी सेतेरी याद मेरे साथ है तन्हा नहीं हूँ मैं  तेरी याद मेरे साथ है, तन्हा नहीं हूँ मैंतारों से भरी रात है ,वीरां नहीं हूँ मैंपूछूंगा हाल जब कभी, आओगे सामनेख़्वाबों में मुलाक़ात है, गूंगा नहीं हूँ मैंहाँ जानता हूँ दर्द,ये
 
योगेश स्वप्न
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ना भुला सका

लीजिये एक और रचना पुरानी डायरी से.ना भुला सका मैंने तेरी राह ना देखी, इंतज़ार भी नहीं कियासच कहता हूँ ,दिल से, मैंनेतुझको प्यार भी नहीं कियाफिर भी जाने क्या कारण है तुझको मैं ना भुला सकातुझसे कभी ना मिलना चाहतेरा रूप ना कभी सराहावफ़ा की कोई कसम ना
 
योगेश स्वप्न
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नव वर्ष २०१० की हार्दिक मंगलकामनाएं

नव वर्ष २०१० की हार्दिक  मंगलकामनाएं. ईश्वर २०१० में आपको और आपके परिवार को  सुख समृद्धि , धन वैभव ,शांति, भक्ति, और ढेर सारी खुशियाँ  प्रदान करें .योगेश वर्मा "स्वप्न"
 
योगेश स्वप्न
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सारी गोपियाँ कहें मोहे, सांवरो कन्हाई

लीजिये प्रस्तुत है "श्याम श्याम  भजो" कैसेट से एक और रचना. सारी गोपियाँ कहें मोहे,सांवरो कन्हाई   सारी गोपियाँ कहें मोहे,सांवरो कन्हाई सारी गोपियाँ कहें मोहे, सांवरो कन्हाई मोहे तू ही बता दे ,मैं का करूँ माई (२) सारी गोपियाँ कहें...........
 
योगेश स्वप्न
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कहता है दिल करे यूँ शिकायत कभी कभी

कहता है दिल करे यूँ शिकायत कभी कभी कहता है दिल करे यूँ,शिकायत कभी कभी उसमें भी हो छिपी-सी,मुहब्बत कभी कभी हो प्यार में अगरचे ,अदावत कभी कभी उस पर भी हम करें एक ,दावत कभी कभी इन्सां पे रब की हो यूँ, इनायत कभी कभी पहुंचे जो रूह तक भी ,राहत कभी कभी बन्द
 
योगेश स्वप्न
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मेरी राधा के संग मंगनी , कराइ दे मेरी मैया-२

लीजिये एक और शब्द चित्र "श्याम श्याम भजो"  कैसेट से. मेरी राधा के संग मंगनी , कराइ दे मेरी मैया-२ मेरी राधा के संग मंगनी , कराइ दे मेरी मैया-२ कराइ दे मेरी मैया, कराइ दे मेरी मैया मेरी राधा के संग मंगनी कराइ दे मेरी मैया मेरी....................
 
योगेश स्वप्न
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आदमी

आदमी (इंसान नहीं )   आदमी को मार कर खायेगा आदमी एक दिन ऐसा भी अब आएगा आदमी जानवर को मात कर जाएगा आदमी अपना असली रूप दिखलायेगा आदमी बेशरम हो अब ना शरमाएगा आदमी और रब से भी ना घबराएगा आदमी कैसे कैसे ज़ुल्म अब ढाएगा आदमी ज़ुल्म-ओ-सितम की आग बरसायेगा
 
योगेश स्वप्न
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अजनबी बन कर रहोगे, कब तलक.

पुरानी डायरी से एक और रचना.  अजनबी बन कर रहोगे कब तलक अजनबी बन कर रहोगे, कब तलक बात दिल की ना कहोगे, कब तलक आग भड़का दी है ऐसी, प्रीत ने प्रीत में जलते रहोगे, कब तलक अजनबी बन कर रहोगे, कब तलक............ आरज़ू कर लो कभी तो, स्वप्न की या उन्हें दे
 
योगेश स्वप्न
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मज़ा कुछ और है

चलिए ब्लॉग के दूसरे वर्ष कि  शुरुआत करते हैं आजही लिखी इस रचना से. आज  अरहर कि दाल और चावल खाने कि इच्छा हुई  सुबह सुबह पत्नी से कविता में इसकी मांग कर बैठे , मांग क्या कर बैठे  मुखड़ा भा गया और इस रचना ने पदार्पण किया , गौर फरमाए
 
योगेश स्वप्न
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DREAM

मेरे ब्लॉग का जन्म दिन  आज ०६.१२.२००९ को मेरे ब्लॉग का एक वर्ष पूरा हुआ . इस एक वर्ष में बहुत कुछ सीखने को मिला , बहुत से अनजान व्यक्तियों , कलाकारों, कवियों से न सिर्फ परिचय हुआ बल्कि व्यक्तिगत संपर्क भी कायम हुए जो कलाकार मेरे अन्दर सोया हुआ थ
 
योगेश स्वप्न
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कोई याद करता है दिल कह रहा है

कोई याद करता है दिल कह रहा है कोई हम पे मरता है दिल कह रहा है किसकी ये खुशबू फिजा में है शामिल ये किसकी सदा कह रही मुझसे आ मिल कोई आह भरता है दिल कह रहा है कोई याद करता है ........................ ये हिचकी मुझे दे गई किसका सन्देश निकट हूँ किसी के भले
 
योगेश स्वप्न
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धीरे-धीरे वंशी की धुन, चुरा रही है मेरा दिल

धीरे-धीरे वंशी की धुन, चुरा रही  है मेरा दिल धीरे-धीरे वंशी की धुन, चुरा रही  है मेरा दिल कहाँ छुप गया मनमोहन तू, जली जा रही मैं तिल तिल धीरे-धीरे वंशी की धुन, चुरा रही  है मेरा दिल.............. सुनकर ये आवाज़ निराली, दिल धक् धक् करने
 
योगेश स्वप्न
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थाम लिया है आँचल, अबकी बार ना छोड़ेंगे

प्रस्तुत है एक और गीत पुरानी डायरी से.   थाम लिया है आँचल, अबकी बार ना छोड़ेंगे थाम लिया है आँचल, अबकी बार ना छोड़ेंगे ले जायेंगे उस पार तुम्हें, इस पार ना  छोड़ेंगे तुमको पाकर सदियों की, भटकन को मिल गया विराम दिल को मिला सुकून, हुए सच स्वप्न
 
योगेश स्वप्न
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पिघला दें ना ह्रदय तुम्हारा

प्रस्तुत है कई वर्ष पहले लिखी एक रचना. जो मुझ बहुत पसंद है , शायद आपको भी पसंद आये. पिघला दें ना ह्रदय तुम्हारा   .. पिघला दें ना ह्रदय तुम्हारा , जब तक मेरे नगमे गीत तब तक चैन नहीं पाऊंगा, मेरे रूठे बिछुड़े मीत पिघला दें ना ह्रदय तुम्हारा तुम्ह
 
योगेश स्वप्न
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आशिक हूँ मैं इश्क-ए-हकीकी

आशिक हूँ मैं इश्क-ए-हकीकी जिसमें लगती दुनिया फीकी किसी को लगती माया जैसी किसी को लगती स्वप्न सरीखी आशिक हूँ मैं...................... कोई कहता सत्य यही है कोई कहता सत्य वही है नेति नेति कह सब हारे जैसी देखी, वैसी दीखी आशिक हूँ मैं.................. न
 
योगेश स्वप्न
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रूठ के मो से कान्हा, मुख नाहीं मोड़ो रे

प्रस्तुत है एक भजन और " श्याम श्याम भजो " कैसेट से. रूठ के मो से कान्हा, मुख नाहीं मोड़ो रे प्रीत का बंधन कान्हा, बाँध के ना तोड़ो रे रूठ के मो से कान्हा, मुख नाहीं मोड़ो रे........................ तुमसे बिछुड़ कर,मैंने ये जाना रे तुम बिन मेरो, कोई नही
 
योगेश स्वप्न
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हँस के गुजार दी कभी रो के गुजार दी

हँस के गुजार दी कभी रो के गुजार दी जिंदगी हमने तेरे,होके गुजार दी तुझको यकीन हो ना हो , लेकिन है सच यही हमने तो अपनी जिंदगी तुझपर निसार दी इश्क में तूफ़ान आना, लाज़मी, मालूम था कश्ती समंदर में तिरे भरोसे उतार दी चाँद तारों की तमन्ना की नहीं तेरे सिवा
 
योगेश स्वप्न
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खोजता था अपना नाम .............

खोजता था अपना नाम उसके हाथों में कहीं क्या लकीरें इश्क की , हाथ में होती नहीं हैं? सोचता था स्वप्न में ही उससे मिल आऊं कभी पर सुना है  वो दीवानी आज कल सोती नहीं है अश्क बनकर बरस जाऊं उसकी आँखों से कभी मेरी किस्मत, मौन है वो, आजकल रोती नहीं है सी
 
योगेश स्वप्न
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बिन जिव्हा बिन मुख किया

घुप अँधेरे दिख रही, ज्योति एक अनूप उस ज्योति में दीखते, सकल नाम, सब रूप लगते लगते लग गया , श्याम रूप पर ध्यान चातक को स्वांति मिली,मिला दिव्य वरदान बिन जिव्हा बिन मुख किया ,प्रेम सुधा का पान अपना आपा   खो गया, मिला परम सोपान जिस क्षण मेरी हो गई
 
योगेश स्वप्न
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आन बसों मोरे श्याम, हमारे नयनन में

मेरी नज़र में तू है कन्हाई,और नहीं कुछ देत दिखाई इन नयनों में बस जाए तू,हो जीवन की सफल कमाई आन बसों मोरे श्याम,हमारे नयनन में आय करो विश्राम, हमारे नयनन में इन नयनन में ,धेनु चराओ इन नयनन में,वंशी बजाओ इन नयनन में ,माखन चुराओ गोकुल और नन्द,गाँव हमारे
 
योगेश स्वप्न
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जिंदगी में प्यार की...........

जिंदगी में प्यार की सबको ज़रुरत है हर किसी के मन बसी एक खूब सूरत है चल किसी मोहताज़ की कुछ मदद कर दें मत घड़ी को देख ये अच्छा  मुहूरत है हर बशर एक सा है मिटटी से बना एक हर बशर में एक ही रब की तो मूरत है मैं कहाँ हस्ती कहाँ मेरी जो बोलूं रब के बार
 
योगेश स्वप्न
Oct 14 2009 07:36 PM
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कुछ दोहे

जो अपनी औकात में रहकर करता बात उसको सभ्य समाज की पड़े कभी ना लात भूल गया निज वक़्त तू कुर्सी पा भरमाय घूस खाए चोरी करे सबकी लेता हाय तुझको लगता था बुरा, जो औरों का कर्म वही कर्म अब तू करे , गई कहाँ तेरी शर्म कुर्सी के बल कूदता , कहाँ गए संस्कार  
 
योगेश स्वप्न
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कन्हैया को मैया बुलाय रही रे

लीजिये प्रस्तुत है " श्याम श्याम भजो " कैसेट से मेरा लिखा दूसरा भजन " कन्हैया को मैया बुलाय रही रे " इस पोस्ट के साथ इस भजन और पिछली १९ . ०५ . २००९ की पोस्ट में प्रकाशित भजन " श्याम श्याम भजो " का ऑडियो / विडियो भी संलग्न / अटैच कर रहा हूँ . पढिये और
 
योगेश स्वप्न