0
इस दुनिया में अपना कोई घर ना बने तो अच्छा है
इस दुनिया में अपना कोई घर ना बने तो अच्छा है ( आत्म - चिंतन)इस दुनिया में अपना कोई, घर ना बने तो अच्छा हैजो फक्कड़ बन घूम रहा है , वो ही साधू सच्चा हैये दुनिया परदेस है इसमें ,रहने कि क्यूँ ठान रहासभी पराया है इस जग का, जिसको अपना मान रहाये सपनों कि नगरी
- 9 00 टिप्पणियां [13]
Mar 19 2010 08:13 AM


Shuffle


























