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BHARTIYA PAKSHA : भारतीय पक्ष

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05 Jun 2010
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अध्यापन की भारतीय दृष्टि

हमारी सृजन परम्परा अधिकतर वाचक थी और प्रशिक्षण भी वाचक तरीके से दी जाती थी। कहीं कोई लिखित विधि किसी लोहार के पास नहीं थी कि कैसे लोहा गलाया जाता था।
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प्ले स्कूल भंग कर दो

आज बच्चा अपने अभिभावकों की नजर में उनके उन सपनों को पूरा करने का साधन है जो अपने बच्चों के बाह्य व्यक्तित्व को लेकर उन्होंने देखे हैं।
Jun 05 2010 02:23 PM
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विश्व मंगल गौ पुष्टि महायज्ञ संपन्न

बिहार के वैशाली जिले के चकमजाहिद गांव में विश्व मंगल गौ पुष्टि महायज्ञ हुआ। यह महायज्ञ 15 अप्रैल से 20 अप्रैल तक चला। यज्ञ के अलावा अन्य कई गविविधियां भी सम्पन्न हुई।
Jun 03 2010 01:13 PM
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पक्षियों की रक्षार्थ एक अनोखा प्रयोग

बाहोपुर गांव के एक किलोमीटर से अधिक की परिधि में कई बड़े-बड़े मटकों को रख दिया गया है। इनमें रोज पानी भरा जाता है। उद्देश्य है कि पक्षी इस गर्मी के मौसम में पानी की तलाश करते इधर आयें तो मटके का पानी पीकर अपनी प्यास बुझायें।
Jun 03 2010 01:02 PM
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स्त्री विमर्श पर आधारित चर्चित पुस्तकें

सामयिक प्रकाशन के युवा और ऊर्जावान निदेशक महेश भारद्वाज ने जहां हर चर्चित लेखक की पुस्तकों का प्रकाशन किया है, वहीं नवोदित लेखकों के लिए भी अपने प्रकाशन का मंच पूरी सहृदयता के साथ उपलब्ध कराया है।
May 22 2010 04:34 PM
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राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन का छठवां वार्षिकोत्सव

राष्ट्रीय स्वाभिमान आन्दोलन का छठवां वार्षिकोत्सव इंदौर के आनंद मोहन माथुर सभागार में 9 जून, 2010 को आयोजित होगा।
May 22 2010 01:24 PM
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वाइब्रेंट गुजरात की खुलेगी पोल

महागुजरात पार्टी के महासचिव सुनील ओझा ने कहा कि राज्य में पानी को लेकर आम आदमी परेशान है, लेकिन राज्य सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं है।
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ये कैसा विश्वविद्यालय ?

वेदान्त विश्वविद्यालय के नाम से यह शिक्षा केन्द्र दस हजार एकड़ भूमि पर निर्मित होगा। विश्वविद्यालय के निर्माण को लेकर उड़ीसा सरकार जितनी तेजी और तत्परता दिखा रही है उतना ही इसके विरोध में लोग अपनी आवाज ऊंची कर रहे हैं।
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पुस्तक समीक्षा : एक व्यंग्यात्मक उपन्यास

'महात्मा की बेटी और सियासत' नामक यह संपूर्ण उपन्यास देश की राजनैतिक दुर्दशा की सतत प्रवाहित विडंबनापूर्ण प्रदीर्घ केवल कहानी नहीं है बल्कि गांधीजी की मनोव्यथा का बेबाक प्रकटीकरण भी है। यह विचारोत्तेजक रचना देश की जनता की अपनी त्रासदपूर्ण स्थिति से निकलने
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पुस्तक समीक्षा : भारत का भूविज्ञान

प्रस्तुत पुस्तक भारतीय उपमहाद्वीप के प्राकृतिक भूविज्ञान को घेरे हुए महासागरों व उनके द्वीपों के समस्त पहलुओं पर प्रकाश डालती है। इसमें भारत के भूविज्ञान की प्राकृतिक दृष्टिकोण से उपलब्ध जानकारी को एकत्र करने का प्रयास किया गया है।
Apr 07 2010 01:21 PM
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कहानी : माता-विमाता

बच्चे को छाती से चिपकाये, मां पीछे हट गयी। भीड़ बिखर गयी। डिब्बे के दरवाजे में खड़ी बनजारन अभी भी चिल्लाये जा रही थी, ''कंजरी, हरामजादी, तूने इसे जनते ही क्यों नहीं मार डाला? जब भी मार डालेगी, तभी मेरे दिल को चैन मिलेगा, नासपिट्टी।
Apr 07 2010 11:15 AM
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रामासृजन जन कल्याण संस्थान

संस्थान की ओर से भारतीय संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए 'भारत को भारत रहने दो' नाम से अभियान चलाया जाता है। इस अभियान के तहत लोगों को भारतीय संस्कृति को जीवन में कायम रखने के लिए उत्साहित किया जाता है।
Apr 06 2010 05:03 PM
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भगवान हंस का सम्प्रदाय

सम्प्रदाय का सामान्य अर्थ यही है कि जो सम्यक् या प्रकट का 'दाय' है वह सम्प्रदाय है। सम्यक् और प्रकट यानी बह्म या सत्य। दाय यानी देने वाला। इस हिसाब से सत्य का ज्ञान देने वाला जो समूह है वह सम्प्रदाय कहा जाता है।
Apr 06 2010 03:15 PM
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गंगा को बचाने की मुहिम

स्वामी चिदात्मन जी महाराज बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित 'सर्व मंगला आध्यात्म योग विद्यापीठ' के माध्यम से देश-विदेश में लोगों के बीच आध्यात्म का प्रचार-प्रसार करते हैं। इसके अलावा स्वामी जी गाय, गंगा और भारतीय संस्कृति जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर भी खुद
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गांव देखो! स्वराज देखो! हिवरे बाजार देखो

यह फिल्म वस्तुत: 23 मिनट की एक डाक्यूमेंट्री फिल्म है जो महाराष्ट्र के हिवरे बाजार गांव में पिछले 20 साल में आए चमात्कारिक परिवर्तन का मंत्र खुद उस गांव के लोगों की जबानी बयां करती है।
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पहल और प्रयोग के पक्षधर

नस्ली वाडिया, मफतलाल और कई अन्य औद्योगिक घरानों के साथ उनके बहुत निकट संबंध थे। वहां उनका सम्मान घर के एक बुजुर्ग की तरह होता था। इस सबके बावजूद उन्होंने उद्योगपतियों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता देने के लिए भी कभी कोई पहल नहीं की। उनका मानना था कि
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पारस जैसे थे नानाजी

मेरी पत्नी रागिनी के अभी सर्जरी के टांके भी नहीं निकाले गये थे और बच्ची अभी केवल सात दिन की थी। लेकिन रागिनी ने नानाजी के कार्य की आवश्यकता और महत्व को समझा और उसने नानाजी की गाड़ी के ड्राइवर की जिम्मेदारी संभाल ली।
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एक झटके में ठुकराया मंत्री पद

1997 में मुंबई से प्रकाशित 'निर्मोही नानाजी' पुस्तिका में स्वर्गीय रज्जू भईया लिखते हैं, 'संगठन के कार्य के लिये अच्छे लोग बाहर रहने चाहिए। इसलिये मेरी नानाजी से केन्द्र में मंत्री न बनने की बात हुई। प्रात: काल छह बजे के समाचारों में जब मैंने सुना कि
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उनमुक्त चिंतन के धनी

नानाजी संघ में पहली पीढ़ी के प्रचारक थे, वे अपने काल के अंतिम साक्षी थे।
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जो कहा सो किया

नानाजी ने जब राजनीति छोड़ी तब जनता पार्टी के हालात बहुत खराब थे। शीर्ष के तीन नेता मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम नेतृत्व पाने के लिए आपस में लड़ रहे थे। नानाजी जब सत्ता के शिखर की इस कलह को रोक पाने में नाकाम रहे तो उन्होंने एक आदर्श
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ऐसे थे नानाजी…

एक धार्मिक नेता ने अपनी पुस्तिका में नानाजी को अपना आशीर्वाद इस प्रकार लिखा है, 'मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वह नानाजी को सुदीर्घ आयु तो दे परन्तु शरीर त्याग करने के बाद उन्हें मोक्ष न दे। उन्हें पुन: इसी धरा पर जन्म दे जिससे वे चित्रकूट को ही
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जन-जन के नानाजी

28 फरवरी 2010 का दिन सम्पूर्ण देश में होली की खुशियों का दिन था। लेकिन उस दिन चित्रकूट एवं उसके आस-पास के 500 गांवों में रंग तो दूर घरों में चूल्हा तक नहीं जला था। श्रद्धांजलि देने वालों में राजनेताओं, अधिकारी एवं कर्मचारियों को यदि छोड़ दें तो वे साधू
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नरेगा में संशोधन की जरूरत

नरेगा के द्वारा न तो देश में गरीबी की दर कम हो सकती है, और न ही गरीबों को दो वक्त की रोटी नसीब हो सकती है। ताजा आंकलन के अनुसार देश में गरीबों की तादाद 28 प्रतिशत से बढ़कर 37.2 प्रतिशत हो गई है। इसका मतलब है कि 11 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे सरक गए हैं।
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गंगा केवल पुराणों में बहेगी

सरकार सोच रही है कि जब गंगा नदी पर चल रही बिजली परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी तो उत्तराखंड के हर गांव में बिजली की रोशनी झिलमिलाएगी। लोग कौड़ी के मोल बिजली खरीदेंगे। सत्य तो यह है कि बिजली तो मिलेगी लेकिन पानी नहीं मिलेगा। जब पानी ही नहीं मिलेगा तो जीवन कैसे
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भगदड़ का जिम्मेदार कौन?

भूख और बेकारी असली वजह है इस देश की भगदड़-मौतों की। ये भगदड़ उसी बीस रुपए की वजह से है जिस पर अभी भी देश की बड़ी आबादी का रोजाना गुजर-बसर हो रहा है।
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ऐसे जीवट पर तिलक करो

नानाजी के 80 वर्ष पूरा होने पर 1997 में मुंबई से एक स्मारिका प्रकाशित की गई थी जिसमें नानाजी के काम के बारे में कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए थे। इसी स्मारिका में प्रभाष जोशी का लेख छपा था। आज जब न तो नानाजी हैं और न ही प्रभाष जी, यह लेख अपने आप में
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ग्राम स्वराज्य के लिए भूख हड़ताल

'केन्द्रीय बजट की 7 प्रतिशत राशि सीधे ग्राम पंचायतों को दी जाय' इस मांग को लेकर राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के जंतर मंतर पर भूख हड़ताल की। ये भूख हड़ताल 9 मार्च 2010 से लेकर 11 मार्च 2010 तक लगातार चली।
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कविता : नानाजी देशमुख

श्रीराम के कर्मभूमि को, नाना तुमने स्वीकार किया, अपना जीवन उनके रजतल, न्योछावर करने का व्रत लिया। तुमने दधीची के समान, अपने देह का दान किया, केवट सा भक्ति भाव ले, चित्रकूट का कल्याण किया।
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महिला आरक्षण पर बने आम सहमति

बहुमत का मतलब ये नहीं कि आप कुछ भी पारित करवा लें और उसके विरोध को अलोकतांत्रिक घोषित कर दें। कई बार ऐसा होता है जब बहुमत से जनमत का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
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कहानी : जंगबहादुर

नाम ने नाम के आधार को ठीक से देखना आवश्यक कर दिया। पर्वतीय पथ और पत्थरों की चोट से टूटे हुए नाखून और चुटीली उंगलियों के बीच ढाल बनी मूंज की चप्पल मानो मनुष्य को पशु बनाकर भी खुर न देने वाले परमात्मा का उपहास कर रही थीं। पांव से दो बालिश्त ऊंचा और
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अगस्त्य: विंध्य पार करने का आसान रास्ता बनाने वाले

दक्षिण के इस महामुनि का सारे भारत पर अपनी बौद्धिकता और कर्मठता का दबदबा कुछ ऐसा था कि उत्तर के गाथाकारों ने कितनी ही ऐसी कथाएं बना डालीं कि जिससे साबित यह होता है कि वे कोई विशेष लोकहित का काम करने दक्षिण दिशा की ओर गए और फिर वहीं के होकर रह गए।
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विष के डर से मंथन ही नहीं करेंगे तो कभी अमृत भी नहीं मिलेगा

राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की ओर से ग्राम पंचायतों के आर्थिक सशक्तिकरण की मांग जोर-शोर से उठायी जा रही है। इस अभियान का नेतृत्व श्री के.एन. गोविन्दाचार्य कर रहे हैं। उनकी मांग से जुड़े़ विभिन्न पहलुओं पर डा. सुरेन्द्र बिष्ट ने बात की। प्रस्तुत है उनकी
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बात केवल पैसे देने की नहीं है

ऐसा नहीं है कि गांवों को अभी पैसा नहीं मिलता है। असलियत यह है कि गांवों के नाम पर अच्छी खासी रकम खर्च हो रही है। लेकिन दुर्भाग्य से इसका लाभ गांव की जनता को नहीं बल्कि भ्रष्ट नौकरशाहों, नेताओं और सरपंचों को मिल रहा है।
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सामाजिक निगरानी से आएगी पंचायतों में पारदर्शिता

विवेक पवार समाज सेवी संस्था 'विकल्प' के अध्यक्ष हैं। अपनी संस्था के माध्यम से वे मध्य प्रदेश के मंडला बालाघाट जिले में लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनका कार्य प्रमुख तौर पर विस्थापन से उपजी समस्याओं का निराकरण, सरकारी योजनाओं तक
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मैं बीपीएल नहीं हूं

राजस्थान के भरतपुर जिले में सरपंच पद की एक युवा महिला प्रत्याशी ऋचा ढेंकावत से बात करने पर पंचायतों में महिलाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाती है। प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ अंश
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पंचायत का इतिहास

एल. एम. सिंघवी के नेतृत्व में 1986 में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर संसद ने 1992 में 73वे संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से पंचायतों को संविधान की नौवीं सूची में शामिल कर संवैधानिक दर्जा दिया।
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सरपंच पद की नीलामी

गांव के कुछ लोगों ने तय किया कि जो व्यक्ति मंदिर निर्माण के लिए सबसे ज्यादा पैसा देगा, उसे ही सरपंच बनाया जाएगा। लिहाजा मंदिर पर बोली लगाई गई और छह लाख पचपन हजार रुपए की अंतिम बोली के साथ सरपंच चुन लिया गया
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ग्रामविकास की पाठशाला

गांव के सुधार एवं पुनर्निर्माण की बात 'हिवरे बाजार' के कुछ युवाओं में आई। उन्होंने एकजुट होकर संकल्प लिया कि सामूहिक प्रयास से गांव को सुधारा जाये। पहले तो इनकी बातों को लोगों ने हल्के में लिया। इनके संकल्पों को पानी का बुलबुला कहकर उपेक्षा की गई। लेकिन
Mar 06 2010 07:00 PM
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चौखट तक सिमटा पंचायती राज

बोलचाल में ही नहीं अखबारों तक में सरपंचपति, प्रधानपति और जिलाप्रमुख पति जैसी शब्दावली का प्रकाशन किया जाता है। सत्ता के विकेन्द्रीकरण की दिशा में पंचायती राज महत्वपूर्ण कदम रहा, लेकिन आज भी पंचायतों में महिलाओं को मिलने वाले अधिकार अभी सरकारी फाइलों में
Mar 06 2010 01:00 PM
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गुणों का गांव राजूखेड़ी

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के राजूखेड़ी गांव के निवासी गरीब और पिछड़ेपन के शिकार भले ही रहे हों, लेकिन उन्होंने किसी पर निर्भर रहने की बजाय अपने जीवन की बेहतरी का रास्ता खुद तैयार कर लिया है। राजूखेड़ी को एक व्यवस्थित एवं संपन्न गांव बनाने से लेकर 'निर्मल
Mar 06 2010 10:23 AM